Death Penalty Police Case: बात करीब 6 साल पहले की है. पूरे देश में कोविड का दौर चरम पर था. लौकडाउन की जबरदस्त परिस्थितियां बनी हुई थीं. अधिकतर लोग कोरोना के भय से अपनेअपने घरों में कैद थे. उन्हीं दिनों तमिलनाडु के शहर सथानकुलम में 58 साल के कारोबारी पी. जयराज और उन के 31 साल के बेटे जे. बेनिक्स कोविड लौकडाउन नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में एक थाने की लौकअप में थे. आरोप था कि उन्होंने लौकडाउन के दौरान दुकान खोल रखी थी.

बेटे को तब हिरासत में लिया गया था, जब वह अपने पिता से मिलने थाने गए थे. दोनों को सथानकुलम पुलिस स्टेशन में रखा गया था. कई सालों तक कोर्ट में चले इस मामले की आखिरी सुनवाई मदुरै की फस्र्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट ऐंड सेशंस कोर्ट में 7 अप्रैल 2026 को हुई थी. न्यायाधीश ने एक चौंकाने वाला फैसला सुनाते हुए सभी 10 दोषी पुलिसकर्मियों को मौत की सजा दे दी.

सजा पाने वालों में एक आरोपी की कोविड के दौरान ही कोरोना से मौत हो गई थी. इस कारण फांसी की सजा पाने वाले 9 पुलिसकर्मियों के नाम हैं—

तत्कालीन इंसपेक्टर एस. श्रीधर, एसआई के. बालकृष्णन, पी. रघु गणेश, हैडकांस्टेबल एस. मुरुगन, ए. समदुरई, कांस्टेबल एम. मुतुराजा, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थौमस फ्रांसिस और एस. वैलमुतु. इस केस के 10वें आरोपी पल्दुरई (तत्कालीन स्पैशल सबइंसपेक्टर) थे. बचे पुलिसकर्मी 23 मार्च, 2026 को ही इस डबल मर्डर के दोषी ठहराए थे. मगर तब सजा नहीं सुनाई गई थी. इस केस को इस अंजाम तक पहुंचाने के लिए कई कदम उठाने पड़े थे.

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