Love Affair Murder. कुछ गलत न हो, इसलिए समाज ने हर रिश्ते की मर्यादा निश्चित की है, लेकिन जहां यह मर्यादा टूटती है, वहां अनर्थ ही होता है. विभाष और योगेश्वरी के मामले में भी ऐसा ही हुआ.
रात भर की गश्त से थकेमांदे भोपाल के थाना बागसिवानिया के थानाप्रभारी ललित सिंह डागुर अपने आवास पर पहुंचे थे कि हमीदिया अस्पताल से मिली खबर से उन्हें उलटे पांव थाने आना पड़ा. उन्होंने थाने में मौजूद एसआई नीलेश अवस्थी, एएसआई श्री स्थापक तथा कुछ पुलिस वालों को साथ लिया और तुरंत हमीदिया अस्पताल के लिए रवाना हो गए.
जाहिर था, मामला गंभीर ही रहा होगा. दरअसल अस्पताल द्वारा उन्हें सूचना दी गई थी कि थाना बागसिवानिया के साकेतनगर की रहने वाली एक युवती बुरी तरह से घायल एक युवक को अस्पताल ले जा रही थी, जिस की अस्पताल पहुंचतेपहुंचते मौत हो गई थी. युवती का कहना था कि सोते समय उस के भाई पर हमला हुआ था.
मामला गंभीर था, इसलिए ललित सिंह ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही इस घटना की सूचना एसपी (दक्षिण) अंशुमान सिंह और एसडीओपी (मिसरौद) को दे दी थी. इस के बाद कुछ ही देर में वह हमीदिया अस्पताल पहुंच गए थे. उन्होंने देखा 22-23 साल की एक युवती स्ट्रेचर पर रखी 30-32 साल के युवक की लाश के पास खड़ी रो रही थी.
युवती को चुप करा कर पूछताछ की गई तो पता चला कि मृतक का नाम विभाष कनेरिया था. वह युवती उस की छोटी बहन थी. लाश को देख कर ही पता चल गया था कि उस के सीने पर किसी धारदार हथियार से वार कर के उस की हत्या की गई थी. ललित सिंह ने जब हत्या के बारे में आभा से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के भाई की हत्या उस के सामने हुई थी. वह भाई के साथ ही रहती थी. उस के घर से कुछ दूरी पर उस की रिश्ते की बहन योगेश्वरी रहती थी. उस के और विभाष के बीच कुछ विवाद चल रहा था, जिसे सुलझाने के लिए वह रात में उस के घर रुकी थी.
सुबह साढ़े 6 बजे के करीब विभाष के कमरे से उसे अजीब सी आवाजें आती सुनाई दीं. उस ने कमरे में जा कर देखा तो योगेश्वरी पलंग पर सो रहे विभाष के सीने पर चाकू से वार कर रही थी. उस ने उसे रोकना चाहा तो वह उसे धक्का दे कर भाग गई थी.
ललित सिंह को अस्पताल की काररवाई के साथसाथ घटनास्थल की भी काररवाई करनी थी. इस के अलावा घटना को अंजाम देने वाली योगेश्वरी को भी पकड़ना था. वह मृतक की बहन से योगेश्वरी के बारे में पूछताछ कर रहे थे कि अचानक सेट पर उन्हें मैसेज मिला कि जींसशर्ट पहने योगेश्वरी नाम की एक लड़की ने थाना पिपलानी के अंतर्गत आने वाले एक कुएं में कूद कर जान देने की कोशिश की है.
लेकिन कुएं में पानी कम था, जिस से उसे बचा लिया गया है. चूंकि विभाष की हत्या करने वाली युवती का यही नाम था, इसलिए ललित सिंह ने तत्काल थाना पिपलानी के थानाप्रभारी से संपर्क कर के युवती को हत्याभियुक्त बता कर उसे बैठाए रहने को कहा.
इस के बाद एसआई रतन सिंह के नेतृत्व में महिला सिपाही शिवकला चंदेल और अलिखेश को योगेश्वरी को हिरासत में लेने के लिए थाना पिपलानी भेज दिया गया. ललित सिंह ने खुद अस्पताल की सारी औपचारिक काररवाई निपटाई और लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. यह सारी काररवाई निपटा कर ललित सिंह थाने पहुंचे, उस से पहले ही रतन सिंह की टीम योगेश्वरी को ले कर थाने आ चुकी थी.
योगेश्वरी थाने की बैंच पर बैठी थी, लेकिन वह काफी गुस्से में थी. विभाष की हत्या करने के बाद उस ने पहले पैट्रोल डाल कर, उस के बाद कुएं में कूद कर जान देने की कोशिश की थी. उस के गुस्से को देखते हुए ललित सिंह को लगा कि पहले योगेश्वरी के दिमाग में भरे गुस्से को निकालना जरूरी है, अन्यथा यह किसी भी तरह खुद को नुकसान पहुंचा सकती है.
उस का मन बदलने के लिए ललित सिंह पहले उसे घटनास्थल पर ले गए, जहां से उन्होंने हत्या में प्रयुक्त चाकू और उस का मोबाइल फोन बरामद कर लिया, जो विभाष की बहन के साथ हुई छीनाझपटी में वहां गिर गया था. इस के बाद थाने लौट कर उन्होंने महिला सिपाही शिवकला को बुला कर मित्रवत व्यवहार करते हुए किसी तरह योगेश्वरी के दिमाग में भरे गुस्से को निकाल कर पूरी कहानी उगलवाने को कहा, ताकि योगेश्वरी का मन हलका हो जाए.
पहले तो योगेश्वरी मुंह खोलने को तैयार ही नहीं थी, लेकिन जब शिवकला ने उसे काफी समझाया तो किसी तरह वह गुस्सा थूक कर सच्चाई बताने को तैयार हुई. आखिर शिवकला अपने मकसद में कामयाब हो गई. उस ने योगेश्वरी से विभाष की हत्या की सारी कहानी उगलवा ली. उस ने विभाष की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी :
3 भाईबहनों में योगेश्वरी सब से बड़ी थी. उस के मातापिता टिमरनी में रहते थे, इसलिए उस की स्कूली शिक्षा वहीं हुई. इस के बाद भोपाल के सत्यसाईं कालेज से उस ने बीए किया. योगेश्वरी ने जिस विभाष की हत्या की थी, वह बैतूल का रहने वाला था. वह उस की मां के दूर के रिश्ते से उस का भाई लगता था. उस के नाना टिमरनी में ही रहते थे, इसलिए वह जब कभी नाना के घर आता था, उस से उस की मुलाकातें होती रहती थीं. इसी मिलनेजुलने में योगेश्वरी मन ही मन उस से लगाव महसूस करने लगी.
वैसे तो उन के प्यार की वास्तविक शुरुआत सन 2007 में हुई थी, लेकिन इस से पहले सन 2004 में जब योगेश्वरी 10वीं में पढ़ती थी, तब वह बैतूल स्थित अपने मामा के घर घूमने गई थी. वही रात में छत पर सोते समय विभाष से उस का झगड़ा हो गया था. नाराज हो कर वह नीचे आ गई तो विभाष ने भी पीछेपीछे नीचे आ कर उसे बाहों में भर लिया था.
उस समय ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था, जिसे प्यार कहा जा सके, लेकिन वह यह जरूर समझ गई थी कि विभाष के मन में उस के लिए क्या चल रहा है. वह मन ही मन विभाष को चाहती थी, इसलिए उस ने ना तो विभाष की हरकत का बुरा माना था और न किसी से इस बारे में कुछ कहा था.
12वीं पास करने के बाद सन 2007 में योगेश्वरी बीए करने के लिए भोपाल आई तो विभाष पहले से वहां रह कर एमबीए की तैयारी कर रहा था. उस के साथ उस की दोनों बहनें भी रहती थीं, सो घर वालों को लगा कि घर से बाहर उन की बेटी को इस से अच्छा ठिकाना और कहां मिल सकता है.
तब शायद उन्हें पता नहीं था कि उन्हें सुरक्षित लगने वाला यही ठिकाना उन की बेटी की जिंदगी की बरबादी बन जाएगा. योगेश्वरी विभाष और उस की बहनों के साथ रहने लगी. साथ रहने की वजह से कुछ ही दिनों में विभाष का व्यवहार उस के प्रति दोस्ताना हो गया. करीब 6 महीने बाद वह दुर्भाग्यशाली रात आई, जब विभाष ने योगेश्वरी के साथ अपने रिश्ते की परिभाषा ही बदल दी. वह दिसंबर का महीना था. विभाष की दोनों बहनें गांव गई हुई थीं. भोपाल में विभाष और योगेश्वरी ही थे. उस रात विभाष को तेज बुखार था, इसलिए योगेश्वरी उस की देखभाल में लगी थी.
आधी रात के बाद अचानक विभाष ने उसे अपने बिस्तर पर खींच लिया. योगेश्वरी ने काफी विरोध किया, दूर के ही सही, उस ने भाईबहन के रिश्ते की भी दुहाई दी, पर विभाष ने अपने प्यार की दुहाई दे कर उस रात उस के साथ हर तरह के संबंध स्थापित कर लिए.
इस के बाद उस रात योगेश्वरी को नींद नहीं आई. उसे लग रहा था कि उस से बहुत बड़ा पाप हो गया है. सुबह उठ कर वह रोने लगी तो विभाष ने अपने प्यार की कसमें खा कर जीवन भर उस का साथ देने का वादा किया. 2-4 दिनों बाद जब विभाष की बहनें वापस आईं, तब तक योगेश्वरी पूरी तरह उस की हो चुकी थी. इसलिए दोनों बहनों के आने के बाद भी उन के संबंध उसी तरह बने रहे.
विभाष और योगेश्वरी अब पतिपत्नी की तरह एक साथ रहने लगे थे. धीरेधीरे इसी तरह 3 साल बीत गए. लेकिन इस बीच विभाष की दोनों बहनों को योगेश्वरी और विभाष के संबंधों के बारे में पता चलने की कौन कहे, शक तक नहीं हुआ. लेकिन सन 2010 में एक दिन विभाष की छोटी बहन ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया.
जिस समय उस ने उन दोनों को रंगेहाथों पकड़ा था, उस समय वे ऐसी अवस्था में थे कि अपनी सफाई में उस से कुछ नहीं कह सकते थे. योगेश्वरी भी चुप थी. वह कहती भी क्या कि विभाष उस के साथ जबरदस्ती कर रहा था.
लेकिन वह विभाष पर झूठा इल्जाम नहीं लगाना चाहती थी, क्योंकि उस ने उस से जीवन भर साथ निभाने का वादा जो किया था. इसलिए वह भी उसे पति मान रही थी. रंगेहाथों पकड़ लेने के बाद बहन ने न तो भाई से कुछ कहा था और न योगेश्वरी से. लेकिन शर्म की वजह से योगेश्वरी अलग रहने लगी थी. विभाष भी आ कर उस के साथ पति की तरह रहने लगा था. लेकिन बाद में जब घर वालों ने ऐतराज किया तो दोनों अलगअलग रहने लगे. पर उन का मिलना ही नहीं होता रहा, बल्कि उन के संबंध भी उसी तरह बने रहे. योगेश्वरी और विभाष के संबंधों में खटास तब आने लगी, जब एमए करने के लिए योगेश्वरी ने बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी में एडमीशन ले लिया.
वहां योगेश्वरी के साथ लड़के भी पढ़ते थे, जिन में से कुछ से उस की दोस्ती हो गई थी. विभाष को यह बात पसंद नहीं आई तो नाराज हो कर वह उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त करने लगा. अगर उस का कोई दोस्त कमरे पर आ जाता तो विभाष उस के साथ गालीगलौज करता, जो योगेश्वरी को अच्छा नहीं लगता था. सन 2012 में विभाष के एक अन्य लड़की से संबंध बन गए. इस बात को ले कर योगेश्वरी का उस से झगड़ा ही नहीं हुआ, बल्कि वह उस से अलग रहने लगी. लेकिन सन 2013 में विभाष की बड़ी बहन की शादी हो गई. इस के बाद विभाष ने उस से माफी मांग कर साथ रहने को कहा तो एक बार फिर वह उस के साथ रहने लगी.
इस के बाद हालात तेजी से बदले, जिस के कई कारण थे. एक तो विभाष एमबीए कर के भवन निर्माण का काम करने लगा था. इस से उस के पास काफी पैसा आ रहा था. पैसा आने से उस की आदतें बिगड़ रही थीं. दूसरे विभाष की बड़ी बहन की शादी जिस डाक्टर से हुई थी, उस के साथ काम करने वाली किसी नर्स से संबंध थे. इसलिए वह विभाष की बहन को परेशान करता था.
बहन की परेशानी दूर करने के लिए विभाष ने उस नर्स को बहनोई की जिंदगी से अलग करने का बीड़ा उठाया. उस ने बहनोई की प्रेमिका नर्स को इस तरह परेशान किया कि 22 दिसंबर, 2015 को उस ने आत्महत्या कर ली. नर्स के सुसाइड नोट के आधार पर विभाष, उस की बहन और बहनोई को अभियुक्त बनाया गया, जिस से विभाष परेशान रहने लगा.
उस की इसी परेशानी और भागदौड़ में योगेश्वरी ने उस की हर तरह से मदद की. विभाष के लिए योगेश्वरी इतना कुछ कर रही थी, इस के बावजूद वह बदलता जा रहा था. यही नहीं, वह उस से दूरी भी बनाने लगा था. जब योगेश्वरी ने विभाष से इस की वजह पूछी तो उस ने कहा कि उन के बीच जो सामाजिक रिश्ता है, उस की वजह से उन की शादी नहीं हो सकती.
इस पर योगेश्वरी का कहना था कि यह बात तो उसे 8 साल पहले उस समय सोचना चाहिए था, जब पहली बार उस ने उसे बिस्तर पर खींचा था और दुनिया से लड़ कर जीवनभर साथ निभाने का वादा किया था. बहरहाल विभाष के यह कहने पर योगेश्वरी कई वकीलों से मिली और अपनी स्थिति बताई. इस से पता चला कि अदालत के माध्यम से उन की शादी आराम से हो सकती है.
लेकिन यह जान कर विभाष खुश नहीं हुआ, जिस से योगेश्वरी को लगा कि विभाष के मन में कुछ और ही चल रहा है, जो वह उसे बताना नहीं चाहता. योगेश्वरी ने जब उस के बारे में पता किया तो जानने में आया कि विभाष का किसी अन्य लड़की से प्रेमसंबंध चल रहा है. उस ने इस का विरोध किया तो विभाष ने इसे उस के मन का वहम बताया.
लेकिन जब उस की उस प्रेमिका ने योगेश्वरी को फोन कर के उसे उलटीसीधी बातें कहीं तो विभाष की असलियत सामने आ गई. दरअसल विभाष की प्रेमिका की बातों का मतलब यह था कि विभाष ने उसे योगेश्वरी के बारे में जो कुछ बताया था, उस का मतलब था कि वह बहुत गिरी हुई लड़की है. विभाष से उस के संबंध उसी की पहल पर बने थे और अभी भी वह विभाष पर संबंध बनाने के लिए जोर डाल रही थी.
योगेश्वरी विभाष और उस की प्रेमिका की वजह से परेशान रहने लगी थी. विभाष लगातार उस से दूर होता जा रहा था. जबकि वह उस से जानना चाहती थी कि क्या उस की जिंदगी में उस दूसरी लड़की की अहमियत उस से ज्यादा है? लेकिन वह इस बात को टालता रहा. जब योगेश्वरी से सहन नहीं हुआ तो वह आरपार का फैसला करने पर उतर आई.
4 जून की रात 11 बजे के आसपास योगेश्वरी विभाष के घर पहुंची. उस समय वह अपने कमरे में था और उस की छोटी बहन बाहर बैठी थी. उस ने विभाष से अपने साथ बाहर चलने को कहा तो उस ने बाहर जाने से साफ मना कर दिया. तब उस ने वहीं जानना चाहा कि वह उसे और प्रेमिका में से किसे ज्यादा चाहता है?
लेकिन विभाष अपनी जिंदगी में किसी दूसरी लड़की के होने की बात से इनकार करता रहा. जबकि उस की वह प्रेमिका योगेश्वरी को फोन पर धमकी दे कर ऐसी बातें कहती थी, जो योगेश्वरी और विभाष के अलावा कोई अन्य को पता नहीं थीं.
इस से साफ था कि उस लड़की से विभाष के लगभग वैसे ही संबंध थे, जैसे पिछले 8 सालों से योगेश्वरी से थे. लेकिन उस समय उस की बातचीत का कोई निर्णय नहीं निकला. विभाष उसे अपनी कार से उस के घर छोड़ने जा रहा था, तभी रास्ते में उस लड़की का फोन विभाष के मोबाइल पर आ गया.
योगेश्वरी के साथ होने की वजह विभाष ने उस का फोन अटैंड नहीं किया. जिस तरह से विभाष योगेश्वरी को उस के घर के बाहर छोड़ कर तेजी से लौटा था, वह समझ गई थी कि अब वह उस लड़की से बात करेगा., इसलिए वह उस की कार का पीछा करते हुए उस के घर आ गई, जहां दोनों में बहस हो गई.
इस के बाद विभाष अंदर के कमरे में सो गया तो योगेश्वरी बाहर उस की बहन के पास लेट गई. लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी. सुबह 5, साढ़े 5 बजे योगेश्वरी विभाष के कमरे में गई और उस का मोबाइल चैक किया. विभाष ने अपना वाट्सएप डिलीट कर दिया था. वह अपनी उस प्रेमिका से आईमो पर चैटिंग करता था.
उस में विभाष की उस लड़की के साथ कई अंतरंग फोटो थे. एक फोटो में विभाष उसे रिंग पहना रहा था. इतना ही नहीं, उस ने चैटिंग में उस लड़की से योगेश्वरी को काफी भलाबुरा कहा था.
उस ने यहां तक लिखा था कि वह उस के पीछे पड़ी है और उस पर संबंध बनाने के लिए दबाव डालती है. विभाष की इन बातों को पढ़ कर योगेश्वरी के मन में आग लग गई, क्योंकि उस ने उस की जिंदगी खराब की थी. उस ने बैग में लाया चाकू निकाला और विभाष के सीने में उतार दिया. वह चीखा तो उस की बहन आ गई, जिस ने योगेश्वरी की पकड़ने की कोशिश की तो वह उसे धक्का दे कर भाग गई.
पुलिस और बदनामी से बचने के लिए उस ने पहले पैट्रोल डाल कर खुद को जलाने की कोशिश की, उस के बाद कुएं में कूद कर आत्महत्या करने की कोशिश की. लेकिन कुएं में पानी कम होने की वजह से वह मर नहीं पाई. लोगों ने पुलिस बुला ली, जिस ने उसे कुएं से बाहर निकाल लिया.
मन की भड़ास निकल कई तो योगेश्वरी का गुस्सा शांत हो गया. इस तरह होशियारी से ललित सिंह ने योगेश्वरी का गुस्सा भी ठंडा कर दिया और सारी सच्चाई भी उगलवा ली. इस के बाद उन्होंने उस की निशानदेही पर वह चाकू भी बरामद कर लिया था, जिस से उस ने विभाष की हत्या की थी. सारी औपचारिकता पूरी कर के ललित सिंह ने उसी दिन उसे अदालत में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया. Love Affair Murder






