Rajasthan Gangster. राजू मांजू राजस्थान के सब से कुख्यात और वांटेड गैंगस्टरों में से एक है. वह पश्चिमी राजस्थान में सक्रिय कुख्यात '007 गैंग’ का सरगना है. अपराध की दुनिया में उस के साथी उसे 'बिल्ला’ के नाम से भी बुलाते हैं. उस पर हत्या, अपहरण, लूट और हथियारों की तस्करी सहित लगभग 36 से ज्यादा गंभीर मुकदमे दर्ज हैं. 2023 में जमानत पर छूटने के बाद से वह फरार चल रहा था. फिर 75 हजार रुपए का यह इनामी गैंगस्टर कैसे आया पुलिस की गिरफ्त में?

राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को सूचना मिली थी कि 007 गैंग का सरगना राजाराम बिश्नोई उर्फ राजू मांजू जयपुर में हथियार लेने आया हुआ है. वह लगातार जयपुर के चक्कर काट रहा है.

यह सूचना 007 गैंग के ही एक पूर्व सदस्य ने एएनटीएफ को दी थी. वह व्यक्ति पहले राजू मांजू के साथ काम करता था. बाद में उस की राजू से किसी बात को ले कर अनबन हो गई थी. उसे जब राजू मांजू के जयपुर में पुराने गैंग के सदस्यों से मिलने एवं हथियार खरीदने के बारे में जानकारी मिली तो उस ने इस की खबर पुलिस को दे दी थी.

राजू मांजू के बारे में जानकारी मिली तो एएनटीएफ के आईजी विकास कुमार ने एडीजी दिनेश एम.एन. के निर्देशन में एक विशेष टीम बनाई. पुलिस ने राजू मांजू को पकडऩे के लिए 'औपरेशन मद मार्जार’ कोड नेम दिया.

राजू अपराध की दुनिया में बिल्ली की तरह दबे पांव और चालाकी से चलता था, इसलिए उस के साथी उसे 'बिल्ला’ कहते थे. मार्जार बिल्ली का संस्कृत पर्यायवाची शब्द है और मद राजस्थान का नंबर वन गैंगस्टर बनने का उस का अहंकार. इन दोनों शब्दों को जोड़ कर इस मिशन का नाम रखा गया, जिस ने आखिरकार राजू मांजू की चालाकी को मात दे दी.

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