Haridwar love crime case. भावनाओं की कद्र न करने वाले पति पप्पू निषाद से बांदा निवासी कौशल्या निषाद असंतुष्ट थी, तभी तो वह मोहल्ले के ही रहने वाले ओमप्रकाश निषाद उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा को दिल दे बैठी थी. प्रेमी को उस के साथ मौजमस्ती करना तो पसंद था, लेकिन कौशल्या ने जब उस पर शादी का दबाव डाला तो प्रेमी ने घर से 700 किलोमीटर दूर हरिद्वार ले जा कर ऐसी मौत दी कि…
ओमप्रकाश यह सोचसोच कर परेशान था कि उस के गले आ पड़ी प्रेमिका कौशल्या निषाद से कैसे छुटकारा पाया जाए, क्योंकि वह उस पर शादी करने का लगातार दबाव बना रही थी.
उत्तर प्रदेश के जिला बांदा में एक मोहल्ला है ग्योड़ी बाबा. यहीं के रहने वाले ओमप्रकाश निषाद उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा की तारीफ इलाके के एक अच्छे राजमिस्त्री के रूप में होती थी. दरअसल, वह मजबूत और सुंदर मकान बनाने में महिर था. उस का मोहल्ले में ही रहने वाले पप्पू निषाद की पत्नी कौशल्या निषाद के साथ लव अफेयर चल रहा था.
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एक दिन ओमप्रकाश का बड़ा बहनोई छेदीलाल सुबहसुबह उस के घर आया था. घर में घुसते ही एक युवती से वह टकरा गया. वह अपने अस्तव्यस्त कपड़े सहेजती हुई जल्दबाजी में थी. छेदीलाल उस से कुछ कहता कि इस से पहले ही वह तेज कदमों से बगल के घर की ओर बढ़ गई. वह उसे मटकती हुई चाल में जाते हुए देखता रह गया.
तभी ओमप्रकाश की नजर उस पर पड़ी तो वह बोला, ”अरे!अरे!… जीजाजी, आप अचानक सुबहसुबह आए? क्या बात है?’’
”अभी मैं तुम्हारे लिए एक काम लाया हूं.’’ छेदीलाल बोला. बोलते हुए उस की नजर ओमप्रकाश के हाथ पर चली गई.
वह हाथ में लेडीज अंडरगारमेंट ब्रा लिए था, जिसे उस ने हाथ पीछे कर छिपाने की कोशिश की. सकपकाता हुआ बोला, ”यह पड़ोसन कौशल्या की है. मेरे पीछे अपने कपड़े यहीं सुखाने चली आती है. इसे ही लेने आई थी, यह छूट गया था. आओ न, भीतर चलो. मैं इसे लौटा कर आता हूं.’’ ओमप्रकाश बोला और पड़ोसी के घर की ओर चला गया.
कुछ मिनट में ओमप्रकाश कमरे में बैठे छेदीलाल को पीने के लिए पानी ले कर आया. छेदीलाल कमरे को ऐसे निहार रहा था, मानो जासूसी कर रहा हो. उस की नजर बैड पर बिछे सिलवटों वाले चादर पर पड़ी… तकिया बिस्तर से नीचे की ओर लटका हुआ था, मानो गिरने ही वाला हो.
छेदीलाल ने उसे संभालने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि उस की नजर सफेद खोल वाले तकिए पर चिपकी हुई लाल बिंदी पर टिक गई. इस पर उस ने अधिक ध्यान नहीं दिया, लेकिन मन में संदेह का कीड़ा कुलबुलाने लगा था. अचानक बोल पड़ा, ”पत्नी और बच्चे नजर नहीं आ रहे? पत्नी मायके गई है क्या?’’
”लो न! पानी पी लो!’’ ओमप्रकाश बोला और जीजा के हाथ में पानी का गिलास पकड़ा दिया. इस के बाद वह जल्दीजल्दी बैड की चादर ठीक करने लगा.
”ओमप्रकाश, पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे कि तुम कुछ छिपा रहे हो. वह तुम्हारी पड़ोसन जिस तरह से घर से निकली थी, वह मुझे कुछ ठीक नहीं लगा. वह मुझ से टकरा भी गई थी…तुम्हारे हाथ में उस के कपड़े थे. कपड़े भी साधारण नहीं थे. कुछ तो बात है.’’ छेदीलाल बोला.
”बात तो कुछ नहीं है, अगर मानो तो बड़ी भी है.’’ ओमप्रकाश बोला. ”तुम जो बोल रहे हो, वह मेरी समझ से बाहर है.’’ छेदीलाल बोला.
”अब जीजाजी तुम से क्या छिपाना. समझो मैं किसी मुसीबत के जाल में फंसने वाला हूं.’’ ओमप्रकाश चिंतित हो कर बोला.
”वह कैसे?’’ ”इसी पड़ोसन के कारण!’’ ”क्या किया उस ने?’’
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”क्या नहीं करती है? समझो, उस के कारण मेरी जमीजमाई गृहस्थी बरबाद हो सकती है.’’ ओमप्रकाश ऐसे बोला, जैसे मन में काफी समय से जमा गुबार बाहर निकालने के लिए छटपटा रहा हो.
”पहेलियां बुझाने से काम नहीं चलेगा… सहीसही बताओ!’’ छेदीलाल उसे कुरेदने लगा था.
”बताता हूं…सब कुछ बताऊंगा. उस बदचलन कौशल्या के बारे में भी बताऊंगा.’’ ओमप्रकाश धाराप्रवाह बोलने लगा, लेकिन बीच में ही छेदीलाल बोला, ”कौशल्या कौन? वही तुम्हारी पड़ोसन!’’
”हांहां, वही पड़ोसन कौशल्या निषाद, एक बदचलन औरत है वो. अपने पति से संतुष्ट नहीं है. मौका पाते ही मेरे बिस्तर में घुस आती है. रात…दिन…जब चाहे चली आती है. न चाहते हुए भी मुझे उस के साथ…’’ ओमप्रकाश बोलतेबोलते रुक गया.
”अब समझा! तुम्हारे घर से निकलते वक्त वह अपने ब्लाउज के हुक क्यों बंद कर रही थी..!’’ छेदीलाल संदेह दूर करता हुआ बोला.
”मेरी मदद करो, मैं उस से छुटकारा पाना चाहता हूं.’’ ओमप्रकाश की आवाज में गिड़गिड़ाहट थी.
”अच्छा, तो यह बात है. मैं तुम्हारे मन की पीड़ा समझ गया हूं. कुछ न कुछ तो तरीका निकालना होगा.’’ छेदीलाल बोला.
”जो भी करो, मगर जल्द…पत्नी और बच्चे के मायके से लौटने से पहले, वरना बहुत देर हो जाएगी.’’ ओमप्रकाश बोला.
”ठीक है, कुछ खाने के लिए लाओ…और हां, चाय भी बना लेना, मैं तब तक सोचता हूं कि कौशल्या से तुम्हारा पिंड कैसे छुड़ाया जाए?’’
कुछ देर में दोनों सालेबहनोई नाश्ता कर रहे थे और चाय की चुस्कियों के साथ कौशल्या के कारण पैदा हुई प्रौब्लम को दूर करने के लिए विचारविमर्श कर रहे थे. इस प्रौब्लम से छुटकारा पाने के लिए छेदीलाल ने उसे एक प्लान बताया. उस पर रामप्रसाद ने हामी भर दी. बोला, ”यही ठीक रहेगा. इस तरह कौशल्या से छुटकारा मिलेगा.’’
”तो फिर उसे हरिद्वार घुमाने ले जाने के लिए तैयार करो.’’ छेदीलाल बोला.
”वो तो मैं आज ही उसे राजी कर लूंगा. आगे का काम तुम्हें ही संभालना होगा.’’ ओमप्रकाश बोला.
ओमप्रकाश ने इस योजना के अनुसार 2 दिनों के भीतर ही न केवल कौशल्या निषाद को हरिद्वार घूमने जाने के लिए राजी कर लिया, बल्कि अपने भाई राकेश निषाद को भी योजना में शामिल कर लिया. उन्होंने 4-5 दिनों का कार्यक्रम बनाया था.
कौशल्या निषाद ने हरिद्वार जाने के लिए अपने पति पप्पू निषाद को यह कह कर राजी कर लिया कि उस ने बच्चे के लिए मन्नत मांगी है. पप्पू निषाद को उस के ओमप्रकाश के साथ जाने पर कोई आपत्ति नहीं थी. इस तरह हरिद्वार जाने का कार्यक्रम बन गया.
वह 5 मई, 2026 का दिन था. उस दिन ओमप्रकाश निषाद, राकेश निषाद व छेदीलाल अपने साथ कौशल्या को हरिद्वार ले जाने के लिए शाम के वक्त घर से चल पड़े. रात की बस द्वारा बांदा से पहले लखनऊ पहुंचे. इस के बाद वे लखनऊ से हरिद्वार जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए. वे लोग 7 मई की सुबह हरिद्वार पहुंच गए. वहां वे एक होटल में ठहरे.
पूरे दिन हरिद्वार के तीर्थस्थलों पर घूमते रहे. इस के बाद चारों 8 मई की शाम को पैदल ही चंडी देवी मंदिर के लिए चले थे. वे चंडी देवी के दर्शन कर वापस बांदा लौट आए, किंतु इन के साथ कौशल्या नहीं थी.
गांव में कौशल्या निषाद के नहीं लौटने की चर्चा होने लगी. पहले से ही उस के बारे ग्रामीण तरहतरह की बातें किया करते थे. उस के पति को छोड़ कर किसी गैरमर्द के साथ घूमने जाने की भी चर्चा हो रही थी.
उस के वापस बांदा नहीं लौटने के बारे में ओमप्रकाश ने पप्पू निषाद को बताया कि वह हरिद्वार से ट्रेन से लौटते वक्त न जाने किसी स्टेशन पर उतर गई. साथ में अपना सामान भी ले गई थी. वह अपने मायके के किसी रिश्तेदार के यहां जाने के बारे में बता रही थी. उसे नहीं मालूम कि रात के वक्त वह किस स्टेशन पर उतरी.
पप्पू ने 2 दिनों तक पत्नी के लौटने का इंतजार किया. उसे फोन किया. उस का फोन नहीं लगने पर उस ने बांदा पुलिस में उस के लापता होने की सूचना दर्ज करवा दी.
कई हफ्ते गुजर गए, लेकिन कौशल्या बांदा नहीं आई. मई का पूरा महीना बीत गया. बांदा पुलिस कौशल्या की तलाश नहीं कर पाई. 6 जून, 2026 को सुबहसुबह बांदा पुलिस ग्योड़ीबाबा में ओमप्रकाश के घर पहुंची. वह काम पर जाने वाला था. पुलिस ने उसे रोका और पूछताछ करने लगी. पुलिस ने वोटर आईडी कार्ड की फोटोकौपी दिखाई. वह आईडी कौशल्या की थी. उस पर पता उसी गांव का था. पति का नाम दर्ज था.
बांदा पुलिस उस पते पर जाने के बजाय ओमप्रकाश के पास पहुंची और उस से कौशल्या के बारे पूछा.
पुलिस का कहना था कि 8 मई को चंडी में उस के साथ सीसीटीवी कैमरे में देखी गई यही युवती है. उस के बारे में वह सचसच बताए.
सीसीटीवी में अपनी तसवीर आने के बारे में सुनते ही ओमप्रकाश घबरा गया. उस के सूखे कंठ से आवाज नहीं निकल पा रही थी. पुलिस ने उसे पानी पीने के लिए दिया.
”ओमप्रकाश, तुम जो कुछ इस युवती के बारे में जानते हो, बताओ. हरिद्वार में यह युवती तुम्हारे साथ थी.’’ उत्तराखंड पुलिस के एसआई संतोष सेमवाल ने उस से पूछा.
थाना श्यामपुर (उत्तराखंड) पुलिस सब से पहले थाना कोतवाली बांदा पहुंची थी. फिर बांदा पुलिस को साथ ले कर गांव ग्योड़ी बाबा में स्थित ओमप्रकाश के घर पहुंची थी.
यहां पर पुलिस को ओमप्रकाश से जो जानकारी मिली, उस से पुलिस टीम की बांछें खिल गई थीं. पुलिस ने इस ब्लाइंड कौशल्या निषाद मर्डर केस को सुलझा ही नहीं लिया, बल्कि हत्यारों तक पहुंच भी गई थी.
इस तरह बांदा पुलिस ने लापता कौशल्या निषाद के बारे में अपनी तहकीकात पूरी कर उस के पति पप्पू निषाद के साथ ओमप्रकाश से पूछताछ की. उन्हें बताया कि कौशल्या की मौत हो चुकी है. उस की लाश चंडी की एक पुलिस बूथ पर तैनात पुलिस ने बरामद कर चुकी है.
यह सुनते ही पप्पू निषाद सदमे में आ गया, जबकि ओमप्रकाश बुरी रह से डर गया. वह समझ गया कि कौशल्या की मौत का इलजाम उस के माथे लगने से बच नहीं सकता है.
बांदा और हरिद्वार की पुलिस की संयुक्त तहकीकात से न केवल कौशल्या निषाद और ओमप्रकाश के एक साथ हरिद्वार घूमने जाने के बारे में कई बातों की पुष्टि हो गई थी.
कौशल्या की नग्न लाश चंडी के वन विभाग के कर्मचारी सुरेश और अमन को उस समय मिली थी, जब वह अपनी नियमित गश्त पर थे. उन्हें घनी झाडिय़ों के बीच सड़ीगली अवस्था में लाश मिली थी. उस की पहचान बहुत मुश्किल थी. इसी स्थान के पास चंडी देवी मंदिर का रोपवे भी था. वनकर्मियों ने इस की सूचना थाना श्यामपुर (हरिद्वार) पुलिस को दी थी.
सूचना पा कर एसएचओ नितेश शर्मा घटनास्थल पर पहुंच गए थे. उन्होंने इस बारे में सीओ शिशुपाल नेगी और एसपी (सिटी) अभय प्रताप, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर को भी सूचित कर दिया था. नितेश शर्मा एसएसआई मनोज रावत पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल का मुआयना किया था.
शव के निरीक्षण के दौरान घटनास्थल से शर्मा ने 2 कुंडल, टूटा मंगलसूत्र, सफेद रंग का एक गमछा तथा मृतका के गले में कस कर बांधा हुआ ब्लाउज बरामद किया.
शव की प्रारंभिक जांच में उस के दाहिने हाथ पर ‘KAUSHILYA’ और फूलदान का चिह्नï, जबकि बाएं हाथ पर ‘K. R.’गुदा था.
नितेश शर्मा ने इस के बाद वनकर्मियों के बयान दर्ज किए. इस की सूचना पा कर कंट्रोल रूम से एसपी (क्राइम) निशा यादव, सीआईयू इंसपेक्टर नरेंद्र बिष्ट और सीओ शिशुपाल सिंह सहित फोरैंसिक टीम भी मौके पर पहुंच गई.
पुलिस के लिए सब से बड़ी समस्या शव की पहचान की थी. गले में बंधे ब्लाउज से इतना स्पष्ट था कि उस की हत्या गला घोंट कर की गई है. उस की पहचान का एकमात्र जरिया उस का टैटू ही था.
अज्ञात महिला के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. साथ ही शव के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का काम किया जाने लगा.
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने एसपी (सिटी) अभय सिंह के नेतृत्व और सीओ शिशुपाल सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई.
टीम में एसएचओ नितेश शर्मा, इंसपेक्टर नरेंद्र सिंह (सीआईयू), एसएसआई मनोज रावत, एसआई संतोष सेमवाल, मोहन कठैत, रचना पठानिया, एएसआई रवींद्र गौड़, दरम्यान सिंह, हैडकांस्टेबल प्रेम सिंह, पंकज देवली, कांस्टेबल राहुल देव, विनीत कुमार, अनिल रावत, सुशील चौहान, तेजेंद्र सिंह, ओमवीर सिंह, जितेंद्र घिल्डियाल, अजय चौहान, मनमोहन सिंह, माधुरी त्रिपाठी, वसीम, उमेश, हरवीर सिंह, दीप गौड़ आदि को शामिल किया गया.
इस मामले को सुलझाने के लिए गठित पुलिस टीम की बैठक मीटिंग बुलाई गई. मीटिंग में एसपी (सिटी), सीओ, एसएचओ, सीआईयू इंसपेक्टर आदि पुलिस अधिकारियों ने अज्ञात महिला की पहचान करने का खाका तैयार किया.
इसी क्रम में बांदा में लापता कौशल्या के बारे में भी नए सिरे से तहकीकात की जाने लगी और उस की तसवीर और हुलिए से इस लाश के हुलिए का मिलान किया गया.
पुलिस टीम ने गुमशुदगी रिकौर्ड, निर्वाचन सूची, सोशल मीडिया और विभिन्न सरकारी पोर्टलों की जांच की.
2019 से अब तक कौशल्या नाम की 164 गुमशुदा महिलाओं का रिकौर्ड और 3,540 महिलाओं का डेटा खंगाला गया. इस के अतिरिक्त लगभग 144 घंटे का डंप डेटा जुटा कर 1,44,605 मोबाइल नंबरों की जांच की गई.
दूसरी तरफ सीसीटीवी फुटेज से इस जांच टीम को सहयोग मिला. उस में 8 मई, 2026 की रात 3 संदिग्ध युवकों के साथ एक महिला के साथ चंडी देवी की तरफ जाती दिखी, लेकिन लौटते वक्त वह उन के साथ नहीं थी.
उक्त महिला की कदकाठी भी बरामद महिला की लाश की कदकाठी से काफी मेल खा रही थी. अत: पुलिस ने उन तीनों पर ही अपना फोकस कर उसी ओर अपनी जांच मोड़ दी. इस के बाद पुलिस की टीमें उन्हीं तीनों व्यक्तियों की छानबीन करने तथा उन की पहचान करने के प्रयास में जुट गईं.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका की मौत का कारण उस का गला घोंटना बताया गया. संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लिस्ट में पुलिस को एक ऐसा मोबाइल नंबर मिला, जिस से पुलिस हत्यारों तक पहुंचने में कामयाब हो गई.
पुलिस टीम को मोबाइल फोन धारक का नाम ओमप्रकाश निषाद पुत्र राजा निषाद, निवासी ग्राम ग्योड़ी बाबा कालोनी, जिला बांदा (उत्तर प्रदेश) के नाम पाया गया. इस के बाद पुलिस की टीम बांदा के लिए निकल पड़ी.
इस तरह से हरिद्वार और बांदा की पुलिस के सामने ओमप्रकाश उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा का कारनामा सामने आ गया. उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. इस में शामिल 2 व्यक्तियों के भी नाम बता दिए.
उस ने बताया कि उस के पड़ोस में रहने वाले पप्पू निषाद की पत्नी कौशल्या निषाद के साथ नाजायज संबंध बन गए थे. वह उस पर शादी करने की जिद किए हुए थी. वह कई बार पति को छोड़ कर दूसरे युवकों के साथ घर से भाग चुकी थी. फेमिली वालों के काफी समझाने के बाद भी कौशल्या अपने प्रेमी ओमप्रकाश उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा पर शादी करने का दबाव बनाए हुए थी.
इस कारण अकसर ओमप्रकाश तनाव में रहने लगा था. वह कौशल्या से हर हाल में पिंड छुड़ाना चाहता था. इस बारे में उस ने जीजा छेदीलाल से बात की थी. योजना के तहत कौशल्या निषाद को हरिद्वार के चंडी देवी मंदिर घुमाने के लिए ले जाया गया. वहीं पर उस की जंगल में रात को सुनसान स्थान पर हत्या कर दी गई. लाश को जंगल में फेंक कर सभी वापस लौट आए.
इस काम को अंजाम देने वालों ओमप्रकाश का भाई राकेश निषाद और बहनोई छेदीलाल भी शामिल था.
तीनों कौशल्या के साथ पैदल चलते हुए उस पर झपट पड़े थे. तीनों उसे खींच कर 100 मीटर अंदर जंगल की ओर ले गए. इस के बाद जब कौशल्या चिल्लाई थी, तब राकेश ने उस के हाथ पकड़ लिए. बाद में छेदीलाल और ओमप्रकाश ने उसी के ब्लाउज से उस का गला घोंट दिया.
कौशल्या की हत्या करने के बाद तीनों ने उस के कपड़े उतार दिए, ताकि उस की कोई पहचान न कर सके.
ओमप्रकाश के बयान पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103 (1), 61 (2) बी के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया. इस के बाद जल्द ही ओमप्रकाश के भाई राकेश निषाद व छेदीलाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया.
कथा लिखे जाने तक कौशल्या हत्याकांड के तीनों अभियुक्त ओमप्रकाश उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा, राकेश निषाद और छेदीलाल हरिद्वार जेल में बंद थे.Haridwar love crime case






