Love Marriage Tragedy. यह कहानी प्रेम, संदेह और दर्द की है. यह कहानी उस अंजलि की है, जो बस प्यार और विश्वास चाहती थी. यह कहानी उस समीर की है, जिस की असुरक्षाओं ने उस के भीतर एक राक्षस को जन्म दिया और यह कहानी उन अनकहे शब्दों की है, जो अगर कह दिए जाते तो शायद जिंदगी कुछ और होती.
एक समय था जब अंजलि और समीर एकदूसरे की पूरी दुनिया थे. वारजे, पुणे (महाराष्ट्र) का शांत सा इलाका, जहां शामें कोमल थीं और सड़कों पर हवा धीरेधीरे बहा करती थी. इन्हीं सड़कों पर कभी चलते थे हाथ में हाथ डाले हुए समीर जाधव और अंजलि.
दोनों ही बहुत साधारण थे, लेकिन एक मधुर प्रेम कथा थे. अंजलि उस वक्त एक छोटे से प्राइवेट स्कूल में टीचर थी. उस का स्वभाव बहुत ही विनम्र था. मुसकराहट में अपनापन, बातों में सादगी. समीर औटोमोबाइल में डिप्लोमा कर के अपना एक छोटा सा गैराज चलाता था. जिंदगी में बड़ी आकांक्षाएं नहीं थीं, पर छोटीछोटी खुशियों को जीना उसे आता था.
एक दिन बारिश में भीगते हुए समीर स्कूल के सामने रुका. अंजलि ने हंसते हुए कहा, ''इतना क्यों भीग गए? थोड़ा पहले ही कहीं रुक जाते, बारिश में भीगने की क्या जल्दी थी?’’
समीर ने बस मुसकरा दिया. फिर आहिस्ता से बिना झिझके बोला, ''शायद आप को देखने की जल्दी थी.’’
समीर के इस तरह के जवाब से पहले तो अंजलि चौंकी, फिर मुसकरा दी. आगे चल कर यही मुसकान समीर की दुनिया बन गई. उन का रोज का सिलसिला बन गया. कभी कौफी हाऊस तो कभी सड़क किनारे बर्गर, कभी बस यूं ही किसी पार्क में बैठ कर गप्पें करते. उन का प्यार साधारण था, पर बेहद सच्चा.






