True Life Story. आइवी सिंह के पति आनंद सिंह पिछले 25 सालों से कोमा में हैं. आइवी अपने परिवार के भरणपोषण के लिए कमाती भी हैं और किसी अबोध बच्चे की तरह पति की सेवा भी करती हैं.
दोपहर का वक्त था. श्रीमती आइवी सिंह सोफे पर बैठी सोच में गुम थीं. जिंदगी में आए उतारचढ़ाव की कल्पना ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया था. सोच का यह सागर अकसर दस्तक दे ही देता था. वह जिस कमरे
में बैठी थीं, वह अस्पतालनुमा था. वह बिस्तर पर बेसुध से लेटे अपने पति आनंद सिंह को एकटक निहारे जा रही थीं. उन के साथ बिताए खुशगवार पलों की यादें एक तरफ खुशी दे रही थीं तो दूसरी तरफ दर्द का एक ऐसा तूफान भी था, जिस के थमने की कोई उम्मीद नहीं थी.
वर्तमान में उन के पास यूं तो हर खुशी थी, लेकिन पति की बीमारी की टीस उन्हें पलपल ऐसा अहसास कराती थी, जैसे कोई नाव किनारों की तलाश में बारबार लहरों से टकरा रही हो. अच्छेबुरे अनुभवों से उन की आंखों के किनारों को आंसुओं ने अपनी जद में ले लिया.
इसी तरह कुछ समय बीता तो उन्हें अपने सिर पर किसी के हाथ की छुअन का अहसास हुआ. आइवी सिंह ने नजरें उठा कर देखा. उन की मां आर. हिगिंस पास खड़ी थीं. बेटी को देख कर उन की भी आंखें नम हो गईं. वह शांत लहजे में बोलीं, ‘‘यूं परेशान नहीं होते बेटा.’’
आइवी ने हथेलियों से आंसू पोंछ कर पलकें उठाईं और मां का हाथ थाम कर बोलीं, ‘‘समझ नहीं आता मां क्या करूं?’’






