Inter Caste Love. रामबाबू ने अंजलि को बहुत समझाया कि वह रवि से न मिले क्योंकि वह उस की जाति से नीची जाति का है. लेकिन रवि के प्यार में पागल अंजलि नहीं मानी और प्रेमी को घर बुलाती रही. इसी का परिणाम था कि रवि की हत्या हो गई. 

7 सितंबर, 2014 की बात है. सुबह का उजाला फैलने ही वाला था कि अचानक जोरों से दरवाजा भड़भड़ाने की आवाज आई. ख्यौरा, कानपुर निवासी मुन्नीलाल का परिवार उस वक्त नींद के आगोश में था.

दरवाजे पर भड़भड़ाहट की आवाज से मुन्नीलाल की आंखें खुल गईं. उन्होंने कमरे की लाइट जला कर घड़ी पर नजर डाली, 4 बज चुके थे. इस वक्त कौन आ गया, वह मन ही मन बुदबुदाए. मुन्नीलाल दरवाजे तक पहुंच पाते, इस से पहले ही दोबारा दरवाजा पीटा गया. मुन्नीलाल ने झुंझलाहट में पूछा, ‘‘अरे, कौन है भई?’’

‘‘बाबूजी, मैं हूं अंजलि. जल्दी दरवाजा खोलिए.’’

दरवाजे पर अंजलि है, यह जान कर मुन्नीलाल चौंके.

अंजलि पड़ोस में रहने वाले रामबाबू की बेटी थी. इतनी सुबह अंजलि क्यों आई, यह जानने के लिए उन्होंने दरवाजा खोल दिया. अंजलि बुरी तरह घबराई हुई थी. उन्होंने उस से पूछा, ‘‘क्या बात है, इतनी घबराई हुई क्यों हो?’’

‘‘तुम्हारे बेटे रवि को मेरे बप्पा बुरी तरह कुल्हाड़ी से काट रहे हैं. जल्दी चलो, नहीं तो वह रवि को मार डालेंगे.’’ अंजलि ने एक ही सांस में पूरी बात कह दी.

मुन्नीलाल अंजलि से कुछ और पूछना चाहते थे, पर वह बुरी तरह डरी हुई थी. डर की वजह से वह आगे कुछ नहीं बता सकी और दौड़ते हुए वापस चली गई. मुन्नीलाल जल्दी से अपने बड़े बेटे रिंकू और भाई रमाशंकर को साथ ले कर अपने घर से अंजलि के घर की ओर भागे. उन के मन में तरहतरह की आशंकाएं जन्म ले रही थीं.

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