True Crime Story. अपने यहां काम करने वाले अंकुश को पृथ्वी हांडा सुधारना चाहते थे. लेकिन आवारा अंकुश को उन की अच्छी बातें भी इस तरह बुरी लगीं कि उस ने अपने मित्रों के साथ उन्हें ऐसा सबक सिखाया कि अब शायद ही वह उसे भूल पाएंगे...  

पृथ्वी हांडा परिवार के साथ पंजाब प्रांत के जालंधर शहर के मौडल टाउन में अपनी विशाल कोठी में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सुजाता के अलावा एकलौता बेटा जतिन था. कोठी से कुछ दूरी पर मेनमार्केट में उन की 2 दुकानें थीं. एक में हांडा डेयरी थी, जिस में शुद्ध देसी घी का थोक कारोबार होता था तो दूसरी में रेडीमेड गारमेंट्स का. क्वालिटी के लिए उन की दोनों ही दुकानें शहर भर में प्रसिद्ध थीं.

दोनों दुकानें घर से ज्यादा दूर नहीं थीं, इसलिए बापबेटा कोठी से दुकानों तक पैदल टहलते हुए चले जाते थे. हांडा डेयरी का काम पृथ्वी हांडा खुद देखते थे, जबकि हांडा कलेक्शन यानी गारमेंट्स की दुकान उन का बेटा जतिन संभालता था. बापबेटे के दुकानों पर चले जाने के बाद घर में सुजाता हांडा के अलावा 17 साल का नौकर हरीश ही रह जाता था. शरीर भारी होने की वजह से सुजाता को चलनेफिरने में दिक्कत होती थी, इसलिए घर के कामों में मदद के लिए उन्होंने हरीश को रखा हुआ था. 20 सितंबर, 2016 की शाम 5 बजे पृथ्वी हांडा ने जतिन की दुकान पर जा कर कहा, ‘‘बेटा, आज मंगलवार है. थोड़ी देर में तुम घर चले जाना और घर में रखा प्रसाद ले जा कर हनुमान मंदिर में चढ़ा देना.’’

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