Fake Murder Case. मनोज उस पत्नी रिंकी की हत्या के आरोप में 2 सालों तक जेल में बंद रहा, जिस की हत्या हुई ही नहीं थी. वह तो प्रेमी के साथ भाग कर गुलछर्रे उड़ा रही थी. लेकिन मनोज की मां ने ममता की वजह से सच्चाई का पता लगाया और रिंकी तथा उस के प्रेमी मयूर को जेल पहुंचाया.
ऐसा लग रहा है यह कोई अपराध नहीं, बल्कि फिल्मी कहानी है. अगर कोई निर्माता इस पर फिल्म बनाने का निर्णय ले ले तो हैरानी भी नहीं होनी चाहिए. घटना की शुरुआत या अंत कुछ भी कह लें, जबलपुर के थाना कैंट के बिलहरी मोहल्ले से हुई, जो मंडला रोड पर स्थित है. यहां अनुसूचित जाति के लोग ज्यादा रहते हैं. ज्यादा नहीं, अब से कुछ साल पहले तक बिलहरी एक गांव हुआ करता था. लेकिन धीरेधीरे यहां लोग बसने लगे तो यह जबलपुर के कैंट इलाके का प्रमुख मोहल्ला इस लिहाज से हो गया, क्योंकि यहां आसपास के गांव वालों के अलावा दूसरे शहरों और राज्यों के भी लोग आ कर बसने लगे थे.
कुछ लोगों को छोड़ दें तो बिलहरी में रह रहे ज्यादातर लोग मेहनतमजदूरी कर रोज कमानेखाने वाले हैं और कच्चे मकानों या झुग्गियों में रहते हैं. रोजाना कई लोग आ कर इस इलाके में बसते हैं और फिर धीरेधीरे यहीं के हो कर जबलपुरिया कहलाने लगते हैं.
रोजगार की तलाश में ऐसा ही एक जोड़ा अप्रैल, 2015 में जबलपुर आया तो बिलहरी में किराए का मकान ले कर रहने लगा. पति का नाम मयूर मलिक था और पत्नी का रिंकी शर्मा. रहने का ठिकाना मिल गया तो मयूर इधरउधर काम करने लगा. कुछ दिनों बाद उसे एक दुकान में नौकरी मिल गई. जल्दी ही उन के यहां एक बेटा भी हो गया.






