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डायरेक्टर: सुपर्ण एस. वर्मा, मिलन लूथरिया

लेखक: सुपर्ण एस. वर्मा

कलाकार: ताहिर राज भसीन, निशांत दहिया, अनुप्रिया गोयनका, मौनी राय, मेहरीन पीरजादा, विनय पाठक, अंजुम शर्मा, अनिल जार्ज, सुनील पलवल, हरलीन सेठी

सुलतान औफ दिल्ली वेब सीरीज भारत की आजादी के बाद बने हालात पर केंद्रित है, जिस में अर्जुन भाटिया नाम के एक पात्र से जुड़े विषयों पर इसे लिखा गया है. कहानी  की शुरुआत अर्जुन भाटिया की जवानी से शुरू होती है. अर्जुन भाटिया का रोल ताहिर राज भसीन ने निभाया है.

वेब सीरीज अर्जुन के बचपन के आधा घंटा फ्लैशबैक में जाती है. इस दौरान सीरीज से जुड़े अन्य पात्रों के बचपन को दिखाते हुए दूसरे बाल कलाकार के रूप में राजेंद्र प्रताप सिंह को दिखाया जाता है. राजेंद्र प्रताप सिंह की भूमिका निशांत दहिया ने निभाई है. उस के पिता अपने मनोरंजन के लिए शंकरी देवी को साथ में रखते हैं.

शंकरी देवी का अभिनय अनुप्रिया गोयनका ने निभाया है. वह पिता के साथसाथ बचपन से ही राजेंद्र प्रताप सिंह पर डोरे डालने लगती है. वेब सीरीज को 2 डायरेक्टरों सुपर्ण एस. वर्मा और मिलन लूथरिया ने मिल कर बनाया है. अर्जुन भाटिया का परिवार आजादी के बाद हुए बंटवारे में भारत आता है. पाकिस्तान में रहते वह काफी संपन्न रहता है, वहीं राजेंद्र प्रताप सिंह का परिवार भारत में संपन्न रहता है.

फिल्म डायरेक्शन के दौरान पहले एपिसोड में डायरेक्टरों की भारी कमियां आप सहज महसूस कर सकेंगे. इस में अर्जुन के बचपन में पिता के अचानक अय्याश होने की बात, फिर उस के अपराध जगत की तरफ जाने के किस्से बहुत जल्दीजल्दी में फिल्माए गए हैं.

यहां दर्शक बोर न हो जाएं तो शंकरी देवी की आड़ में 2 बार डायरेक्टरों ने राजेंद्र प्रताप सिंह के बाल कलाकार के रूप में इंटीमेंट सीन बनाने का प्रयास किया है. पहले एपिसोड में जगह जगह डायलौग डिलीवरी तो है, लेकिन वह दर्शकों में प्रभाव डालने वाली नहीं है.

इस में शंकरी देवी और राजेंद्र प्रताप सिंह पर डोरे डालते वक्त बोला गया डायलौग. शंकरी देवी यहां राजेंद्र प्रताप सिंह से कहती है कि उसे जो चाहिए वह उस के पिता के पास है. वह देने के लिए उसे बड़ा होना पड़ेगा. अर्जुन को जब बड़ा होते दिखाया गया, तब दोनों डायरेक्टर उस पल पर फिल्माए गए सीन के साथ न्याय नहीं कर पाए.

पहले एपिसोड में 1962 लिखा है, लेकिन उस में आज के जमाने की रौयल एनफील्ड दिखाई गई है. शायद उस समय डायरेक्टरों की अकल घास चरन गई होगी. इसी तरह जगन सेठ के इशारों पर हथियारों की डिलीवरी ले जाते वक्त हुई मुठभेड़ के फिल्मांकन में भी दोनों डायरेक्टर मात खा गए. जगन सेठ की भूमिका मशहूर हास्य कलाकार विनय पाठक ने निभाई है. वे पात्र के अनुरूप अपने चरित्र को ढाल नहीं सके.

इस के अलावा अर्जुन भाटिया और नीलेंदु बंगाली, जो हथियार चलाते हुए दिखाए गए, वे सारे आधुनिक हथियार हैं. यह इंसास, एके47 अमेरिकन मेड पिस्टल से मेल खाते हुए हैं. यहां भी डायरेक्टरों ने कमअक्ल होने का सबूत दिया है. नीलेंदु बंगाली की भूमिका अंजुम शर्मा ने निभाई है. वह अर्जुन का करीबी यार दिखाया गया है, जिस का मकसद सिर्फ जगन सेठ के लिए काम करना है.

वेब सीरीज में जगहजगह जबरिया ड्रामा और सस्पेंस पैदा करने का असफल प्रयास किया गया है. यह आप को नीलेंदु बंगाली और अर्जुन भाटिया की पहली मुलाकात में भी देखने को मिलेगा. इस के अलावा जगन सेठ और अर्जुन भाटिया की जब मुलाकात होती है तब भी आप को वेब सीरीज में किसी न किसी बात की कमी स्वयं महसूस कर सकेंगे.

एपिसोड में राजेंद्र प्रताप सिंह और जगन सेठ एकदूसरे को फायदा पहुंचाने के लिए हाथ मिलाते हैं. पहले एपिसोड में निर्मम हत्या, बाल कलाकारों पर किए जा रहे यौन शोषण के किस्से आप को कोई रोमांच पैदा नहीं कर सकेंगे.

सुलतान औफ दिल्ली वेब सीरीज के दूसरे एपिसोड को दोनों डायरेक्टरों ने मिल कर क्यों बनाया, यह आप को पूरा देखने के बाद भी समझ में नहीं आएगा. अर्जुन भाटिया और नीलेंदु बंगाली के बीच दोस्ताना संबंध को स्थापित करने के लिहाज से कई सीन डाले गए, जो काफी बोझिल हैं.

जगन सेठ के लिए काम करने वाले इन 2 खास सिपहसालारों की जानकारी राजेंद्र प्रताप सिंह पहले से रखता है. वह पार्टी में जब उन की मुलाकात कराता है तो यह बात वह बोलता भी है, लेकिन दोनों डायरेक्टर इस बात को साबित करने में नाकाम साबित हुए.

पहली हथियारों की डिलीवरी देने की खुशी में आयोजित पार्टी में मुठभेड़ भी दिखाई गई. यह किस ने और किस के इशारों पर अंजाम दी गई, यह साफ नहीं होता है. इस से पहले हथियारों की डिलीवरी लेने वाले के कहने पर अर्जुन और नीलेंदु बंगाली जेल से उस के बेटे को छुड़ाते हैं.

यह सीन भी डायरेक्टर ने काफी बोझिल बनाया. उस में निरंतरता की काफी कमी दर्शकों को दूसरे एपिसोड में दिखाई देगी. इधर, शंकरी देवी के जरिए राजेंद्र प्रताप सिंह दूसरे एपिसोड में पार्टनर बने जगन सेठ को मंत्री बनाने के लिए चुनाव में टिकट दिलाने की बात पहुंचाता है. यहां भी डायरेक्टर अचानक एक ऐसे नेता को दर्शकों को सामने ला देते हैं, जिस के बारे में दूसरे एपिसोड में स्थिति साफ नहीं होती.

दूसरे एपिसोड में 60 के दशक के संगीत को आधुनिक बना कर पेश किया गया है. यह बैकग्राउंड म्यूजिक है, लेकिन दर्शकों को मनोरंजन देने में बिलकुल नाकाम साबित हुआ. जगन सेठ पर हुए हमले के बाद की परिस्थितियों को भी बेहद हलके अंदाज में डायरेक्टर ने प्रदर्शित किया. दूसरे एपिसोड का शीर्षक ही अचरज में डालने वाला है.. इस कहानी का शीर्षक ‘स्वीट स्मेल आफ सक्सेस’ है.

सुलतान औफ दिल्ली वेब सीरीज के तीसरे एपिसोड को काफी अव्यवहारिक बनाया गया है. वेब सीरीज के मुख्य किरदार को इस एपिसोड के लिए पूरी तरह से नग्न होना पड़ता है. वह भी वेब सीरीज में फारुख मस्तान और उस के साथ बैठी फरीदा बी के सामने.

फारुख मस्तान की भूमिका अनिल जार्ज ने निभाई है. वह काफी मंझे हुए कलाकार हैं, लेकिन दोनों डायरेक्टर अपने हुनर का लोहा उस से नहीं मनवा पाते.

तीसरे एपिसोड को ‘किस औफ लव’ नाम दिया गया है. फारुख के बेटे शाहिद के पास जाने की टिप जगन सेठ का ही दाहिना हाथ और उस के साथ परछाईं की तरह रहने वाला संधू देता है. यह भूमिका सुनील पलवल ने निभाई है. वह ही उसे उकसाता है कि जगन सेठ का करीबी बनने के लिए फारुख मस्तान के बेटे शाहिद से पूछताछ की जानी चाहिए.

जगन सेठ पर हुए हमले को ले कर पूछताछ करने के लिए अर्जुन भाटिया वहां जाता है. हालांकि वह कुछ कहता, उस से पहले संधू ही उसे गोली मार देता है. जब यह बात जगन सेठ को पता चलती है तो गलती को अर्जुन भाटिया अपने सिर पर ले लेता है. उसे ही सुधारने के लिए अर्जुन भाटिया फारुख मस्तान के सामने नंगा होता है.

फारुख का दिल जीतने पर जगन सेठ खुश हो कर अर्जुन भाटिया को अपनी कार देता है, जिस में वह कारोबारी हरीश कुमार की बेटी संजना को लिफ्ट देता है. यहां से दोनों के प्यार की शुरुआत दिखाई गई है. संजना का किरदार मेहरीन पीरजादा ने निभाया है. वह उस को बंगले पर ले जाता है.

यह बंगला उसे कैसे मिला, वेब सीरीज में यह साफ नहीं है. डायरेक्टर ने वेब सीरीज में संजना और अर्जुन भाटिया के लव सीन और गाने को एक ही जगह पर फिल्माया है. इधर, जगन सेठ को टिकट देने की सिफारिश शंकरी देवी इंडिया विकास पार्टी के नेता से करती है. जब वह तैयार नहीं होता है तो शंकरी देवी दि क्राउन रायल होटल के मैनेजर को कहती है.

शंकरी देवी के कहने पर नेता को कई लड़कियों के साथ हनीट्रैप में फंसाया जाता है, जिस कारण इंडिया विकास पार्टी का नेता जगन सेठ को अपना उम्मीदवार घोषित कर देता है.

तीसरे एपिसोड में यह सब कुछ काफी बिखरा हुआ नजर आता है. दर्शकों के सामने डायरेक्टर सीधे परिणाम देते हैं. जबकि परिणाम के पहले होने वाले संघर्ष और उस की वजह को ले कर कोई भी बात पता नहीं चली.

वेब सीरीज का चौथा एपिसोड फिर जगन सेठ के आसपास घूमता है. इस बार जगन सेठ के लिए नीलेंदु बंगाली और अर्जुन भाटिया मुंबई जाते हैं. इस कारण इस एपिसोड का नाम ‘बांबे कांफिडेंशियल’ रखा गया है.

लेकिन दोनों डायरेक्टर पहले की तरह हर सीन में कोई भी बात कांफिडेंशियल नहीं रहने देते. क्योंकि जिस शीर्षक पर यह एपिसोड बनाया गया है, वह डायरेक्टरों की लापरवाही उजागर करता है. दरअसल, अर्जुन भाटिया हीरे लेने के बाद काल कर के जगन सेठ को बताता है कि माल उस के पास है.

इस एपिसोड में डायरेक्टरों ने बिना वजह का हवाई जहाज के भीतर शौचालय में एयरहोस्टेस के साथ सैक्स करते हुए फूहड़ता भरा सीन क्रिएट किया है. इस से डायरेक्टरों की सोच भी नंगी हो जाती है.

यहां 3 एपिसोड में डायरेक्टर की नीयत से पहले ही साफ हो जाता है कि एयरहोस्टेस की हीरा डिलीवरी के वक्त महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी. क्योंकि बिना रोमांच और सस्पेंस के नीलेंदु बंगाली उस के पास जाता है और वह उसे शौचालय में संबंध बनाने के लिए तैयार कर लेता है.

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