मासूम की लाश पर लिखी सपनों की इबारत

मासूम की लाश पर लिखी सपनों की इबारत – भाग 4

जब रुद्राक्ष रोते हुए अपने घर जाने की जिद करने लगा तो अंकुर ने उसे क्लोरोफार्म युक्त रुमाल सुंघा कर बेहोश कर दिया. रुद्राक्ष के बेहोश होने पर अंकुर ने पुनीत हांडा के घर फोन कर के रुद्राक्ष के अपहरण करने की बात कही और 2 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी. पुनीत ने अपने पास इतनी बड़ी रकम नहीं होने की बात कही तो उस ने कहा कि सुबह तक जितनी रकम का इंतजाम हो सके, कर लेना.

इस के बाद अंकुर बेहोश रुद्राक्ष को बारां रोड स्थित महालक्ष्मीपुरम के अपने अपार्टमेंट में ले गया. तब तक रुद्राक्ष को धीरेधीरे होश आने लगा था. अंकुर ने उसे फिर क्लोरोफार्म सुंघा दिया और हाथपैर बांध कर उसे अपार्टमेंट में लिटा दिया. इस के बाद वह ताला लगा कर अपने घर गया और खाना खाया.

दशहरा हालांकि गुजर चुका था, लेकिन कोटा में 10 अक्टूबर तक के लिए दशहरा मेला लगा था. उस रात यानी 9 अक्तूबर को मेले में विजयश्री रंगमंच पर भोजपुरी नाइट का आयोजन किया गया था, जिस में भोजपुरी गायिका रुचि सिंह और राकेश मिश्रा के गीतों की प्रस्तुति होनी थी. अंकुर पत्नी के साथ दूसरी कार से दशहरा मेला में भोजपुरी प्रोग्राम देखने चला गया.

जब वह दशहरा मेला देखने गया, तब तक पुलिस को रुद्राक्ष के अपहरण की सूचना मिल चुकी थी और पुलिस ने नाकेबंदी भी शुरू कर दी थी. इस से अंकुर को खतरा महसूस होने लगा. वह घर वापस पहुंचा और सब से पहले अपनी माइक्रा निशान कार के शीशों पर लगी काली फिल्म हटाई. क्योंकि इस कार से वह पकड़ में आ सकता था.

उस वक्त उस का दिमाग बड़ी तेजी से चल रहा था. आगे की योजना के लिए उस ने अपने एक भाई की ईको स्पोर्ट्स कार ली और बारां रोड स्थित अपने अपार्टमेंट पहुंच कर बेहोश रुद्राक्ष को उस कार में डाल लिया. तब तक आधी रात हो चुकी थी. रुद्राक्ष उस समय तक बेहोश था, लेकिन उस की सांसें चल रही थीं. अंकुर फिरौती की बात भूल चुका था. अब उसे खुद के बचाव की सूझ रही थी. इसलिए रुद्राक्ष को नहर में फेंक दिया.

उस वक्त चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था. एकबार छपाक की आवाज हुई और सब कुछ शांत हो गया. कहां क्या हुआ, किसी को पता तक नहीं चला. घर वापस आ कर अंकुर चैन की नींद सो गया.

उसी रात पुलिस उस के फ्लैट पर उस की कार का सत्यापन करने आई, लेकिन उस ने एक पुलिस अधिकारी से फोन करवा कर पेपर अगले दिन दिखाने की बात कही और पल्ला झाड़ लिया.

कोटा में रुद्राक्ष के अपहरण को ले कर भड़के लोगों के गुस्से और पुलिस की हलचल देख कर अंकुर के लिए खतरा बढ़ता रहा था. इसलिए वह 10 अक्टूबर की रात कोटा से दिल्ली चला गया. दिल्ली से वह लखनऊ पहुंचा और 11 व 12 अक्टूबर को अपने भाई अनूप के पास रहा. इस दौरान उस ने अपने मोबाइल छोड़ दिए और दूसरी सिमों का इस्तेमाल करता रहा. कोटा में चल रही पुलिस की गतिविधियों की टोह लेने के लिए वह सोशल मीडिया का सहारा लेता था.

लखनऊ से वह 13 अक्टूबर की रात को वापस कोटा आ गया. कोटा आने पर उसे पता चला कि उस पर पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. इसलिए वह 14 अक्टूबर को ही फिर कोटा से भाग खड़ा हुआ. पुलिस को उस के पास मौजूद मोबाइल नंबर का पता चल चुका था. इसी नंबर को ट्रेस करते हुए पुलिस उसे तलाश रही थी. अंकुर ने वह मोबाइल कोटा से पटना जाने वाली ट्रेन के टायलेट में रख दिया और खुद कोटा के रेलवे यार्ड में खड़ी एक ट्रेन में छिप गया, जबकि पुलिस उसे मोबाइल की लोकेशन वाली ट्रेन में तलाशती रही.

कुछ घंटों बाद अंकुर उसी ट्रेन से जिस में वह छिपा था, कोटा के डकनिया रेलवे स्टेशन पहुंचा और वहां पास के एक सैलून में सिर का मुंडन करवा कर रतलाम जाने वाली ट्रेन से निकल गया. उसी दिन देर रात कोटा पुलिस ने प्रेस कौन्फ्रैंस कर के रुद्राक्ष के कातिल अंकुर की पहचान कर लिए जाने की जानकारी प्रेस को दी और दावा किया कि अंकुर को जल्द पकड़ लिया जाएगा.

अंकुर कोटा से रतलाम, गुजरात, उड़ीसा व नागपुर सहित कई शहरों में होता हुआ अपने भाई अनूप के पास लखनऊ पहुंचा. इस बीच, पुलिस की डेढ़ दर्जन टीमें उसे देश भर में तलाश करती रहीं. दीपावली के दिन 23 अक्टूबर को वह कानपुर पहुंचा. कानपुर में वह भुवनेश्वर निवासी सुशांत राजगढि़या के नाम से होटल में रुका था. सुशांत का आईडी कार्ड उस ने ट्रेन में सफर के दौरान उड़ाया था. इसी होटल से वह पुलिस के हत्थे चढ़ा.

पुलिस ने दोनों भाइयों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर के पहले 10 दिन के रिमांड पर लिया. बाद में उन का दोबारा रिमांड लिया गया. कथा लिखे जाने तक पुलिस मामले की जांच कर रही थी. पुलिस को दोनों भाइयों के कई कारनामों का पता चला है.

दोनों के खिलाफ पुलिस ने काफी सुबूत जुटा लिए हैं. पुलिस इस मामले को फास्ट टै्रक कोर्ट में ले जाएगी, ताकि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके.

रुद्राक्ष का कातिल भले ही पकड़ा गया, लेकिन पुनीत व श्रद्धा हांडा को उस ने ऐसा गम दिया है, जो जिंदगी भर नहीं भुलाया जा सकता. वे कहते हैं कि मासूम रुद्राक्ष ने अंकुर का क्या बिगाड़ा था, जो उस ने हमारा खुशहाल जीवन उजाड़ दिया. उन का कहना है कि हत्यारे को जिस दिन फांसी होगी, उसी दिन वे दिवाली मनाएंगे.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मासूम की लाश पर लिखी सपनों की इबारत – भाग 3

रुद्राक्ष की हत्या हुए 15 दिन से ज्यादा बीत चुके थे. दीपावली का त्योहार भी निकल गया था. एडीजी (अपराध) अजीत सिंह शेखावत इस मामले को ले कर चिंतित भी थे और बेचैन भी. वह ठीक से सो तक नहीं पा रहे थे. उन्हें जयपुर से कोटा आए कई दिन हो गए थे. पुलिस महानिदेशक ओमेंद्र भारद्वाज उन से रोजाना रिपोर्ट ले रहे थे. मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी भी लगातार उन से संपर्क बनाए हुए थे. पुलिस की विफलता और लोगों में बढ़ता जनाक्रोश मीडिया में सुर्खियां बना हुआ था.

शेखावत की परेशानी वाजिब थी. मामला एक मासूम के अपहरण और हत्या का था, जिस में अपराधी अंकुर पाडि़या की हकीकत भी पता चल चुकी थी और पुलिस ने उस के खिलाफ सुबूत भी जुटा लिए थे. लेकिन अंकुर पुलिस को चकमा पर चकमा दे रहा था. पुलिस डालडाल रहती, तो वह पातपात चलता. पुलिस उस की चालों को समझ ही नहीं पा रही थी.

पुरानी कहावत है कि बकरे की मां आखिर कब तक खैर मनाएगी. इस मामले में भी यही हुआ. घटना के 18 दिनों बाद आखिर 27 अक्टूबर को अंकुर पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया. उसे उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया.

होटल में वह फर्जी नाम से रुका हुआ था. संयोग से अंकुर के भाई अनूप से की गई पूछताछ में उन के कारनामों और भविष्य की साजिशों का ऐसा घिनौना चेहरा सामने आया कि पुलिस भी हतप्रभ रह गई.

रुद्राक्ष का अपहरण कर के उस की हत्या करने वाला मुख्य आरोपी अंकुर इतना शातिर था कि वह आत्महत्या की झूठी कहानी गढ़ कर राजस्थान से बाहर ऐश की जिंदगी जीने के सपने देख रहा था. उस ने अपना हुलिया भी बदल लिया था. पहचान छिपाने के लिए उस ने सिर के बाल कटवा लिए थे और दाढ़ी बढ़ा ली थी.

पूछताछ में हुए खुलासे के बाद पुलिस ने अंकुर का लिखा एक सुसाइड नोट बरामद किया, जिस में उस ने लिखा था कि मुझे पैसों के लिए प्रताडि़त किया गया. इस के बाद कुछ लोगों ने गुमराह कर के मुझ से रुद्राक्ष के अपहरण और हत्या का अपराध करवाया. रुद्राक्ष को अगवा करने के बाद मैं ने उन्हें सौंप दिया था. मैं ने अपराध किया है, इसलिए अब मैं जिंदा नहीं रहना चाहता. मैं खुद को खत्म कर रहा हूं. पुलिस व मेरे परिवार को जब तक यह ‘सुसाइड नोट’ मिलेगा, तब तक मेरी लाश चंबल में कहीं दूर बह चुकी होगी.

हकीकत में अंकुर का आत्महत्या करने का कोई इरादा नहीं था. वह इस सुसाइड नोट के जरिए पुलिस और लोगों को गुमराह करना चाहता था. अंकुर का मानना था कि सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस मान लेती कि उस की मौत हो चुकी है. इस के बाद वह अपने भाई अनूप की तरह किसी बड़े शहर में नाम बदल कर अपना बिजनेस शुरू करता.

अंकुर ने इस सुसाइड नोट में पुलिस व जनता को भावुक करने के लिए यह भी लिखा था कि वह अपने मातापिता व पत्नी से माफी मांगता है. उस ने जो काम किया, उस की वजह से मातापिता व उस की पत्नी को दुखी होना पड़ा, इस के लिए वह क्षमा चाहता है. अंकुर ने प्लास्टिक सर्जरी करवा कर अपना चेहरा बदलवाने का प्लान भी बना लिया था, ताकि जिंदगी भर वह किसी की पहचान में न आए.

उस का इरादा था कि मामला शांत हो जाने के बाद वह भारत से भाग कर फ्रांस में जा बसेगा और दूसरी शादी कर लेगा.

अंकुर जैसा ही शातिर उस का भाई अनूप था. अनूप के खिलाफ राजस्थान के विभिन्न पुलिस थानों में 39 केस दर्ज थे. इन में ज्यादातर मामले ठगी के थे, जिन में से कई मामलों में उसे सजा भी हो चुकी थी. वह जयपुर सेंट्रल जेल में बंद था. 18 नवंबर, 2009 को कोटा से पेशी पर लौटते समय अनूप पुलिस टीम को चकमा दे कर भाग गया था.

पुलिस हिरासत से भाग कर कई महीने इधरउधर रहने के बाद अनूप लखनऊ में बस गया था. उस ने उत्तर प्रदेश में फरजी ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लिया था. फिलहाल वह लखनऊ स्थित गोमतीनगर के विराम खंड के एक मकान में नाम बदल कर रह रहा था. मकान मालिक व अड़ोसपड़ोस के लोगों को उस ने खुद को दिल्ली निवासी बता कर अपना नाम संतोष बताया था. जिस मकान में वह रहता था, उस का किराया 20 हजार रुपए महीने था.

लखनऊ में अनूप एक मोबाइल शौप पर मैनेजर की नौकरी करता था. उस के घर काम करने वाली नौकरानी रानी ने पुलिस को बताया कि अनूप की एक गर्लफ्रैंड है, दोनों की मुलाकात एक मौल में होम एप्लांसेस की दुकान में हुई थी. अनूप के ठाठबाठ व रईसी रहनसहन देख कर वह उस से इंप्रेस हो गई थी. अपनी गर्लफ्रैंड को वह महंगी गाडि़यों में घुमाता था. अनूप के घर पर आए दिन पार्टियां होती रहती थीं. व्हाट्स एप पर अनूप ने अपने प्रोफाइल स्टेटस पर खुद को किंगसाइज लाइफ शो कर रखा था.

पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि अनूप पाडि़या लखनऊ में रहते हुए देह व्यापार के लिए रशियन लड़कियों की सप्लाई करता था. इस के लिए वह अपने ग्राहकों से 30 हजार से 50 हजार रुपए तक लेता था.

रशियन लड़कियां वह दिल्ली के एक दलाल के मार्फत लखनऊ बुलवाता था. दिल्ली से हवाई जहाज से लखनऊ आने के बाद ये लड़कियां अनूप के बताए ठिकाने पर चली जाती थीं. लड़कियों को सप्लाई करने के लिए वह हर बार अलग ड्रेस कोड तय करता था, ताकि एयरपोर्ट पर आने के बाद वह खुद या उस का एजेंट लड़की को आसानी से पहचान सके. रशियन लड़कियों के वीजा की व्यवस्था दिल्ली का दलाल करता था.

दोनों भाई ठगी करने में माहिर थे. अंकुर ने एक कोचिंग संस्थान में फेकल्टी के विभागाध्यक्ष रहे गोपाल चतुर्वेदी से जमीन के नाम पर 55 लाख रुपए ठग लिए थे. इस के लिए उस ने गोपाल से उदयपुर में पार्टनरशिप में 5 करोड़ रुपए की जमीन खरीदने की बात तय की थी. अंकुर ने गोपाल को वह जमीन दिखा भी दी थी. इतना ही नहीं, उस ने रजनीश जिंदल के नाम से एक फरजी इकरारनामा बनवा कर गोपाल से 55 लाख रुपए ले भी लिए थे.

बाद में जमीन मालिक से मिलवाने के लिए अंकुर गोपाल को दिल्ली ले गया और होटल ली-मेरेडियन में उन्हें रजनीश जिंदल के बजाय अपने भाई अनूप से मिलवा दिया. अनूप ने गोपाल चतुर्वेदी को अपना परिचय रजनीश जिंदल के रूप में दिया और उदयपुर की जमीन खुद की बताई. बाद में इस जमीन के फर्जीवाड़े की बात सामने आने पर गोपाल को दोनों ठग भाइयों की असलियत पता चली. इस संबंध में कोटा के बोरखेड़ा थाने में मुकदमा दर्ज है.

अंकुर ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि महंगे शौक और सट्टेबाजी के कारण उस पर एक करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज हो गया था. कर्ज चुकाने के लिए ही उस ने रुद्राक्ष का अपहरण करने की योजना बनाई थी. इस के लिए वह दिल्ली के गफ्फार मार्केट से 8 नए मोबाइल सिम खरीद कर लाया था. इस के बाद उस ने क्लोरोफार्म का इंतजाम किया.

रुद्राक्ष का अपहरण करने के लिए उस ने पार्क की कई दिनों तक रैकी की थी. इस बीच उस ने रुद्राक्ष को बहकाफुसला कर उस से उस के परिवार के बारे में पूछ लिया था. चौकलेट के चक्कर में रुद्राक्ष उस से काफी घुलमिल गया था.

9 अक्टूबर की शाम को रुद्राक्ष हनुमान मंदिर पार्क में पहुंचा और वहां मौजूद बच्चों के साथ खेलने लगा. इसी दौरान अंकुर पाडि़या भी वहां पहुंच गया. थोड़ी देर बातचीत के बाद वह रुद्राक्ष को बड़ी चौकलेट दिलाने के बहाने पार्क से बाहर ले आया. पार्क के बाहर उस की माइक्रा निशान कार खड़ी थी. वह रुद्राक्ष को उसी में बैठा कर चल दिया. उस ने पहले उसे चौकलेट दिलाई, फिर थोड़ी देर कार से उसे इधरउधर घुमाता रहा.

मासूम की लाश पर लिखी सपनों की इबारत – भाग 2

रात बीत गई, लेकिन कोई भी फोन नहीं आया. न तो अपहरणकर्ता ने ही दोबारा फोन किया और न ही फोन पर रुद्राक्ष के मिलने की कोई खबर मिली.

पूरी रात आंसुओं में बीतने के बाद दूसरे दिन शुक्रवार का सूरज निकल आया. पुनीत और श्रद्धा को उम्मीद थी कि आज रुद्राक्ष का पता लग जाएगा. वे दुआ मांग रहे थे कि किसी भी तरह रुद्राक्ष सुरक्षित लौट आए.

रुद्राक्ष का पता लग भी गया, लेकिन पुनीत और श्रद्धा का सब कुछ लुट चुका था. उस दिन सुबहसुबह कोटा के पास तालेड़ा इलाके में एक नहर में बच्चे का शव पड़ा होने की सूचना मिली. पुलिस मौके पर पहुंची. पुनीत और श्रद्धा को भी बुला लिया गया. शव रुद्राक्ष का ही था. बेटे का शव देख कर श्रद्धा पछाड़ खा कर गिर पड़ीं. परिवार वालों ने उन्हें संभाला और घर ले गए. अपहर्ताओं ने मासूम रुद्राक्ष को मार कर नहर में फेंक दिया था.

रुद्राक्ष का शव नहर में मिलने की बात पूरे शहर में तेजी से फैली तो लोगों में आक्रोश फैल गया. मासूम रुद्राक्ष की मौत से पूरा शहर रो पड़ा. पुलिस ने जरूरी काररवाई के बाद शव घर वालों को सौंप दिया. दोपहर में गमगीन माहौल में रुद्राक्ष का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अब यह मामला संगीन हो चुका था. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निर्देश पर जयपुर से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, कोटा के प्रभारी मंत्री यूनुस खान तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) अजीत सिंह कोटा पहुंच गए. उन्होंने पीडि़त परिवार से मिल कर सांत्वना दी और रुद्राक्ष के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का भरोसा दिलाया.

मासूम रुद्राक्ष की हत्या ने कोटा के नागरिकों को इतना आहत किया कि 11 अक्टूबर को पूरा शहर बंद रहा. चाय की गुमटी व पानसिगरेट तक की दुकानें नहीं खुलीं. वकीलों ने कामकाज बंद रखा. लोगों ने कैंडल मार्च निकाल कर रुद्राक्ष को श्रद्धांजलि दी.

रुद्राक्ष का शव मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजीत सिंह के निर्देशन में पुलिस दल ने नए सिरे से जांचपड़ताल शुरू कर दी. पुलिस की 10 से ज्यादा टीमें रुद्राक्ष के अपहरणकर्ताओं की जानकारी जुटाने लगी. सबूत मिलने लगे तो अपराध की अलगअलग कडि़यां जुड़ने लगीं. इस बीच रुद्राक्ष की हत्या को ले कर पूरे कोटा संभाग में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा था. जगहजगह आंदोलन हो रहे थे. आसपास के शहर भी अलगअलग दिन बंद रहे. पुलिस के लिए रुद्राक्ष के अपहरण और हत्या का मामला चुनौती बन गया था.

5 दिनों तक दिनरात चली जांचपड़ताल के बाद पुलिस ने विभिन्न तरीकों से इस मामले में सभी जरूरी ठोस सबूत जुटा लिए. 14 अक्टूबर की रात पुलिस अधिकारियों ने कोटा में प्रेस कौन्फ्रैंस कर के दावा किया कि रुद्राक्ष के कातिल की पहचान कर ली गई है. रुद्राक्ष का अपहरण कर के उस की हत्या करने वाला शख्स अंकुर पाडि़या है.

अधिकारियों ने दावा किया कि जांचपड़ताल में पुलिस को अंकुर पाडि़या के बारे में कई सनसनीखेज एवं तथ्यात्मक जानकारियां मिली हैं. पुलिस का कहना था कि अंकुर पाडि़या का पर्दाफाश क्लोरोफार्म की आनलाइन शौपिंग के लिए किए गए ई-मेल से हुआ है.

प्रेस कौन्फ्रैंस में अधिकारियों ने बताया कि पुलिस की जांचपड़ताल में पता चला है कि अंकुर का रहनसहन और जीवनशैली हाईप्रोफाइल है. हाई सोसायटी में उठनाबैठना, महंगी गाडि़यों में घूमना, लड़कियों से अय्याशी करना, क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाना उस का शौक था. अय्याशी का जीवन जीने वाला अंकुर कई बार विदेश जा चुका है. अलगअलग जगहों पर उस के कई फ्लैट हैं.

बारां रोड पर एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में उस का एक फ्लैट पूरी तरह साउंडपू्रफ है. इस फ्लैट में वह केवल पार्टियां करता था. वहां ऐशोआराम की तमाम सुविधाएं हैं. ओम एन्क्लेव के एक फ्लैट से पुलिस को अंकुर की कई कीमती चीजें मिली हैं. विदेशों में भी उस के कई दोस्त हैं. जांचपड़ताल में पुलिस को अंकुर के भाई अनूप की भी जानकारी मिली. अनूप भगोड़ा था. वह 5 साल पहले पुलिस हिरासत से भाग गया था. उस पर लोगों से करोड़ों रुपए ठगने का आरोप था.

पुलिस ने अपनी छानबीन के आधार पर बताया कि अंकुर पाडि़या कोटा के ओम एन्क्लेव के सी ब्लाक में चौथी मंजिल पर अपनी पत्नी व मातापिता के साथ रहता था. उस के फ्लैट के ठीक सामने कोटा में तैनात यातायात पुलिस की डीएसपी तृप्ति विजयवर्गीय का फ्लैट है. जांच में यह बात भी सामने आई कि वारदात के बाद अंकुर अपने इस फ्लैट में आताजाता रहा, लेकिन न तो पड़ोसी डीएसपी को उस पर शक हुआ और न ही किसी और को.

जांच दलों को अंकुर के पुलिस अधिकारियों से भी अच्छे संपर्क होने की जानकारी मिली. जांच में यह भी पता चला कि रुद्राक्ष के अपहरण की रात पुलिस जब उस की निशान माइक्रा कार का सत्यापन करने के लिए उस के घर पहुंची तो उस ने जांच के लिए आए पुलिस दल को एक उच्चाधिकारी से फोन करवा कर कहलवाया कि वह गाड़ी के कागज एक दिन बाद दिखा देगा.

पुलिस ने रुद्राक्ष के अपहरण की सूचना और निशान माइक्रा कार की फुटेज मिलने के बाद उसी रात कार कंपनी के शोरूम से कोटा में चल रही निशान माइक्रा कारों और उन के मालिकों की सूची हासिल कर ली थी. इसी सूची के आधार पर घटना के कुछ घंटे बाद ही आधी रात को पुलिस अंकुर के घर उस की कार का सत्यापन करने के लिए पहुंची थी. पुलिस अधिकारियों ने माना कि अगर उस रात अंकुर की कार का सत्यापन हो जाता तो शायद रुद्राक्ष जीवित मिल जाता.

पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि जांच में यह बात सामने आई कि अंकुर पाडि़या क्रिकेट का सट्टा लगाता था. सट्टे में वह करोड़ों रुपए की रकम गंवा चुका था. इसी की भरपाई के लिए उस ने रुद्राक्ष के अपहरण की साजिश रची थी. इस के लिए उस ने कई दिनों तक पार्क की रैकी करने के बाद रुद्राक्ष को चुना था. रुद्राक्ष के पिता पुनीत हांडा बैंक मैनेजर थे और मां श्रद्धा टीचर. इस से अंकुर को उम्मीद थी कि रुद्राक्ष का अपहरण कर के उसे मोटी रकम मिल जाएगी, जिस से वह अपना कर्ज उतार देगा.

राजस्थान पुलिस ने 14 अक्टूबर की रात रुद्राक्ष के अपहरण और उस की हत्या के मामले का पर्दाफाश जरूर कर दिया, लेकिन अंकुर पाडि़या पुलिस की पकड़ से दूर था. अलबत्ता पुलिस ने दावा किया कि अंकुर के ठिकानों की जानकारी मिल चुकी है और वह जल्द से जल्द पकड़ में आ जाएगा.

पुलिस ने अंकुर पाडि़या की जन्म कुंडली और उस के भगोड़े भाई अनूप की अपराध कुंडली हासिल कर के एक मोर्चे पर सफलता हासिल कर ली थी. उसे उम्मीद थी कि अपराधी अब ज्यादा दिन भाग नहीं सकेंगे. पुलिस ने जिस तरह के दावे किए थे, उस से कोटा की जनता और रुद्राक्ष के मातापिता को भी यह उम्मीद बंधी थी कि अपराधी जल्दी ही गिरफ्तार हो जाएंगे.

लेकिन यह इतना आसान साबित नहीं हुआ. पुलिस अंकुर की गिरफ्तारी को जितना आसान मान रही थी, वह उतना ही मुश्किल साबित हो रहा था. अंकुर पुलिस से भी ज्यादा शातिर और चालाक साबित हुआ. पुलिस जब तक उस के ठिकाने पर पहुंचती, वह वहां से निकल चुका होता था. उधर कातिल का पर्दाफाश हो जाने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से कोटा में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा था. पुलिस परेशान थी. कई टीमें अंकुर की तलाश में देश भर में उस के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं, लेकिन सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहे थे.

मासूम की लाश पर लिखी सपनों की इबारत – भाग 1

उस दिन अक्टूबर की 9 तारीख थी. धरती पर सुरमई शाम उतर आई थी. सूरज दूर पहाड़ों की ओट में छिपने लगा था. राजस्थान में चंबल नदी के  किनारे बसे और पूरे देश में एजुकेशन हब के नाम से मशहूर शहर कोटा की पौश कालोनी तलवंडी निवासी पुनीत हांडा बैंक से अभीअभी घर लौटे थे.

दिनभर के थकेमांदे पुनीत ने घर आते ही पत्नी श्रद्धा से बेटे रुद्राक्ष के बारे में पूछा. रसोई में पुनीत के लिए चाय बनाने में व्यस्त श्रद्धा ने वहीं से हंसते हुए कहा, ‘‘आप को पता तो है, रुद्राक्ष पड़ोस के हनुमान मंदिर पार्क में खेलने जाता है, फिर भी आप रोजाना घर आते ही उस के बारे में पूछते हैं.’’

पत्नी के जवाब से संतुष्ट हो कर पुनीत फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस गए. कुछ देर में वह हाथमुंह धो कर बाथरूम से निकल आए. इतनी देर में श्रद्धा चाय और एक प्लेट में बिस्किट ले कर ड्राइंगरूम में आ गई. दोनों चाय की चुस्कियां लेते हुए इधरउधर की बातें करने लगे.

इसी बीच पुनीत की नजर दीवार पर टंगी घड़ी पर पड़ी. शाम के 7 बज चुके थे, रुद्राक्ष अभी तक घर नहीं लौटा था. पुनीत ने श्रद्धा की ओर देखते हुए कहा कि रुद्राक्ष रोजाना तो ज्यादा से ज्यादा साढे़ 6 बजे तक घर लौट आता था. आज क्यों नहीं आया?

श्रद्धा साड़ी के पल्लू से चेहरे को पोंछते हुए बोलीं, ‘‘हो सकता है, वह अपने दोस्तों के साथ अभी तक खेलने में लगा हो. फिर भी पापा से कहती हूं कि अपने लाडले पोते को पार्क से ले आएं.’’

श्रद्धा ने ससुर एम.एम. हांडा को रुद्राक्ष के अब तक घर नहीं आने की बात बताई तो वह उसे पार्क से लाने के लिए जाने लगे, तभी घर के लैंडलाइन पर फोन की घंटी बजने लगी. पुनीत ने फोन उठाया. फोन पर दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘तू पुनीत बोल रहा है?’’

फोन सुन कर पुनीत को झटका सा लगा. भद्दी आवाज में कोई उन्हें तू कह कर बोल रहा था. फिर भी उन्होंने यह सोच कर कि हो न हो कोई दोस्त हो, आवाज पहचानने की कोशिश की, लेकिन कुछ याद नहीं आया.

पुनीत कुछ पूछते, इस से पहले ही फोन पर दूसरी ओर से रौबीली आवाज सुनाई दी, ‘‘तू बैंक मैनेजर है ना… तेरी बीवी का नाम श्रद्धा है और वह टीचर है. रुद्राक्ष तेरा ही बेटा है ना…?’’

पुनीत इस तरह के सवालों से झल्ला गए. फिर भी उन्होंने शांत स्वर में कहा, ‘‘हां.’’

पुनीत के हां कहते ही फोन पर दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘सुन, तेरे बेटे रुद्राक्ष का अपहरण हो गया है. हम उसे कश्मीर भेज रहे हैं. कल सुबह तक 2 करोड़ रुपए का इंतजाम कर लेना.’’

पुनीत कुछ पूछते, इस से पहले ही फोन करने वाले ने कहा, ‘‘याद रखना, पुलिस को सूचना दी तो बच्चा जिंदा नहीं बचेगा. जितनी तेजी से फोन करने वाले ने बात की थी. उतनी ही तेजी से दूसरी तरफ से फोन कट गया.’’

फोन सुन कर पुनीत सन्न रह गए. एकाएक यह बात उन की समझ में नहीं आई कि क्या करें? उन्होंने श्रद्धा को आवाज दे कर बुलाया और उन्हें फोन पर हुई सारी बातें बताईं.

रुद्राक्ष के अपहरण और 2 करोड़ की फिरौती मांगने की बातें सुन कर श्रद्धा बेसुध हो गईं. उन की आंखों से आंसू टपकने लगे. श्रद्धा ने पुनीत से कहा, ‘‘ऐसा कैसे हो सकता है? हमारे बच्चे का अपहरण भला कोई क्यों करेगा? हमारी तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है.’’

पुनीत ने श्रद्धा को दिलासा देते हुए कहा, ‘‘हिम्मत रखो, सब ठीक हो जाएगा. पुनीत कहीं नहीं गया होगा, चलो पार्क में ढूंढ़ते हैं.’’

बात वाकई चिंता की थी. फोन पर इस तरह का मजाक भी संभव नहीं था. रुद्राक्ष और श्रद्धा अपने घर के पड़ोस वाले पार्क में पहुंचे, लेकिन वहां कोई नहीं था. चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था. रुद्राक्ष के दोस्तों से पूछताछ के लिए वे आसपास रहने वाले बच्चों के घर गए. बच्चों से पता चला कि 3-4 दिन से रोजाना एक व्यक्ति पार्क में आता था.

निशान माइक्रा कार से आने वाला वह व्यक्ति पार्क में बच्चों से बड़े प्यार से बातें करता था, उन से स्पेलिंग वगैरह के अलावा उन के मातापिता के कामकाज के बारे में भी पूछा करता था. साथ ही बच्चों को चौकलेट भी देता था. 3-4 दिन में ही वह पार्क में आने वाले बच्चों से काफी घुलमिल गया था. रुद्राक्ष के साथ खेलने वाले बच्चों ने बताया कि वही व्यकित रुद्राक्ष को अपने साथ ले गया था.

पार्क में खेलने वाले बच्चों ने जो कुछ बताया, उस से यह बात साफ हो गई कि फोन झूठा नहीं था और न ही उन से कोई मजाक किया गया था. मतलब साफ था कि 7 साल के मासूम रुद्राक्ष का वाकई अपहरण हो गया था.

अपहरण की बात सामने आने के बाद पुनीत व श्रद्धा की रुलाई फूट पड़ी. रुद्राक्ष उन के जिगर का टुकड़ा था, लेकिन रोने से कुछ नहीं होने वाला था. पुनीत ने सोचविचार कर अपने परिचितों को फोन कर के तुरंत घर पर बुलाया.

कुछ ही देर में पुनीत के यारदोस्त व करीबी रिश्तेदार आ गए तो पुनीत ने उन्हें रुद्राक्ष के अपहरण होने और 2 करोड़ रुपए की फिरौती मांगने की बात बताई. रुद्राक्ष के अपहरण की बात सुन कर सभी को झटका लगा. सभी ने पुनीत और श्रद्धा को हिम्मत से काम लेने और पुलिस को सूचना देने की सलाह दी. पुनीत ने अपने कुछ परिचितों के साथ थाना जवाहरनगर पहुंच कर रुद्राक्ष के अपहरण और फोन पर 2 करोड़ रुपए की फिरौती मांगे जाने की सूचना दे दी. पुलिस ने तत्काल अपहरण का केस दर्ज कर लिया.

पुनीत हांडा कोटा के संभ्रांत नागरिक हैं. वे बूंदी सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक की तालेड़ा शाखा के मैनेजर हैं. उन की पत्नी श्रद्धा हांडा स्कूल में टीचर हैं. रुद्राक्ष के अपहरण और फिरौती मांगे जाने की बात पूरे शहर में रात को ही आग की तरह फैल गई. लोकल चैनलों पर खबरें आने लगीं.

कोटा के सांसद ओम बिड़ला को इस मामले की जानकारी मिली तो वह विधायक संदीप शर्मा के साथ पुनीत हांडा के घर पहुंचे और उन्हें भरोसा दिलाया कि चिंता न करें, रुद्राक्ष को सहीसलामत घर ले कर आएंगे. ओम बिड़ला दबंग सांसद हैं. उन्होंने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से फोन पर बात की और रुद्राक्ष के अपहरण के मामले की जानकारी दे कर बच्चे का तुरंत सुराग लगवाने का आग्रह किया.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उस दिन जयपुर में ही थीं और एक दिन बाद सिंगापुर के दौरे पर जाने की तैयारियों में लगी थीं. उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को महसूस कर के तुरंत प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओमेंद्र भारद्वाज को तलब कर अपहृत बच्चे का पता लगाने के  निर्देश दिए. डीजीपी ने कोटा के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि जैसे भी संभव हो, रुद्राक्ष का पता लगाएं. इस के लिए विशेष पुलिस टीमें तैनात की जाएं.

डीजीपी के निर्देश पर कोटा के आईजी डा. रविप्रकाश, एसपी ग्रामीण डा. विकास पाठक, कार्यवाहक एसपी मनीष अग्रवाल, एएसपी सिटी राजन दुष्यंत और डीएसपी हिमांशु सहित तमाम पुलिस अधिकारी रुद्राक्ष की तलाश में जुट गए. इस के साथ ही कोटा और आसपास के इलाके में कड़ी नाकेबंदी कर दी गई.

सब से पहले अपहरणकर्ताओं का पता लगाना जरूरी था. इस के लिए पुलिस ने पार्क में रुद्राक्ष के साथ खेलने वाले बच्चों, पार्क में आने वाले लोगों, पार्क में बने हनुमान मंदिर के पुजारी और अन्य लोगों से पूछताछ की. पार्क के आसपास के मकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने के बाद निशान माइक्रा कार को चिह्नित कर लिया गया. परेशानी यह थी कि कैमरों की फुटेज में न तो कार का नंबर दिखाई दे रहा था, न ही कार चलाने वाले का चेहरा नजर आ रहा था. कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी थी. फिर भी पुलिस उस निशान माइक्रा कार की तलाश में जुट गई.

पूरी रात पुलिस रुद्राक्ष के अपहरण की गुत्थी सुलझाने के प्रयास में जुटी रही. दूसरी ओर पुनीत के घर आधी रात तक लोगों का आनाजाना लगा रहा. लोग उन्हें दिलासा देते रहे. बेटे रुद्राक्ष का फोटो देखदेख कर श्रद्धा बारबार रो रही थीं. एक बार तो वह गश खा कर अचेत भी हो गईं. पुनीत व श्रद्धा समेत पूरे परिवार के लोगों ने पूरी रात जाग कर गुजारी. उन्हें उम्मीद थी कि पता नहीं कब पुलिस का फोन आ जाए कि रुद्राक्ष का पता लग गया है या अपहर्ताओं का ही दोबारा फोन आ जाए.