Hindi Kahani: राजकुमार को बचपन से संगीत से लगाव था. वह दिन में अपनी वीणा ले कर बैठ जाता और छिताई जहां होती, वीणा का स्पंदन सुनते ही हिरणी की तरह खिंच आती. दोनों का प्रेम अमर था. लेकिन सुलतान अलाउद्दीन ने छिताई पर नजर डाली तो सब कुछ गड़बड़ा गया. इस के बावजूद दोनों मिल कर ही रहे.
सुलतान अलाउद्दीन खिलजी बुरी तरह फंस गया था. उसे गुमान नहीं था कि यादव राजा रामदेव की दासियां इतनी तेज हैं कि उड़ती चिडि़यों को पहचान ही नहीं लेतीं, जमीन से उन के कान भी काट लेती हैं. अलाउद्दीन अपना नाम सुन कर भागना चाहता था, मगर वह औरत जो दासी मालूम पड़ती थी, उस से अधिक फुर्तीली निकली. उस ने अपनी कमर में बंधी कमंद को भागने वाले पर निशाना लगा कर फेंका. भागने वाला कमंद में फंस कर रह गया. उस की मुश्कें कस चुकी थीं और वह अपनी कमर में एक ओर बंधे नेजे को निकाल नहीं पा रहा था.
तब तक वह औरत एकदम रूबरू आ खड़ी हुई. बोली, ‘‘कटारी मेरे पास भी है बादशाह सलामत. हथियार मत इस्तेमाल कीजिए वरना पछताइएगा. मैं जरा भी आवाज दूंगी तो हमारे सिपाही दौड़े आएंगे. आप के इस तरह पकड़े जाने पर आप की फौज को भागने का रास्ता न मिलेगा, जान लीजिए.’’
अलाउद्दीन खूब अच्छी तरह जानता था कि वह चालाक औरत एकदम सही कह रही थी. उस के पकड़े जाते ही लड़ाई का पासा पलट जाएगा. चाहे बाद में दिल्ली की फौज उसे छुड़ा ले, इस राज्य को नूस्तनाबूद कर दे, मगर उस पर जो धब्बा लग जाएगा, वह फिर न मिटेगा. यह भी हो सकता है कि राजा रामदेव उसे हाथियों से कुचलवा दें या भयानक खाई में फेंकवा दें. वह एकबारगी सिहर उठा. उस ने अपनी हेकड़ी में अकेले इधर आ कर कितनी बड़ी गलती की है. राघो (राघव) चेतन से अलाउद्दीन का प्रस्ताव सुन कर राजा रामदेव का उबल पड़ना बिलकुल वाजिब था.






