Pathankot Attack: पाक आतंकियों द्वारा भारत में घुसपैठ कर के आतंकी हमले करना कोई नई बात नहीं है. पठानकोट एयरबेस का हमला भी पाक आतंकियों की सोचीसमझी रणनीति थी. इस हमले में भारत के 7 जवान शहीद हुए, लेकिन राहत की बात यह है कि पहली बार पाकिस्तान अपने यहां बैठे आतंकियों के आकाओं के विरुद्ध काररवाई करने की बात कर रहा है. पर क्या ऐसा होगा?

किसी निहायत सनसनीखेज कांड को अंजाम देने की भूमिका तभी सामने आ गई थी, जब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 29 दिसंबर, 2015 को एयरफोर्स के बर्खास्त नान कमीशंड औफिसर रंजीत के.के. को पंजाब के बठिंडा से गिरफ्तार किया था. उस पर पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध कराने का आरोप था.

दरअसल, बठिंडा में तैनात रंजीत को एक अज्ञात महिला ने सोशल साइट फेसबुक पर जाल में फांस कर एयरफोर्स की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली थी. दिल्ली पुलिस की इस काररवाई से पंजाब पुलिस पूरी तरह अनजान थी. जांच से जुड़े दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के बताए अनुसार, जासूसी रैकेट में अब तक सेना और बीएसएफ के एकएक जवान और एक पूर्वसैनिक सहित 5 लोग गिरफ्तार किए जा चुके थे. दिल्ली पुलिस इस मामले में पूरी गंभीरता से जांच कर रही थी, ताकि षडयंत्रकारियों की जड़ तक पहुंच सके.

24 वर्षीय रंजीत केरल के मलप्पुरम जिले का रहने वाला था. उस ने सन 2010 में इंडियन एयरफोर्स जौइन की थी. सन 2013 में उसे अपने फेसबुक एकाउंट पर दामिनी मैकनोट के नाम से एक महिला की फ्रैंडशिप रिक्वेस्ट मिली थी, जिसे उस ने खुशी से स्वीकार कर लिया था. दामिनी ने अपने प्रोफाइल में बताया था कि वह देशदुनिया की खबरों पर आधारित यूके की एक पत्रिका में फीचर राइटर है. रंजीत के मैसेज बौक्स में उस ने अपना निजी मोबाइल नंबर छोड़ कर उस से बात करने की गुजारिश की थी. रंजीत ने उस नंबर पर बात की तो दोनों की अच्छीभली दोस्ती हो गई.

कुछ दिन प्यार भरी मीठीमीठी बातें करते रहने के बाद एक दिन उस ने रंजीत से यह कहते हुए भारतीय वायु सेना से संबंधित कुछ जानकारियां मांगी कि वह इस विषय पर अपनी पत्रिका के लिए एक फीचर तैयार करना चाहती है. रंजीत पहले ही उस के हनीट्रैप में फंस चुका था. उस ने जो भी जानकारी चाही, रंजीत ने बेझिझक दे दी. रंजीत को किसी मामले में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था. इस के बाद ही वह दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया. पुलिस ने 4 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले कर उस से गहन पूछताछ की. उम्मीद थी कि उस से कई बड़े खुलासे होंगे.

दिल्ली में अभी यह सब चल ही रहा था कि पंजाब में इस बीच एक बड़ी अनहोनी हो गई. पहली जनवरी, 2016 की भोर में पठानकोट के थाना नरोट जैमलसिंह के अधीन पड़ने वाली रावी नदी पर बनी कंबलौर पुलिया के पास एक लावारिस लाश मिली. उस से थोड़े फासले पर एक गाड़ी खड़ी थी. अनुमान लगाया गया कि मरने वाला उसी गाड़ी का ड्राइवर रहा होगा. अभी यह गुत्थी सुलझ भी नहीं पाई थी कि एक अन्य सनसनीखेज समाचार चर्चा का विषय बन गया. पता चला कि विगत रात पठानकोट के एसपी (हैडक्वार्टर) रहे सलविंदर सिंह को आतंकियों ने अपहृत कर के उन से बुरी तरह मारपीट की और उन्हें एक सुनसान जगह पर छोड़ दिया और अपने साथ उन की नीली बत्ती लगी गाड़ी ले गए.

जिस ड्राइवर की लाश बरामद की गई थी, पुलिस छानबीन में उस के बारे में यह जानकारी सामने आई कि वह थाना नरोट जैमलसिंह के तहत आने वाले गांव भगवाल का रहने वाला 35 वर्षीय इकागर सिंह था. वह अपनी इनोवा गाड़ी टैक्सी के रूप में चलाया करता था. पिछली रात करीब 9 बजे कुछ लोगों ने फोन कर के उस की गाड़ी किराए पर ली थी और उसे कहीं अज्ञात जगह पर बुलाया था. तब से वह अपनी गाड़ी समेत घर से गायब था. भोर में अड्डा कोहलियां के नजदीक से जब उस की गाड़ी बरामद की गई तो गाड़ी के चारों पहियों की हवा निकली हुई थी. गाड़ी को और भी काफी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था.

उस जगह से थोड़ी दूरी पर स्थित कंबलौर पुलिया के पास से ड्राइवर इकागर सिंह की लाश मिली थी. लाश पर चाकुओं के अनगिनत जख्म थे. यह सीधे कत्ल का मामला था. एसपी सलविंदर सिंह का 2 दिन पहले पठानकोट से तबादला हुआ था, मगर अभी तक उन्होंने अपना चार्ज नहीं छोड़ा था. पहली जनवरी की भोर में गुलपुर सिंबली गांव पहुंच कर उन्होंने किसी के फोन से पुलिस हैडक्वार्टर को सूचित किया था कि वह अपने एक रसोइए व करीबी दोस्त राजेश वर्मा के साथ इलाके के एक धार्मिक स्थल पर मत्था टेकने गए थे. जब वह अपनी महिंद्रा एक्सयूवी गाड़ी नंबर पीबी02ए बी0313 से वापस घर लौट रहे थे तो रास्ते में फौजी वर्दी पहने 2 व्यक्तियों ने सड़क पर सामने आ कर उन्हें रुकने का इशारा किया.

गाड़ी रुकने पर 3 अन्य व्यक्ति भी वहां आ गए. इस के बाद उन लोगों ने खतरनाक हथियारों के बल पर उन का अपहरण कर लिया. गाड़ी में सलविंदर सिंह को उन के रसोइया से मारपीट कर के गुलपुर सिंबली के पास उन्हें गाड़ी से उतार दिया गया, जबकि उन के साथी राजेश वर्मा को आतंकवादी अपने साथ ले गए. उन के सेलफोन भी आतंकियों ने पहले ही हथिया लिए थे. यह गंभीर मामला पुलिस की जानकारी में आया तो पठानकोट व गुरदासपुर में रेडअलर्ट जारी कर के चारों तरफ सख्त नाकाबंदी कर दी गई.

कुछ देर बाद राजेश वर्मा भी पुलिस से संपर्क साधने में सफल हो गया. उस की बुरी तरह पिटाई करने के साथ ऐसा लग रहा था, जैसे उस की गर्दन काटने का भी प्रयास किया गया था. उस की गर्दन पर तेजधार हथियार का गहरा घाव था. जिस पर उस ने अपनी कमीज बांध रखी थी. कमीज खून से पूरी तरह लाल हो गई थी. राजेश को तुरंत सिविल अस्पताल में दाखिल करा दिया गया. चेकिंग के दौरान पुलिस को पठानकोट के गांव अकालगढ़ के नजदीक एक वीरान जगह से एसपी सलविंदर सिंह की गाड़ी खड़ी मिल गई.

इनोवा चालक इकागर सिंह के कत्ल के संबंध में थाना नरोट जैमलसिंह में केस दर्ज करने और एसपी व उन के साथियों के अपहरण के मामले में गुरदासपुर के सदर थाना में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद पठानकोट के एसएसपी रवींद्र कुमार बख्शी व गुरदासपुर के एसएसपी गुरप्रीत सिंह तूर अपनी विशेष पुलिस टीमों के साथ मामले की तह में जाने और वांछित आतंकियों की धरपकड़ के लिए जुट गए. मगर देर रात तक न तो पुलिस के हाथ कोई आतंकी लगा और न ही उन के बारे में कहीं से अन्य कोई सुराग मिल पाया.

इस बीच स्थिति का जायजा लेने के लिए पहली जनवरी की सुबह ही एडीजीपी (ला एंड और्डर) हरदीप सिंह ढिल्लो, बौर्डर रेंज के आईजी लोकनाथ आंगरा व डीआईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह, चंडीगढ़ और अमृतसर से पठानकोट आ पहुंचे. उन के आते ही पुलिस और सेना का जौइंट सर्च औपरेशन शुरू करवा दिया गया.

पुलिस के ये तीनों उच्चाधिकारी दिन भर एसपी सलविंदर सिंह से पूछताछ करते रहे. उन्हें अपना यह कनिष्ठ औफिसर संदेह के दायरे में आता दिख रहा था. यों भी इस एसपी का पिछला आचरण सही नहीं माना जा रहा था. एक साथ 5 महिला सिपाहियों ने उस के खिलाफ गलत आचरण की शिकायत की थी, जिस आधार पर उस का पठानकोट से ट्रांसफर किया गया था. मगर वह तुरंत रिलीव हो कर नई जगह पर जौइन करने के बजाय पठानकोट में ही जमा हुआ था.

अभी 5 महीने पहले ही गुरदासपुर के कस्बा दीनानगर में बड़ी आतंकवादी वारदात हुई थी. आतंकियों ने यहां के पुलिस स्टेशन को अपने कब्जे में ले लिया था. मौजूदा स्थिति को देखते हुए सेना ने आशंका जताई कि इस बार भी आतंकवादियों की ओर से वैसा ही कोई हमला हो सकता है. इसलिए इन बातों को नजरअंदाज न कर के पूरी सुरक्षा व्यवस्था कर ली गई थी. मगर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की मुस्तैदी के दावों के बावजूद 2 जनवरी, 2016 की अलसुबह ठीक सवा 3 बजे आतंकवादी पठानकोट के एयरफोर्स स्टेशन में हथियारों समेत दाखिल होने में कामयाब हो गए. उन लोगों ने एयरफोर्स स्टेशन में दाखिल होते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.

इस में डिफेंस सिक्योरिटी कोर के औफिसर औनरेरी कैप्टन फतेह सिंह व हवलदार कुलवंत सिंह शहीद हो गए, साथ ही अन्य कई जवान भी जख्मी हुए. हालांकि मरने से पूर्व बुरी तरह जख्मी हो जाने पर भी फतेह सिंह व कुलवंत सिंह ने 20 मिनट तक आतंकवादियों को आगे बढ़ने से रोके रखा था. इस बीच हमले की जानकारी मिलते ही एयरफोर्स के अनेक अधिकारी तो घटनास्थल के पास पहुंचे ही, पठानकोट की विशेष पुलिस फोर्स ने भी वहां पहुंच कर एयरफोर्स स्टेशन की समूची हद को चारों तरफ से पूरी तरह से सील कर दिया. भीतर छिपे आतंकियों से निपटने के लिए समूची कमान एयरफोर्स के साथ एनएसजी कमांडोज व भारतीय सेना के जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया. यह औपरेशन लगातार 17 घंटे से भी अधिक समय तक चला.

इस दौरान कई बार अतिरिक्त फौज भी बुलाई गई. बख्तरबंद गाडि़यों की भी मांग की जाती रही. आतंकवादियों की ओर से इन गाडि़यों के बुलेटप्रूफ कांच पर अंधाधुंध फायरिंग कर के इन के भीतर बैठे जवानों को नुकसान पहुंचाने के प्रयास लगातार किए जाते रहे, मगर इन गाडि़यों पर एके 47 असाल्ट राइफल की फायरिंग का भी कोई असर नहीं हुआ. देर शाम एयरफोर्स स्टेशन में एक टैंक भेजा गया. स्थिति का जायजा लेने के लिए इस्तेमाल में लाए गए एमआई 35 हेलीकौप्टरों से रुकरुक कर फायरिंग की गई. इन हेलीकौप्टरों में जीपीएस सिस्टम के साथ ऐसे कैमरे भी फिट हैं, जो दूरदराज के कोनों तक के भी साफ फोटो ले सकते हैं, जिन्हें देख कर अचूक निशाना साधा जा सकता है.

इस तरह की आधुनिक तकनीक व मारक हथियारों की मदद से सुरक्षाबलों ने एकएक कर के एयरफोर्स स्टेशन में घुसे 5 आतंकवादियों को मार गिराया. भीतर घुस आए आतंकवादियों ने औनरेरी कैप्टन फतेह सिंह व हवलदार कुलवंत सिंह का 20 मिनट तक मुकाबला कर के उन्हें शहीद करने के बाद कैंटीन का रुख कर लिया था. यहां धुआंधार फायरिंग कर के उन्होंने जिन जवानों को जख्मी किया, वे थे—सूबेदार मेजर दलबीर सिंह, नायक वेदव्यास, लांस नायक किशोरीलाल, सिपाही बिशनदास, सिपाही करतार सिंह, नायक गौरव, नायक बी.एस. जोर, हवलदार जसपाल, रोहित शर्मा व भूप सिंह, एनएसजी कमांडोज व डिफेंस सिक्योरिटी कोर के भी कई जवान घायलों में शामिल थे.

एयरफोर्स स्टेशन में हवाई फौज के मिग-21 लड़ाकू जहाज व एमआई-24 हेलीकौप्टरों समेत अन्य सैन्य साजोसामान मौजूद था, जिन्हें आतंकवादी नुकसान पहुंचा सकते थे. मगर यहां पर तैनात फोर्स की मुस्तैदी की वजह से आतंकवादी इन तक पहुंचने में सफल नहीं हो सके. जिस बर्खास्त एयरफोर्स अधिकारी रंजीत को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने काबू किया था, उस से जब इस मुद्दे पर पूछताछ की गई तो उस ने माना कि इस हमले की उसे पहले से ही जानकारी थी, साथ ही उस ने बताया कि पठानकोट के अलावा बठिंडा व जैसलमेर भी आतंकवादियों के निशाने पर हैं.

इस से पहले 30 अगस्त, 2015 को पठानकोट पुलिस ने एयरमैन सुनील कुमार को गिरफ्तार किया था. वह फेसबुक के जरिए हनीट्रैप में फंस कर एक लड़की के माध्यम से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को एयरफोर्स की गुप्त सूचनाएं लीक कर रहा था. मगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर के लंबी पूछताछ के बाद छोड़ दिया था. जाहिर है, अब ये गलतियां नहीं दोहराई जा सकती थीं. दिल्ली पुलिस ने बठिंडा से पकडे़ गए रंजीत के कस्टडी रिमांड की अवधि बढ़ा कर उस से महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर पूछताछ शुरू कर दी. इस बीच बठिंडा कैंट की जबरदस्त सुरक्षा बढ़ा कर पंजाब सहित पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया.

चर्चा यह थी कि पठानकोट एयरबेस में घुसे आतंकी अगर अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते तो वहां भारी नुकसान पहुंचा सकते थे. इस के बावजूद यह कहना गलत न होगा कि माल का नुकसान भले ही ज्यादा न सही, बेशकीमती जानों का नुकसान तो उन लोगों ने कर ही दिया था. गांव झंडा गुज्जरां के शहीद कैप्टन फतेह सिंह राजपूत सेना की 16 डोगरा रेजीमेंट से बतौर कैप्टन रिटायर हो कर अपने परिवार के साथ मध्य प्रदेश में रह रहे थे. कुछ वर्ष पहले वह फिर सेना में बतौर अफसर डीएससी कोर में शामिल हो गए थे. फतेह सिह सेना में अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज थे. वह एशिया और अन्य कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों में निशानेबाजी में अनेक पदक जीत चुके थे. उन का एक बेटा गुरदीप सिंह दीपू भी सेना में तैनात है.

दूसरे शहीद हवलदार कुलवंत सिंह सन 1985 में आर्टिलरी सेना के केंद्र हैदराबाद में बतौर सिपाही भरती हुए थे. सन 2004 में रिटायरमेंट के बाद वह घर आ गए. सन 2006 में वह फिर सेना की डीएससी (डीसैंस सिक्योरिटी कौप) सेवा में भरती हो गए. 2 माह पहले ही वह ओडिशा से ट्रांसफर हो कर पठानकोट की एयरबेस में ड्यूटी पर आए थे. शहीद होने से एक दिन पहले ही वह अपने घर वालों से मिल कर वापस ड्यूटी पर पहुंचे थे.

पठानकोट पर यह आतंकी हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा के एक सप्ताह बाद हुआ था. ऐसे में सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि दोनों देशों के सुधरते रिश्तों पर इस का क्या असर होगा? वैसे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में आलोचना कर के सकारात्मक संदेश देने के प्रयास किए हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान भी आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने की मुहिम में भारत के साथ है. इस परिप्रेक्ष्य में भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना बयान इस तरह से जारी किया, ‘हम न केवल पाकिस्तान, बल्कि अपने सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं. लेकिन भारत पर अगर कोई आतंकी हमला होता है तो हम उस का करारा जवाब देंगे.’

वैसे अब तक की छानबीन में यह बात सामने आई है कि पठानकोट हमले में जैशएमोहम्मद का हाथ है. इस हमले में सन 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान अपहरण व दिसंबर, 2001 में संसद पर हुए हमले से जुड़े आतंकवादियों का ही हाथ है. संदर्भवश बता दें कि आतंकवादी अफजल गुरु के बाद आतंकियों ने अपने संगठन को दूसरे तरीके से तैयार किया है और फिदायीन हमलावरों की टोली बनाई है. इन्हें ट्रेनिंग देने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया. कश्मीर में आतंकवादियों के एनकाउंटर से जुड़े सुरक्षा अधिकारियों ने सीधेसीधे आशंका जताई है कि पठानकोट हमले में सन 2001 में संसद पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरु से जुड़े लोगों का हाथ है.

इन लोगों ने सन 2014 में स्क्वैड औफ जैश नामक संगठन बनाया था. गुरु उत्तरी कश्मीर के सोपोर क्षेत्र का रहने वाला था, जिसे फरवरी, 2013 में तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी. इस से पहले जैश नामक आतंकी संगठन को मौलाना मसूद अजहर ने बनाया था. अजहर वही आतंकी है, जिसे सन 1999 में हाइजैक हुए इंडियन एयरलाइंस के विमान को अफगानिस्तान के कंधार ले जा कर रिहा करवा लिया गया था.  यह घटनाक्रम कुछ इस तरह से था कि 24 दिसंबर, 1999 को 5 हथियारबंद आतंकवादियों ने 178 यात्रियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को काठमांडू से हाइजैक कर लिया था. वे उसे अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट पर ले गए. वहां 25 साल के भारतीय नागरिक रूपेन कत्याल की हत्या कर के उस के शव को प्लेन से बाहर फेंक दिया गया था.

आतंकियों ने भारत के सामने 178 यात्रियों की हिफाजत के बदले 3 आतंकियों की रिहाई का सौदा किया. उस वक्त की वाजपेयी सरकार ने पैसेंजरों की जान बचाने के लिए तीनों आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया. तब भारत की जेलों में बंद आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर व अहमद उमर सईद शेख को कंधार ले जा कर रिहा किया गया था.

बहरहाल, ताजा पठानकोट आतंकी हमले की छानबीन में यह बात सामने आई है कि हमला करने वाले आतंकवादी अपने पाकिस्तानी आकाओं से निरंतर संपर्क में थे. उन आकाओं ने इन आतंकवादियों के लिए पाकिस्तानी फोन नंबर का इस्तेमाल कर एक टोयोटा इनोवा टैक्सी की व्यवस्था की थी. रास्ते में टैक्सी का रिम खराब होने के कारण आतंकवादी उस से उतर गए थे. उस के बाद उन्होंने एसपी सलविंदर सिंह से उन की गाड़ी छीन ली. उन का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया, जिस से एक आतंकवादी ने पाकिस्तान बात की थी.

खैर, पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले से एक बार तो लगा कि अंदर घुसे सभी आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया है, मगर 3 जनवरी को गोलियां चलने का क्रम फिर से शुरू हो गया. अचानक बनी इस स्थिति से यह अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा था कि एयरबेस में अभी कितने और आतंकी छिपे हैं और उन के पास किस तरह के हथियार हैं, कैसी विस्फोटक सामग्री है? अभी तक तो यही समझा जा रहा था कि कुल 5 आतंकवादी थे और वे मारे जा चुके हैं.

उस दिन एक अति दुखद घटना यह घटी कि एक आतंकी की लाश को हटाते वक्त भयानक विस्फोट हुआ, जिस में एनएसजी के लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ई. कुमार शहीद हो गए. साथ ही 6 कमांडो भी गंभीर रूप से घायल हो गए. रविवार सुबह करीब साढ़े 8 बजे लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन एनएसजी के कमांडो के साथ एक आतंकी का शव उठवाने गए थे. तभी आतंकी के शव पर लगे आईईडी में विस्फोट हो गया था. अब तक 5  आतंकियों के मारे जाने का अनुमान था, जिन में से 4 के शव बरामद कर लिए गए थे. जबकि वायु सेना के शहीद हुए जवानों की संख्या 7 तक पहुंच गई थी.

लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन पर एनएसजी (नैशनल सिक्योरिटी गार्ड) को ही नहीं, पूरी आर्म्ड फोर्स को नाज था. उन का जन्म बंगलुरू में बीईएमएल के अधिकारी ई.के. शिवरंजन के यहां हुआ था. उनके 2 भाई व 1 बहन हैं. मां का निधन बचपन में ही हो गया था. निरंजन अपने पीछे विधवा डा. के.जी. राधिका व 2 साल की बेटी विस्मय को छोड़ गए हैं. निरंजन एनएसजी के बम निरोधक दस्ते के सदस्य थे. पठानकोट एयरबेस में वह एनएसजी की टीम को लीड कर रहे थे. एयरबेस में सुरक्षाबलों व आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ अभी भी जारी थी. इस बीच शहीद हुए शूरवीरों की शौर्यगाथाएं भी बाहर आने लगी थीं.

गरनाला, अंबाला सिटी के रहने वाले 28 वर्षीय गुरसेवक सिंह अपने फौजी पिता व बड़े भाई की तरह करीब 6 साल पहले भारतीय वायु सेना में भरती हुए थे. बचपन से ही दिलेर रहे गुरसेवक को एयरफोर्स की गरुड़ कमांडो विंग का हिस्सा बनते देर नहीं लगी. अपनी इस नौकरी से वह बहुत खुश थे. उन की शादी 18 नवंबर, 2015 को कुराली की रहने वाली जसप्रीत कौर से हुई थी. लंबी छुट्टी काटने के बाद उन्होंने 20 दिसंबर को फिर से अपनी ड्यूटी जौइन की थी. पहली जनवरी, शुक्रवार की आधी रात में ही उन्हें पठानकोट एयरबेस पहुंचने का आदेश मिला और वह अपनी टीम के साथ तत्काल वहां के लिए कूच कर गए.

अगले दिन बहादुरी दिखाते हुए उन्होंने अपनी जान देश पर न्यौछावर कर दी. त्रासदी यह कि उन की विधवा जसप्रीत कौर के हाथों की मेहंदी भी अभी नहीं छूट पाई थी. ऐसे ही डीएससी कोर के सिपाही संजीव कुमार राणा, जगदीशचंद व करतार सिंह भी अपनी जांबाजी के सबूत दे कर वतन के लिए जान दे कर अपनी शौर्यगाथाएं छोड़ गए. 4 आतंकियों की पहली टुकड़ी ने जब एयरबेस की मैस में घुस कर फायरिंग शुरू की थी, तब जगदीशचंद खाना बना रहे थे.

उन की आंखों के सामने आतंकियों ने 3 जवानों को मौत के घाट उतार दिया तो जगदीश निहत्थे ही आतंकियों के पीछे दौड़ पड़े. एक आतंकी की राइफल छीन कर उस पर गोलियों की बौछार करते हुए उसे मौत के घाट उतारने के बाद वह दूसरे आतंकी की ओर बढ़े. मगर तब तक बाकी बचे तीनों आतंकियों ने उन्हें घेर लिया था. तीनों ने एक साथ उन पर इतनी गोलियां चलाईं कि उन का पूरा जिस्म गोलियों से छलनी हो गया. इस आतंकवादी घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है.

पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि भारतीय वायु सेना के प्रमुख अड्डे पर हुआ यह आतंकी हमला दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ता की राह में रोड़ा साबित होगा. भारतीय मीडिया की भी यही राय है. यह हमला चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की औचक लाहौर यात्रा के एक हफ्ता बाद हुआ था, इसलिए इसे पुरानी घटनाओं से जोड़ते हुए पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं. बहरहाल, पठानकोट एयरबेस में तीसरे दिन भी मुठभेड़ जारी रही. सुरक्षाबलों ने उस इमारत को टैंक से उड़ा दिया, जिस में आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका थी. इस प्रयास में एक आतंकवादी का शव मिला, जबकि वहां और भी आतंकवादियों के छिपे होने का अनुमान था.

आतंकवादी हमले के पीछे की पूरी साजिश की जांच के लिए एनआईए ने 4 जनवरी को 3 मामले दर्ज कर के पुलिस अधीक्षक रैंक की अगुवाई में एक विशेष टीम का गठन किया. 5 जनवरी को देश के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने पठानकोट पहुंच कर संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया और इस बात की घोषणा की कि एयरबेस में घुसे सभी 6 आतंकियों को मार गिराया गया है. अब कौंबिंग औपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है.

6 जनवरी को चंडीमंदिर स्थित वैस्टर्न कमांड के मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल के.जी. सिंह ने बताया कि इस औपरेशन को इसलिए सफलतम कहा जा सकता है, क्योंकि इसे अंजाम देते वक्त करीब 11 हजार आम नागरिकों व 23 विदेशी नागरिकों की जिंदगी बचाने में भी सफलता मिली है. उल्लेखनीय है कि इस एयरबेस में लगभग 3 हजार परिवार रहते हैं और 4 मित्र देशों के 23 सैनिक प्रशिक्षण के लिए यहां आए हुए थे.

जांच एजेंसियां इस हमले की गहराई में जाने को पूरी तरह प्रयासरत हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरदासपुर के पुलिस अधीक्षक द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं पर विचार करने के लिए 1 जनवरी, 2016 को शाम साढ़े 7 बजे बैठक बुलाई थी, जबकि आतंकी तब तक वायु सेना परिसर के निकट पहुंच चुके थे.

जांचकर्ताओं के अनुसार, यह तो तय है कि आतंकी पाकिस्तान से ही आए थे. वायु सेना हवाईअड्डे पर थर्मल इमेजिज उपकरण में लगे कैमरे में जो तसवीरें कैद हुई हैं, उन्होंने भी जांच एजेंसियों की काफी मदद की है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी के कुछ अधिकारियों का मानना है कि पहली जनवरी को आतंकियों के पास तीनों मोबाइल फोन एक्टिव रहे. इन में एक फोन ज्वैलर राजेश वर्मा का था, जिस से पाकिस्तान में काल की गई थी. दूसरा फोन एसपी सलविंदर सिंह व तीसरा उन के रसोइए मदनगोपाल का था. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या 10 घंटे तक पठानकोट हवाईअड्डे के निकट आतंकियों को स्थानीय मदद मिली थी. एनआईए का मानना है कि मृत आतंकियों की वस्तुओं को देखने से पता चलता है कि वे बहावलपुर से संबंध रखते हैं, जोकि जैशएमोहम्मद का मुख्यालय है.

जांचकर्ताओं के लिए यह जांच का मुख्य मुद्दा है कि 1 जनवरी की सुबह पठानकोट पहुंचे आतंकी मध्यरात्रि तक वायु सेना परिसर में दाखिल होने का इंतजार करते रहे. इन 10 घंटों केदौरान वे कहां रुके, इस का पता लगाया जाना निहायत जरूरी है. इसी से यह बात सामने आ सकती है कि क्या इन आतंकियों को वहां रुकने में किसी ने मदद की थी.

आईबी (इंटेलीजेंस ब्यूरो) ने बीएसएफ व पंजाब पुलिस को 3 महीनों में 3 अलगअलग अलर्ट भेजे थे, जिन में आतंकियों की संभावित घुसपैठ का उल्लेख किया गया था. इन संदेशों में यह भी बताया गया था कि कितने आतंकी घुसपैठ करने को तैयार बैठे हैं. सब से ताजा अलर्ट में कहा गया था कि औटोमैटिक हथियारों व हैंडग्रेनेड के साथ 6 आतंकी पाकिस्तानी पंजाब के मसरूर बड़ा भाई गांव में बैठे हुए हैं तथा भारत में दाखिल हो कर तबाही मचाने की सोच रहे हैं. हालांकि इस अलर्ट में यह नहीं बताया गया था कि ये आतंकी किस दिन, किस वक्त व भारत के किस क्षेत्र में दाखिल होंगे. इतना जरूर कहा गया था कि ये आतंकी घुसपैठ के लिए उचित समय का इंतजार कर रहे हैं तथा उत्तरी पंजाब के हिस्से बमियाल से घुसपैठ कर सकते हैं.

इस से पहले अक्तूबर व नवंबर महीने में भी अलर्ट भेजे गए थे. इंटेलीजेंस अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों की घुसपैठ के सही दिन के बारे में बताना कठिन होता है. वे उचित समय की प्रतीक्षा में रहते हैं और अंतिम समय में ही एकदम से घुसपैठ करते हैं. मसरूर बड़ा भाई गांव बमियाल से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां आतंकवादी यदाकदा जमा होते रहते हैं. एजेंसियों का यह भी मानना है कि गुरदासपुर के दीनानगर पर हमला करने वाले पाक आतंकी भी भारत में दाखिल होने से पहले मसरूर बड़ा भाई गांव में रुके थे. वे बमियाल क्षेत्र के साथ लगते नाले की आड़ में भारत में घुसे थे.

इस संबंध में सीमा सुरक्षा बल का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में उन के जवान 24 घंटे अलर्ट रहते हैं. दूसरी ओर इंटेलीजेंस की तरफ से अलर्ट अकसर मिलते रहते हैं. यों मारे गए 6 आतंकियों के बाद अब एनआईए टीम ने विधिवत जांच शुरू कर दी है. जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों के लिए सब से बड़ा प्रश्न उस रूट का पता लगाना था, जिसे आतंकियों ने पठानकोट पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया था. फिलहाल इन एजेंसियों की निगाह बमियाल में पड़ने वाली उज्ज नदी पर जमी है. इस नदी के साथ ही खूनी नाला पड़ता है, जो सीधा पाकिस्तान की सीमा से मिलता है.

इस खूनी नाले के किनारे पर जसपाल सिंह की जमीन है, जिस ने जांच एजेंसियों को अपने खेतों में जूतों के अजीब तरह के निशान दिखाए थे. इन निशानों पर अंगरेजी के कुछ शब्द अंकित थे. जांच एजेंसी ने इन निशानों को आतंकवादियों से जोड़ कर देखा. यह रूट आतंकियों द्वारा अपनाया गया हो सकता था, क्योंकि ये निशान खूनी नाले के बीच में तथा भारतपाक सीमा से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर पाए गए थे. यहां पर यह बताना तर्कसंगत रहेगा कि मृतक ड्राइवर इकागर सिंह के मामा के घर की ओर भी यही रास्ता जाता था. इकागर के घर वालों ने भी बताया था कि वह घटना की रात साढ़े 9 बजे अपने मामा के घर की ओर गया था.

बहरहाल, जांच पूरी होने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है. इस आतंकवादी घटना से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा आलोचना के घेरे में आ गई है. इसी के मद्देनजर 7 जनवरी, 2016 को भारत की ओर से पाकिस्तान पर दबाव बनाते हुए स्पष्ट कर दिया गया कि पठानकोट हमले के उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों पर त्वरित और निर्णायक काररवाई के बाद ही द्विपक्षीय बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ सकता है. इस के साथ ही हमले में शामिल आतंकियों के आकाओं के रूप में इन नामों की सूची पाकिस्तान को सौंप दी गई थी—जैशएमोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, उस का भाई अब्दुल रऊफ असगर, अशफाक एवं कासिम. यह भी बताया गया है कि हमले की साजिश लाहौर के पास रची गई थी.

इस सिलसिले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उसी दिन इस सिलसिले में एक उच्चस्तरीय मीटिंग बुला कर पठानकोट आतंकी हमले पर वार्ता की. उन्होंने अपने अधिकारियों की ओर से इस बात की पुष्टि चाही कि वे भारत द्वारा सौंपे गए सबूतों पर त्वरित काररवाई करते हुए जरूरी एक्शन लेंगे. इस आतंकी हमले में आतंकवादियों की ड्रग तस्करों से गठजोड़ की भी जांच हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जनवरी को पठानकोट पहुंच कर स्थिति का जायजा लेने के साथ यहां के जवानों की पीठ भी ठोंकी. आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सुरक्षा बल की हौसलाअफजाई की. उसी दिन अमेरिका ने पाकिस्तान को चेताया कि वह पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकियों के खिलाफ त्वरित काररवाई करे.

छहों मृत आतंकियों के शवों को पोस्टमार्टम करने के बाद उन के डीएनए टेस्ट के लिए भेज कर शवों को कड़ी सुरक्षा के बीच शवगृह में रखवा दिया गया. पुलिस प्रशासन द्वारा पठानकोट में आर्मी की वर्दी की खुले में बिक्री पर सख्त रोक लगा दी गई. भारत ने इस हमले के जो सबूत पाकिस्तान को सौंपे थे, वे यूके, यूएसए, जापान, फ्रांस व दक्षिण कोरिया को भी भेजे गए हैं. इन देशों ने भी भारत को भरोसा दिलाया है कि वे पाकिस्तान पर जांच में तेजी लाने के लिए दबाव बनाएंगे. भारत की कोशिशों का असर दिखा भी.

अमेरिकी विदेश मंत्री जौन कैरी ने पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से फोन पर बात की. इस बातचीत में शरीफ ने भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान जल्द ही पठानकोट हमले का सच सामने लाएगा. लेकिन 11 जनवरी को पाकिस्तान ने भारत की ओर से हासिल सबूतों को नकार दिया. उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने पाकिस्तान को 2 फोन नंबर सौंपे थे +92-1017775253 और +92-3000597212. भारत का दावा था कि ये नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के थे, जिन पर पठानकोट हमले से जुड़े आतंकियों ने बात की थी. मगर पाकिस्तान की ओर से साफ कह दिया गया कि ये नंबर पाकिस्तान में रजिस्टर्ड नहीं हैं.

अंतत: पाकिस्तान पर अमेरिका और भारत का दबाव काम आया. पाक पीएम नवाज शरीफ ने पठानकोट के एयरबेस पर हुए हमले की जांच के लिए संयुक्त टीम बनाने के आदेश दे दिए. इस टीम में पाकिस्तान आईबी, आईएसआई, मिलिट्री इंटेलीजेंस और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. नवाज शरीफ ने दावा किया कि वह पठानकोट हमले को ले कर काफी गंभीर हैं. उन्होंने सख्त रवैया अख्तियार कर लिया है. वह इस हमले की तह तक जा कर यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता कौन है, इस संबंध में उन्होंने अपने आर्मी चीफ जनरल राहील शरीफ से भी बात की.

पाकिस्तानी खबरिया चैनल एआरवाई न्यूज ने इस बारे में अपनी एक खबर के माध्यम से कहा कि इस सिलसिले में कुछ गिरफ्तारियां हुई हैँ, लेकिन पुलिस ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि  ये गिरफ्तारियां पठानकोट हमले के सिलसिले में हुई हैं. चैनल ने समाचार प्रसारित करते हुए यह भी कहा कि इन संदिग्धों को गिरफ्तार कर के पूछताछ के लिए अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है.

11 जनवरी को दिल्ली में संपन्न 68वें आर्मी डे पर आयोजित समारोह में भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने पठानकोट एयरबेस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बोलते हुए कहा कि अगर कोई इस देश को नुकसान पहुंचा रहा है तो उस शख्स और संगठन को भी वैसा ही दर्द झेलना होगा. पठानकोट हमले को अमेरिका ने बेहद गंभीरता से लिया है. 12 जनवरी को उस ने पाकिस्तान को झटका देते हुए 8 एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री रोक दी. इसी दिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि पाक पर अविश्वास नहीं, मगर इन हालात के बीच विदेश सचिव स्तरीय बातचीत फिलहाल टाल देना ही ठीक है. 14 जनवरी, 2016 को पाकिस्तान से धमाकेदार खबर आई कि पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड और जैश के सरगना मसूद अजहर को बहावलपुर से 10 अन्य कथित आतंकियों सहित गिरफ्तार कर लिया गया है.

खबर में यह भी बताया गया कि पठानकोट हमले के संबंध में वांछित आरोपियों को पकड़ने के लिए न केवल ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है, बल्कि पाकिस्तान का विशेष जांच दल भी पठानकोट जाएगा. इस के अगले ही दिन पाक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस से इनकार करते हुए कहा कि उसे मसूद की गिरफ्तारी की कोई जानकारी नहीं है. भारतपाक विदेश सचिवों की वार्ता भी फिलहाल टल गई है. 15 जनवरी को पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के कानून मंत्री राणा सनाउल्लाह ने साफ किया कि मसूद को गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि उसे ऐहतियातन हिरासत (प्रोटेक्टिव कस्टडी) में रखा गया है.

इस पर 16 जनवरी को जयपुर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘बहुत हुआ, सहने की जो क्षमता इस देश की थी, वह खत्म हो गई है. रक्षामंत्री के तौर पर मेरी भी यह क्षमता खत्म हो गई है. अब तो अगले एक साल में दुनिया इस के नतीजे देखेगी.’  फिलहाल, जांच एजेंसियों की छानबीन तो इस ओर इशारा कर रही है कि आतंकियों की मदद करने वाले पंजाब में ही बैठे वे घर के भेदी हैं, जो पैसों के लालच में अपना ईमान तक बेचने से नहीं हिचकते. आतंकियों के मारे जाने के बाद एयरबेस से जो असलहा एवं गोलाबारूद बरामद हुआ है, उस का वजन एक क्विंटल से ज्यादा है.

एयरबेस तक आतंकियों को पहुंचाने वाले एक गाइड का सुराग भी जांच एजेंसियों को मिला है. हनीट्रैप में फंस कर अपने ही देश से गद्दारी पर उतारू सुनील व रंजीत वगैरह पहले ही संदेह के घेरे में आ चुके हैं. इन्हें फिर से कस्टडी में ले कर व्यापक पूछताछ की तैयारी चल रही है. एसपी सलविंदर सिंह व उन के साथी भी संदेह के घेरे में हैं. नैशनल इन्वैस्टीगेशन एजेंसी इन से कई बार पूछताछ कर चुकी है. इन का लाई डिटेक्टर टेस्ट भी करवाया गया है. एनआईए को इस काररवाई से महत्त्वपूर्ण सूचनाएं मिली एनआईए का दावा है कि बिना भीतर की मदद के बाहर से आए आतंकवादी इतने खतरनाक हमले की योजनाएं नहीं बना सकते.

मारे गए आतंकियों के शवों के पोस्टमार्टम कर इन के पार्ट्स डीएनए के लिए भेजे गए हैं. शवों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है. इन आतंकियों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी. इन के फिंगरप्रिंट भी संरक्षित कर लिए गए हैं. इन लाशों का क्या किया जाना है, यह गृह मंत्रालय तय करेगा. फिलहाल पठानकोट के सिविल अस्पताल के मोर्चरी विभाग में शवों को सुरक्षित रख कर ताला लगा दिया गया है और वहां कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था कर दी गई है.

एसपी सलविंदर सिंह के बारे में बताया गया है कि एनआईए की पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया है कि वह ड्रग माफिया की खेप पार करवाने के लिए उन से हीरे लिया करता था, जिन की जांच उस का ज्वैलर दोस्त राजेश वर्मा किया करता था. उस रात भी एसपी निकला तो इसी काम के लिए था, मगर उन का सामना हो गया आतंकवादियों से. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के बताए अनुसार, 40 से अधिक संवेदनशीन जगहों पर लेजर दीवारें खड़ी कर के किसी भी तरह की घुसपैठ से निजात हासिल कर ली जाएगी. Pathankot Attack

 

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