Delhi News: आरजू और नवीन ने भले ही प्यार कर के जीवन भर साथ निभाने का वादा कर लिया था, लेकिन उन की शादी में अड़चन यह थी कि वे एक ही मोहल्ले के रहने वाले थे. नवीन तो घर वालों के कहने पर मान गया, लेकिन आरजू जिद पर अड़ी थी. तब उस से छुटकारा पाने के लिए नवीन ने जो किया, उस से उसे क्या मिला.
आरजू चौहान अमूमन सुबह जल्दी उठ जाती थी, लेकिन 2 फरवरी को उस की आंख थोड़ी देर से खुली तो वह नहाधो कर कालेज जाने की तैयारी करने लगी. वह अशोक विहार स्थित लक्ष्मीबाई कालेज में बीए फाइनल ईयर में पढ़ रही थी. कालेज जाने में देर न हो जाए, आरजू ने नाश्ता तक नहीं किया. केवल चाय पी कर साढ़े 8 बजे घर से निकल गई. कालेज से वह अकसर दोपहर 2 बजे तक घर आ जाती थी. लेकिन जब कभी उसे आखिरी पीरियड अटैंड करना होता था तो घर आने में उसे 4 बज जाते थे.
लेकिन जब उस दिन वह 4 बजे तक घर नहीं लौटी तो उस की मां कविता ने उसे फोन किया कि इस समय वह कहां है और कब तक घर आएगी? लेकिन उस का फोन बंद था. कई बार फोन करने पर भी बात नहीं हो सकी तो वह परेशान हो उठीं कि पता नहीं आरजू ने फोन क्यों बंद कर दिया है.
आरजू के पिता संजीव चौहान उस समय घर पर ही थे. पत्नी को परेशान देख कर उन्होंने पूछा, ‘‘क्या बात है, क्यों परेशान हो रही हो?’’






