Domestic Violence Murder. मंटू पत्नी को प्यार तो बहुत करता था, लेकिन किसी मर्द से बातें करते देख उसे शक हो जाता था कि उस का इस मर्द से जरूर संबंध है. बस इसी शक ने उस से पत्नी का खून करवा दिया. 

घर में कदम रखते ही मंटू कुमार ने कोहराम मचा दिया था. मारे गुस्से के उस का चेहरा तमतमा रहा था. खाने का टिफिन फैंक कर वह आराधना की ओर झपटा. आराधना उस समय आईने के सामने खड़ी अपने बाल संवार रही थी.

गुस्से से लालपीले हुए मंटू ने आराधना के बालों को पकड़ कर घसीटते हुए बैड पर पटक दिया. इस के बाद गला दबाते हुए बोला, जब मैं ने मना किया था कि इस घर में अब राजू को मत आने देना तो तू ने उसे क्यों आने दिया, वह तेरा खसम लगता है क्या? मैं उसे क्यों बुलाने लगी? घायल शेरनी की तरह उठ कर आराधना चिल्लाई,  इस घर में मैं उसे लाई थी क्या? तुम्हीं तो उसे लाए थे, अपना दोस्त बना कर. जब उस के साथ शराब और चिकन उड़ाते थे, तब वह अच्छा लगता था. आखिर अब क्यों बुरा लगने लगा?

चुप बेशर्म. मंटू ने एक थप्पड़ आराधना के गाल पर मारते हुए कहा, मैं लाया था तो अब मैं ही मना कर रहा हूं. अब उसे यहां मत आने देना. न मैं उसे बुलाने जाती हूं और न रोकूंगी. अगर उस का आना इतना ही बुरा लगता है तो तुम खुद ही उसे मना कर दो कि वह यहां न आया करे. इस का मतलब तुम मेरा कहना नहीं मानोगी? कह कर मंटू ने आराधना को जोर से धक्का दिया तो वह बैड पर गिर पड़ी. इस के बाद वह उस की लातघूंसों से पिटाई करने लगा.

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