Honor Killing: लालाराम ने बेटी प्रीति की 2 शादियां कीं, लेकिन कोई न कोई खामी बता कर उस ने दोनों पतियों को छोड़ दिया. अपनी पसंद के विक्रम के साथ उस ने अपनी दुनिया बसानी चाही तो...

कानपुर के थाना शिवराजपुर पुलिस को पुलिस कंट्रोल रूम से संदेश मिला कि वाकरगंज गांव के पास गड्ढे में एक लाश पड़ी है. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी माणिकचंद्र पटेल एसआई आर.के. सिंह, सतीशचंद्र तथा कुछ सिपाहियों को साथ ले कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. लाश पानी भरे गड्ढे में पड़ी थी. माणिकचंद ने गांव वालों की मदद से लाश बाहर निकलवाई.

वह लाश 27-28 साल की महिला की थी. वह काले रंग की सलवार और गुलाबी रंग का कुर्ता पहने थी. गले में दुपट्टा लिपटा था, जिसे देख कर ही लग रहा था कि उसी दुपटटे से महिला का गला घोंटा गया है. लाश से कुछ दूरी पर एक जोड़ी लेडीज चप्पलें तथा एक रूमाल पड़ा था. पुलिस ने यह सारा सामान सुरक्षित कर लिया.

लाश और घटनास्थल का मुआयना करने के बाद माणिकचंद पटेल ने वायरलेस से इस घटना की सूचना एसपी (देहात) सुरेंद्रनाथ तिवारी तथा सीओ (बिल्हौर) रमेशचंद्र दुबे को दे दी थी.   फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और डौग स्क्वायड की टीम भी आ गई. इन लोगों ने घटना की जांच की, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला. खोजी कुत्ता लाश सूंघ कर कुछ दूर तक गया और फिर लौट आया. इस से अनुमान लगाया गया कि लाश गड्ढे में फेंकने के बाद हत्यारे किसी वाहन से गए होंगे.

काफी कोशिश के बाद भी लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी. एसपी (देहात) सुरेंद्रनाथ तिवारी और सीओ रमेशचंद्र दुबे भी घटनास्थल पर आ गए थे. रमेशचंद्र दुबे के निर्देश पर महिला सिपाही सरिता सिंह ने लाश की तलाशी ली तो उस के ब्लाउज के अंदर से एक छोटा सा पर्स निकला, जिस के अंदर एक कागज का टुकड़ा मिला. उस कागज के टुकड़े पर एक मोबाइल नंबर तथा ‘मौसाजी’ लिखा था. शायद इस नंबर से लाश की शिनाख्त हो जाए, यह सोच कर माणिकचंद्र पटेल ने उसे संभाल कर रख लिया.

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