Delhi Crime: सबइंसपेक्टर विजेंद्र वर्मा ने शादीशुदा होते हुए भी पत्रकार निकिता चौहान से इसलिए दोस्ती की, ताकि वह उस के साथ मौजमस्ती करता रहे. लेकिन यह दोस्ती उस के गले की ऐसी फांस बनी, जिस ने उस का सब कुछ तबाह कर दिया.
जनवरी का महीना आधा बीत चुका था. हलकीफुलकी बारिश हो जाने की वजह से मौसम में थोड़ी नमी आ गई थी. दिल्ली के द्वारका सेक्टर-4 स्थित डीडीए पार्क में वैसे तो रोजाना तमाम लोग आते थे, लेकिन उस दिन रविवार होने की वजह से पार्क में कुछ ज्यादा ही गहमागहमी थी. पार्क में कुछ लोग धूप सेंक रहे थे तो कुछ लोग व्यायाम कर रहे थे. साढ़े 11 बजे के करीब एक सबइंसपेक्टर एक युवती के साथ पार्क के गेट पर ईरिक्शा से उतरे और पार्क में जा कर एक बेंच पर बैठ गए. उन की तरह पार्क में और भी कई जोड़े बैठे थे. सभी अपनीअपनी बातों में मशगूल थे.
सबइंसपेक्टर और युवती को आए अभी कुछ ही देर हुई थी कि उधर से पटाखे के फूटने जैसी आवाज आई. तेज आवाज आने पर लोगों की निगाहें उधर गईं तो सभी हैरान रह गए. सबइंसपेक्टर ने अपने साथ बैठी युवती पर अपनी सर्विस रिवौल्वर से एक के बाद एक कई फायर कर के खुद को भी गोली मार ली थी.
इस घटना से लोग हैरान रह गए थे. सभी डर के मारे भागने लगे. मिनटों में पार्क खाली हो गया. पार्क के पास ही बैरिस्टर सिंह नाम का आदमी कपड़ों पर इस्तरी करता था. लोगों के इस तरह तेजी से पार्क से भाग निकलने की वजह वह समझ नहीं पाया. पार्क में पटाखों के फूटने जैसी आवाज उस ने भी सुनी थी. जिज्ञासावश वह पार्क में गया. उस ने एक बेंच के पास एक पुलिस औफिसर और एक युवती को पड़ी देखा. दोनों ही खून से लथपथ थे. दोनों को उस ने कुछ देर पहले ही पार्क में जाते देखा था.
बैरिस्टर सिंह उलटे पांव वापस लौटा और यह बात वहां फ्लैटों में रहने वालों को बताई. कुछ लोग अविलंब पार्क में पहुंचे. गोली चलने पर जो लोग पार्क से भाग गए थे, वे भी फिर से पार्क में आ गए. उन्होंने ही बताया कि सबइंसपेक्टर ने पहले युवती पर गोलियां चलाईं, इस के बाद खुद को भी गोली मार ली. इसी दौरान किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के पुलिस को इस घटना की सूचना दे दी थी. यह 17 जनवरी, 2016 की बात है.
खबर मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम की गाड़ी घटनास्थल पर पहुंच गई. चूंकि वह इलाका दक्षिणीपश्चिमी दिल्ली के थाना द्वारका (उत्तरी) के अंतर्गत आता था, इसलिए द्वारका उत्तरी थाने की पुलिस भी वहां पहुंच गई. आननफानन में पुलिस वाले सबइंसपेक्टर और युवती को पास के रौकलैंड अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने युवती को मृत घोषित कर दिया.
सबइंसपेक्टर गंभीर रूप से घायल था. उसे भी कई गोलियां लगी थीं. वह धीरेधीरे बोल रहा था. वह अपना नाम विजेंद्र वर्मा बता रहा था, जबकि उस की वर्दी पर संदीप बिश्नोई नाम की नेमप्लेट लगी थी. उस की पोस्टिंग पश्चिमी दिल्ली के रनहोला थाने में थी. नाम और नेमप्लेट की बात बाद की थी. पहली कोशिश उस की जान बचाने की थी. रौकलैंड अस्पताल के डाक्टरों ने सबइंसपेक्टर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ट्रामा सेंटर रैफर कर दिया. घटनास्थल पर एक सरकारी रिवौल्वर और मृतक युवती का पर्स पड़ा था, जिन्हें पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था.
रास्ते भर विजेंद्र वर्मा यही कहता रहा कि ‘मणे मरण दो’. साथ में बैठे पुलिस वाले उसे दिलासा दे रहे थे कि वह बच जाएगा. इसी बीच उस ने कहा कि निक्की ने उसे इस कदर परेशान कर रखा था कि उसे यह कदम उठाना पड़ा. उस की बातों से जानकारी मिली कि उस के साथ पार्क में जो युवती आई थी, उस का नाम निक्की था और वह उस की प्रेमिका थी.
एम्स के ट्रामा सेंटर पहुंचने के बाद डाक्टरों की टीम सबइंसपेक्टर विजेंद्र वर्मा के इलाज में जुट गई. उस के सीने में 3 गोलियां लगी थीं. सूचना मिलने पर दक्षिणीपश्चिमी जिले के डीसीपी आर.ए. संजीव भी ट्रामा सेंटर पहुंच गए थे. उन्होंने विजेंद्र का इलाज कर रहे डाक्टरों से बात की. डाक्टरों ने बताया कि गोलियां लगने से उस के कई अंग क्षतिग्रस्त हो गए हैं, साथ ही काफी मात्रा में खून भी बह चुका है, इसलिए हालत चिंताजनक बनी हुई है. अंतत: डाक्टरों की कोशिश नाकाम रही. शाम करीब साढ़े 4 बजे सबइंसपेक्टर विजेंद्र वर्मा ने दम तोड़ दिया.
विजेंद्र वर्मा की पोस्टिंग पश्चिमी जिले के रनहोला थाने में थी. इस से पहले वह उत्तरनगर में तैनात था. विभाग के तमाम लोग उस के और मृत युवती निक्की के प्रेमसंबंधों से वाकिफ थे. जब उन्हें दोनों की मौत की जानकारी मिली तो सभी को आश्चर्य हुआ. रात करीब साढ़े 9 बजे अस्पताल के डाक्टर ने पुलिस को विजेंद्र के कपड़े और सामान सौंपा. सामान में विजेंद्र का एक पर्स भी था. पुलिस ने जब पर्स खोला तो उस में एक सुसाइड नोट मिला. सुसाइड नोट हिंदी में लिखा था. उस में उस ने निक्की की हत्या और अपनी आत्महत्या की वजह बताई थी. पत्र पढ़ कर लग रहा था कि विजेंद्र ने यह योजना पहले ही बना कर सुसाइड नोट लिखा था.
खबर मिलने पर हरियाणा के झज्जर जिले से उस के मातापिता व अन्य लोग दिल्ली आ गए. 39 साल के एकलौते बेटे की मौत पर उन का रोरो कर बुरा हाल था. उन का कहना था कि उन का बेटा इतना कमजोर नहीं था, जो वह आत्महत्या करता. पत्रकार निकिता चौहान उर्फ निक्की ने ब्लैकमेल करकर के उसे इतना परेशान कर दिया था कि उसे यह कदम उठाना पड़ा.
घर वाले जिस युवती पर आरोप लगा रहे थे, उस की मौत पहले ही हो चुकी थी. मतलब कोई ऐसा आरोपी नहीं था, जो जीवित हो. पुलिस ने मृतका निकिता चौहान (25 वर्ष) के पर्स की तलाशी ली तो उस में एक सीडी और पेनड्राइव के अलावा उस का पहचानपत्र मिला. पता चला कि वह दक्षिणीपश्चिमी दिल्ली के सागरपुर की गली नंबर-4 निवासी शादीराम चौहान की बेटी थी. पुलिस ने शादीराम चौहान को भी उन की बेटी की मौत की खबर दे दी. बेटी की मौत पर उन्हें भी सदमा लगा.
पुलिस ने दोनों लाशों का पोस्टमार्टम करा कर लाशें उन के घर वालों को सौंप दीं. पुलिस ने इस केस की जांच की तो इस के पीछे प्रेमप्रसंग की एक हैरतभरी कहानी सामने आई. विजेंद्र वर्मा मूलरूप से हरियाणा के झज्जर जिले के गांव मातनहेल के रहने वाले रामकिशन का बेटा था. वह अपनी 5 बहनों के बीच अकेला भाई था. विजेंद्र सन 2001 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भरती हुआ था. उसी साल रेवाड़ी, हरियाणा की निशा से उस की शादी हो गई थी. विजेंद्र की शादी के बाद उस के घर वाले गांव छोड़ कर झज्जर शहर के किला मोहल्ला में आ कर रहने लगे.
उन के शहर में रहने से विजेंद्र को यह सुविधा हो गई थी कि जब भी उसे ड्यूटी से समय मिलता था, वह दिल्ली से झज्जर जा कर अपनी पत्नी और घर वालों से मिल आता था. इस तरह वह अपनी गृहस्थी और ड्यूटी में तालमेल मिला कर चल रहा था. वक्त के साथ वह एक बेटी प्रियंका और बेटे रजत का पिता भी बन गया.
विजेंद्र भी दिल्ली पुलिस में अधिकारी बनना चाहता था. इस के लिए वह पढ़ाई भी कर रहा था. ड्यूटी के सद जब भी उसे समय मिलता, यारोंदोस्तों के साथ गप्पें लड़ाने के बजाय पढ़ाई करने बैठ जाता. सन 2008 में दिल्ली पुलिस में सबइंसपेक्टरों की भरती हुई तो उस ने भी आवेदन किया. अपनी मेहनत और लगन से वह सबइंसपेक्टर बन गया.
सन 2009 में जब विजेंद्र की पोस्टिंग पश्चिमी दिल्ली के उत्तमनगर थाने में थी, तभी उस की मुलाकात निकिता चौहान उर्फ निक्की से हुई. निकिता दक्षिणीपश्चिमी दिल्ली के सागरपुर इलाके में रहती थी. उसे पत्रकार बनने का शौक था, इस के लिए उस ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया था. इस के बाद वह दिल्ली के तिलकनगर से प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक समाचारपत्र में नौकरी करने लगी थी.
निकिता खबरों के सिलसिले में उत्तमनगर थाने में भी आती रहती थी. उसी दौरान उस का परिचय सबइंसपेक्टर विजेंद्र वर्मा से हुआ. निकिता खूबसूरत और तेजतर्रार युवती थी. उस की इसी खूबी पर विजेंद्र उस से प्रभावित हो गया. दोनों ने एकदूसरे को अपने फोन नंबर दे दिए. दोनों की फोन पर अकसर बातें होने लगीं. धीरेधीरे दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई. यह दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई.
प्यार होने के बाद दोनों की मुलाकातें होने लगीं. विजेंद्र को चूंकि अच्छा वेतन मिलता था, इसलिए वह अपनी प्रेमिका पर खुले हाथों से खर्च करता था. जब निकिता को पता चला कि विजेंद्र शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है तो उस ने नाराजगी जताई. उस की नाराजगी देख कर विजेंद्र ने उसे उसी नजरिए से समझाया, तब कहीं जा कर वह शांत हुई. निकिता शांत तो हो गई, लेकिन विजेंद्र की हकीकत जान कर उस ने इस का फायदा उठाना शुरू कर दिया. वह जबतब विजेंद्र से मोटी रकम ऐंठने लगी. विजेंद्र भी बदनामी के डर से उसे मुंहमांगी रकम देता रहा.
इसी बीच निकिता की दोस्ती प्रवेश कुमार उर्फ बिट्टू से हो गई. 2011 में दोनों ने चोरीछिपे आर्यसमाज मंदिर में शादी कर ली. यह बात सबइंसपेक्टर विजेंद्र को पता नहीं थी. वह एक प्रेमी से पैसे ऐंठ रही थी तो दूसरे के साथ मौजमस्ती कर रही थी. चूंकि वह प्रवेश से ही शादी करना चाहती थी, इसलिए उस ने यह बात अपने घर वालों से बता दी थी. बेटी की खुशी देखते हुए निकिता के घर वाले तैयार हो गए तो प्रवेश के घर वालों ने भी हामी भर दी. सन 2014 में घर वालों की सहमति से हरिनगर के एक बैंक्वेट हाल में दोनों की सामाजिक रीतिरिवाज से शादी हो गई.
विजेंद्र को जब नकिता की शादी की बात पता चली तो वह नाराज हुआ. इस पर निकिता ने तर्क दिया, ‘‘तुम शादीशुदा हो तो मैं ने भी शादी कर ली. इस में हर्ज ही क्या है? हम दोनों के लिए बेहतर यही होगा कि जिस तरह पहले मिलते रहते थे, उसी तरह मिलते रहें. अगर तुम ने डिस्टर्ब किया तो मैं सब को अपने संबंधों की बात बता दूंगी.’’
उस की इस धमकी पर विजेंद्र चुप हो गया. इस के बाद दोनों अपनेअपने जीवनसाथी को धोखा दे कर मिलते रहे. विजेंद्र की पत्नी चूंकि हरियाणा स्थित उस के घर पर रहती थी, इसलिए उसे कुछ पता नहीं था. लेकिन किसी तरह निकिता के पति को यह बात पता चल गई कि उस की पत्नी दिल्ली पुलिस के एक सबइंसपेक्टर के साथ गुलछर्रे उड़ाती है. सइसे ले कर प्रवेश और निकिता के बीच विवाद शुरू हो गया. बात यहां तक पहुंच गई कि प्रवेश कुमार ने निकिता से तलाक लेने के लिए फैमिली कोर्ट में केस दायर कर दिया.
इस से निकिता को झटका तो लगा, लेकिन वह बहुत ज्यादा परेशान नहीं हुई, क्योंकि विजेंद्र से उसे हर तरह की सुखसुविधाएं मिल रही थीं. विजेंद्र भी उस के प्यार में अंधा था. किसी तरह विजेंद्र की पत्नी निशा को जानकारी मिल गई कि विजेंद्र दिल्ली की एक पत्रकार के साथ रहता है. पत्नी चाहे कितनी भी सीधी क्यों न हो, वह सब कुछ बरदाश्त कर सकती है लेकिन यह हरगिज सहन नहीं कर सकती कि उस का पति किसी दूसरी औरत के साथ रहे. लिहाजा निशा ने भी पति से इस बात पर विरोध जताया. नतीजतन उन के पारिवारिक रिश्ते में दरार आ गई. विजेंद्र पत्नी पर पुलिसिया रौब झाड़ना चाहता था. लेकिन वह यह नहीं जानता था कि घर में वर्दी का रौब नहीं चलता.
विजेंद्र डराधमका कर पत्नी को शांत करना चाहता था, लेकिन हुआ इस का उलटा. निशा खुले रूप से उस का विरोध करने लगी. उस ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से मिल कर पति की शिकायत की. इतना ही नहीं, उस ने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस भी कोर्ट में दायर कर दिया. इस से विजेंद्र तनाव में रहने लगा. एक तरफ उस की विभागीय जांच चल रही थी तो दूसरी ओर कोर्ट केस. ऐसी स्थिति में मानसिक तनाव स्वाभाविक था. तनाव की वजह से वह पूरी जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी नहीं कर पा रहा था. जांच के बाद विजेंद्र का ट्रांसफर उत्तमनगर से थाना रनहोला में कर दिया गया.
उधर विजेंद्र के पिता रामकिशन ने अपने रिश्तेदारों को बुला कर विजेंद्र से बात की. सभी ने उसे समझाया. उस ने भी सब के सामने वादा कर लिया कि अब वह निकिता से संबंध नहीं रखेगा. उस का यह आश्वासन मिलने के बाद निशा मान गई. फलस्वरूप उन दोनों में राजीनामा हो गया. इस मौखिक समझौते के बाद विजेंद्र ने निकिता से दूरियां बढ़ानी शुरू कर दीं. जब निकिता को महसूस हुआ कि विजेंद्र उस से मिलने में आनाकानी कर रहा है तो उस ने भी उसे धमकाना शुरू कर दिया. यह बात विजेंद्र के घर वालों को पता चली तो वे दिल्ली आए. उन्होंने निकिता से बात कर के उसे समझाया. इस पर निकिता 5 लाख रुपए ले कर विजेंद्र का पीछा छोड़ने को तैयार हुई.
कुछ दिनों तक निकिता विजेंद्र से नहीं मिली तो उस ने राहत की सांस ली. लेकिन उस का यह सुकून ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रहा. क्योंकि निकिता उसे सोने का अंडा देने वाली मुरगी समझती थी. उसे आसानी से कैसे छोड़ सकती थी. उस ने फिर से विजेंद्र से संपर्क करने की कोशिश की. विजेंद्र के लिए अब अपना परिवार पहले था. इसलिए उस ने निकिता को लिफ्ट देनी बंद कर दी. यह देख निकिता ने विजेंद्र को धमकी दी कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो वह उस के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करा देगी.
विजेंद्र उस की धमकी में नहीं आया तो निकिता ने अक्तूबर, 2015 में थाना उत्तमनगर में शिकायती पत्र दे कर सबइंसपेक्टर विजेंद्र वर्मा के खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की. थानाप्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो उस ने संयुक्त पुलिस आयुक्त से मुलाकात की. उस ने उन्हें बताया कि विजेंद्र वर्मा शादी का झांसा दे कर उस के साथ लिवइन में रह रहा था. लेकिन अब वह शादी करने के लिए मना कर रहा है. उस ने विजेंद्र के खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की. संयुक्त पुलिस आयुक्त ने निकिता को भरोसा दिया कि इस मामले की जांच कर के उचित काररवाई करेंगे.
विजेंद्र की एक बार फिर से विभागीय जांच शुरू हुई तो वह फिर से परेशान रहने लगा. उस ने निकिता को बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं मानी. वह अपनी शिकायत वापस लेने के एवज में उस से 10 लाख रुपए मांग रही थी. यह कोई छोटी रकम नहीं थी, जो वह तुरंत दे देता. इस बारे में विजेंद्र ने अपने घर वालों से बात की. चूंकि निकिता से पीछा छुड़ाना जरूरी था, इसलिए किसी तरह पैसों का इंतजाम कर के उन्होंने 10 लाख रुपए निकिता को दिए और उस का मुंह बंद कर दिया. बताया जाता है कि जिस अखबार में वह नौकरी करती थी, उस के मालिक के खिलाफ भी उस ने छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.
पैसे लेने के बाद भी निकिता विजेंद्र को फिर से ब्लैकमेल करने लगी. वह उस से और पैसों की डिमांड कर रही थी. उस ने धमकी दी कि यदि उस ने बात नहीं मानी तो वह कोर्ट चली जाएगी. यानी उस ने फिर से विजेंद्र को टेंशन दे दी. निकिता विजेंद्र से अब तक कई लाख रुपए ऐंठ चुकी थी. उसे लगने लगा कि निकिता किसी गिरोह के चंगुल में है. गिरोह के लोग उसे मोहरा बना कर खेल खेल रहे हैं. उस के लगातार पैसे मांगने पर विजेंद्र अधिक मानसिक दबाव में आ गया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इस भंवर से कैसे निकले.
मानसिक तनाव की वजह से वह अपने केसों की तफ्तीश भी ढंग से नहीं कर पा रहा था. काम के प्रति लगातार लापरवाही की वजह उसे अधिकारियों की डांट खानी पड़ती थी. बिना बताए वह कईकई दिनों तक ड्यूटी से गायब रहता था. घटना से पहले भी वह 2 सप्ताह के लिए गायब हो गया था. 16 जनवरी, 2016 को विजेंद्र अपनी ड्यूटी पर वापस आया. उस समय भी वह अधिक तनाव में था. इस तनाव की वजह निकिता ही थी. तनाव जब उस की बरदाश्त की सीमा से बाहर हो गया तो इस के लिए उस ने दूसरा ही रास्ता खोजा.
17 जनवरी को वह फिर थाने पहुंचा. उस ने लूटपाट से जुड़ी तफ्तीश में जाने के लिए थाने से रिवौल्वर लिया. इस के बाद वह निकिता के साथ एक ईरिक्शा से द्वारका सेक्टर-4 स्थित डीडीए पार्क पहुंचा. वहां दोनों एक बैंच पर बैठ कर बातें करने लगे. उसी दौरान उन के बीच पता नहीं ऐसी क्या बात हुई कि उस ने अपने सर्विस रिवौल्वर से निकिता को 4 गोलियां मारीं.
आटोमैटिक रिवौल्वर से उस ने खुद को भी 3 गोलियां मारीं. निकिता की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और बाद में विजेंद्र ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया. अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि जब विजेंद्र थाने से निकला था तो उस की वर्दी पर उस के नाम की ही प्लेट लगी थी. बाद में उस ने सबइंसपेक्टर संदीप बिश्नोई के नाम की नेमप्लेट क्यों लगाई. संदीप बिश्नोई भी दिल्ली पुलिस में एक सबइंसपेक्टर है और वह विजेंद्र वर्मा का दोस्त था.
विजेंद्र वर्मा तेजतर्रार पुलिस अफसर था. निकिता के प्यार में फंस कर उसे अपनी जान से तो हाथ धोना ही पड़ा, साथ ही अपने और निकिता के घर वालों को बिलखते भी छोड़ना पड़ा. उधर निकिता के पिता शादीराम का कहना है कि उन की बेटी की हत्या एक सुनियोजित योजना के तहत कराई गई है, जिस में मृतक सबइंसपेक्टर के अलावा एक अखबार का मालिक व एक अन्य शख्स शामिल था. उस ने उन सब के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की. बहरहाल पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.
कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






