Hindi Love Story: उजली ने ठंड से अकड़े पोरबंदर के राजकुंवर मेहा जेठवा को शरीर की गर्मी दे कर नया जीवन दिया था. बदले में राजकुंवर ने उसे क्या दिया...
आकाश में बिजली चमकी तो उस के उजाले से आंखों की पलकें बंद हो गईं. ऐसा लगा, जैसे पूरे पहाड़ पर आग लग गई हो. बादल इतने जोर से गरजे कि बिछौने में सो रहे बच्चे मांओं के सीने में छिपने की कोशिश करने लगे. बादल ऐसे गरज रहे थे, मानो हजार हाथी एक साथ चिंघाड़ रहे हों. हवा भी इतनी तेज थी कि मानो वह घरों की छतों को उड़ा ले जाएगी. ऐसा लग रहा था, जैसे प्रलय आने वाली है. बाकी बची कसर ओलों ने पूरी कर दी. तड़ातड़...तड़ातड़ मोटेमोटे ओले पत्थर की तरह बरसने लगे थे.
पेड़ों पर बैठे पक्षियों का साथ बिछड़ गया, खुले में बंधे पशु रंभाते हुए रस्सियां तोड़ कर भागने लगे. जिन के खूंटे और रस्सियां मजबूत थीं, वे रंभाते हुए रस्सियां तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. बर्फ से पिटते, ठंड से ठिठुरते पशुपक्षी इधरउधर छिपने की कोशिश कर रहे थे. जीवजंतु परेशान हो रहे थे. सपौष की सर्दी में यह बरसात, आंधी और ओलों की मार से ठंड चौगुनी हो गई थी. झोपडि़यों में रहने वाले चारण आग जलाए ताप रहे थे. बच्चे मांओं से चिपटे थे.
अपनी झोपड़ी में बूढ़ा अमरा चारण फटी गुदड़ी से लिपटा ठंड से बचने की कोशिश कर रहा था. लेकिन फटी गुदड़ी से कहीं ठंड जाती है. ठंड से जूझता हुआ अमरा हवा और बरसात को कोस रहा था. सर्दी की वजह से उस की पूरी देह कांप रही थी. ऐसे में भला कहीं नींद आती है. आधी रात को उस भयंकर मौसम में घोड़े के टापों की आवाज सुनाई दी तो अमरा के कान खड़े हो गए. इस समय ऐसे मौसम में घोड़े की टाप कहां से आ रही है? घोड़े की टाप और हिनहिनाने की आवाज धीरेधीरे उस की झोंपड़ी के नजदीक आती जा रही थी. अचानक उस की झोपड़ी के सामने आ कर वह आवाज ठहर गई. वह उठ कर दरवाजे पर पहुंचा तो देखा दरवाजे पर घोड़ा खड़ा था.






