Delhi Crime News: दिल्ली पुलिस पर लोग भ्रष्टाचार और न जाने कैसेकैसे आरोप लगाते हैं, लेकिन 2 महिला सिपाहियों ने जिस तरह हथियारबंद बदमाश के चंगुल से एक लड़की को छुड़ाया, उस से दिल्ली पुलिस की साख बढ़ी है.
आज महिलाओं के साथ कोई भी वारदात हो जाना आम बात हो गई है. आपराधिक तत्त्वों से महिलाएं कैसे बचें और संकट की उस घड़ी में वे क्या करें, इस बात की जानकारी कहीं और भले ही न दी जाती हो, लेकिन दिल्ली में दिल्ली पुलिस समयसमय पर इस की ट्रेनिंग के लिए कैंप लगा कर महिलाओं को ट्रेनिंग देती रहती है. दिल्ली के रैनबसेरों में भी तमाम महिलाएं रहती हैं, दिल्ली पुलिस रैनबसेरों में भी जा कर महिलाओं को जागरूक करती है.
उत्तरपश्चिमी दिल्ली के थाना आदर्शनगर की हैडकांस्टेबल जसबिनी और कांस्टेबल पूजा 28 जनवरी, 2016 को अपने रूटीन कार्यक्रम के तहत लालबाग स्थित रैनबसेरे में गई थीं. वहां की महिलाओं को जागरूकता का पाठ पढ़ा कर वे दोपहर को थाने लौट रही थीं, तभी 2 लड़के दौड़ते हुए उन के पास आए. दोनों ही बुरी तरह हांफ रहे थे. जसबिनी ने पूछा, ‘‘क्या बात है, कोई परेशानी है क्या?’’
एक लड़के ने सांसों पर काबू पाने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘मैडम, फुटपाथ पर नीली कैप लगाए जो लड़का लड़की के साथ जा रहा है, उस ने उस लड़की का अपहरण कर लिया है.’’
जसबिनी ने उस ओर देखा तो सिर पर नीली कैप लगाए एक लड़का आराम से एक लड़की के साथ चला जा रहा था. उसे देख कर कहीं से भी नहीं लग रहा था कि उस के साथ जो लड़की जा रही है, उस का अपहरण किया गया है. लड़की उस के साथ चुपचाप चली जा रही थी. यही लग रहा था कि वह अपनी मरजी से उस के साथ जा रही है.
जसबिनी ने कहा, ‘‘पागल हो क्या? दिनदहाड़े भीड़ भरी सड़क पर कोई इस तरह अपहरण कर के आराम से चलेगा. अगर उस का अपहरण हुआ होता तो वह चीखतीचिल्लाती?’’
‘‘मैडम, वह शोर इसलिए नहीं मचा रही है, क्योंकि लड़के ने उस की पसलियों से तमंचा सटा रखा है.’’ लड़के ने कहा.
उस की इस बात पर जसबिनी चौंकी. उन्होंने साथ खड़ी कांस्टेबल पूजा की ओर देखा. इस के बाद दोनों सड़क पार उस नीली कैप वाले लड़के का पीछा करने लगीं. जब दोनों उस लड़के के नजदीक पहुंचीं तो उन्होंने देखा सचमुच वह अपने साथ चल रही लड़की की कमर से तमंचे की नाल सटा चल रहा था. उस लड़के को इस बात का पता नहीं था कि दिल्ली पुलिस की 2 महिला कांस्टेबल उस का पीछा कर रही हैं. वह लापरवाही से चला जा रहा था. जसबिनी ने एकाएक फुरती से लड़के के हाथ से तमंचा छीन लिया. उस ने पलट कर देखा तो पुलिस को देख कर डर गया और तेजी से भागा. जसबिनी और पूजा ने भी उस के पीछे दौड़ लगा दी.
उस युवक ने भागते हुए ही अपनी पैंट की जेब से एक डिबिया निकाली और उस में रखी गोलियां हथेली पर रख कर मुंह में डाल लीं. इसी के साथ वह ठोकर खा कर गिर गया. तब तक जसबिनी और पूजा उस के पास पहुंच गईं. उन्होंने लड़के को पकड़ लिया. जसबिनी ने उस का मुंह खोल कर अंगुलियों से कुछ गोलियां बाहर निकाल लीं, लेकिन तब तक कुछ गोलियां उस ने निगल ली थीं, जिस से उस की आंखें मुंदने लगीं थीं.
कांस्टेबल पूजा ने मोबाइल फोन द्वारा इस बात की जानकारी थानाप्रभारी संजय कुमार को दे दी थी. चूंकि थाना लालबाग कुछ ही दूरी पर था, इसलिए थानाप्रभारी कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर कुछ ही देर में वहां पहुंच गए. तब तक वह लड़का बेहोश हो गया था और उस के साथ जो लड़की थी, वह रो रही थी. इस बीच वहां तमाम तमाशबीन इकट्ठा हो गए थे. संजय कुमार लड़के को तुरंत अपनी गाड़ी से जहांगीरपुरी स्थित बाबू जगजीवनराम मेमोरियल अस्पताल ले गए. डाक्टरों ने उस का उपचार शुरू कर दिया. डाक्टरों ने बताया कि लड़के ने सल्फास की गोलियां खाई थीं. डाक्टरों ने किसी तरह लड़के की जान बचा ली.
पुलिस ने लड़के की तलाशी ली तो उस की पैंट की जेब से एक ड्राइविंग लाइसेंस, जिंदा कारतूस और एक सुसाइड नोट मिला. ड्राइविंग लाइसेंस पर नाम सुनील लिखा था. वह लाइसेंस उसी लड़के का था. सुसाइड नोट में लड़की की हत्या करने के बाद खुद के सुसाइड करने की बात लिखी थी. सुनील कौन था, वह जिस लड़की को अपहरण कर के ले जा रहा था, वह कौन थी और उस ने उस का अपहरण क्यों किया था? सुनील के होश में आने पर पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस लड़की के अपहरण की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.
24 वर्षीय सुनील थाना आदर्शनगर के अंतर्गत आजादपुर का रहने वाला था. वह औटो चलाता था. करीब 8 साल पहले उस का पत्नी से तलाक हो गया था, जिस के बाद वह शराब पीने लगा था. वह जिस लड़की का अपहरण कर के ले जा रहा था, उस का नाम अनीता था. 22 वर्षीया अनीता अपने परिवार के साथ सुनील के पड़ोस में रहती थी. वह वजीरपुर स्थित एक फैशन डिजाइन संस्थान में प्रशिक्षण ले रही थी. आसपास रहने की वजह से सुनील और अनीता का एकदूसरे के यहां आनाजाना था. इसी वजह से अनीता सुनील को भइया और उस की पत्नी को भाभी कहती थी. सुनील भी उसे बहन जैसा स्नेह देता था. यही नहीं, रक्षाबंधन पर वह उस से राखी भी बंधवाता था.
सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. समस्या तब पैदा हुई, जब सुनील के घर में कलह होने लगी. कलह की ही वजह से उस की पत्नी उसे छोड़ कर मायके चली गई. उस ने उस के साथ रहने से साफ मना कर दिया. बाद में उन का तलाक हो गया. सुनील शराब तो पहले से ही पीता था, पत्नी से तलाक होने के बाद वह और ज्यादा शराब पीने लगा. पत्नी से तलाक के बाद वह महिला का साथ पाने के लिए तरसने लगा. उसी बीच उसे अनीता का ध्यान आया. वह उस की कोई सगी बहन तो थी नहीं, मुंहबोली थी. इसलिए बहनभाई के रिश्ते को दरकिनार कर वह उस के बारे में उलटीसीधी बातें सोचने लगा. एकतरफा प्यार करते हुए वह उसे पाने के तिकड़म भिड़ाने लगा.
एक दिन सुनील ने शर्मोहया त्याग कर अपने मन की बात अनीता से कह दी. वह उसे भाई मानती थी, इसलिए उस के मुंह से प्यार की बात सुन कर हक्कीबक्की रह गई. उस ने सुनील से कह दिया कि वह उसे भाई समझती है, इसलिए वह अपने मन से यह फालतू की बात निकाल दे. पर सुनील की समझ में उस की बात नहीं आई. वह उलटा अनीता को ही समझाने की कोशिश् करने लगा. तब हार कर अनीता ने उस की शिकायत अपने मातापिता से कर दी. उन्होंने सुनील को काफी लताड़ा.
मगर सुनील अपने मन से अनीता के अक्स को निकाल नहीं सका. वह लगातार उस से प्रेमनिवेदन करता रहा. अनीता के घर वालों को जब लगा कि सुनील इस तरह से नहीं मानेगा तो 22 जुलाई, 2015 को अनीता अपने मांबाप के साथ थाना आदर्शनगर पहुंची और सुनील की शिकायत कर दी. पुलिस ने भादंवि की धारा 354 के तहत सुनील को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. लेकिन 3 महीने बाद सुनील जमानत पर जेल से छूट गया.
जेल जाने के बाद भी सुनील के सिर से प्यार का भूत नहीं उतरा. अब वह अनीता को धमकी भी देने लगा. उस ने उस से साफसाफ कह दिया कि अगर वह उस की न हुई तो वह उसे मार कर खुद भी मर जाएगा. अनीता उसे शराबी समझती थी. इसलिए उस ने उस की धमकियों को कभी गंभीरता से नहीं लिया. 28 जनवरी, 2016 की दोपहर 1 बजे के आसपास अनीता वजीरपुर स्थित फैशन डिजाइन संस्थान से बाहर आई तो उस ने सुनील को सामने सड़क पर खड़े देखा. वह चुपचाप बसस्टाप की ओर चलने लगी. सुनील भी उस के पीछेपीछे चलने लगा. अनीता ने जब पीछे मुड़ कर देखा तो सुनील उस के पीछे आ रहा था. उस ने रुक कर गुस्से में कहा, ‘‘मेरे पीछे क्यों पड़े हो, फिर जेल जाने का इरादा है क्या?’’
‘‘मैं तुम से आखिरी बार पूछ रहा हूं कि मुझ से शादी करोगी या नहीं?’’ सुनील ने पूछा.
‘‘लगता है, तुम ऐसे नहीं मानोगे. तुम्हारी शिकायत फिर पुलिस से करनी पड़ेगी,’’ अनीता ने कहा.
इतना कह कर अनीता आगे बढ़ी थी कि सुनील ने झपट कर उसे पकड़ लिया और तमंचा लहराते हुए कहा, ‘‘तुझे मेरे साथ अभी चलना होगा. ध्यान रहे, रास्ते में शोर मचाया तो तुझे मार कर खुद को भी गोली मार लूंगा.’’
तमंचा देख कर अनीता बुरी तरह से डर गई. सुनील ने तमंचे की नाल अनीता की कमर से सटा दी. डर के मारे अनीता उस के साथसाथ चलने लगी. तमंचा किसी को दिखाई न दे, इस के लिए उस ने उस के ऊपर अनीता के गले में पड़ी चुन्नी डाल ली. वह उसे वजीरपुर स्थित झुग्गी बस्ती में ले गया. वहां उस का एक परिचित रहता था, जो उस समय वहां नहीं मिला. वहीं पर अनीता ने 2 लड़कों से इशारों ही इशारों में मदद की गुहार लगाई.
तमंचा देख कर उन लड़कों की सुनील से कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई. सुनील तमंचे की नाल अनीता की कमर पर सटा कर फिर चलने लगा. दोनों लड़के उस का पीछा करने लगे. जब वह उसे ले कर लालबाग के पास पहुंचा तो उन लड़कों की नजर 2 महिला कांस्टेबलों पर पड़ गई. वे दोनों दौड़ कर उन के पास पहुंचे और उन्हें पूरा वाकया बता दिया. हैडकांस्टेबल जसबिनी और कांस्टेबल पूजा ने साहस का परिचय दे कर सुनील के हाथ से तमंचा छीन लिया था. उन के इन अदम्य साहस ने अनीता की जान तो बचाई ही, साथ ही एक सनकी प्रेमी को जेल पहुंचा दिया.
पुलिस ने सुनील को भादंवि की धारा 364/365/307 और 25/54/27 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. जसबिनी को बहादुरी विरासत में ही मिली थी. उन के पिता भारतीय सेना में थे. पूजा के पिता सुरेंद्र कुमार भी विदेश मंत्रालय में नौकरी करते थे. डीसीपी विजय सिंह और एसीपी रविंद्र कुमार त्यागी को जब इन दोनों महिला सिपाहियों की बहादुरी की जानकारी हुई तो दोनों पुलिस अधिकारी थाना आदर्शनगर पहुंच गए. उन्होंने उन के साहसपूर्ण कार्य की सराहना की. इस के बाद तो ये बहादुर महिला सिपाही मीडिया की सुर्खियां बन गईं.
तत्कालीन पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने भी हैडकांस्टेबल जसबिनी और कांस्टेबल पूजा को अपने औफिस बुला कर उन के इस साहस के लिए उन्हें सम्मानित किया. यही नहीं, उन्होंने दोनों को आउट औफ टर्न प्रमोशन देने की भी घोषणा की. काश जसबिनी और पूजा की तरह दिल्ली पुलिस के अन्य लोग इसी तरह मुस्तैदी से काम करें तो यकीनन दिल्ली में अपराधियों के मन में पुलिस के प्रति भय पैदा हो जाएगा. Delhi Crime News
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, अनीता बदला हुआ नाम है






