Baazigar Style Revenge . पूजा ने गणेश से प्यार ही नहीं किया था, बल्कि उस की जीवनसंगिनी बनने का सपना भी देखने लगी थी. लेकिन गणेश ने तो उस से सिर्फ इसलिए प्यार किया था क्योंकि उसे अपने ताऊ की हत्या का बदला लेना था.

उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर के थाना गहमर के गांव देवल के रहने वाले रामअवध चौधरी की बहन पूजा रात 9 बजे घर में कहीं दिखाई नहीं दी तो घर वालों को चिंता हुई. गांव में उस की तलाश हुई, लेकिन उस का कहीं कुछ पता नहीं चला. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर पूजा कहां चली गई. रात गहरा गई तो गांव वालों ने कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता, जो होना होगा, सुबह ही होगा.

घर वालों ने रात आंखों में काटी.  सुबह होते ही पूरा परिवार पूजा की तलाश में निकल पड़ा. गांव वाले भी मदद कर रहे थे. आसपास के रिश्तेदारों, परिचितों से पता किया गया, लेकिन कोई भी उस के बारे में कुछ नहीं बता सका. जब पूजा के बारे में कहीं से कुछ पता नहीं चला तो किसी अनहोनी की बात सोच कर घर वाले ही नहीं, पूरा गांव परेशान हो उठा.

सुबह से दोपहर हो गई और किसी को कोई लाभ होता नहीं दिखाई दिया तो गांव वालों ने रामअवध चौधरी से पूजा की गुमशुदगी दर्ज कराने को कहा. इस के बाद गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर रामअवध चौधरी थाना गहमर पहुंच गए.

थानाप्रभारी कृष्णप्रताप सिंह को रामअवध चौधरी ने पूरी बात बताई तो उन्होंने उन से तहरीर ले कर गुमशुदगी दर्ज करा दी. इस के बाद उन्हें जरूरी काररवाई का आश्वासन दे कर घर भेज दिया. यह 3 दिसंबर, 2015 की बात थी.

गुमशुदगी के इस मामले की जांच कृष्णप्रताप सिंह ने सबइंसपेक्टर सुधीर त्रिपाठी को सौंप दी थी. उन्होंने मामले की जांच शुरू की तो उन्हें पता चला कि पूजा 2 दिसंबर की रात रहस्यमय ढंग से गायब हो गई थी. मजे की बात यह थी कि उसे किसी ने घर से बाहर जाते नहीं देखा था.

सुधीर त्रिपाठी इस मामले में कुछ कर पाते, अगले दिन यानी 4 दिसंबर, 2015 को उन्हें देवल गांव से सटे एक अरहर के खेत में पूजा की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. उन्होंने यह बात कृष्णप्रताप सिंह को बताई तो वह उन्हें और कुछ सिपहियों को साथ ले कर वहां पहुंच गए, जहां पूजा की लाश पड़ी थी. घटनास्थल पर गांव के काफी लोग जमा थे. लाश के पास ही रामअवध और उस के घर वाले रो रहे थे.

कृष्णप्रताप सिंह ने रामअवध और उन के घर वालों को चुप करा कर लाश से दूर किया और सहयोगियों के साथ अपनी काररवाई में लग गए. लाश के निरीक्षण में पता चला कि पूजा की हत्या उसी के दुपट्टे से की गई थी. दुपट्टा अभी भी उस के गले में लिपटा था. गला कसे जाने से जीभ बाहर निकल आई थी.

शरीर में रगड़ के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. इस से अंदाजा लगाया गया कि जान बचाने के लिए उस ने काफी संघर्ष किया था. लाश के पास ही पुलिस को 470 रुपए और एक वोटर आईडी कार्ड मिला, जो गांव के ही गणेश चौधरी का था. पुलिस ने दोनों चीजें संभाल कर अपने पास रख ली थीं. पुलिस ने लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद कृष्णप्रताप सिंह ने पूछताछ शुरू की तो पता चला कि रामअवध की गांव में किसी से ऐसी कोई दुश्मनी नहीं थी कि वह उन की बहन की हत्या कर देता.

घटनास्थल से उन्हें गणेश चौधरी का जो वोटर आईडी कार्ड मिला था, उन्होंने उस के बारे में पता किया. पता चला कि गणेश गांव का बहुत ही सीधासादा, अपने काम से काम रखने वाला व्यवहारकुशल लड़का था. वह न किसी के घर आताजाता था और न किसी से ज्यादा मतलब रखता था. वह किसी प्रकार का नशा आदि भी नहीं करता था. गांव में उस की गिनती अच्छे लड़कों में होती थी.  गणेश कैसा भी रहा हो, लाश के पास से उस का वोटर आईडी कार्ड मिला था, इसलिए वह शक के घेरे में आ गया था. शायद पूजा के कमरे से कोई सबूत मिल जाए, इस उम्मीद में पुलिस ने उस के कमरे की तलाशी ली. उस के कमरे से पुलिस को एक मोबाइल फोन मिला, जिस के बारे में घर वालों को बिलकुल पता नहीं था.

उस फोन का काल लौग चैक किया गया तो उस में सिर्फ एक ही नंबर से फोन आए थे और उस नंबर पर लंबीलंबी बातें हुई थीं. इस से पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि पूजा का किसी लड़के से प्रेमसंबंध चल रहा था. पुलिस ने पूजा की हत्या का मामला दर्ज करा कर मामले की जांच शुरू कर दी. पुसिल ने पूजा के कमरे में मिला मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया था. इस के बाद उस में चल रहे नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई गई. काल डिटेल्स से पता चला कि उस नंबर पर पिछले कई महीनों से उसी एक नंबर से फोन आ रहे थे और दोनों के बीच लंबीलंबी बातें होती थीं. जिस रात पूजा घर से गायब हुई थी, उस दिन शाम साढ़े 7 बजे के करीब उसी नंबर से फोन आया था और करीब 5 मिनट बात हुई थी.

पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो पता चला वह नंबर गणेश चौधरी का था. पुलिस को जैसे ही पता चला, वह नंबर गणेश चौधरी का है, उस का शक यकीन में बदल गया और 7 दिसंबर की सुबह पुलिस ने गणेश चौधरी को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. गणेश को थाने ला कर कृष्णप्रताप सिंह ने जब उस से पूछा कि उस ने पूजा की हत्या क्यों की तो इधरउधर करने के बजाय उस ने बड़ी निर्भीकता से जवाब दिया, मैं ने पूजा की हत्या नहीं की.

गणेश चौधरी ने भले ही पूजा की हत्या करने से इनकार किया था, लेकिन कृष्णप्रताप सिंह के पास उस के खिलाफ सारे सबूत थे. उन्होंने जब घटनास्थल से मिला उस का वोटर आईडी कार्ड, 470 रुपए और काल डिटेल्स उस के सामने रखी तो वह जोर से चीखा, हां, मैं ने ही पूजा की हत्या की है. अपने प्रेमजाल में फांस कर मैं ने ही उसे मारा है. उस की हत्या कर के मैं ने अपने (बड़े पिताजी) ताऊ की हत्या का बदला लिया है. मुझे न अपने किए पर कोई पछतावा है और न जेल जाने का डर है. मुझे खुशी है कि मैं ने गोपाल चौधरी से अपने ताऊजी की हत्या का बदला ले लिया है.

गणेश की बातें सुन कर सभी सन्न रह गए. सीधेसादे गणेश के मन में गोपाल चौधरी के परिवार के प्रति इतना जहर भरा था कि उस ने एक ऐसे बेगुनाह की हत्या कर दी, जिस का उस के ताऊ की हत्या से कोई मतलब नहीं था. इस के बाद गणेश ने दिल दहलाने वाली पूजा की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह कुछ इस तरह से थी :

24 वर्षीय गणेश चौधरी देवल गांव के ही रहने वाले चंद्रमा चौधरी का बेटा था. चंद्रमा चौधरी की गिनती गांव में संपन्न किसानों में होती थी. गोपाल चौधरी भी इसी गांव में रहते थे. कभी उन की गांव में तूती बोलती थी. बड़े किसान होने के साथ वह दबंग भी थे. बात 20-22 साल पहले की है. एक जमीन को ले कर चंद्रमा के बड़े भई विक्रम चौधरी और गोपाल चौधरी में ठन गई. वह जमीन विक्रम चौधरी की थी. गोपाल चौधरी उस पर कब्जा करना चाहते थे. उसी जमीन को ले कर दोनों परिवारों में लड़ाईझगड़ा शुरू हुआ तो गोपाल चौधरी के परिवार वालों ने विक्रम चौधरी की गोली मार कर हत्या कर दी थी.

गोपाल चौधरी और उस के घर वालों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ. लेकिन गांव वालों ने दुश्मनी खत्म कराने के लिए इस मामले को अपने स्तर पर निपटाने की कोशिश की. आखिर गांव वालों की कोशिश रंग लाई और दोनों परिवारों में समझौता हो गया. वक्त बड़े से बड़ा घाव भर देता है, ऐसा ही विक्रम चौधरी के हत्या के मामले में भी हुआ. विक्रम चौधरी की मौत को भी उस के परिवार वालों ने भुला दिया.

जिन दिनों विक्रम चौधरी की हत्या हुई थी, गणेश उस समय काफी छोटा था. इस के बावजूद वह अपने ताऊ की हत्या की बात को भूल नहीं पाया. शायद उस हत्या का जख्म उस के दिल में गहरे तक उतर गया था. यह ऐसा जख्म था, जो अंदर ही अंदर उसे साल रहा था. शायद इसीलिए वह बड़ा हुआ तो अपने ताऊ की हत्या का बदला लेने के बारे में सोचने लगा.

इस की वजह यह थी कि घर वालों ने उस के ताऊ की हत्या की बात को लगभग भुला दिया था. उस ने कई बार पिता चंद्रमा चौधरी से इस बारे में कहा भी, तब उन्होंने यह कह कर बात को टाल दिया कि उसे भी इस बात को भूल कर अब आगे के बारे में सोचना चाहिए. इन परिस्थितियों में उस बात को भुला देना ही ठीक है. पिता की इस बात से गणेश बेचैन हो उठा था. यही नहीं, उस ने प्रतिज्ञा ली थी कि कुछ भी हो, वह गोपाल चौधरी के परिवार के किसी आदमी को मार कर ताऊ की हत्या का बदला जरूर लेगा.

गणेश चौधरी बदला लेने के बारे में ही सोच रहा था कि एक दिन टीवी पर उस ने शाहरुख खान, शिल्पा शेट्टी और काजोल अभिनीत फिल्म ‘बाजीगर’ देखी. यह फिल्म देखने के बाद उस के मन में जो विचार आया, उस से उसे लगा कि अब वह ताऊ की हत्या का बदला आराम से ले लेगा. उस ने फिल्म में देखा था कि शाहरुख खान ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए फिल्म में दिलीप ताहिर की बेटी शिल्पा शेट्टी को अपने प्यार में फांस कर बड़ी चालाकी से उसे बिल्डिंग से नीचे फेंक कर हत्या कर दी थी.

इस के बाद गणेश ने इस फिल्म को मोबाइल में डलवा कर कई बार देखी. इस के बाद उस ने योजना बनाई कि उसे क्या करना है. उस ने गोपाल चौधरी की खूबसूरत बेटी पूजा की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया. उस ने अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखा था, इसलिए उस ने उस की दोस्ती स्वीकार कर ली. इस तरह गणेश को अपना मकसद कामयाब होता नजर आया. फिल्म बाजीगर में जिस तरह शाहरुख खान ने शिल्पा शेट्टी को टारगेट बनाया था, उसी तरह गणेश ने पूजा को टारगेट बनाया.

पूजा गणेश के इरादों से बेखबर थी. वह नहीं जानती थी कि इस दोस्ती के पीछे गणेश का क्या इरादा है? गणेश के ताऊ विक्रम चौधरी की जिन दिनों हत्या हुई थी, उन दिनों पूजा पैदा भी नहीं हुई थी. उसे अपने परिवार वालों से भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी.

पूजा और गणेश की यह दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. दोनों अकसर गांव के बाहर खेतों में मिलने लगे. गणेश की योजना का यह दूसरा चरण था, जिस में वह सफल हो गया था. उन के प्यार का यह दूसरा साल चल रहा था. पूजा गणेश के प्यार में इस कदर पागल थी कि उस के बुलाने पर वह भागी चली आती थी. इस की वजह यह थी कि पूजा के साथ गणेश ने कभी कोई गलत हरकत नहीं की थी. वह उस से इस तरह की बातें करता था, जिसे सुन कर वह काफी प्रभावित होती थी.

गणेश पूजा की हर छोटीबड़ी जरूरतें पूरी करता था. उस ने उसे एक नया मोबाइल फोन भी ला कर दे दिया था, जिस से दोनों के बीच घंटों बातें होती थीं. यह वही मोबाइल फोन था, जो पूजा के कमरे में मिला था. पूजा खुद को दुनिया की सब से खुशनसीब प्रेमियों में मानती थी. वह गणेश के साथ शादी के सपने देखने लगी थी, क्योंकि वह उसी की जाति का था. जबकि हकीकत इस से अलग थी. गणेश ने देखा कि पूजा अब उस के प्यार में अंधी हो चुकी है और अब उसे कभी भी कहीं भी बुलाया जा सकता है तो उस ने योजना के अंतिम चरण को अंजाम देने के लिए 2 दिसंबर, 2015 की शाम साढ़े 7 बजे उसे फोन किया.

पूजा कमरे में अकेली टेलीविजन देख रही थी. गणेश का नंबर देख कर वह खुश हो गई. उस ने दबी जुबान से कहा, क्या बात है, आज बड़ी जल्दी फोन कर दिया? तुम अभी क्या कर रही हो? गणेश ने पूछा. कुछ खास नहीं, टीवी देख रही थी, बताओ फोन क्यों किया? बताता हूं, कमरे में कोई है तो नहीं? कोई॒ नहीं है, बताओ॒ क्या॒ बात है? तुम थोड़ी देर के लिए खेतों की ओर आ सकती हो? क्यों, क्या बात है?  पूजा ने पूछा. थोड़ी प्यार भरी बातें करने का मन कर रहा है. लेकिन मैं इतनी देर खेतों की तरफ नहीं आ सकती. अभी देर कहां हुई है, शाम ही तो है. अंधेरा हो चुका है. तुम अंधेरे से कब से डरने लगी? तुम्हारे रहते मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता. तो फिर तुम कमरे से बाहर निकलो, बाहर मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. गणेश ने कहा. मूड तो नहीं है, लेकिन तुम कह रहे हो तो आ जाती हूं.  पूजा ने तुनक कर कहा. ठीक है, थोड़ी देर बातें कर के आ जाएंगे. तुम चलो, मैं कोई बहाना बना कर आ रही हूं.

प्रेमी के बुलाने पर पूजा मना नहीं कर सकी और मोबाइल अपने कमरे में रख कर दबे पांव गणेश से मिलने के लिए निकल पड़ी. उसे बाहर जाते घर के किसी आदमी ने नहीं देखा था. पूजा गांव के बाहर पहुंची तो गणेश उसे इंतजार करता मिल गया. दोनों खेतों की ओर बढ़ गए. ठंडी का मौसम था, लेकिन प्रेमी से मिलने की चाह में दोनों को ठंड नहीं लग रही थी. गणेश पूजा को अरहर के खेतों में ले गया. प्रेमी के बगल में बैठ कर पूजा बोली, समझ में नहीं आता कि तुम्हें रात में खेतों में आ कर बातें करने में क्या मजा मिलता है? वही जो तुम्हें मिलता है. आखिर तुम भी तो मना नहीं करती. गणेश ने कहा.

इस तरह प्यार की बातें करते काफी समय निकल गया. रात गहरा गई और पूजा को ठंड लगने लगी तो पूजा ने चलने को कहा. तभी गणेश ने पूजा का दुपट्टा ले कर उसे ओढ़ाने के बहाने गले में लपेटा और फुर्ती से कस दिया. गला कसने पर पूजा छटपटाई जरूर, लेकिन ताकतवर गणेश ने उसे छोड़ा नहीं. पूजा मर गई तो उस ने आसमान की ओर देख कर कहा, बड़े पापा, गोपाल चौधरी की बेटी को मार कर मैं ने आप की हत्या का बदला ले लिया, अब तो आप की आत्मा को शांमि मिल गई होगी.

इस के बाद गणेश ने पीछे की जेब से मोबाइल निकाला, तभी जेब में रखे 470 रुपए और वोटर आईडी कार्ड नीचे गिर गया. उस समय अंधेरा था, इसलिए इस का पता उसे नहीं चला और वह घर आ गया. बाद में इन्हीं चीजों से वह शक के घेरे में आ गया. चालाक गणेश ने बड़े ही शातिराना अंदाज में ठंडे दिमाग से पूजा की हत्या की थी, लेकिन उसे उस के किए की सजा मिलनी थी, इसलिए उस के हाथों वहां सबूत गिर गए. गणेश को निर्दोष पूजा की हत्या करने का तनिक भी अफसोस नहीं है.

पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक पुलिस ने गणेश चौधरी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था. Baazigar Style Revenge

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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