Bhopal Jail Break Case. भोपाल की अतिसुरक्षित जेल से एक गार्ड की हत्या कर के भागे 8 आतंकियों को भोपाल पुलिस ने 8 घंटों के अंदर ही एनकाउंटर में मौत के घाट उतार दिया. इसे ले कर खूब हंगामा मचा और इस की जांच के लिए जांच आयोग बना दिया गया. हो सकता है यह एनकाउंटर फरजी रहा हो, लेकिन क्या सारी संवेदनाएं और मानवीय अधिकार आतंकियों, हत्यारों के लिए ही हैं?
पिछले करीब 16 महीनों से बेटी सोनिया की शादी की तैयारियों में जुटे भोपाल सैंट्रल जेल में प्रधान आरक्षक रमाशंकर यादव की ड्यूटी जब दिवाली की रात भी लगा दी गई तो वह ज्यादा परेशान नहीं हुए. इस की वजह यह थी कि दूसरे ही दिन यानी 1 नवंबर से उन की डेढ़ महीने की छुट्टी मंजूर हो गई थी.
रमाशंकर यादव मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति थे. इसी के चलते जल्द ही भोपाल जेल और पुलिस विभाग में उन की एक अलग पहचान बन गई थी. करीब एक साल पहले उन का तबादला सारंगपुर से भोपाल हुआ था.
भोपाल आते ही उन्होंने सोच लिया था कि रहने के लिए इस से बेहतर कोई शहर नहीं हो सकता. रमाशंकर दिल के मरीज थे, इसलिए बहुत नियमकरम से रहते थे. भोपाल में हर तरह की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध थी, यह उन के लिए और भी अच्छी बात थी.
रमाशंकर ने अपनी पूरी जिंदगी जेल विभाग की नौकरी में खपा दी थी. उन की उम्र 57 साल हो चुकी थी, सेवानिवृत्ति के केवल 3 साल बचे थे. उन्होंने केवल भोपाल में ही रहने का फैसला कर लिया था, बल्कि वहीं पर अपना मकान भी बनवा लिया था. चूंकि इस नए मकान में उन की पहली दिवाली थी, इसलिए यादव परिवार ने अपने इस आशियाने को पूरे तनमन से सजाया था.






