Ghaziabad Double Murder. शादीशुदा बेनजीर ने अपने अविवाहित प्रेमी वसीम से शादी करने की भरसक कोशिश की. वसीम के इनकार करने पर उस ने उस के खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करा दी. लेकिन बेनजीर का यह बार उलटा साबित हुआ जिस से उसे और उस के जवान बेटे सलमान को जान से हाथ धोना पड़ा

बेनजीर और शबनम शास्त्री नगर स्थित एक ब्यूटी पार्लर पर काम करती थीं, लेकिन बेनजीर ने कुछ दिनों पहले यह काम बंद कर दिया था. शबनम से उस की दोस्ती पहले की तरह थी. फोन पर दोनों की बातचीत होती रहती थी. 11 जनवरी, 2014 की शाम को करीब 5 बजे शबनम ने बेनजीर को फोन कर के बेटे सलमान के साथ ब्यूटी पार्लर पर आने को कहा. बेनजीर ने उस से काफी पूछा कि क्या काम है, लेकिन शबनम ने उस से केवल इतना कहा कि एक खास काम है जिस के बारे में फोन पर बात नहीं की जा सकती.

बेनजीर की शबनम से इतनी गहरी दोस्ती थी कि वह उसे मना भी नहीं कर सकती थी. अलबत्ता, उस के जहन में यह बात जरूर घूम रही थी कि आखिर ऐसा क्या काम है जिस के बारे में उस ने फोन पर बताना ठीक नहीं समझा. बेनजीर गाजियाबाद के इस्लाम नगर में रहती थी.

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वहां से शास्त्री नगर ज्यादा दूर नहीं था, लिहाजा वह अपने जवान बेटे सलमान मलिक के साथ रिक्शे में बैठ कर शास्त्री नगर चली गई. उस का बेटा समीर मलिक घर पर रह गया था. बेनजीर ने उस से कह दिया था कि वह शास्त्री नगर में शबनम के ब्यूटी पार्लर पर जा रही है. चूंकि शबनम उस के घर आतीजाती रहती थी इसलिए समीर शबनम को जानता था.

रात के 8 बज गए, लेकिन बेनजीर और सलमान घर नहीं लौटे जबकि वे थोड़ी देर में ही घर लौट आने की बात कह कर गए थे. समीर को चिंता होने लगी. उस ने मां को फोन मिलाया ताकि पता चल सके कि उन्हें घर आने में कितनी देर और लगेगी. लेकिन मां का नहीं फोन मिला. कई बार मिलाने के बावजूद फोन स्विच्ड औफ मिला.  शबनम जिस ब्यूटी पार्लर पर काम करती थी उस के भी बंद होने का समय हो गया था. इतनी रात को भाई और मां को कहां ढूंढे, यह बात समीर की समझ में नहीं आ रही थी.

रात भर उसे नींद नहीं आई. उसे इस बात की चिंता सता रही थी कि भाई और मां आखिर कहां चले गए. सुबह होते ही वह उन्हें ढूंढने निकल गया लेकिन उन का कहीं पता नहीं लगा. 9-10 बजे वह उस ब्यूटी पार्लर पर पहुंच गया जहां शबनम काम करती थी. शबनम वहीं मिल गई. समीर ने शबनम से जब अपने भाई और मां के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि वो तो कल थोड़ी देर बाद ही यहां से चले गए थे. यहां से वो कहां गए, पता नहीं. लेकिन मुझ से यही कह कर गए थे कि घर जा रहे हैं.

समीर ने अपने संबंधियों और अन्य लोगों से भी मां और भाई के बारे में मालूमात की लेकिन कहीं से भी उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. उस का पूरा दिन मां और भाई की खोजबीन में निकल गया.

गाजियाबाद के ही रहने वाले वसीम और अहजर उर्फ अज्जू की समीर मलिक के परिवार से रंजिश चल रही थी. रहरह कर समीर के जेहन में यह विचार भी आ रहा था कि कहीं मां और भाई को गायब करने में इन लोगों का तो कोई हाथ नहीं है. रंजिश की वजह से उस की वसीम और अजहर से बात करने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी. जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो अगले दिन यानी 13 जनवरी को वह थाना कवि नगर पहुंच गया.

थानाप्रभारी पंकज पंत से मिल कर उस ने मां बेनजीर मलिक और भाई सलमान मलिक के रहस्यमय तरीके से गायब होने की बात बताई. समीर की बात थाना प्रभारी के गले नहीं उतर रही थी. क्योंकि दोनों मांबेटे कोई नादान तो थे नहीं जो रास्ता भटक जाते. समीर की माली हालत भी इतनी अच्छी नहीं थी जिस से अनुमान लगाया जाता कि उन्हें किसी ने फिरौती के लिए किडनेप कर लिया हो.

यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी कि जब ऐसा कुछ नहीं है तो दोनों मांबेटे कहां चले गए. चूंकि समीर ने अजहर, वसीम और शबनम पर उन्हें किडनैप करने का आरोप लगाया था. इसलिए उन्होंने समीर मलिक की तहरीर पर उक्त तीनों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र यादव ने इस मामले को सुलझाने के लिए थाना प्रभारी सीओ अतुल यादव के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई जिस में थाना प्रभारी पंकज पंत एसएसआई निरमल सिंह, एसआई योगेंद्र पाल सिंह, हेड कांस्टेबल लोकेंद्र, देवपाल, हरीश रावत, कांस्टेबल संदीप गहलोत, सत्यवीर गुर्जर, धर्मेंद्र कुमार, भूपेंद्र, सुनील, प्रमोद, नरेंद्र, सोनिया के अलावा एसओजी प्रभारी रतेंद्र सिंह गहलौत को शामिल किया.

यह पुलिस टीम एसपी (सिटी) मुनिराज जी के निर्देशन में मांबेटे की खोज में जुट गई. पुलिस टीम ने सब से पहले नामजद तीनों लोगों को घर पर तलाशा. इन में से अजहर और वसीम अपने घरों से नदारद मिले, लेकिन शबनम घर पर ही मिल गई. पूछताछ के लिए पुलिस उसे थाने ले आई.

शबनम से जब बेनजीर और उस के बेटे सलमान के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने इतना ही स्वीकार किया कि वे दोनों 11 जनवरी की शाम को उस के पास आए तो थे लेकिन बाद में वे कहां गए, इस की उसे कोई जानकारी नहीं है. शबनम से वसीम और अजहर के बारे में भी मालूमात की लेकिन वह उन के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दे सकी. तब पुलिस ने कुछ हिदायत दे कर उसे घर भेज दिया.

पुलिस को शबनम पर शक तो हो रहा था लेकिन उस के पास शबनम के खिलाफ कोई सुबूत नहीं था लिहाजा थानाप्रभारी पंकज पंत ने एक कांस्टेबल को शबनम की निगरानी पर लगा दिया. साथ ही उन की पुलिस टीम ने नामजद वसीम और अजहर को तलाशना शुरू कर दिया. दोनों के मोबाइल फोनों को भी इलेक्ट्रौनिक सर्विलांस पर लगा दिया गया. उन के फोन स्विच्ड औफ थे.

कई दिन बीत गए लेकिन न तो इन दोनों के बारे में पुलिस को पता लगा और न ही लापता मांबेटे की कोई खबर मिली. रास्ते में दोनों मांबेटे का कहीं रोड एक्सिडेंट तो नहीं हो गया, जानने के लिए पुलिस ने इलाके के प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में पूछताछ की. लेकिन सफलता नहीं मिली. तब पुलिस ने उन का पता लगाने के लिए अपने मुखबिरों को भी लगा दिया था.

उधर अपनी मां और भाई को ले कर समीर मलिक और उस की बहन शिरीन मलिक का रोरो कर बुरा हाल था. उन का कहीं कोई सुराग मिला या नहीं, जानने के लिए वे थाने के चक्कर लगा रहे थे. लेकिन उन्हें वहां से ऐसी कोई खबर नहीं मिल रही थी, जो उन्हें तसल्ली दे सके.

26 जनवरी को पुलिस टीम को आखिर सफलता मिल ही गई. एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने वसीम, अजहर उर्फ अज्जू और आरिफ को गाजियाबाद में संजय नगर गेट से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उन से बेनजीर मलिक और उस के बेटे सलमान मलिक के बारे में अलगअलग पूछताछ की तो वे सच बताने को मजबूर हो गए. उन्होंने स्वीकार किया कि बेनजीर और सलमान की हत्या कर के उन की लाशें यूपी में ठिकाने लगा दी गई हैं.

हत्या की बात सुन कर थानाप्रभारी भी दंग रह गए. उन्होंने पूछा, ‘‘उन की लाशें कहां हैं?’’

‘‘सर, हम ने बेनजीर की लाश संभल में और सलमान की लाश डिबाई के पास अतरौली इलाके में डाल कर जला दी थीं.’’

वसीम और अजहर के अनुसार उन दोनों की हत्या किए 2 हफ्ते बीत चुके थे. संभावना थी कि अब तक सुबूत भी नष्ट हो गए होंगे फिर भी पुलिस तीनों अभियुक्तों को उन जगहों के लिए ले कर चल पड़ी जहां उन्होंने लाशें ठिकाने लगाई थीं. सब से पहले अभियुक्त पुलिस को संभल के गवां रोड पर ले गए. जहां उन्होंने बेनजीर की लाश जलाने का दावा किया था. लेकिन उस जगह पर पुलिस को लाश से संबंधित कोई सुबूत नहीं मिला.

वह इलाका संभल के ही हयात नगर थाने में आता है. गाजियाबाद पुलिस ने हयात नगर थाने में संपर्क किया तो पता चला कि 12 जनवरी, 2014 को थाना पुलिस ने गवां रोड पर कोल्ड स्टोर के पास से एक महिला की अधजली लाश बरामद की थी. उस का गला कटा हुआ था.

लाश की शिनाख्त करने के लिए गाजियाबाद पुलिस समीर मलिक को अपने साथ ले ही गई थी. हयात नगर थाना पुलिस ने अधजली लाश के फोटो समीर को दिखाए तो उस ने उस की शिनाख्त अपनी मां बेनजीर मलिक के रूप में की.

इस के बाद पुलिस अभियुक्तों को अतरौली (अलीगढ़) में उस जगह पर ले गई जहां उन्होंने बेनजीर के जवान बेटे सलमान मलिक की लाश जलाई थी. पुलिस को वहां भी लाश से संबंधित कोई सुबूत नहीं मिला. अतरौली थाने में संपर्क करने पर पता चला कि थाना पुलिस ने डिबाई रोड पर अतरौली से आगे फाटक के नजदीक 13 जनवरी, 2014 को एक युवक की लाश बरामद की थी.

उस का गला कटा हुआ था और वह लाश भी अधजली थी. लाश के फोटो और अधजले कपड़ों से समीर वे उस की शिनाख्त अपने भाई सलमान मलिक के रूप में की.

इस से साफ हो गया था कि अभियुक्तों ने वास्तव में दोनों की हत्या कर के लाशों को ठिकाने लगाने की कोशिश की थी. मगर अब यहां एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि इन लोगों ने इतना जघन्य अपराध क्यों किया. आखिर ऐसी क्या वजह रही कि उन्हें 2-2 हत्याएं करने के लिए मजबूर होना पड़ा?

उन दोनों को कविनगर थाने ला कर एसपी (सिटी) मुनिराज जी और सीओ अतुल यादव के सामने उन से विस्तार से पूछताछ की गई तो इस दोहरे मर्डर केस की जो सनसनीखेज कहानी सामने आई वह अवैध संबंधों की पृष्ठभूमि पर रची गई थी.

गाजियाबद के इस्लाम नगर में रहने वाला वसीम अहमद घरों में पीओपी (प्लास्टर औफ पेरिस) का काम कराने का ठेकेदार था. उस के साथ इस्लाम नगर का ही रहने वाला सलमान मलिक भी काम करता था. सलमान के परिवार में उस की मां बेनजीर मलिक के अलावा छोटा भाई समीर मलिक और बहन शिरीन मलिक थे. बेनजीर ने कई साल पहले अपने पति आबिद मलिक को छोड़ दिया था.

वह पति से अलग हो कर अपने तीनों बच्चों के साथ इस्लाम नगर में रहती थी. उस के दोनों बेटे जवान थे. वह खुद भी शास्त्री नगर स्थित एक ब्यूटी पार्लर पर काम करती थी. उस की और बेटों की कमाई से घर का खर्च चल रहा था. बेनजीर भले ही पति से अलग रह रही थी लेकिन रहती बहुत बन ठन कर थी.

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बेनजीर का बड़ा बेटा सलमान वसीम अहमद के साथ काम करता ही था. इसलिए वसीम का उस के घर आनाजाना लगा रहता था. बेनजीर उस की बहुत खातिर तवज्जो करती थी. इस की एक वजह तो वसीम अविवाहित था और दूसरे उसे ठेकेदारी के काम में अच्छी कमाई हो रही थी. इसलिए अपनी बातों आदि से बेनजीर उस से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश करती रहती थी. वह उस से हंसहंस कर बातें करती और मादक मुसकान व अदाओं से उसे रिझाने की कोशिश करती.

वसीम भले ही शादीशुदा नहीं था लेकिन वह बेनजीर के इरादों को भांप गया था और फिर जब शादीशुदा लोग ऐसी महिलाओं के जाल में फंस जाते हैं तो वसीम तो अविवाहित था. भला वह खुद को कैसे रोक सकता था. यानी वह जल्दी ही बेनजीर के नजदीक पहुंच गया. दोनों की नजदीकियां उन्हें अवैध संबंधों के मुकाम तक ले गईं.

बेनजीर से अवैध संबंध बन जाने के बाद वसीम उस के यहां अकसर जाने लगा. बेनजीर भी उस के साथ घूमनेफिरने लगी. वसीम भी उस पर और उस के परिवार पर खूब पैसे खर्च करने लगा. अब तक बेनजीर की हसरतें कुलाचें मारने लगीं थीं. वह उस के साथ निकाह करने के ख्वाब देखने लगी. लेकिन वसीम ने उस से साफ कह दिया कि वह अपने घरवालों की मरजी के बिना शादी नहीं कर सकता.

उस समय बेनजीर ने भी उस पर ज्यादा दबाव बनाना उचित नहीं समझा. उस ने सोचा कि कहीं ऐसा न हो कि ज्यादा दबाव बनाने पर वसीम उस से संबंध ही खत्म कर ले. इसलिए उस ने शादी की बात को ज्यादा तूल नहीं दिया.

उन दोनों के अवैध संबंध पहले की तरह बने रहे. इसी बीच वसीम का किसी और लड़की के साथ निकाह हो गया. जब यह बात बेनजीर को पता चली तो उस ने वसीम से नाराजगी जाहिर की. उस की शादी हो जाने के बाद बेनजीर को लगने लगा था कि अब वसीम उस से दूर हो जाएगा. इसलिए उस ने उस के ऊपर शादी के लिए फिर से दबाव बनाना शुरू कर दिया.

जब वसीम ने उस से कहा कि उस ने किसी और से शादी कर ली है तो बेनजीर ने तर्क दिया कि इस्लाम में मर्द को एक से अधिक शादी करने का हक है. इस पर वसीम ने जवाब दिया कि वह ऐसा नहीं कर सकता. बेहतर यही है कि दोनों के बीच जो कुछ था उसे भूल जाएं और अपनीअपनी जिम्मेदारियों की तरफ ध्यान दें.

लेकिन बेनजीर इस के लिए तैयार नहीं हुई. उस ने वसीम को चेतावनी दी कि अगर उस ने उस के साथ निकाह नहीं किया तो वह थाने में उस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा देगी. वसीम ने इसे उस की गीदड़ भभकी समझा और उस से संबंध खत्म कर लिए.

बेनजीर जिद्दी स्वभाव की महिला थी. उस ने तय कर लिया कि वह वसीम को सबक सिखा कर ही रहेगी. इसी के चलते उस ने गाजियाबाद कोतवाली में वसीम के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करा दिया. जिस से वसीम को जेल जाना पड़ा. यह करीब  2 साल पहले की बात है.  उसे बेनजीर से इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वह उस के साथ ऐसा भी कर बैठेगी. कोशिश करने पर कुछ दिनों बाद वसीम की जमानत हो गई. वसीम के अनुसार बात यहीं तक सीमित होती तो भी ठीक थी, बेनजीर ने मोहल्ले में उस की बदनामी के अलावा उस के रिश्तेदारों तक को बेइज्जत करना शुरू कर दिया. इस बात से वह बहुत परेशान हो गया था.

कोई रास्ता न देख वसीम ने इस्लाम नगर वाला मकान बेच कर गाजियाबाद के ही संजय नगर में मकान बना लिया. वसीम का फुफेरा बहनोई शाने आलम भी इस्लाम नगर में ही रहता था. बेनजीर को इस की जानकारी थी. एक दिन बेनजीर और उस के बेटे सलमान ने शान-ए-आलम की न केवल पिटाई की बल्कि उस की कार में भी तोड़फोड़ की. शान-ए-आलम ने उन के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी.

वसीम को अपने बहनोई की बेइज्जती बुरी लगी. वह बेनजीर और उस के बेटों की ज्यादतियों से आजिज आ चुका था. वह उन्हें सबक सिखाने के उपाय खोजने लगा.

इस्लाम नगर में ही वसीम का एक दोस्त अजहर उर्फ अज्जू रहता था. वहीं की रहने वाली शबनम नाम की एक युवती से उस के प्रेम संबंध थे. शबनम शास्त्री नगर स्थिति उसी ब्यूटी पार्लर पर काम करती थी जिस पर पहले बेनजीर करती थी. उन दोनों में अच्छी दोस्ती थी. लेकिन बेनजीर को अजहर पसंद नहीं था. वह शबनम से भी उस से दूर रहने के लिए कहती रहती थी.

अजहर और शबनम एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे इसलिए बेनजीर की बातों से उन के संबंधों पर कोई फर्क नहीं पड़ा. अलबत्ता इस बात को ले कर अजहर बेनजीर से रंजिश जरूर रखने लगा. वसीम ने अजहर से बात कर के बेनजीर को सबक सिखाने के लिए कहा. चूंकि बेनजीर से दोनों की दुश्मनी थी इसलिए दोनों ने ही उसे और उस के बेटे सलमान को ठिकाने लगाने की ठान ली.

वसीम का एक खलेरा भाई था आरिफ, जो उत्तर प्रदेश के चंदौसी शहर का रहने वाला था. वसीम ने आरिफ, शाने आलम और शबनम को भी इस योजना में शामिल कर लिया. योजना बनाने के बाद शबनम और अजहर ने गाजियाबाद में ही महेंद्र इन्क्लेव में किराए पर कमरा ले लिया.

योजनानुसार 11 जनवरी, 2014 को शाम करीब 5 बजे शबनम ने फोन कर के बेनजीर और उस के बेटे सलमान को ब्यूटी पार्लर बुलाया. चूंकि बेनजीर उस पर आंख मूंद कर विश्वास करती थी, इसलिए वह बड़े बेटे सलमान के साथ शास्त्री नगर स्थित ब्यूटी पार्लर पर पहुंच गई. वहां से किसी बहाने से शबनम उसे महेंद्र इन्क्लेव में स्थित अपने कमरे पर ले गई. कमरे पर पहुंच कर उस ने मांबेटे दोनों के लिए चाय बनाई. चाय में उस ने नशीली गोलियां मिला दीं. योजनानुसार उसी दौरान अजहर भी कमरे पर पहुंच गया.

चाय पीने के बाद बेनजीर और सलमान की आंखें मुंदने लगीं तो अजहर ने वसीम को फोन कर दिया. वसीम को इस काम के लिए एक कार की जरूरत थी. वह संजय नगर में रहने वाले दोस्त वकार से उस की टाटा सूमो कार ले आया. वकार प्रौपर्टी डीलर था.

अजहर का फोन आते ही वसीम शाने आलम, खलेरे भाई आरिफ, आरिक (इस्लाम नगर), साथ में काम करने वाले फुरकान के साथ महेंद्र इन्क्लेव पहुंच गया. तब तक बेनजीर और सलमान पर नशीली गोलियों का असर हो चुका था. अजहर, फुरकान, आरिफ, आरिक  और शबनम ने उन दोनों को दबोच लिया. फिर वसीम और शाने आलम ने छुरों से बेनजीर और सलमान की गला काट कर हत्या कर दी.

इस से कमरे में फर्श पर खून ही खून फैल गया. इस के बाद इन लोगों ने दोनों की लाशों को अलगअलग कंबल और बेडशीट में गठरी की तरह बांध लिया. बेनजीर का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ कर के वसीम ने अपने पास रख लिया था.

लाशों की दोनों गठरियों को कमरे में ही रखने के बाद वह लोग गाड़ी ले कर नया गाजियाबाद रेलवे स्टेशन की तरफ चले गए और स्टेशन के सामने नाले के किनारे की झाडि़यों में बेनजीर का मोबाइल और हत्या में प्रयुक्त छुरों को वहां छिपा दिया.

इस के बाद उन्होंने शबनम को वहीं उतार दिया. वसीम अपने घर चला गया. वहां उस ने खून सने कपड़े उतार कर एक थैली में रख लिए. दूसरे कपड़े पहन कर वह फिर महेंद्र इंक्लेव में अजहर के कमरे पर पहुंचे. जहां दोनों मर्डर किए थे. चूंकि कमरे में खून ही खून फैला था. इसलिए उन्होंने फर्श का खून अच्छी तरह से साफ कर दिया.

कमरे की सफाई करने के बाद उन्होंने लाशों की दोनों गठरियां टाटा सुमो कार में रख लीं और संभल की तरफ चल दिए. संभल में वसीम की ससुराल थी. वहां आनेजाने की वजह से संभल इलाके से वह परिचित था इसलिए लाश ठिकाने लगाने के लिए उसे उधर का इलाका उचित लगा.

रास्ते में मसूरी नहर में उस ने खून सने कपड़े फेंक दिए. इस के बाद वे लोग अंधेरे में ही संभल पहुंच गए. वहां गवां रोड पर कोल्ड स्टोर के पास सुनसान जगह देख कर बेनजीर की लाश वाली गठरी रख कर उस पर अपने साथ लाया हुआ 5 लीटर डीजल डाल कर आग लगा दी और वहां से निकल गए.

चूंकि सभी लोग पूरी रात के जागे हुए थे, इसलिए वसीम उन्हें अपनी ससुराल ले गया. दिन में खापी कर उन्होंने वहां आराम किया. अंधेरा होने पर वह सलमान की लाश ठिकाने लगाने के लिए अलीगढ़ की तरफ निकल गए.

डिबाई के आगे अतरौली रोड पर रेलवे फाटक के पास सुनसान जगह देख कर उन्होंने सलमान की लाश वाली गठरी उतार कर उस पर भी साथ लाया हुआ 5 लीटर डीजल डाल कर आग लगा दी. दोनों लाशें ठिकाने लगा कर वे सब गाजियाबाद लौट आए. वसीम ने गाड़ी धुलवा कर दोस्त को दे दी. वसीम ने अपना मोबाइल फोन स्विच्ड औफ कर रखा था. इसके बाद वे सभी इधरउधर छिपते घूमते रहे. पुलिस उन्हें सरगर्मी से तलाश कर ही रही थी. इसी बीच मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने वसीम, अजहर और आरिफ को संजय नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया.

उधर बेनजीर के छोटे बेटे समीर मलिक का कहना है कि वसीम उस की मां और भाई पर बलात्कार का मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव डाल रहा था. जब उस की यह कोशिश नाकाम हो गई तो उस ने साजिशन दोनों की हत्या कर दी.

तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने शबनम और शाने आलम को भी उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छुरियां और लाश ठिकाने लगाने में प्रयोग की गई सुमो कार भी बरामद कर ली गई.

पुलिस ने सभी अभियुक्तों को अपहरण कर के हत्या करने और लाशें ठिकाने लगाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया. जहां से उन्हें डासना जेल भेज दिया गया. पुलिस फुरकान और आरिक को तलाश रही है.

इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

–  2014 में प्रकाशित

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