Sabarmati River Murder. मिनेश सोलंकी और कोमल ने अपने फेमिली वालों की मरजी के खिलाफ जा कर लव मैरिज की थी. उन की घरगृहस्थी हंसीखुशी से चल रही थी. शादी के कुछ दिनों बाद ही जून 2017 में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान कोमल रहस्यमय तरीके से गायब हो गई. मिनेश ने थाने में पत्नी की गुमशुदगी भी दर्ज कराई, लेकिन उस का कोई सुराग तक नहीं लग सका. 9 साल बाद पुलिस ने कोमल की गुमशुदगी का मामला खोल ही दिया, वह भी एक हत्या के रूप में. आखिर किस ने और क्यों की थी कोमल की हत्या? और 9 साल तक कैसे छिपा रहा यह गहरा राज?

26 जून, 2017 को अहमदाबाद शहर ने भगवान जगन्नाथ की 140वीं रथयात्रा खूब धूमधाम से मनाई थी. यह रथयात्रा बरसात के समय निकलती है, इसलिए उस दिन अकसर बरसात हो जाती है. उस रात भी हुई बारिश ने शहर को खूब भिगोया था. रात भर बादल बरसते रहे थे, जिस से सुबह साबरमती नदी का पानी सामान्य दिनों से कुछ अधिक उफान पर था.

अगले दिन सुबह का समय था. साबरमती रिवरफ्रंट पर फायर ब्रिगेड की मोटरबोट हमेशा की तरह गश्त कर रही थी. नदी में आत्महत्या करने वालों या किसी भी आपात स्थिति में फंसे व्यक्ति को तुरंत बचाने के लिए फायर ब्रिगेड की मोटरबोट गश्त करती रहती है.

बोट पर तैनात जवान महेश की निगाह अचानक नदी के बीचोबीच तैर रही किसी चीज पर पड़ी. उस ने आंखें सिकोड़ कर देखा. फिर उस ने साथियों से कहा, ”मोटरबोट उधर ले चलो. लगता है कोई आदमी पानी में डूब रहा है.’’

मोटरबोट चला रहे जवान ने इंजन की रफ्तार बढ़ा दी. कुछ ही क्षणों में बोट उस स्थान पर पहुंच गई. जवानों ने पास जा कर देखा तो उन सब के चेहरे गंभीर हो गए. क्योंकि वह किसी युवती की लाश थी. 20 वर्षीय एक युवती की लाश पानी में औंधे मुंह तैर रही थी. उस के बाल बिखरे हुए थे और चेहरा फूल चुका था.

महेश ने तुरंत वायरलेस से कंट्रोलरूम को फोन किया कि साबरमती रिवरफ्रंट (वेस्ट) क्षेत्र में एक अज्ञात युवती की लाश मिली है. तत्काल पुलिस भेजिए.

कुछ ही मिनटों में रिवरफ्रंट वेस्ट पुलिस स्टेशन की जीप घटनास्थल पर पहुंच गई. पुलिस इंसपेक्टर ने लाश का ध्यान से निरीक्षण किया. उस के बाद सहयोगियों से बोले, ”पहले लाश की फोटोग्राफी कराओ, उस के बाद पंचनामा करा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाओ.’’

फोटोग्राफर ने अलगअलग कोणों से लाश की तसवीरें लीं. इस के बाद लाश को सावधानी से बाहर निकाला गया. इंसपेक्टर ने एक बार फिर युवती का चेहरा गौर से देखा. फिर बोले, ”शिनाख्त के लिए इस के पास से कोई सामान मिला है?’’

एक सिपाही ने उस की तलाशी ले कर कहा, ”नहीं साहब, इस के पास ऐसी कोई चीज नहीं है, जिस से इस की शिनाख्त हो सके.’’

इंसपेक्टर ने गहरी सांस ले कर कहा, ”लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो, साथ ही आसपास के सभी थानों में लाश मिलने की सूचना दे दो, शायद किसी थाने में किसी लड़की की गुमशुदगी दर्ज हो.’’

कई दिनों तक थाना रिवरफ्रंट (वेस्ट) की पुलिस मृतका की शिनाख्त की कोशिश करती रही, अखबारों में सूचना दी, आसपास के थानों से संपर्क किया गया, गुमशुदा लोगों के रिकार्ड खंगाले गए, लेकिन उस की शिनाख्त करने कोई नहीं आया.

7 दिन बीत गए. सरकारी नियम के अनुसार जब किसी लावारिस लाश का कोई वारिस सामने नहीं आता तो उस का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है. 7 दिन बीत जाने के बाद पुलिस ने उस अज्ञात युवती की लाश का भी अंतिम संस्कार करा दिया. पुलिस ने उस की फाइल पर अंतिम टिप्पणी लिख दी, ”अज्ञात युवती, संभवत: नदी में डूबने से मर गई थी.’’ और इसी के साथ फाइल बंद कर दी गई.

यह मामला धीरेधीरे पुलिस की हजारों फाइलों के नीचे दब गया. लोग भूल गए. पुलिस भी भूल गई.

लेकिन कहते हैं कि अपराध को कितना भी गहरा दफना दिया जाए, एक न एक दिन वह खुद अपनी कब्र तोड़ कर बाहर निकल आता है.

ठीक 9 साल बाद जून, 2026 की एक सुबह अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के औफिस में बैठे एसआई आर.सी. शर्मा किसी पुराने केस की फाइल देख रहे थे, तभी उन की केबिन का दरवाजा धीरे से खुला.

उन्होंने सिर उठा कर देखा तो दरवाजे पर एक परिचित मुखबिर खड़ा था. उस के चेहरे पर चमक थी. इसलिए शर्मा समझ गए कि यह कोई महत्त्वपूर्ण सूचना लाया है. उन्होंने पूछा, ”क्या बात है?’’

मुखबिर ने केबिन का दरवाजा बंद किया, इधरउधर देखा और फिर धीमी आवाज में बोला, ”साहब, मैं एक बहुत बड़ी खबर ले कर आया हूं.’’ ”बोलो, क्या खबर है?’’

”9 साल पहले जो एक युवती की लाश साबरमती नदी में मिली थी.’’ यह सुन कर शर्मा की भौंहें तन गईं. उन्होंने पूछा, ”हां, तब?’’

मुखबिर ने गहरी सांस ले कर कहा, ”साहब, वह डूब कर नहीं मरी थी, उस की हत्या हुई थी.’’ कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया.

एसआई शर्मा अपनी कुरसी पर थोड़ा आगे झुक आए, ”पूरी बात शुरू से बताओ.’’

मुखबिर ने पूरी बात बतानी शुरू की. उस के बाद जो कहानी सामने आई, उस ने 9 साल पुरानी बंद हो चुकी एक फाइल को फिर से खोल दिया.

पूरी बात सुन कर एसआई आर.सी. शर्मा अपनी कुरसी पर सीधे बैठ गए. उन्होंने सामने बैठे मुखबिर की आंखों में गौर से देखा. उस की घबराहट बता रही थी कि उस ने जो सूचना दी थी, वह कोई साधारण सूचना नहीं थी.

”देखो,’’ एसआई शर्मा ने गंभीर स्वर में कहा, ”अगर यह खबर झूठी निकली तो तुम्हारे लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी. इसलिए जो भी कहना, सोचसमझ कर कहना.’’

मुखबिर ने बिना झिझके जवाब दिया, ”साहब, मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं. 9 साल पहले कालूपुर में रहने वाले मिनेश सोलंकी ने अपनी पत्नी कोमल की नदी में डुबो कर हत्या की थी. उसने उसे साबरमती नदी में उठा कर फेंक दिया था. उस के बाद खुद ही थाने जा कर पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवा दी थी.’’

शर्मा ने भौंहें सिकोड़ कर पूछा, ”तुम्हें यह सब कैसे पता चला?’’

”साहब, इतना मत पूछिए. बस, इतना समझ लीजिए कि खबर पक्की है. मिनेश दूसरी शादी कर चुका था. दूसरी पत्नी से उस के बच्चे भी हैं. अब वह पत्नी और बच्चों के साथ हाथीजण में रहता है. उसे लगता है कि उस का अपराध हमेशा के लिए दफन हो गया है.’’

कुछ क्षण कमरे में सन्नाटा छाया रहा. मुखबिर अपनी बात कह कर चला गया, लेकिन उस के जाने के बाद भी उस के शब्द शर्मा के कानों में गूंजते रहे, ”वह डूबी नहीं थी, बल्कि उस की डुबो कर हत्या की गई थी.’’

शर्मा सीधे अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इंसपेक्टर श्री जेबलिया के कमरे में पहुंचे. जेबलिया ने उन की ओर सवालिया नजरों से देखा तो वह बोले, ”सर, एक अहम सूचना मिली है.’’

इस के बाद इंसपेक्टर जेबलिया ने पूरी बात ध्यान से सुनी. सालों के अनुभव ने उन्हें सिखाया था कि हर मुखबिर की बात पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए, लेकिन किसी सूचना को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने कुछ पल सोच कर कहा, ”शर्मा, पहले इस सूचना के बारे में पता करो कि इस में कितनी सच्चाई है. अगर बात सही निकलती है तो समझ लीजिए कि मामला बहुत बड़ा है.’’ ”जी, सर.’’

उसी दिन क्राइम ब्रांच की एक टीम बना कर उसे इस काम पर लगा दिया गया. सब से पहले थाना कालूपुर से पुराने रिकौर्ड निकलवाए गए. धूल से अटी अलमारी से 9 साल पुरानी फाइल निकाली गई. फाइल के पहले पन्ने पर ही लिखा था, शिकायतकर्ता- मिनेश सोलंकी. विषय- पत्नी कोमल के लापता होने की सूचना.

शर्मा ने पूरी रिपोर्ट ध्यान से पढ़ी. उस में लिखा था कि कोमल घर से निकली तो वापस नहीं लौटी. रिपोर्ट पढ़ कर उन्होंने धीरे से कहा, ”अगर मुखबिर सही है तो यह शिकायत सिर्फ पुलिस को गुमराह करने के लिए लिखवाई गई थी.’’

अब पुलिस ने कोमल के मायके का पता लगाया. कोमल के पेरेंट्स और उस की बहन आज भी उसी इलाके में रहते थे, जहां पहले रहते थे. क्राइम ब्रांच के अधिकारी उन के घर पहुंचे. दरवाजा एक बूढ़े व्यक्ति ने खोला. पुलिस ने पूछा, ”क्या आप कोमल के पापा हैं?’’ ”जी, लेकिन आप लोग कौन हैं?’’

”हम क्राइम ब्रांच से हैं. हमें आप से कुछ जरूरी बात करनी है.’’

क्राइम ब्रांच का नाम सुन कर उस बूढ़े व्यक्ति के चेहरे का रंग उड़ गया. उन्हें लगा कि कहीं बेटी के बारे में कोई नई जानकारी तो नहीं मिली. पुलिस उन्हें अपने साथ क्राइम ब्रांच के औफिस ले आई.

उधर दूसरी टीम थाना रिवरफ्रंट (ईस्ट) और रिवरफ्रंट (वेस्ट) के रिकौर्ड खंगाल रही थी. घंटों की तलाश के बाद उन्हें साल 2017 में साबरमती नदी से मिली एक अज्ञात युवती की फाइल मिल गई. उस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी थी और सब से महत्त्वपूर्ण थे, उस युवती के फोटो. फाइल तुरंत क्राइम ब्रांच के औफिस पहुंचा दी गई.

एसआई शर्मा ने फोटो मेज पर रखे. कोमल के पापा को सामने कुरसी पर बैठाया गया. शर्मा ने कहा, ”इन तसवीरों को ध्यान से देखिए.’’

कोमल के पापा ने कांपते हाथों से पहली तसवीर उठाई. कुछ पल उसे ताकते रहे. फिर अचानक उन का शरीर कांप उठा. तसवीर उन के हाथ से छूट कर मेज पर गिर गई और उन की आंखों से आंसू बहने लगे. उन्होंने धीमे से कहा, ”यह मेरी बेटी कोमल है.’’

कमरे में बैठे सभी पुलिसकर्मी एकदूसरे का चेहरा देखने लगे. कोमल के पापा फूटफूट कर रोने लगे. उन्होंने कहा, ”हमें तो बताया गया था कि वह कहीं चली गई है. हम 9 साल से इस का इंतजार कर रहे हैं. हमें क्या पता कि हमारी बच्ची को उसी साल मार दिया गया था.’’

9 साल से जिन आंखों में बेटी के जिंदा होने की उम्मीद बाकी थी, वह एक तसवीर ने हमेशा के लिए छीन ली. अब पुलिस के सामने तसवीर साफ थी. जिस युवती का अंतिम संस्कार लावारिस समझ कर कर दिया गया था, वह कोई और नहीं, कोमल थी.

अगर कोमल की मौत दुर्घटना नहीं थी तो सब से बड़ा संदेह उसी व्यक्ति पर जाता था, जिस ने उस की गुमशुदगी की सूचना लिखवाई थी. वह था कोमल का पति मिनेश सोलंकी.

इंसपेक्टर जेबलिया ने आदेश दिया कि अब मिनेश को भनक न लगे, इस तरह उस की निगरानी करो. उस की हर गतिविधि पर नजर रखो. जल्दबाजी नहीं करनी है. पहले सबूत मजबूत करो. उस के बाद ही आगे की काररवाई करो.

अगले कई दिनों तक पुलिस सादे कपड़ों में मिनेश का पीछा करती रही. वह रोज की तरह काम पर जाता, परिवार के साथ हंसताबोलता, बाजार आताजाता. उस के चेहरे पर कहीं भी अपराधबोध का कोई निशान नहीं दिखाई देता था.

उसे क्या पता था कि 9 साल पहले साबरमती की लहरों में दफन किया गया उस का अपराध अब सतह पर आ चुका है. एक सुबह पुलिस को मौका मिल गया. मिनेश को बिना किसी शोरशराबे के हिरासत में ले कर क्राइम ब्रांच के औफिस लाया गया.

पूछताछ कक्ष का दरवाजा बंद किया गया. एसआई शर्मा ने उस के सामने कुरसी पर बैठ कर बिना किसी भूमिका के पहला सवाल किया, ”मिनेश, तुम्हारी पहली पत्नी कोमल कहां है?’’

पहली पत्नी और कोमल, ये 2 शब्द सुन कर मिनेश का चेहरा पीला पड़ गया. उस के माथे पर पसीने की बूंदें चमक उठीं. पूछताछ कक्ष में गहरा सन्नाटा छाया रहा. क्योंकि मिनेश ने कोई जवाब नहीं दिया.

सामने कुरसी पर बैठा वह बारबार अपने होंठों पर जीभ फेर रहा था. उस के माथे पर पसीने की महीन बूंदें चमक रही थीं.

एसआई आर.सी. शर्मा और इंसपेक्टर जेबलिया उस की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे. शर्मा ने दोबारा वही सवाल किया, लेकिन इस बार आवाज कड़क कर के, ”मिनेश, तुम्हारी पहली पत्नी कोमल कहां है?’’

मिनेश ने नजरें झुका लीं. कुछ पल बाद बोला, ”साहब, मुझे नहीं पता. वह तो मुझे छोड़ कर कहीं चली गई थी.’’

शर्मा ने बिना किसी प्रतिक्रिया के सामने रखी फाइल खोल कर कहा, ”यह गुमशुदगी तुम ने लिखवाई थी?’’ ”जी, मैं ने ही लिखवाई थी.’’

”क्यों?’’ ”क्योंकि वह बिना बताए घर छोड़ कर चली गई थी.’’

शर्मा मेज पर एक पुरानी तसवीर रख कर बोले, ”पहचानते हो इसे?’’

तसवीर देखते ही मिनेश के चेहरे का रंग उड़ गया. वह समझ गया कि पुलिस खाली हाथ नहीं आई है. फिर भी उस ने हिम्मत जुटा कर कहा, ”साहब यह तो…’’  उस की आवाज लडख़ड़ा गई.

इंसपेक्टर जेबलिया ने सख्त स्वर में कहा, ”अभी भी झूठ बोलोगे? 9 साल तक तुम ने सब को धोखा दिया, लेकिन अब नहीं दे सकते. हमारे पास तुम्हारी पत्नी की पहचान है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट है और भी कई तथ्य हैं. सच बोलोगे तो ठीक रहेगा.’’

करीब 10 मिनट तक सवालों की बौछार होती रही. आखिरकार मिनेश की हिम्मत जवाब दे गई. उस ने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया. फिर कुछ क्षण बाद धीमी आवाज में बोला, ”हां साहब, मैं ने ही कोमल को नदी में डुबो कर मार डाला था.’’ एसआई शर्मा ने शांत स्वर में पूछा, ”क्यों?’’

मिनेश बोला, ”शादी के बाद वह छोटीछोटी बातों पर झगड़ा करती थी. हर समय शक करती थी. मैं उस से बहुत परेशान हो गया था. मुझे लगा कि इस से छुटकारा पाने का यही एक रास्ता बचा है.’’

उस के बाद उस ने पूरी कहानी सुनानी शुरू की. कालूपुर की तंग गलियों में रहने वाला मिनेश पेशे से दरजी था. उसी इलाके की पंचभाई की पोल में कोमल अपनी फेमिली के साथ रहती थी. कभी कोमल को कोई कपड़ा सिलवाना होता तो उसी की दुकान पर जाती थी.

एक ही मोहल्ला होने की वजह से अकसर दोनों की मुलाकातें हो जाती थीं. धीरेधीरे बातचीत बढ़ी. बातचीत दोस्ती में बदली और फिर यह दोस्ती कब प्यार बदल गई, दोनों को खुद भी पता नहीं चला.

मोहल्ले का ही एक युवक भावेश दोनों का कौमन फ्रेंड था. कई बार तीनों साथ बैठते, बातें करते और भविष्य के सपने बुनते. एक शाम कोमल ने मुसकरा कर कहा, ”मिनेश, अगर हमारे घर वाले शादी के लिए तैयार नहीं हुए तो?’’

मिनेश ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ”तो भी मैं तुम्हारा साथ और हाथ, दोनों कभी नहीं छोड़ूंगा.’’

कोमल ने भी दृढ़ स्वर में कहा, ”मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकती.’’

दोनों ने अपनेअपने घरों में अपने प्रेम की बात बताई. लेकिन जैसा उन्हें डर था, वही हुआ. दोनों ही परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुए. मिनेश के घर वालों ने साफ कह दिया कि यह शादी कभी नहीं हो सकती.

उधर कोमल के मातापिता ने भी मना कर दिया. लेकिन प्रेम में डूबे दोनों युवाओं ने समाज और परिवार की परवाह नहीं की. कुछ दिनों बाद दोनों घर छोड़ कर चले गए और विवाह कर के अपनी अलग दुनिया बसा ली.

शुरुआत के कुछ दिन बहुत अच्छे रहे. दोनों को लगा कि अब जिंदगी खुशियों से भर जाएगी. लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद रिश्ते में दरारें पडऩे लगीं. छोटीछोटी बातें बड़े झगड़ों का कारण बनने लगीं. कभी खर्चों को ले कर विवाद होता, तो कभी घर के काम को ले कर, तो कभी कोमल मिनेश पर शक करने लगती. एक दिन झगड़े के बाद कोमल ने गुस्से में कहा, ”तुम पहले जैसे नहीं रहे.’’

मिनेश ने भी तैश में जवाब दिया, ”और तुम हर वक्त लडऩे के अलावा और भी कुछ करती हो?’’

धीरेधीरे घर का माहौल तनाव से भर गया. जिस प्रेम के लिए दोनों ने अपना घरपरिवार छोड़ दिया था, वही प्रेम अब रोजरोज की किचकिच बन गया था.

मिनेश अपनी परेशानियां अकसर अपने दोस्त भावेश को बताता. भावेश हर बार उसे समझाता, ”देखो, शादी के बाद झगड़े तो होते ही रहते हैं. बैठ कर बात कर लो, सब ठीक हो जाएगा.’’

लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए. हत्या से 2 दिन पहले भी दोनों के बीच जोरदार झगड़ा हुआ. उस दिन गुस्से में मिनेश ने मन ही मन एक भयानक फैसला कर लिया. हालांकि उस ने यह बात किसी से नहीं कही. बाद में उस ने भावेश से इतना जरूर कहा, ”अब इस झगड़े का हमेशा के लिए अंत करना है.’’

भावेश ने समझा कि शायद वह समझौते की बात कर रहा है. उस ने कहा, ”चलो, किसी दिन तीनों बैठ कर बात करेंगे.’’

फिर तय हुआ कि रथयात्रा वाले दिन शाम को तीनों मिलेंगे और झगड़े का समाधान निकालेंगे. लेकिन भावेश नहीं जानता था कि जिस बैठक को वह समझौते की कोशिश समझ रहा है, उसी दिन मिनेश अपने मन में एक ऐसा फैसला कर चुका था, जिस से एक प्रेम कहानी का अंत हमेशा के लिए होने वाला था.

25 जून, 2017 के दिन अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा निकलने वाली थी. पूरा शहर धार्मिक उत्साह में डूबा हुआ था. सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी और जगहजगह पुलिस का कड़ा बंदोबस्त किया गया था.

मिनेश ने सुबह से ही सामान्य व्यवहार किया. उस ने कोमल से कहा कि शाम को दोनों घूमने चलेंगे. कोमल खुश हो गई. उसे लगा कि शायद पिछले कुछ दिनों के तनाव के बाद पति का व्यवहार बदल गया है. उसे क्या पता था कि जिस घूमने की बात पर वह इतना खुश हो रही है, वही उस की जिंदगी का आखिरी सफर बनने वाला है.

दिन भर दोनों शहर के अलगअलग स्थानों पर घूमते रहे. बीचबीच में सामान्य बातचीत भी होती रही. बाहर से देखने वाले किसी भी व्यक्ति को यह नहीं लग रहा था कि पति के मन में पत्नी की हत्या का इरादा पल रहा है.

रात लगभग 9 बजे दोनों दधीचि ब्रिज के नीचे स्थित ईस्ट रिवरफ्रंट पर पहुंचे. पहले से तय योजना के अनुसार उन्होंने अपने दोस्त भावेश को भी वहीं बुला लिया था.

उस समय रिवरफ्रंट पर लोगों की आवाजाही बहुत कम हो गई थी. वेस्ट रिवरफ्रंट की तुलना में ईस्ट रिवरफ्रंट पर वैसे भी कम लोग आते थे.

तीनों एक जगह बैठ गए. बातचीत का विषय वही था, जो पिछले कई महीनों से उन के जीवन का हिस्सा बन चुका था, पतिपत्नी के बीच लगातार होने वाले झगड़े.

भावेश ने दोनों को समझाने की कोशिश की. उस ने एकएक कर के उन की शिकायतें सुनीं और समझाया कि छोटीछोटी बातों को इतना बड़ा रूप नहीं देना चाहिए. काफी देर तक बातचीत चलती रही. कुछ समय बाद उसे लगा कि दोनों का गुस्सा शांत हो गया है और अब मामला संभल सकता है.

पतिपत्नी को अकेले में बात करने का मौका देने के लिए भावेश कुछ दूरी पर चला गया. उसे विश्वास था कि अब दोनों आपस में बैठ कर अपने मतभेद दूर कर लेंगे.

रात धीरेधीरे गहराती जा रही थी. घड़ी लगभग 11 बजा रही थी. आसपास सन्नाटा था. दूरदूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था.

इसी दौरान अचानक नदी की ओर से किसी भारी चीज के पानी में गिरने की तेज आवाज आई.

भावेश ने तुरंत पीछे मुड़ कर देखा. जहां कुछ क्षण पहले मिनेश और कोमल खड़े थे, वहां अब केवल मिनेश दिखाई दे रहा था. कोमल नजर नहीं आ रही थी. उसी समय नदी के बीच से एक चीख सुनाई दी, ”बचाओ… बचाओ…’’

भावेश दौड़ कर रेलिंग तक पहुंचा. उस ने नीचे देखा तो कोमल नदी में हाथपांव मार रही थी. वह तेजी से डूब रही थी और बचाने की गुहार लगा रही थी. भावेश तुरंत समझ गया कि यह कोई हादसा नहीं है. उस की नजर मिनेश पर गई. वह घबराया जरूर था, लेकिन नदी में कूद कर पत्नी को बचाने का कोई प्रयास नहीं कर रहा था.

इसी बीच मिनेश सोलंकी भावेश के पास आया और उसे सख्त चेतावनी दी कि अगर उस ने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो उस का भी यही हाल होगा. उस ने यह भी कहा कि यदि मामला पुलिस तक पहुंचा तो दोनों फंस जाएंगे.

भावेश बुरी तरह डर गया. सामने उस की फ्रेंड नदी में डूब रही थी, लेकिन धमकी और भय ने उस के साहस को तोड़ दिया. वह कुछ भी नहीं कर सका. कुछ ही देर बाद कोमल की आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई और वह साबरमती की गहराइयों में समा गई.

दोनों वहां से चले गए. उस रात भावेश सो नहीं सका. बारबार कोमल का डूबता चेहरा उस की आंखों के सामने आ रहा था, लेकिन मिनेश की धमकी उस के मन पर इतनी भारी थी कि उस ने किसी से कुछ नहीं कहा.

उधर मिनेश अपने बनाए हुए अगले चरण की तैयारी में लग चुका था. अगली सुबह वह कालूपुर पुलिस स्टेशन पहुंचा और पत्नी के लापता होने की शिकायत दर्ज करा दी. उस ने पुलिस के सामने चिंता और दुख का ऐसा नाटक किया कि किसी को उस पर शक नहीं हुआ. वह बारबार यही कहता रहा कि उस की पत्नी कहीं चली गई है और वह उसे हर जगह तलाश चुका है.

पुलिस ने भी गुमशुदगी का मामला दर्ज कर अपनी तरफ से तलाश शुरू की, लेकिन कोमल कभी मिलने वाली नहीं थी. उसी दिन बाद में उस की लाश साबरमती नदी से मिली, जिसे पहचान न होने के कारण लावारिस मान कर कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और 7 दिनों बाद उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

इधर मिनेश निश्चिंत हो चुका था. उसे लगा कि उस का अपराध हमेशा के लिए साबरमती में डूब गया. कुछ समय बाद उस ने दूसरी शादी कर ली. शादी के बाद वह कालूपुर छोड़ कर हाथीजण में रहने लगा और सामान्य जीवन जीने लगा.

लेकिन अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, उस के निशान पूरी तरह मिटते नहीं. 9 साल बाद एक मुखबिर की सूचना ने उस दबी हुई फाइल को फिर से खुलवा दिया और पुलिस सीधे मिनेश तक पहुंच गई.

अब पुलिस की नजर उस व्यक्ति पर गई, जिस का नाम पूछताछ के दौरान सामने आया था. वह था भावेश. भावेश को क्राइम ब्रांच के औफिस बुलाया गया. 9 साल पुरानी घटना का नाम सुनते ही उस के चेहरे का रंग बदल गया. वह समझ गया कि जिस राज को वह इतने वर्षों से अपने भीतर दबाए बैठा था, अब उसे छिपाना संभव नहीं रहेगा.

शुरुआत में उस ने टालने की कोशिश की, लेकिन जब पुलिस ने उसे पूरी जांच की जानकारी दी और बताया कि मिनेश से पूछताछ हो चुकी है, तब उस का डर धीरेधीरे कम होने लगा.

भावेश ने बताया कि वह उस रात रिवरफ्रंट पर मौजूद था. तीनों झगड़े का समाधान करने के लिए मिले थे. बातचीत के बाद वह कुछ दूरी पर चला गया था. तभी पानी में गिरने की आवाज आई. उस ने पीछे मुड़ कर देखा तो कोमल नदी में डूब रही थी. वह उसे बचाने के लिए पुकार रही थी, लेकिन वह घबरा गया.

उसी समय मिनेश ने उसे धमकी दी कि यदि उस ने किसी को कुछ बताया तो उस का भी वही हाल होगा. इस धमकी के कारण उस ने वर्षों तक चुप्पी साधे रखी.

भावेश का बयान पुलिस के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण साबित हुआ. एक ओर मिनेश का स्वीकारोक्ति वाला बयान था तो वहीं दूसरी ओर प्रत्यक्षदर्शी गवाह. इस के साथ ही गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट और कोमल की पहचान ने मामले को और मजबूत बना दिया.

पुलिस ने मिनेश सोलंकी के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी काररवाई शुरू कर दी. क्राइम ब्रांच ने पूरी फाइल और मिनेश को थाना वेस्ट रिवरफ्रंट को सौंप दिया है. अब आगे की काररवाई वही करेगा. Sabarmati River Murder

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