Missing Girl Case. एक गैस एजेंसी के मैनेजर विक्रम ने शादीशुदा होते हुए भी अपने ही चपरासी की 16 वर्षीया बेटी अन्नू को अपने जाल में फांस कर कोर्टमैरिज कर ली. बाद में अन्नू को उस की हकीकत पता चली. अन्नू एक तरह से उस के गले की फांस बन गई. इस फांस को निकालने के लिए उस ने ऐसी साजिश रची कि...
आनंद कुलकर्णी ने जीआरपी मुरादाबाद के पुलिस अधीक्षक का चार्ज संभालते ही पुराने बंद पड़े मुकदमों की फाइलें देखीं.
उन्हीं फाइलों में उन्हें एक फाइल ऐसी मिली, जो पिछले 2, ढाई सालों से बंद थी. वह मामला सहारनपुर रेलवे स्टेशन का था.
मामला यह था कि 10 जुलाई, 2007 को सहारनपुर के गांव संभल के रहने वाले ओमपाल अपनी पत्नी बबली और बेटी अन्नू के साथ हरिद्वार घूमने जा रहा था. सभी लोग सहारनपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-6 पर ट्रेन के आने का इंतजार कर रहे थे. वहीं से ओमपाल की 16 साल की बेटी अचानक गायब हो गई थी.
ओमपाल ने बेटी को सभी प्लेटफार्मों पर खोजा, जब वह नहीं मिली तो रेलवे स्टेशन पर स्थित जीआरपी थाने में बेटी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. इस मामले की जांच हेड कांस्टेबल सुनील कुमार को सौंपी गई थी.
कुछ दिनों जांच करने के बाद भी हेड कांस्टेबल सुनील कुमार को अन्नू के बारे में कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी थी.
पुलिस अधीक्षक आनंद कुलकर्णी ने अन्नू की गुमशुदगी की जांच दोबारा कराने का फैसला लिया. उन के निर्देश पर अन्नू की गुमशुदगी को 11 दिसंबर, 2013 को अपहरण में बदल दिया गया. अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर, इस की विवेचना तेजतर्रार सबइंसपेक्टर कंचन कटियार को सौंप दी गई.






