Dowry Murder Case. मानेंद्र सिंह ने श्वेता से शादी सिर्फ दहेज के लिए की थी. जबकि वह प्यार अपनी भाभी की बहन स्मृति सिंह से करता था. शादी के बाद स्मृति सिंह को पाने और श्वेता से पिंड छुड़ाने के लिए उस के परिवार ने श्वेता के साथ जो किया, उसी की सजा के रूप में आज पूरा परिवार खंडवा की जेल में है, जबकि परिवार के सभी लोग सरकारी नौकरियों में अच्छे पदों पर थे.  

आखिर 30 जून, 2014, सोमवार को वह दिन आ ही गया, जिस का इंतजार राघवेंद्र सिंह 5 सालों से करते आ रहे थे. यह दिन उन के लिए एक बड़ी सौगात ले कर आ रहा था. क्योंकि इस

दिन उन की उस निर्दोष बेटी को इंसाफ मिलने वाला था, जिस ने कुछ लालची लोगों की वजह से मजबूर हो कर मौत को गले लगा लिया था.

बेटी की मौत वाले दिन से ले कर उस दिन तक का एकएक दिन उन्होंने ही नहीं, परिवार के एकएक सदस्य ने कांटों पर बिताया था. हर दिन का एक सूरज नई उम्मीद के साथ उगता था तो डूबता था निराशा के साथ. बेटी की असमय और दर्दनाक मौत के दुख ने पूरे परिवार को एक पल के लिए चैन नहीं लेने दिया था. लेकिन उन की मेहनत रंग लाई था और फैसले का दिन आ गया था.

फैसले का दिन होने की वजह से खंडवा की जिला एवं सत्र न्यायालय में जहां राघवेंद्र सिंह तो मौजूद थे ही, दूसरे पक्ष यानी उन की बेटी श्वेता की ससुराल के भी वे सभी लोग मौजूद थे, जो इस मुकदमें में आरोपी थे. उन के कुछ सगेसंबंधी भी आए थे.

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