Social Crime Story. भारत में नोट छापने की टकसाल नासिक, मैसूर और देवास 3 जगहों पर हैं. लेकिन नोट छापने की छोटीछोटी मशीनें हर शहर के तमाम चौराहों पर लगी हैं, यह अलग बात है कि इन का तरीका भी अलग है और मालिक भी.
कुदरतउल्लाह ऐसा आदमी था, जिसे कहीं भी पहचाना जा सकता था. लंबे कद और दुबलेपतले शरीर वाले कुदरतउल्लाह की आंखें छोटीछोटी थीं और गालों की हड्डियां उभरी हुईं. उन उभरी हड्डियों के बीच में एक काला मस्सा था, जो किसी तालाब के टापू की तरह उभरा था, लेकिन माथा काफी ऊंचा था. उस की गरदन काफी छोटी, जो लंबे कद पर बड़ी विचित्र लगती थी.
चपटी नाक के नीचे घनी मूछों की वजह से उस का चेहरा आम चेहरों से अलग लगता था. वह हुलिया भी ऐसा बनाए रहता था कि दूर से पहचान में आ जाता था. कुल मिला कर उस का डीलडौल ऐसा था कि उस से मिलने आने वालों को उस के बारे में किसी से पूछने की जरूरत नहीं पड़ती थी. निसार चौधरी भी बिना किसी से कुछ पूछे उस के पास जा पहुंचे थे. कुदरतउल्लाह ने उन्हें नीचे से ऊपर तक देखते हुए पूछा, ‘‘आप की तारीफ?’’
‘‘मुझे निसार चौधरी कहते हैं.’’ निसार ने बिना इजाजत लिए सामने रखी कुरसी खींच कर बैठते हुए कहा, ‘‘आप के बारे में मुझे सब पता है. फरजंद अली ने मुझे सब बता दिया था.’’
‘‘मैं भी आप का ही इंतजार कर रहा था.’’ कुदरतउल्लाह ने अपने पतले होंठों पर मुसकराहट सजाने की नाकाम कोशिश करते हुए कहा, ‘‘फरजंद अली ने मुझे भी आप के बारे में सब बता दिया था.’’






