Uttar Pradesh Crime. शक का पौधा हमेशा जहर भरे फल देता है. यह फल खाना तो दूर की बात रही, अगर कोई इस पौधे की छाया में भी आता है तो उस शख्स की जीवन की गाड़ी डगमगा जाती है. इलियास के दिमाग में भी शक का ऐसा बीज उपजा कि उस ने न केवल बीवी नसीमा और 3 बच्चों का कत्ल किया, बल्कि अपनी जिंदगी भी बरबाद कर ली.
सुबह के करीब 7 बजे का वक्त था. परेशान सा इलियास घर के बरामदे में टहल रहा था. कभी वह दरवाजे पर जा कर बाहर झांकता, तो कभी गली में चक्कर लगा कर घर में लौट जाता. पड़ोस में रहने वाले लियाकत ने इलियास को परेशान देख कर पूछ लिया, ‘‘खैरियत तो हैं इलियास मियां, कुछ परेशान दिख रहे हो?’’
इलियास ने पहले उसे गहरी नजरों से देखा, फिर जवाब दिया, ‘‘हां, परेशानी की ही बात है.’’
‘‘क्या हुआ मियां, जरा हमें भी तो बताओ?’’ ‘‘तुम्हारी भाभी का कुछ अतापता नहीं है.’’
‘‘मतलब?’’ ‘‘कल वह दवा लेने दिल्ली गई थी, लेकिन अभी तक आई नहीं है. परेशानी यह है कि उस के साथ तीनों बच्चे भी हैं.’’
‘‘मोबाइल तो होगा उन के पास?’’ लियाकत ने जिज्ञासावश पूछा तो इलियास चिंता जाहिर करते हुए बोला, ‘‘हां है, लेकिन नंबर मिलामिला कर थक गया हूं. बराबर बंद आ रहा है. खुदा खैर करे, किसी परेशानी में न फंस गई हो वह.’’
‘‘ऐसा क्यों सोचते हो इलियास भाई, आ जाएंगी.’’ लेकिन लियाकत के समझाने पर भी इलियास की परेशानी रत्ती भर कम नहीं हुई. इलियास की जगह कोई और भी होता तो ऐसे हालातों में वह भी इसी तरह परेशान होता.






