Canada: विदेश में रह रहे गुरजिंदर ने अगर भारतीय सभ्यता से इतर वेस्टर्न कल्चर अपना कर अपनी प्रेमिका मेपल को उसी नजरिए से देखा होता तो आज मेपल जिंदा होती और उसे जेल में उम्रकैद भी न काटनी पड़ती. लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया और...
रोज की तरह 28 सितंबर, 2011 को भी मेपल बटालिया सुबह यूनिवर्सिटी जाने के लिए तैयार हुई तो बड़ी बहन रोजलीन ने कहा, ‘‘आज मैं ने कार अच्छे से साफ कर दी है, कई दिनों से साफ नहीं हुई थी न. तू मेरा एमपी-3 प्लेयर भी ले जा. म्यूजिक सुनते हुए ड्राइविंग में बड़ा मजा आता है.’’
‘‘ठीक है दीदी, लेकिन मुझे यूनिवर्सिटी जल्दी पहुंचना है. क्लास से पहली स्टडी भी करनी है. मुझे म्यूजिक का ज्यादा शौक है नहीं, सिर्फ खाली समय में खुद को हल्का महसूस करने के लिए सुन लेती हूं.’’ मेपल ने कहा.
‘‘चल ठीक है, अब देर मत कर.’’ रोजलीन ने कहा.
मेपल किताबें और पर्स ले कर कार में बैठी और यूनिवर्सिटी चली गई. वह कनाडा के सुर्रे की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में हेल्थ साइंस ग्रैजुएशन की प्रथम वर्ष की छात्रा थी. मेपल ही नहीं, उस का पूरा परिवार कनाडा का नागरिक था. लेकिन वे मूलरूप से भारत के रहने वाले थे. मेपल भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में पैदा हुई थी. उस के परिवार में पति हरकीरत उर्फ हैरी बटालिया, मां सरबजीत, 2 बड़ी बहनें रोजलीन उर्फ रोजी और सिमरन थीं.
मुंबई में रहने के दौरान हरकीरत ड्राइवर की नौकरी कर के किसी तरह परिवार को पाल रहे थे. आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. मेपल 3 महीने की थी, तभी हरकीरत के किसी दोस्त ने उस से कहा कि यहां रह कर उस की आर्थिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होने वाला है. उस की 3 बेटियां हैं, उन्हें पढ़ानेलिखाने और शादी करने में ही उस की जिंदगी खप जाएगी. फिर भी वह पैसों के अभाव में न बेटियों को अच्छी शिक्षा दिला पाएगा और न अच्छे घरों में उन की शादियां कर पाएगा.






