Delhi Murder Case. रेस्तरां वाली मुलाकात के बाद मुसकान ने अपने प्रेमी आकिब से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था. इतना ही नहीं, उस ने आकिब का फोन नंबर ब्लौक कर दिया था. अब वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रही थी, लेकिन आकिब को उस का यह कदम इतना बुरा लगा कि...

मुसकान औटो से उतरी, औटो वाले को पर्स से निकाल कर किराया दिया और फिर अनमने भाव से सामने नजर आ रहे रेस्तरां की तरफ बढ़ गई. यह रेस्तरां उत्तम नगर में स्थित था.

21 बसंत देख चुकी मुसकान बेहद शोख और चंचल थी. उसे कुदरत ने जैसे फुरसत में गढ़ा था. एकएक अंग सांचे में ढला प्रतीत होता था. गोल चेहरा, तीखी नाक, पतले संतरे की फांक जैसे होंठ, नशीली आंखें और गठा हुआ शरीर, जो जवानी के उफान पर था.

मुसकान खूबसूरत थी, इसलिए जवानी की दहलीज पर आते ही उस का झुकाव मौडलिंग की ओर हो गया था. वह छोटेमोटे ऐड करती थी. उस को खुद पर यकीन था कि एक दिन वह रुपहले परदे पर भी नजर आएगी, जहां शोहरत और दौलत दोनों ही कलाकार की झोली में होते हैं.

वह डीयू की छात्रा थी. स्नातक की पढ़ाई कर रही थी. 18 से 21 वर्ष की उम्र बहुत नाजुक होती है, यहां आ कर मन में हसरतें उमडऩे लगती हैं, दिल सीने से फिसलने को बेताब रहता है. इसी उम्र में आ कर युवा वर्ग को प्यार का रोग लग जाता है.

मुसकान का भी यही हाल था. उस के भी कदम बहक गए थे. उसे भी किसी से प्यार हो गया था, लेकिन जितनी तेजी से उस पर प्यार का रंग चढ़ा था, उतनी ही तेजी से वह रंग फीका भी पडऩे लगा था. इस फीके पड़ते प्यार का रंग रेस्तरां में नजर आने वाला था, जिस की ओर मुसकान के कदम धीरेधीरे बढ़ रहे थे. उस के दिल में अजीब सी हलचल थी. चेहरे के भाव मन में उठ रहे तरहतरह के खयालों के कारण रहरह कर बदल रहे थे. उस के पैर रेस्तरां तक आतेआते बहुत भारी हो गए थे.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
₹ 399₹ 299
सब्सक्राइब करें

डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
₹ 1239₹ 799
सब्सक्राइब करें

बुकलेट की सुपर डील!

(डिजिटल + 12 प्रिंट मैगजीन + बुकलेट!)
₹ 1514₹ 999
सब्सक्राइब करें
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...