Family Crime Story. प्रेमिका की बेवफाई से दुखी हो कर हरिकिशन ने आत्महत्या कर ली थी तो पति के इस तरह बीच में ही साथ छोड़ देने से दुखी मीना ने भी जहर खा कर आत्महत्या कर ली.
पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा महानगर कानपुर के थाना कर्नलगंज पुलिस को सूचना मिली कि आर्यनगर स्थित ‘परशुराम वाटिका’ में एक युवक ने गोली मार कर आत्महत्या कर ली है. चूंकि सूचना कंट्रोल रूम द्वारा प्रसारित की गई थी, इसलिए इस घटना की जानकारी थाना पुलिस को ही नहीं, पुलिस अधिकारियों को भी हो गई थी. यह 29 मई, 2014 के शाम 6 बजे की बात थी.
पुलिस कंट्रोलरूम द्वारा मिली सूचना के आधार पर थाना कर्नलगंज के थानाप्रभारी अनिल कुमार यादव तो परशुराम वाटिका पहुंचे ही, एसपी (पश्चिम) गौरव सिंह और सीओ पी.के. चावला भी पहुंच गए थे. युवक की लाश वाटिका की एक बैंच के पास जमीन पर पड़ी थी. उस के दाहिने हाथ में वह पिस्तौल अब भी फंसी थी, जिस से उस ने खुद को गोली मारी थी. सिर के दाहिनी ओर जमीन पर खून ही खून फैला था.
घटना और मृतक की जानकारी के लिए पुलिस ने वहां टहलने वालों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया, ‘‘मृतक इसी बैंच पर बैठा एक लड़की से बातें कर रहा था. अचानक दोनों के बीच न जाने क्या बात हुई कि युवक ने इसी पिस्तौल से खुद के सिर में गोली मार ली. गोली लगने के बाद यह युवक जैसे ही जमीन पर गिरा, इस के पास बैठी लड़की कुछ दूर पर बैठे एक लड़के के साथ भाग गई.’’
लोगों के इस बयान से पुलिस को लगा कि मामला प्रेमप्रसंग में आत्महत्या का है. पुलिस ने मृतक की शिनाख्त के लिए उस के कपड़ों की तलाशी ली तो उस की जेब से कुछ कागजातों के साथ पिस्तौल का लाइसेंस भी मिला. उसी लाइसेंस से उस की शिनाख्त हो गई. मृतक कानपुर के चकेरी के काजीखेड़ा लालबंगला का रहने वाला हरिकिशन था.
मृतक का मोबाइल फोन भी लाश के पास ही पड़ा था. उसी फोन से उस के घर वालों को आत्महत्या की सूचना दे दी गई थी. आत्महत्या करने वाला ठीकठाक घर का लग रहा था, इसलिए पुलिस ने जांच के लिए फोरैंसिक टीम को बुला लिया था.
हरिकिशन की मौत की सूचना पा कर भी उस के घर वाले आ गए थे. पति की लाश देख कर मीना उस से लिपट गई. वह मृत पति के हाथ को पकड़ कर अपने गालों पर तमाचे मारमार कर कहने लगी, ‘‘आप कुछ भी करें, चाहे जहां जाएं, जब मन हो, तब घर पर आएं, मैं आप से कुछ नहीं कहूंगी. बस आप हमें छोड़ कर मत जाइए.’’
पल भर बाद उस ने मृत पति के चेहरे को एक टक निहारते हुए कहा, ‘‘आप बोलते क्यों नहीं, कुछ तो बोलो. आप नहीं रहेंगे तो हम जी कर क्या करेंगे? हमारे मासूम बच्चों की परवरिश कौन करेगा?’’
इतना कहतेकहते मीना अचेत हो गई. उस के अचेत होते ही वहां रो रहे घर वाले कहीं से पानी ले आए और उस के चेहरे पर छींटे मार कर होश में ले आए. होश में आते ही उस ने कहा, ‘‘मेरे पति का पिस्तौल मुझे दे दो, उसी पिस्तौल की गोली से मैं भी मरूंगी.’’
मीना का इतना कहना था कि लाश के पास खड़ी पुलिस ने लाश पर पड़े पिस्तौल को तुरंत कब्जे में ले लिया. इस के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी होने लगी. घटनास्थल की सारी औपचारिकताएं पूरी कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए हैलट अस्पताल भिजवा दिया गया.
मृतक के घर वाले भी हैलट अस्पताल पहुंच गए थे. रोतेरोते मीना बारबार बेसुध हो जा रही थी. रोते हुए उस ने अपने दोनों बच्चों को पास बुलाया और बेटे हरिओम को गले लगा कर कहा, ‘‘बेटा, तुम अपनी बहन का खयाल रखना, मैं तुम्हारे पापा के साथ जा रही हूं.’’
इस के बाद मीना अपनी बेटी गुनगुन को बांहों में भर कर रोते हुए बोली, ‘‘तुम भी अपने भइया का ख्याल रखना. मैं तुम्हारे पापा के साथ जा रही हूं. अब कभी लौट कर नहीं आऊंगी.’’
मीना की हालत देख कर घर वाले उसे और बच्चों को घर ले जाने की कोशिश करने लगे. बच्चे तो घर चले गए, लेकिन मीना पति की लाश के पास से हटने को तैयार नहीं थी. शव को मोर्चरी के अंदर ले जाया जाने लगा तो मीना ने रोते हुए कहा, ‘‘हरिओम के पापा, मैं तुम्हारे बगैर एक पल भी नहीं जी सकती.’’
इतना कह कर मीना एक बार फिर बेहोश हो कर गिर पड़ी. उस के होश में आतेआते शव अंदर चला गया था. होश में आने के बाद उस ने इधरउधर देखा और फिर फुर्ती से साड़ी के पल्लू में बंधी एक गांठ खोली. उस में जहर की एक शीशी बंधी थी. उस ने जल्दी से ढक्कन खोल कर एक ही झटके में शीशी का पूरा जहर पी लिया.
जहर पीते ही मीना की हालत बिगड़ गई. उस के मुंह से झाग निकलने लगा. घर वालों के संभालतेसंभालते वह बेहोश हो गई. घर वालों को मामला गड़बड़ लगा तो वे उसे उठा कर अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
देर रात पुलिस ने पंचनामा तैयार कर मीना के शव को भी पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में पति की लाश के पास रखवा दिया.
मीना की आत्महत्या पर तो कोई रहस्य नहीं था, लेकिन हरिकिशन की आत्महत्या रहस्यों के घेरे में थी. इसलिए पुलिस को उस की जांच करनी थी.
अगले दिन पोस्टमार्टम के बाद मीना और हरिकिशन का अंतिम संस्कार कर दिया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद हरिकिशन की आत्महत्या के बारे में पूछताछ के लिए थाना कर्नलगंज पुलिस ने मृतक के बड़े भाई बलराम वर्मा को थाने बुलाया. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में बलराम वर्मा ने जो बताया, वह कुछ इस प्रकार था.
महानगर कानपुर के परेड इलाके के मोहल्ला मछली बाजार में रहते थे, श्यामबिहारी वर्मा. उन के परिवार में पत्नी ऊषा, 3 बेटे बलराम, श्रीकृष्ण और हरीकिशन के अलावा एक बेटी थी.
श्यामबिहारी का बड़ा बेटा बलराम अपने परिवार के साथ पुश्तैनी मकान में रहता था तो उस से छोटा श्रीकृष्ण अपने परिवार के साथ चौक में रहता था. जबकि सब से छोटा हरिकिशन चकेरी के काजीखेड़ा लालबंगला में रहता था. तीनों भाइयों की अलगअलग सोनेचांदी के गहनों की दुकानें थीं.
हरिकिशन की शादी कानपुर से जुड़े जिला फतेहपुर की रहने वाली मीना के साथ हुई थी. मीना से उसे बेटा हरिओम तथा बेटी खुशी उर्फ गुनगुन थी. इस समय बेटा 7 साल का है तो बेटी 4 साल की. हरिकिशन का भरापूरा और सुखी परिवार था. मीना का भाई उपेंद्र भी कानपुर में बहन के साथ ही रहता था.
हरिकिशन वर्मा की चौक की सराफा बाजार की चतुर्भुज वाली गली में ‘श्याम दाने वाले’ के नाम से दुकान थी. इस दुकान पर वह साले उपेंद्र के साथ बैठता था. कुछ दिनों बाद हरिकिशन ने हूलागंज में बेटे के नाम से ‘हरिओम ज्वैलर्स’ एक अन्य दुकान खोली तो इसे साले को सौंप दी. पुरानी दुकान पर वह साले की जगह भतीजे सत्यम को बैठाने लगा.
वक्त के साथ हरिकिशन का कारोबार बढ़ता गया. अब उस के पास पैसा भी खूब हो गया था. इसी के साथ उस ने प्रौपर्टी का भी काम शुरू कर दिया. प्रौपर्टी का काम थोड़ा रौबदाब वाला था, इसलिए उस ने लाइसेंस बनवा कर पिस्तौल खरीद ली.
हरिकिशन का साधनसंपन्न परिवार था. जिंदगी ऐशोआराम से गुजर रही थी. अचानक खाड़ेपुर नौबस्ता की रहने वाली एक लड़की से उस का चक्कर चल गया. छरहरे बदन की खूबसूरत उस लड़की से हरिकिशन के संबंध बन गए. दोनों मिलनेजुलने तो लगे ही थे, फोन पर भी घंटोंघंटों बातें करते थे. हरिकिशन के पास पैसे तो थे ही, वह प्रेमिका पर पानी की तरह पैसे बहाने लगा.
व्यवसाय पर विशेष ध्यान देने वाला हरिकिशन उस लड़की के चक्कर में पड़ने के बाद व्यवसाय पर ध्यान देना तो दूर, अक्सर दुकान से गायब रहने लगा.
प्रेममोहब्बत कितना भी छिपा कर किया जाए, वह छिपा नहीं रहता. ऐसा ही हरिकिशन के साथ भी हुआ. उस के भी संबंध उजागर हो गए. उस के इश्कबाजी की खबर मीना को लगी तो वह बेचैन हो उठी. लड़ाईझगड़े होने लगे. इस तरह उस लड़की को ले कर घर में कलह होने लगी.
धीरेधीरे हरिकिशन और मीना के बीच विवाद बढ़ता गया तो हरिकिशन घर आने से कतराने लगा. वह एकांत पसंद हो गया. वह पत्नी से ही नहीं, बच्चों से भी कतराने लगा. हमेशा गुमसुम बना रहता. पति के प्रेमसंबंधों की वजह से मीना अपने और बच्चों के भविष्य को ले कर परेशान रहने लगी.
मीना पति से सिर्फ लड़तीझगड़ती ही नहीं थी, बल्कि उसे समझाती, परेशानियां बताती, बच्चों के भविष्य का हवाला देती. लेकिन हरिकिशन न कुछ सुनता, न समझता और न ही उस की बातों का कोई जवाब देता.
मीना पति से प्रेमसंबंधों को ले कर लड़तीझगड़ती जरूर थी, लेकिन उस के पास ऐसा कोई सुबूत नहीं था कि वह पति से दावे के साथ कह सकती कि उस का किसी लड़की से गलत संबंध है. यही वजह थी कि कभीकभी हरिकिशन कह भी देता था कि उस के पास क्या सुबूत है कि उस का किसी से संबंध है, तब मीना चुप रह जाती थी. अब वह सुबूत की तलाश में लगी थी. आखिर एक दिन उस की तलाश पूरी हो गई.
हुआ यह कि हरिकिशन सो गया तो उस ने उस के मोबाइल फोन का मेमोरी कार्ड निकाल कर अपने मोबाइल फोन में डाला तो उस में हरिकिशन ने उस लड़की के साथ अपनी जो प्रेमसंबंधों की बातें रिकौर्ड की थीं, वे सब सामने आ गईं. उस ने उन बातों को सुना ही नहीं. अपने फोन में ट्रांसफर भी कर लिया. इस के बाद उस ने इन बातों को हरिकिशन को सुना कर सुबूत दिया तो वह उग्र हो उठा.
मीना किसी भी कीमत पर पति के प्यार को बंटवारे के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए वह हरिकिशन को उस लड़की से मिलने से रोकने लगी. पत्नी की इस रोकटोक से हरिकिशन उग्र हो जाता और मीना की पिटाई कर देता. धीरेधीरे यह रोज का नियम सा बन गया. मीना पिटती भले थी, लेकिन वह पति को किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं थी.
अचानक हरिकिशन परेशान रहने लगा. उस ने घर वालों से बातचीत ही नहीं, मिलनाजुलना तक बंद कर दिया. वह अपने खास दोस्तों को बुलाता और उन के साथ बैठ कर शराब पीता. नशे में हो जाता तो कहता, ‘‘यारों, अब मैं चंद दिनों का मेहमान हूं. किसी भी दिन इस दुनिया को अलविदा कह सकता हूं.’’
जब उस के दोस्त वजह पूछते तो वह सिर्फ यही कहता, ‘‘मैं ऐसे चक्रव्यूह में फंस गया हूं, जहां से निकलने का एक ही रास्ता है मौत. मैं इतने तनाव में रहता हूं कि यही लगता है कि अब मरने के बाद ही सुकून मिलेगा.’’
दोस्तों से की जाने वाली इन बातों की जानकारी जब हरिकिशन के घर वालों को हुई तो सब परेशान हो उठे. घर वालों ने उसे समझाने की कोशिश की. लेकिन हरिकिशन ने न किसी की बात मानी और न सुनी. इस से सभी मजबूर और असहाय से हो गए.
कई दिनों बाद 20 मई को हरिकिशन अपने घर पहुंचा तो उस लड़की को ले कर मीना और उस के बीच कहासुनी शुरू हो गई. हरिकिशन वैसे ही परेशान था, पत्नी ने कहासुनी शुरू की तो उसे गुस्सा आ गया. उस ने मीना से तो मारपीट की ही, घर में भी भयंकर तोड़फोड़ की. मारपीट में मीना का सिर फट गया तो तोड़फोड़ में टीवी फूट गया. यह सब कर के वह घर से भाग गया. पड़ोसी मीना को अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने टांके लगा कर मरहमपट्टी की.
इस के बाद हरिकिशन ने घर जाना बंद कर दिया. अब वह बड़े भाई बलराम के यहां रहने लगा, जहां मां भी रहती थी. इस के बाद उस ने हूलागंज वाली वह दुकान बंद करवा दी, जिस पर उस का साला उपेंद्र बैठता था.
जब मीना को पता चला कि हरिकिशन बड़े भाई के घर रह रहा है तो लगभग सप्ताह भर बाद 28 मई की शाम को वह पति को मनाने के लिए वहां पहुंची. उस दिन वट सावित्री का व्रत था. उस ने पति के सामने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘पूरे दिन आप की राह देखती रही, लेकिन आप नहीं आए तो मैं ही आ गई.’’
इतना कह कर जैसे ही मीना ने हरिकिशन के पैर छूने चाहे, उस ने पैर से ठोकर मार दिया. मीना गिर पड़ी तो वह लातघूंसों से उस की पिटाई करने लगा. मारतेमारते थक गया तो वह उसे उसी तरह छोड़ कर भाग गया.
मीना घर वापस आ गई. पति की हरकतों से उसे पूरा विश्वास हो गया कि अब वह उसे बिलकुल नहीं रखेगा. लेकिन वह पति को बहुत प्यार करती थी. उस से वह बिलकुल अलग नहीं रह सकती थी.
शायद उसे लगता था कि अगर पति ने छोड़ दिया तो उस की जिंदगी का क्या होगा. इस हालत से निपटने का उसे एक ही रास्ता नजर आया मौत. उस ने तय कर लिया कि अगर पति ने उसे ठुकराया तो वह मौत को गले लगा लेगी. इस के लिए उस ने जहर की एक शीशी खरीद कर रख ली.
29 मई को हरिकिशन के बुलाने पर उस का सब से करीबी दोस्त मनोज उस के बड़े भाई बलराम के घर पहुंचा. दोपहर 3 बजे के आसपास हरिकिशन उस की मोटरसाइकिल से कहीं जाने के लिए निकला.
शाम साढ़े 6 बजे मनोज अकेला ही बलराम के घर पहुंचा तो काफी डरा और घबराया हुआ था. उस ने बलराम और उस की मां ऊषा से कहा, ‘‘हरिकिशन ने आर्यनगर स्थित परशुराम वाटिका में अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मार कर आत्महत्या कर ली है.’’
इतना कह कर मनोज वहां से भाग खड़ा हुआ. इस सूचना से घर में कोहराम मच गया. तभी पुलिस की ओर से भी हरिकिशन के आत्महत्या करने की सूचना मिल गई थी. सभी घटनास्थल की ओर भागे.
घटना के समय मनोज हरिकिशन के साथ था, इसलिए उस की आत्महत्या के रहस्यों से वही परदा उठा सकता था. पुलिस ने मनोज को भी थाने बुला लिया.
मनोज ने पुलिस को जो बताया उस के अनुसार, वह चौकी सर्राफा बाजार में गुरुकुल गली में रहता था. हरिकिशन से उस की गहरी दोस्ती थी. वह उस पर बहुत ज्यादा विश्वास करता था. इसलिए वह अपनी हर बात उस से बता देता था.
घटना वाले दिन के बारे में मनोज ने बताया था कि उस दिन हरिकिशन अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए काफी उतावला था. इसी के लिए उस ने फोन कर के उसे बुलाया था और उस की मोटरसाइकिल से परशुराम वाटिका गया था. वहां उस ने कहा कि वह खाडे़पुर जा कर किसी तरह उस की प्रेमिका को बुला कर ले आए. तब उस ने कहा था, ‘‘यार, पहले तो वह तुम्हारे फोन करने पर ही दौड़ी चली आती थी, लेकिन अब ऐसा क्या हो गया कि उसे लाने के लिए जाना पड़ रहा है.’’
‘‘अब वह मुझ से दूर जाना चाहती है.’’ खिन्नता से हरिकिशन ने कहा.
दोस्त के लिए मनोज खाड़ेपुर नौबस्ता गया और उस लड़की को समझाबुझा कर परशुराम वाटिका ले आया. उस समय शाम के 5 बज रहे थे. चूंकि उस लड़की और हरिकिशन का पर्सनल मामला था, इसलिए मनोज उन दोनों से दूर एक बैंच पर बैठ गया.
इस के बाद उन दोनों के बीच न जाने क्या बात हुई कि हरिकिशन ने अपनी पिस्तौल निकाली और कनपटी पर रख कर गोली चला दी. हरिकिशन की इस हरकत से दोनों ही घबरा गए और वाटिका से निकल कर भागे. मनोज सीधे बलराम के घर पहुंचा और हरिकिशन द्वारा गोली मार कर आत्महत्या करने की बात बता कर अपने घर चला गया. डर के मारे उस ने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया.
मनोज के बयान से साफ हो गया कि हरिकिशन ने प्रेम में धोखा खाने की वजह से आत्महत्या की थी.
वह प्रेमिका की बेवफाई और बेरुखी को बरदाश्त नहीं कर सका था और उसी के सामने गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी. इस के बाद पति की मौत के गम में मीना ने भी जहर पी कर आत्महत्या कर ली थी.
इस तरह पूछताछ में साफ हो गया कि प्रेमिका से धोखा खा कर हरिकिशन ने आत्महत्या की थी तो पति के इस तरह असमय आत्महत्या कर लेने से दुखी मीना ने आत्महत्या कर ली थी. दोनों ही मामले आत्महत्या के थे, इसलिए पुलिस ने दोनों ही मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा कर जांच बंद कर दी. Family Crime Story
— 2014 में प्रकाशित






