Drug Terror Network. आतंकवादी संगठनों और ड्रग्स का रिश्ता आज किसी से छिपा नहीं है. दुनिया के लगभग सभी बड़े आतंकी संगठन किसी न किसी रूप में नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े हुए हैं. ड्रग्स उन के लिए केवल कमाई का साधन नहीं, बल्कि आतंक फैलाने का हथियार भी है. आतंकवादी संगठन ड्रग्स की तस्करी कर के अरबों रुपए कमाते हैं और उसी पैसे से हथियार खरीदते हैं, लड़ाकों को प्रशिक्षित करते हैं तथा हिंसक गतिविधियों को अंजाम देते हैं.
रात के सन्नाटे में पुरानी फैक्ट्री के एक कमरे की पीली रोशनी में 5 युवक बैठे बातें कर रहे थे. उन के बीच बैठा 22 साल का आरिफ साधारण, मासूम और बेरोजगार युवक था. उस की आंखों में कभी अपने बूढ़े पिता के सपनों को पूरा करने की चमक हुआ करती थी. लेकिन आज उस की उन्हीं आंखों में अजीब सी लालिमा थी.
उस के हाथ कांप रहे थे और सामने रखी छोटी सी सफेद गोली को देखते ही उस की सांसें तेज हो गईं थीं.
''ले लो, इस से सारा डर खत्म हो जाएगा,’’ दाढ़ी वाले आदमी ने मुसकरा कर कहा.
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आरिफ ने एक बार उस दाढ़ी वाले युवक को देखा, फिर पानी के साथ गोली निगल ली. कुछ ही मिनटों में उस की आंखों की बेचैनी गायब हो गई. शरीर में अजीब सी फुरती दौडऩे लगी. उसे लगने लगा कि अब वह कुछ भी कर सकता है. उसे नहीं पता था कि यह गोली सिर्फ नशा नहीं है. यह गोली उस की जिंदगी और इंसानियत दोनों को निगलने वाली थी.
उत्तर प्रदेश के एक शहर का रहने वाला आरिफ पढ़ाई में बहुत अच्छा था. उस की मां चाहती थी कि वह पढ़लिख कर सरकारी नौकरी करे. पिता ईरिक्शा चलाते थे. उसी की कमाई से घर चलता था. लेकिन तमाम ईरिक्शा आ जाने से कमाई कम हो गई थी, जिस से मुश्किल से घर चलता था.






