Emotional Crime Story: जिंदगी में अच्छे लोग भी मिलते हैं और बुरे भी. जिस लड़की ने अपनी हरकतों से मेरी नींद हराम कर दी थी, वह रिया निकलेगी, मैं ने सोचा भी नहीं था. लेकिन रिया के साथ जो हुआ था, उस ने ही कहां सोचा होगा. बहरहाल, हम मिले तो अच्छाई और बुराई दोनों सामने आ गई.  ट्रेन फुल स्पीड में दौड़ रही थी. बाहर हलकीहलकी बूंदाबांदी हो रही थी. मैं खिड़की के पास ही बैठा था. कुछ देर तक तो रिमझिम फुहार अच्छी लगी,

पर जब पानी की बूंदें मेरी सीट पर गिरने लगीं तो मैं ने शीशा गिरा दिया. लोगों को मुझ से शिकायत रही है कि मुझे बोलना नहीं आता. ठीक ही कहते थे लोग. मैं 4 घंटे से चुपचाप बैठा था. आसपास बैठे यात्री आपस में बातें कर रहे थे. मैं या तो अपनी डायरी उलटपलट कर देखता था या फिर बीचबीच में न्यूजपेपर पढ़ लेता था. मेरे सामने वाली सीट पर एक महिला बैठी थी. मैं ने उस की साड़ी से ही समझ लिया था कि कोई महिला या लड़की है, अभी तक उस की शक्ल नहीं देखी थी. बात करने का तो सवाल ही नहीं था. जबकि वह सब से घुलमिल कर बातें कर रही थी.

इसी बीच वह उठ कर मेरी खिड़की के पास आ कर बोली कि थोड़ी सी खिड़की खोल देती हूं, घुटन सी महसूस हो रही है. मैं अपनी डायरी में कुछ लिखने की सोच रहा था, सो बिना सिर उठाए या उस की तरफ देखे मैं ने हूं कह दिया. खिड़की खोल कर वह अपनी सीट पर जा बैठी. थोड़ी देर में चाय वाला आया तो उस ने अपने लिए चाय ली और औपचारिकतावश आसपास के यात्रियों से भी चाय के लिए पूछा, मुझ से भी. मैं ने बिना उस की ओर देखे ना कह दिया.

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