Gujarat News: सूरत के योगगुरु प्रदीपभाई जोटांगिया ने अपने आश्रम को नकली नोट छापने का अड्डा बना रखा था. क्राइम ब्रांच ने उस के पास से करीब 2 करोड़ रुपए के नकली नोट बरामद कर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया. यही आरोपी यदि मुसलिम होते तो इन के घरों पर बुलडोजर ऐक्शन हो गया होता. क्या इस योगगुरु की ऊंची राजनीतिक पहुंच आरोपियों को बुलडोजर ऐक्शन से बचा रही है या इस की वजह कुछ और है?
गुजरात का सूरत शहर साडिय़ों और हीरे के लिए जाना जाता है, लेकिन आज इसी सूरत की एक नई कहानी बताने जा रहा हूं. सूरत की तहसील कामरेज में धोरण पारडी गांव की सीमा से लगा लगभग एक बीघा जमीन पर फैला 'श्री सत्यम योग फाउंडेशन’ है. इस योग फाउंडेशन की सब से बड़ी पहचान इस की रहस्यमयी ऊंची दीवारें हैं. क्योंकि सामान्य तौर पर कोई भी आध्यात्मिक आश्रम खुला और भव्य होता है, परंतु इस आश्रम 'सत्यम योग फाउंडेशन’ के चारों ओर 15 फुट ऊंची दीवारें बनी हैं.
इन दीवारों पर लोहे के तारों की फेंसिंग भी कराई गई है, ताकि बाहर से कोई व्यक्ति अंदर झांक न सके. इस की वजह यह है कि इस के अंदर नकली नोटों यानी फेक करेंसी का कारोबार होता था. सूरत के किसी बड़े स्कूल, मकान या कंपनी में भी ऐसी किलेबंदी नहीं होगी, जैसी इस योग फाउंडेशन में कराई गई थी.
मुख्य गेट से अंदर प्रवेश करते ही यह आश्रम किसी सात्विक केंद्र जैसा कम, किसी राजामहाराजा के आलीशान महल जैसा अधिक दिखाई देता है. आश्रम में प्रवेश करते ही एक ओर विशाल और भव्य गौशाला है, जिस में एक से एक अच्छी गाएं बंधी रहती हैं. इतना ही नहीं, हैरानी की बात तो यह है कि गौशाला के बाद एक अश्वशाला (अस्तबल) है. अस्तबल में भी एक नहीं, कई घोड़े बंधे हैं.






