Hindi Crime Story: राम नायडू उर्फ राहुल दीक्षित जैसे लोगों की समाज में कमी नहीं है, जो दूसरों की कमजोरी का फायदा उठाते हैं. मृणालिनी को हर तरह लूटने वाला राम उर्फ राहुल भले ही पकड़ा गया, लेकिन क्या उसे उतनी सजा मिल पाएगी, जितने घाव उस ने मृणालिनी और दूसरी लड़कियों को दिए हैं?

‘‘बे टी, कब तक मुझ बूढ़ी की तीमारदारी में अपनी जिंदगी खराब करती रहेगी. मेरी मान

तो कोई अच्छा सा लड़का देख कर शादी कर ले और अपना घर बसा ले, मेरा क्या है, आज हूं कल नहीं. मैं चैन से तभी मर पाऊंगी, जब तेरा बसा हुआ घर देख लूंगी.’’

प्रोफेसर मृणालिनी (बदला हुआ नाम) जब थकीहारी कालेज से घर लौटती थीं तो उन्हें रोज किसी न किसी रूप में मां के इसी तरह के शब्द सुनने को मिलते थे. धीरेधीरे स्थिति यह हो गई थी कि मां जिस दिन ऐसी कोई बात नहीं कहती थीं, मृणालिनी को उन की तबीयत खराब होने का अंदेशा होने लगता था. 37 वर्षीया मृणालिनी इंदौर के एक नामी कालेज में प्रोफेसर थीं और एरोड्रम इलाके में रहती थीं.

पिता की मौत के बाद मृणालिनी ने मां की सेवा करने की ठान ली थी. ठान ही नहीं ली थी, बल्कि ऐसा कर भी रही थीं. घर में कोई और नहीं था, जो मां की देखभाल कर पाता. ऐसे में मृणालिनी को यह ठीक नहीं लगा कि वह मां को उन के हाल पर अकेला छोड़ कर शादी कर लें और ससुराल चली जाएं. इसलिए वह शादी, प्यार, रोमांस और घरगृहस्थी जैसे लफ्जों को भूल कर बेटे की भूमिका में आ गईं थीं. उन्होंने मां की सेवा और देखभाल को ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था.

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