Lucknow Murder Case. संतोष शहरी चकाचौंध से इतना प्रभावित हुआ कि पिता के मना करने के बावजूद उस ने खेती की जमीन बेच दी और लखनऊ में एक ढाबा खोल लिया. शादीशुदा होते हुए भी उस ने लखनऊ में रिंकी तिवारी नाम की एक युवती से शादी कर ली. यही उस की सब से बड़ी भूल साबित हुई.
‘‘बाबूजी, आप की पूरी जिंदगी इसी खेती किसानी में निकल गई. बदले में क्या मिला? न तो अच्छा जीवन जी सके और न ही कोई ऐसा काम किया जिस से दुनिया में आप का नाम हो. आप की जिंदगी इस गांव में ही सिमट कर रह गई है. कभी शहर में रह कर देखो तब महसूस होगा कि यहां के जीवन और वहां के जीवन में कितना फर्क है?’’ संतोष ने अपने पिता महाराज बख्श सिंह से कहा. वह पिता को बाबूजी कहता था.
महाराज बख्श सिंह लखनऊ जिले से 26 किलोमीटर दूर गोसाईंगंज इलाके के नूरपूर बेहटा गांव में रहते थे. उन के पास खेती की अच्छीखासी जमीन थी, इसलिए उन की गिनती गांव के प्रतिष्ठित किसानों में होती थी. गांव में रहने के नाते उन का जीवन सरल और सीधा था.
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उन्होंने संतोष को पढ़ाना चाहा, लेकिन जब उस का पढ़ाईलिखाई में मन नहीं लगा तो उन्होंने कम उम्र में ही उस की शादी मोहनलालगंज की रहने वाली राजकुमारी के साथ कर दी थी. शादी हो जाने के बाद संतोष अपनी घरगृहस्थी में रम गया. बाद में राजकुमारी 2 बेटों की मां भी बनी. इस के बाद तो उन के घर में खुशियां और बढ़ गईं. बच्चे बड़े हुए तो उन का दाखिला गांव के ही स्कूल में करा दिया.






