Meerut Crime: महत्त्वाकांक्षी होना बुरी बात नहीं है. बुराई तब आती है जब महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति मेहनत और लगन के बजाय अपराध की डगर पर उतर जाता है. उस स्थिति में इंसान के लिए नातेरिश्ते भी कोई मायने नहीं रखते. प्रतीक और तुषार के साथ भी यही हुआ, जिन्होंने इंजीनियर होने के बावजूद अपना भविष्य अपराध की दलदल में ढूंढने की कोशिश की.
उत्तर प्रदेश, मेरठ शहर के टीपी नगर थानांतर्गत पौश कालोनी पंजाबीपुरा स्थित मयंक जैन की कोठी में 19 फरवरी, 2016 की शाम को अजीब सी हलचल थी. ऐसी हलचल वहां पहले कभी नहीं देखी गई थी. दरअसल इस परिवार का बेटा अतिशय जैन सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकला था. लेकिन शाम तक भी वापस नहीं लौटा था. जैन दंपत्ति के कई नातेरिश्तेदार भी कोठी में मौजूद थे. हर किसी के चेहरे पर चिंता की लकीरें झलक रही थीं. गुरजते वक्त के साथ बीचबीच में सभी की निगाहें दरवाजे की तरफ उठ जाती थीं.
दरअसल, मयंक जैन युवा कारोबारी थे. शहर में ही उन का विवाह मंडप था. उन के परिवार में पत्नी शिखा जैन के अलावा 2 बेटे थे. 13 वर्षीय अतिशय उन का छोटा बेटा था. वह शहर के ही एक स्कूल में कक्षा 6 का छात्र था. वह सुबह को घर से निकल कर करीब 100 मीटर दूर बसस्टाप पर जाता था और वहां से स्कूल बस में बैठ कर स्कूल चला जाता था. उस दिन जब दोपहर में वह वापस नहीं लौटा तो शिखा ने मयंक को फोन कर के बताया. वह तुरंत घर आ गए. पहले उन्होंने सोचा कि अतिशय कहीं किसी दोस्त के पास न चला गया हो. जब घंटों बाद भी वह नहीं आया तो मयंक स्कूल पहुंचे.






