Hindi Fiction Story. गरीबी की मार झेल रहे अशोक को एक दिन रास्ते में पाउच में सोने का हार मिला. उस पाउच में एक बिजनैसमैन का विजिटिंग कार्ड भी था. ईमानदारी दिखाते हुए करीब 7 लाख रुपए के हार को अशोक ने उस बिजनैसमैन की कोठी पर जा कर लौटा दिया. अगले दिन कोठी में बिजनैसमैन की हत्या उस की पत्नी ने कर दी. आखिर वह हार उस बिजनैसमैन की हत्या की वजह कैसे बना?

औफिस में 5 बजे चाय पीने के बाद जो बीड़ी पी थी, वही आखिरी थी. क्योंकि बंडल में वही आखिरी बीड़ी थी. घर जाते समय याद कर के बीड़ी का बंडल खरीदना पड़ेगा. अशोक ने सोचा.

वह सिविल लाइंस के एक औफिस में चपरासी की नौकरी करता था. चाय और बीड़ी के अलावा उसे कोई अन्य व्यसन नहीं था. औफिस में मालिक से मिलने रोजाना 5-6 लोग आते थे. मालिक के कहने पर उसे चाय की दुकान से चाय लानी पड़ती थी और इस तरह दिन में 4-5 बार चाय पीने को मिल जाती थी. बीड़ी के लिए पैसे खर्च करने पड़ते थे. औफिस में बीड़ी पीना मना था, इसलिए उस पर नियंत्रण बना रहता था.

शाम 7 बजे छुट्टी होने के बाद उस ने साइकिल की सीट साफ की. टिफिन वाला झोला हैंडिल पर टांगा और बस स्टौप की ओर साइकिल बढ़ा दी. अल्लापुर में वह हैजा अस्पताल के सामने वाली सड़क पर अपनी पत्नी सविता के साथ एक कमरे और रसोई वाले मकान में रहता था.

https://youtube.com/shorts/SAgtgdg8e68?si=dTj6AFhZQeeiTjbG

चमचमाती रोशनियों वाली शानदार कारें तेज रफ्तार से सिविल लाइंस की ओर जाती थीं. यह दृश्य अशोक रोज देखता था.

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