Hindi Stories: इंसान की जिंदगी में यादों का खास महत्व होता है. जो यादें मन को सुकून देती हैं, उन्हें कोई भूलना नहीं चाहता. जबकि कड़वी यादों को इंसान भूल से भी याद नहीं करना चाहता. लेकिन यादों की डोर आदमी के अपने वश में नहीं होती. दिमाग के परदे पर गाहेबगाहे हर तरह की यादें दस्तक देती रहती हैं. तकलीफ तब होती है, जब कड़वी यादें वर्तमान को प्रभावित करने लगती हैं.

एक शाम ऐलिशिया कोजाकीविक्ज अपने कमरे में बैठी थी, अनायास ही पुरानी यादें उस के सुकून पर हावी हो गईं. उस ने उन से पीछा छुड़ाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह उन बुरी यादों से पीछा नहीं छुड़ा सकी. जब मन परेशान  होने लगा तो उस ने उन यादों को मन के द्वार से निकाल कर आंखों की ऊपरी सतह पर लाने की सोची, ताकि डरावने दृश्य शब्द बन जाएं.

ऐलिशिया ने उन बुरी यादों की अखबारी कटिंग काट कर एक फाइल बना ली थी. उस फाइल में केवल बुरी यादों की ही खबरें नहीं थीं, बल्कि उस की तारीफ में छपी कुछ खबरें और रिपोर्ताज भी थे. वह उस फाइल को ले कर टेबल पर बैठ गई और एकएक खबर को उचटती नजरों से देखने लगी. सभी ऐसी खबरें थीं, जिन्हें उस ने सैकड़ों बार पढ़ा था, इसलिए जानीपहचानी थीं. मन की दिशा बदलने के लिए उस ने सतही तौर पर खबरें पढ़ीं तो, लेकिन बुरी यादों के किसी भी चित्र को आंखों के द्वार पर दस्तक नहीं देने दी. ऐलिशिया अभी उन खबरों की फाइल को उलटपुलट ही रही थी कि उस ने अपने कंधे पर हाथ का स्पर्श महसूस किया. उस ने पलट कर देखा, पीछे उस की मां मैरी खड़ी थीं.

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