Gujrat News: भावनगर के फारेस्ट औफिसर शैलेष खांभला का परिवार ऊपर से देखने में भले ही खुशहाल लगता था, लेकिन घर में ऐसी खामोश आग अंदर ही अंदर सुलग रही थी, जिस की कोई कल्पना तक नहीं कर सकता था. इसी बीच शैलेष ने एक ऐसी खूनी साजिश तैयार कर ली, जिस से उस ने न सिर्फ पत्नी बल्कि दोनों बच्चों की हत्या कर उन्हें दफन कर दिया. एक फारेस्ट अधिकारी ने आखिर ऐसा क्यों किया?

गुजरात के जिला भावनगर की फारेस्ट कालोनी की वह सुबह हर दिन से कुछ अलग सी थी. सूरज से निकलने वाली किरणें घरों की छतों पर इस तरह फैल रही थीं, मानो धीरेधीरे कोई राज खोल रही हों. जबकि इस कालोनी का वह घर, जिस में शैलेष खांभला अपनी पत्नी नयनाबेन, बेटे भव्य और बेटी पृथा के साथ रहता था. उस सुबह जैसे किसी अदृश्य परदे में लिपटा हुआ था. दूर से देखने में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अंदर ऐसा कुछ था, जिसे हवा भी छूने से डर रही थी. शैलेष खांभला वन विभाग में एसीएफ यानी असिस्टेंट कंजर्वेटर औफ फारेस्ट था. साल भर पहले ही उस का इस पद पर प्रमोशन हुआ था. उस के बाद ही ट्रांसफर हो कर भावनगर आया था.

जयपुरिया शर्ट पहन कर औफिस जाने वाला, नियमों में विश्वास रखने वाला, दिखने में शांत, लोगों से कम बोलने वाला व्यक्ति था शैलेष. लोग कहते थे कि साहब बहुत सीधे हैं, गुस्सा बिलकुल नहीं करते. परिवार से बहुत प्यार करते हैं. और उस की पत्नी नयना एक ऐसी महिला थी, जो अपनी छोटी सी दुनिया को संभालने में ही दिनरात खोई रहती थी. बेटी पृथा 13 साल की थी तो बेटा भव्य 9 साल का. दोनों पढऩे में तो अच्छे थे ही, सभ्य और खुशमिजाज भी थे.

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