Village Stories: मास्टर अब्दुर्रहमान की हरकतों से सभी को यही लगता था कि वह पागल हो गया है. लेकिन ऐसा कुछ नहीं था. उसे उस औरत के धोखा देने का ऐसा सदमा लगा था कि उस की हालत पागलों सी हो गई थी.
अब्दुर्रहमान प्राइमरी स्कूल का अध्यापक था. वह जिस स्कूल में पढ़ाता था, वह शहर के किनारे ऐसी जगह पर था, जहां आसपास जड़ीबूटियों से इलाज करने वाले बंजारे डेरा डाले रहते थे. वह जब भी खाली होता, उन बंजारों के पास चला जाता और कईकई घंटे उन के पास बैठा रहता. कभीकभी वह छुट्टी के दिन भी उन के पास चला जाता और पूरा का पूरा दिन वहीं गुजार देता.
ये बंजारे जड़ीबूटियों से दवाएं बनाते थे और जहां कहीं भी डेरा लगाते, आसपास के रहने वाले लोग उन के पास इलाज के लिए आ जाते थे. उन के पास जड़ीबूटियों के ऐसे नुस्खे और दवाइयां होती थीं, जो बाजार की दुकानों में नहीं मिलती थीं. कुछ बीमारियों में उन की दवाएं इतना सटीक फायदा करती थीं, जिन का इलाज बड़ेबड़े डाक्टर भी नहीं कर पाते थे.
मास्टर अब्दुर्रहमान उन बंजारों के बीच अपना काफी समय बरबाद करता था, इसलिए लोग उस की हंसी उड़ाते थे कि पता नहीं इन बंजारों के बीच इस मास्टर को क्या मिलता है, जो वह अपना इतना समय बरबाद करता है. जबकि अब्दुर्रहमान का कहना था कि इन बंजारों के पास ऐसीऐसी दवाएं हैं, जो मुरदों में भी जान डाल सकती हैं. जब लोग उन से कहते कि अगर ये इतने ही होशियार हैं तो दरदर भटकते क्यों हैं? मास्टर अब्दुर्रहमान के पास उन की इस बात का कोई जवाब नहीं होता था.






