Hindi Stories: देवेंद्र अग्रवाल कलयुगी धार्मिक साधुसंतों से दूर रह कर जोधपुर में अपना महेशाश्रम चला रहे हैं, जहां मातापिता द्वारा ठुकराए गए या अवांछित तरीके से फेंके गए बच्चों को पाला जाता है. उन्होंने अब तक सैकड़ों बच्चों को जिंदगियां दे कर वाकई बहुत बड़ा काम किया है.
राजस्थान के मेवाड़ इलाके की वीरता, संघर्ष, त्याग और बलिदान के कितने ही किस्सेकहानियां इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हैं. महाराणा प्रताप, हल्दीघाटी, घोड़ा चेतक और राणा सांगा के बेटे उदय सिंह की धाय की जांबाजी आज भी लोगों की जुबान पर है. उदयपुर भी मेवाड़ के ही इलाके में आता है, यह शहर दुनिया भर में झीलों के लिए प्रसिद्ध है.
उदयपुर शहर के रहने वाले देवेंद्र भी आज त्याग, संघर्ष, जिद, हौसले और समाजसेवा के लिए जाने जाते हैं. बेटी बचाओ की मुहिम में जुटे देवेंद्र राजस्थान ही नहीं, देश भर में पालना वाले बाबा के नाम से जाने जाते हैं. हालांकि उन की उम्र 42-43 साल ही है, लेकिन अधपकी दाढ़ी और संघर्ष के झंझावतों ने उन्हें बाबा बना दिया है. देवेंद्र योग गुरु भी हैं और सरकारी अफसरों के साथ आमजन को योग का प्रशिक्षण देते हैं. इस की वजह यह है कि वह समाज से ठुकराई बेटियों को बचाते ही नहीं, उन्हें नई जिंदगी देते हैं.
8 अगस्त, 1974 को उदयपुर में जयराम अग्रवाल और भगवती देवी के घर जन्मे देवेंद्र पहले पढ़ाईलिखाई और उस के बाद कारोबार में ऐसा व्यस्त हुए कि अपने शरीर पर ध्यान नहीं दे पाए. उसी बीच सन 1996 में हर्षा अग्रवाल से उन का विवाह हो गया. विवाह के बाद बेटा हुआ तो घर में खुशियां आ गईं. पतिपत्नी ही नहीं, मातापिता भी खुश हुए. देवेंद्र की मेहनत से कारोबार तेजी से फलफूल रहा था. उन का मार्केंटिंग का कारोबार था. उन के पास कई नामीगिरामी कंपनियों की एजेंसियां थीं. करोड़ों रुपए का सालाना टर्नओवर था.






