Blind Faith Tragedy : धर्म और आस्था के नाम पर लगभग अनपढ़ हो चुके लोगों को बेवकूफ बनाना और ठगना पंडेपुजारियों का आसान काम है. नालंदा के शीतला माता मंदिर के पुजारियों ने खास दिन और समय पर मंदिर में पूजा करने की ऐसी महत्त्व की कहानियां सुनाईं कि मंदिर में श्रद्धालुओं की बेतहाशा भीड़ बढ़ गई. बेकाबू भीड़ की भगदड़ में 9 जनों को जान गंवानी पड़ी. आखिर आस्था से कैसे निकली मौत...
बात 31 मार्च, 2026 की है. सुबह की पहली किरण अभी धरती पर उतरी भी नहीं थी कि नालंदा के शीतला मंदिर के बाहर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. हाथों में पूजा की थालियां, माथे पर सिंदूर, होंठों पर मंत्र और दिल में एक ही उम्मीद. आज माता के दर्शन होंगे, सब कष्ट दूर हो जाएंगे, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यही आस्था चीखों में बदल जाएगी. यही भीड़ मौत का मंजर बन जाएगी और श्रद्धा की इस राह पर 9 जिंदगियां हमेशा के लिए थम जाएंगी.पहले हम, पहले हम की अदृश्य होड़ में जब इंसान इंसान को धक्का देने लगा. तब न मंदिर दिखा, न आस्था का देव. सिर्फ एक बेकाबू भीड़ थी, जो अपने ही लोगों को रौंदती चली जा रही थी.
कुछ ही मिनटों में बिहार के नालंदा जिले के शीतला मंदिर का वह पवित्र आंगन मातम में बदल गया और पीछे छूट गईं टूटी हुई चूडिय़ों की खनक, बिखरी हुई चप्पलें और उन परिवारों की सिसकियां, जिन की दुनिया उसी सुबह उजड़ गई. यह सिर्फ एक हादसा नहीं था.यह आस्था के नाम पर पनपते अंधविश्वास, अव्यवस्था और लापरवाही की वह भयावह सच्चाई थी, जिस ने 9 जिंदगियां छीन लीं.






