Dehradun High-Profile Case. गुडि़या ने एक रसूखदार और राजनैतिक पहुंच रखने वाले शख्स प्रदीप सांगवान के खिलाफ दुराचार और अन्य धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई. इस से पहले कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर पाती, गुडि़या ने पुलिस को एक प्रार्थनापत्र दिया. पुलिस ने प्रार्थनापत्र की जांच की तो गुडि़या कानून के शिकंजे में खुद फंस गई.
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सुभाष रोड स्थित प्रदेश पुलिस मुख्यालय में उस दिन भी रोज की ही तरह पुलिस महानिदेशक बी.एस. सिद्धू समेत अन्य अधिकारी अपनेअपने औफिसों में बैठे कार्य में लगे थे. पुलिस अधीक्षक ममता वोहरा भी अपने औफिस में जरूरी फाइलें निपटा रही थीं, तभी ड्यूटी पर तैनात उन के पीए ने इंटरकौम से सूचना दी, ‘‘मैडम, एक लड़की आप से मिलना चाहती है.’’
‘‘ठीक है, उसे अंदर भेज दो.’’ ममता वोहरा ने कहा.
उन के कहने के पल भर बाद एक लड़की दरवाजे पर टंगा परदा हटा कर अंदर आ गई. लड़की को देखते ही वह पहचान गईं. उस का नाम गुडि़या था और वह एक बहुचर्चित दुराचार मामले की वादी थी. उन्हें लगा, लड़की अपने केस की प्रगति के बारे में जानने आई है, इसलिए उन्होंने कहा, ‘‘कहिए सब ठीक तो है? हमारी पुलिस उसे गिरफ्तार करने की कोशिश में लगी है. वह जल्दी ही पकड़ा जाएगा.’’
‘‘वह तो ठीक है मैडम, लेकिन...’’ लड़की ने इतना ही कहा था कि ममता वोहरा ने पूछा, ‘‘लेकिन क्या...’’
‘‘मैडम, मैं अपना बयान दोबारा देना चाहती हूं.’’ गुडि़या ने कहा. सवालिया नजरों से उसे घूरते हुए पूछा, ‘‘मतलब?’’
‘‘मैडम, रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद मैं ने जो बयान दिया था, अब उस में मैं कुछ बदलाव करना चाहती हूं.’’ ‘‘क्यों?’’ एसपी वोहरा ने हैरानी से पूछा.






