कहानी के बाकी भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

फरवरी, 2023 के महीने में एक महंगी शादी की खबर मीडिया में तेजी से फैल गई. जिस का कनेक्शन छत्तीसगढ़ के भिलाई, बौलीवुड सितारे, महादेव बुक और राजनेताओं तक से जुड़े हुए थे. यह शादी किसी अमीरजादे या सिनेमा सिलेब्रेटी की नहीं, बल्कि 28 वर्षीय एक युवक सौरभ चंद्राकर की थी.

यह भव्य शादी दुबई के पांचसितारा होटल में हुई थी. उस में बौलीवुड के नामी- गिरामी सितारों ने परमफारमेंस की थी. सनी लियोनी से ले कर आज के रणबीर कपूर तक कई फिल्मी सितारों ने इस में ठुमके लगाए थे.

मेहमानों को कपिल शर्मा और भारती सिंह की कौमेडी ने हंसा हंसा कर लोटपोट कर दिया था तो नेहा कक्कड़ और राहत फतेह अली खान की लाइव परफारमेंस से गजब का समां बंध गया था. मीडिया में वायरल हुई इस की तसवीरें और वीडियो के अनुसार यह करीब 200 करोड़ी शादी कही जाने लगी.

यह शादी थी महादेव ऐप के एक प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की, जो  संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रास अलएखैमा में हुई थी. सौरभ चंद्राकर ने अपने रिश्तेदारों को नागपुर से दुबई प्राइवेट जेट से बुलाया था, सभी वापस लौटे भी प्राइवेट जेट से ही थे.

उस शादी में खाना पकाने, परोसने वाले से ले कर, डेकोरेटर और तमाम इंतजाम करने वाले लोग भारत से गए थे, और इन को कैश में पेमेंट किया गया था. बौलीवुड से जुड़े कुछ सितारों को भी कैश में पेमेंट किया गया था. शादी के इस महाजश्न की कुछ फोटो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, भारत में ईडी के कान खड़े हो गए.

राजधानी दिल्ली में पृथ्वीराज रोड के दोनों ओर वीवीआईपी इलाके में दिनेश कुमार एक कोठी का प्राइवेट गार्ड है. दोपहर के समय उस के पास एक आटो ड्राइवर आया. उस से उस की कुछ माह पहले ही जानपहचान हुई थी. आते ही वह दिनेश के कान में धीमे से बोला, ‘‘आज का नंबर 5 है… खेल ले! पिछला डूबा पैसा निकल आएगा!’’

‘‘सच में!’’ दिनेश की आंखों में चमक आ गई थी.

‘‘हम तुम को कभी गलत बताए हैं आज तक! महादेव कंपनी का औनलाइन है, लेकिन ब्रोकर खेलवाता है. मटका नहीं है!’’ ड्राइवर बोला.

‘‘सो तो है. तुम्हारे कहने पर आज भी लगा देता हूं,’’ दिनेश बोला.

‘‘मेरा भी लगा देना, ये लो कुछ पैसा. हम को सवारी लाने जाना है.’’ ड्राइवर बोलता हुआ पारदर्शी पन्नी में लिपटे अपने पर्स से 5 सौ के 4 नोट देता हुआ बोला,‘‘यह नंबर पक्का है. मैं शाम को आऊंगा.’’

ड्राइवर तुरंत जाने लगा. उस के 2 कदम जाते ही दिनेश बोला, ‘‘बोतल भी ले कर आना. मेरी तरफ से भी मटन पार्टी पक्की है… होटल वाला ले कर आएगा.’’

दरअसल, आटो ड्राइवर को महादेव ऐप से पैसा कमाने के बारे में सिंधिया हाउस के पास एक कैंटीन में काम करने वाले से कुछ दिन पहले ही जानकारी मिली थी. उसी ने बताया था कि इस में पैसा तेजी से बनता है. वह भी कैश में रोजाना मिल जाता है. किंतु उस की समस्या कहीं एक जगह ठिकाना नहीं रहने की थी. ऐप डाउनलोड करने वाला स्मार्टफोन भी उस के पास नहीं था. छोटे मोबाइल से काम चलाता था.

सवारी के साथ कब, किस वक्त कहां निकल जाए, उसे भी पता नहीं रहता था. इसलिए महादेव के बारे में अपने गांव के दोस्त दिनेश को बताया. उसे भी वहां पैसा लगाने के लिए कहा. वह गार्ड था और हमेशा एक जगह पर टिका रहता था. उस की जहां ड्यूटी थी, वहीं पास में खानेपीने रहनेसोने की जगह बनी हुई थी.

ड्राइवर दोस्त की बात दिनेश को भी पसंद आई. इस बारे में उस ने अपने एक रिश्तेदार से भी तहकीकात की थी. वह एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था. उस ने भी महादेव में पैसा लगाने की हामी भर दी थी. इस में वह खुद एक ब्रोकर के मार्फत पैसा लगाता और दूसरे का लगवाता था. उसे बीच की कमाई हो जाती थी.

रास नहीं आया महादेव से सट्टा

रिश्तेदार और ब्रोकर ने दिनेश को अपने मोबाइल में ‘महादेव बुक’ को दिखा कर भरोसा दिलवाया था. उस ने बताया था कि यह एक बड़ी मल्टीनैशनल कंपनी का बेटिंग ऐप है. उसे समझाया था कि यहां कैसे बेटिंग होती है. इस में हजारों लोग रोज पैसा लगा रहे हैं और पैसा बना रहे हैं. यहां पर क्रिकेट, फुटबौल, टेनिस, कैसीनो और तीन पत्ती के लिए बेट यानी बाजी लगाई जाती है. इसे लोग सट्टा कहते हैं.

इस के अलावा इस में कुछ रोमांचित करने वाले गेम भी हैं. इस के मेन पेज पर वाट्सऐप नंबर दिए गए थे. इस के जरिए ही वाट्सऐप मैसेज या मिस काल से डील करने को कहा गया था. यहां काल या मैसेज करने वाले को बाजी की शुरुआत के लिए स्टेप बाइ स्टेप जानकारियां दी गई थीं. वैसे यह लोगों के बीच औनलाइन सट्टा के नाम से जाना जाता था.

इस तरह हमेशा ऐक्टिव और लाइव रहने वाले बेटिंग की दुनिया में चर्चित महादेव बुक से दिनेश, उस के रिश्तेदार और आटो ड्राइवर औनलाइन के बजाय औफलाइन बेट लगाने लगे थे. वह क्रिकेट की हारजीत या ताश की तीन पत्ती खेल पर लगाई जाने वाली बेटिंग की रकम महादेव के ब्रोकर को कैश में दे देते थे. जीती हुई रकम उन्हें कैश में शाम के 8-9 बजे के बीच मिल जाती थी.

दिनेश, आटो ड्राइवर या उन की जानपहचान वाले आधा दरजन लोगों को इस का चस्का लग चुका था. वह अधिक से अधिक पैसा बनाने के लिए इस में लगे रहते थे. उन की मुलाकातें भी होती रहती थीं.

हालांकि वे पैसे की सुरक्षा को ले कर चौकन्ने भी रहते थे. वह इतना तो समझते ही थे कि कहने को बेटिंग है, लेकिन वह गलत धंधा और गैरकानूनी सट्टा ही लगाते हैं. इस कारण उन्हें पुलिस में फंसने की भी आशंका बनी रहती थी, और डरे सहमे भी रहते थे.

सब कुछ ठीक चलने लगा था, लेकिन पिछले कई दिनों से दिनेश की बेटिंग के पैसे लगातार डूबते जा रहे थे. हफ्ते भर में ही उस के 12 हजार रुपए डूब चुके थे. कुछ पैसे उस ने जानने वाले से कर्ज लिए थे, जबकि कुछ सैलरी के भी खर्च कर डाले थे. घर से पैसे के लिए पत्नी का बारबार फोन आ रहा था. फरवरी का महीना था. वह होली के मौके पर घर जाने के लिए अधिक पैसा जमा करना चाहता था, लेकिन हो उस का उलटा रहा था.

इसी बीच उसे मालूम हुआ कि आटो ड्राइवर अंडरग्राउंड हो गया है. वह दिनेश के पास कई दिनों से नहीं आया था. आशंकित दिनेश ने उसे काल किया. फोन बंद मिला. लगातार काल करता रहा, लेकिन फोन बंद ही मिला.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...