रेडिसन ब्लू होटल के कमरा नंबर 922 में हीरा व्यापारी संदीप सुरेश कांबले का शव फर्श पर पड़ा हुआ था. उस की लाश खून से लथपथ थी. चारों तरफ खून ही खून बिखरा पड़ा था.
मृतक की स्थिति देखने से साफसाफ पता चल रहा था कि उस ने आखिरी क्षणों तक काफी संघर्ष किया था, लेकिन हत्यारे शायद एक से अधिक थे, इसलिए उसे अपनी जान गंवानी पड़ी थी.
पुलिस कमिश्नर गुवाहाटी दिगंता बराह ने डीसीपी (वेस्ट) पद्मनाभ बरुआ और एडीसीपी (वेस्ट) नंदिना ककाटी के सुपरविजन में तुरंत पुलिस टीम का गठन कर दिया. इंसपेक्टर संजीत कुमार रे को केस का जांच अधिकारी बनाया गया.
44 वर्षीय संदीप सुरेश कांबले और 25 वर्षीय अंजलि की मुलाकात 10 फरवरी, 2023 को कोलकाता में हुई थी. संदीप सुरेश कांबले पुणे का निवासी था और उस का डायमंड व कार का व्यवसाय था. वह अकसर बड़ेबड़े शहरों में अपने व्यवसाय के सिलसिले में आताजाता रहता था, जबकि अंजलि शा पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के अंतर्गत दक्षिण बक्सर संतरागाछी पुलिस स्टेशन की मूल निवासी थी, जो अभी भोपाल में रहती थी.
मृतक संदीप सुरेश कांबले
संदीप और अंजलि की मुलाकात नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंटरनैशनल एयरपोर्ट, कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में हुई थी, जहां पर अंजलि स्टोर मैनेजर के पद पर कार्य कर रही थी.
असल में संदीप अपने व्यापार के सिलसिले में कोलकाता आया हुआ था. उस ने खाने के और्डर में चिकन सूप मांगा, लेकिन वेटर ने भूलवश उसे वेजेटेबल सूप दे दिया और सूप भी टेबल पर रखते समय छलक कर संदीप के कीमती कपड़ों पर आ गिरा था. जिस के कारण संदीप ने गुस्से में पूरा रेस्टोरेंट ही सिर पर उठा लिया था.
वेटर जल्दी से भाग कर अंजलि के पास आया और उस ने कहा, ”अंजलि मैम, यह ग्राहक तो थोड़ी ही गलती पर मुझ पर बुरी तरह से भड़क गया. उस ने मुझे गालियां तक दे डालीं. अब उस ने पुलिस को बुलाने की धमकी भी दे दी है.’’
अंजलि ने देखा कि वेटर गिरीश डर से बुरी तरह कांप रहा था. अंजलि ने उसे समझाबुझा कर किचन में भेज दिया और खुद संदीप के पास चली गई. उस ने संदीप से बड़े ही शिष्ट अंदाज में वेटर की भूल के लिए क्षमा मांगी. खुद अपने रुमाल को गीला कर उस से संदीप के कपड़ों को साफ किया और संदीप को एक अलग कमरे में ले जा कर उसे खुद ही सूप सर्व किया.
संदीप एक ही पल में अंजलि की बातों, उस के व्यवहार और उस के खूबसूरत चेहरे का दीवाना सा हो गया था. उस ने फिर वहां पर लंच और डिनर भी किया और दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर भी दे दिए. अब जब कभी संदीप का कोलकाता में आना होता था तो वह अंजलि के रेस्टोरेंट में ही खाना खाया करता था. इस बीच वह एकदूसरे के बारे में काफी कुछ जान चुके थे.
एक दिन ऐसे ही संदीप ने अंजलि से पूछ लिया, ”अंजलि, आप को जीवन में अकेलापन नहीं खलता?’’
”देखिए संदीपजी, अकेलापन तो जरूर खलता है, मगर हमेशा एक उम्मीद भी बनी रहती है कि मैं अकेली नहीं हूं. किसी को ऊपर वाले ने मेरे लिए जरूर बना रखा है. वैसे आप को तो अकेलापन नहीं खलता होगा. आप की तो पत्नी है और 2 प्यारे प्यारे बच्चे भी हैं.’’ अंजलि ने बेहद गंभीरता से कहा.
”अंजलिजी, कभीकभी जीवन में सब कुछ होते हुए भी अकेलापन खलता रहता है. मानता हूं कि मेरी पत्नी है, बच्चे भी हैं, मगर जीवन में मुझे अभी भी अकेलापन लगता है. मैं जैसी पत्नी चाहता था, वैसी पत्नी शायद मुझे मिल न सकी. इसलिए भटकता रहता हूं.’’ संदीप ने उदासी भरे स्वर में कहा.
”अरे सर, आप तो इतने पैसे वाले हैं, करोड़पति आदमी हैं. आप तो जिस पर भी नजर मारें, वह आप की हो जाएगी.’’ अंजलि ने मुसकराते हुए कहा.
”अरे, अपने ऐसे नसीब कहां? हां, मगर आप की बातों से लगता है जैसे आप अब अपने जीवनसाथी की तलाश में हैं.’’ संदीप ने कहा.
”देखिए जनाब, मैं ने ऐसा तो नहीं कहा कि शादी करने के बाद अकेलापन बिलकुल भी दूर हो जाता है या बिलकुल खत्म सा हो जाता है. इसलिए मैं शादी झंझट से दूर ही रहना चाहती हूं. वैसे शादी करने के बाद इंसान अपने जीवन में कितना सुखी रह सकता है, यह बात तो मुझ से बेहतर आप जानते हैं. वैसे सच कह रही हूं मैं न? हां, मुझे एक सच्चे दोस्त की तलाश अवश्य है, मगर यह तलाश कब और कहां खत्म होगी, इस बात का पता मुझे बिलकुल भी नहीं है. हां, तलाश जारी है.’’ अंजलि ने अपनी आंखें आकाश की तरफ घुमाते हुए कहा.
अंजलि की बातें वाकई इतनी सही और सटीक थीं कि उन बातों ने संदीप के दिल को भीतर तक हिला कर रख डाला था. उसे अंजलि की बातों में एकदम सच्चाई नजर आ रही थी. शादी होने और बच्चों के बावजूद भी तो वह खुद हमेशा कितना अकेलापन महसूस करता था. वह आज भी सचमुच कितना अकेला था.
”चलो, मैं मानता हूं कि मैं शादी करने के बाद भी आज भी अपने आप को अकेला महसूस करता हूं. मगर क्या आप ने अपने अकेलेपन को दूर करने के बारे में कभी सोचा भी है?’’ संदीप ने पूछा.
”संदीपजी, अपनी तो तलाश जारी है. मैं ने अभीअभी आप से यह बात कही तो है न!’’ अंजलि ने कहा.
”आप एकदम सही कह रही हैं कि आप की तलाश तो मैं आप से कुछ कहना चाहता हूं, यदि आप मेरी बात का बुरा न मानें तो..?’’ संदीप ने हिचकते हुए कहा.
”जी, आप तो मेरे अपने से हैं, आप की बात का भला मैं क्यों बुरा मानने लगी.’’ अंजलि को संदीप की बातों में कोई विशेष ऐसी बात लग रही थी, मानो जिसे वह दिल से सुनना चाहती थी. उस ने एक बार संदीप की आंखों में आंखें डाल कर देखा, फिर अगले ही पल शरमाते हुए अपनी नजरें झुका दी थीं.
संदीप ने अंजलि पर क्यों डाले डोरे
संदीप तो जैसे अपने दिल की बात कहने के लिए कब से उतावला सा हो रहा था. उस ने अपनी ही रौ मैं बहते हुए आखिरकार दिल की बातें अंजलि से कह ही डाली थी, ”अंजलिजी, सचमुच मैं अपने दिल से कह रहा हूं आप को यदि बुरा भी लगेगा तो मुझ पर इस का कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा. सच कहूं तो आप से मिलने से पहले मैं वाकई अपने आप को हमेशा अधूरा सा महसूस करता था, मगर जिस दिन से मुझे आप मिलीं, आप का व्यवहार, स्वभाव, बातें, आप का अपनापन सब मुझे ऐसा लगा जैसे आप मेरी अपनी हैं.
”आप आज से नहीं, बल्कि जैसे जन्म जन्मांतर से मेरी अपनी हैं. आप से मिलने से पहले मुझे लगता था जैसे मैं ने अपने जीवन में कुछ पाया ही नहीं है. मगर, अब मुझे ऐसा लगने लगा है जैसे आप ही मेरा सब कुछ हैं. मैं हमेशा यही सोचता हूं कि मैं आप के सामने बैठ कर आप को निहारता रहूं, आप से बातें करता रहूं, मेरा पूरा जीवन बस आप को देखते हुए गुजर जाए.’’
”देखिए संदीपजी, आप जो कुछ कह रहे हैं, मैं मानती हूं कि आप शायद सच कह रहे हैं. मगर ये बात भी सच है कि आप एक शादीशुदा इंसान हैं, आप का अपना एक संयुक्त परिवार है, आप का एक छोटा भाई भी है. आप के ऊपर अपने परिवार की पूरी पूरी जिम्मेदारी भी है. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप मुझे भूल कर कुछ नई शुरुआत करें.’’ अंजलि ने कहा.
”देखो अंजलि, यह बात सही है कि मैं एक विवाहित पुरुष हूं, मेरा अपना एक परिवार भी है. मगर ये बात भी, बिलकुल सच है कि जिस दिन से मैं ने तुम्हें देखा है, मैं अपना दिल हार चुका हूं. मैं आप को अपने दिल की गहराइयों से बेइंतहा प्यार करने लगा हूं.’’ ऐसा कहते हुए संदीप ने अंजलि के दोनों हाथों को थाम लिया था.
”देखो संदीप, कहीं तुम बीच में मुझे कभी धोखा तो नहीं दोगे न? मुझे मंझधार में छोड़ कर तो नहीं चले जाओगे?’’ अंजलि ने भी अपने दिल की बात कह ही डाली.
”ऐसा भला तुम सोच भी कैसे सकती हो अंजलि,’’ कहते हुए संदीप ने अंजलि को अपनी बाहों में भर लिया था.
कहावत भी है कि जहां चाह होती है, वहां राह अपने आप निकल आती है. पहले तो अंजलि यह सोच कर कि संदीप एक शादीशुदा है, उस से बचती रही. संदीप की कामुकता भरी छेड़छाड़ को वह नजरअंदाज करती रही, परंतु एक दिन तो संदीप ने मर्यादा और नैतिकता की सारी हदें ही तोड़ डाली थीं.