Uttarakhand Love Crime. डा. अनिल दुर्गेश से शादी करना चाहते थे. लेकिन तब उन की आर्थिक स्थिति दुर्गेश के बाप से कम थी. जब उन की आर्थिक स्थिति सुधरी तब भी दुर्गेश के बाप ने उस की शादी उन से नहीं की. इस गलती ने आगे कुछ ऐसा गुल खिलाया कि दोनों ही परिवार बरबाद हो गए.

जिंदगी में रिश्तों का वजूद उतना ही महत्त्वपूर्ण है, जितना जिंदा रहने के लिए सांसों का. रिश्तों की खूबसूरती तब और बढ़ जाती है, जब उन की बुनियाद प्यार, समर्पण और विश्वास पर टिकी हो. यह जरूरी नहीं कि रिश्ते सिर्फ अपनों के हों, बल्कि जिंदगी के सफर में तमाम रिश्ते बनते चले जाते हैं. उन की भी अपनी एक अहमियत होती है. हर इंसान के इर्दगिर्द रिश्तों का एक दायरा होता है.

युवा डा. अनिल सिंह तोमर भी इस सच्चाई से अलग नहीं थे. उन का अपने मरीजों से गहरा रिश्ता था. वैसे भी डाक्टरी के पेशे में अच्छा व्यवहार मरहम की तरह काम करता है. डा. अनिल सिंह तोमर फिजियोथैरेपिस्ट थे और उत्तराखंड के हरिद्वार शहर के ज्वालापुर थानांतर्गत स्थित प्रेमनगर आश्रम के जनदीक अपना सैंटर चलाते थे.

सैंटर की देखरेख के लिए उन्होंने स्टाफ रख रखा था. उन के बाद वहां का काम संभालने की जिम्मेदारी स्टाफ की थी. डा. अलिन अपने यहां आने वालों से बहुत अच्छा व्यवहार करते थे. यही वजह थी कि यह रिश्ता इतना गहरा हो गया था कि लोग उन्हें दिल से पसंद करते थे. वह नजदीक ही रघुनाथ रेजीडेंसी अपार्टमेंट में अपने परिवार के साथ रहते थे.

डा. अनिल रोजाना सुबह सैंटर आते थे और शाम ढले घर जाते थे. प्रत्यक्ष दिखने वाले रिश्तों को वह बखूबी निभा रहे थे. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. वक्त कभी एक तरह से नहीं रहता. किस की जिंदगी में परेशानियां कब चुपके से दस्तक दे दें, इस बात को कोई नहीं जानता. अनिल का परिवार भी अचानक एक बड़ी मुसीबत से रूबरू हो गया था.

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