Kanpur Organ Trade Crime : सुशासन के दावों वाले इस कानपुर शहर में लगता है कि अब इंसान नहीं बल्कि मांस के लोथड़े और उन की कीमत मायने रखती है. कानपुर में सामने आया कि किडनी रैकेट महज एक अपराध नहीं, बल्कि वहां के पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर एक तमाचा है. अस्पतालों की नाक के नीचे चंद रुपयों के लिए गरीबों के जिस्म को किस्तों में काटा जाता रहा, लेकिन संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया रहा. आखिर क्यों?
30मार्च, 2026 की दोपहर कानपुर के थाना रावतपुर के एसएचओ कमलेश राय को मोबाइल फोन पर सूचना मिली कि केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में मानव अंगों का काला कारोबार होता है. बीती रात भी एक किडनी डोनर और मरीज को भरती किया गया था और गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया है.
औपरेशन के बाद डोनर और मरीज को अलगअलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया है. लेनदेन को ले कर डोनर और दलाल के बीच झगड़ा भी हुआ है.इंसपेक्टर कमलेश राय ने इस सूचना से पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल को अवगत कराया तो उन्हें लगा कि अब किडनी रैकेट का परदाफाश हो जाएगा.
दरअसल, मार्च 2026 के पहले हफ्ते में उन्हें सूचना मिली थी कि कल्याणपुर क्षेत्र के कुछ अस्पतालों में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट का धंधा चल रहा है. इस के लिए उन्होंने क्राइम ब्रांच की टीम को लगाया था. तब से टीम पसीना बहा रही थी, लेकिन कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही थी.
अत: जैसे ही कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल को सूचना मिली, उन्होंने इस रैकेट का परदाफाश करने की कमान एसीपी विपिन ताडा तथा डीसीपी (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी को सौंपी. सीपी ने डीसीपी (पश्चिमी जोन) के निर्देशन में क्राइम ब्रांच, थाना रावतपुर पुलिस और सीएमओ की संयुक्त टीम बनाई गई.






