UP Crime: इंजीनियर राम भवन ने अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ मिल कर 33 मासूम बच्चों से ऐसी दरिंदगी की कि पोक्सो कोर्ट ने दोनों को मरते दम तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई. आखिर यह उच्चशिक्षित दंपति मासूमों को अपने जाल में किस तरह फांसता था और उन के साथ किसकिस तरह से शोषण किया जाता था, जिस से यह मामला इंटरनैशल  लेवल तक चर्चित हुआ और उन्हें मिली सजा ए मौत?

उत्तर प्रदेश में बांदा जिले का विशेष पोक्सो कोर्ट 18 फरवरी, 2026 को खचाखच भरा हुआ था. बहुत ही खास केस की सुनवाई होनी थी, जो करीबकरीब अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. केस की जांच सीबीआई के जिम्मे थी. मामला दरजनों मासूम बच्चों के साथ यौनाचार का था, जिन की उम्र 3 साल से 15 साल तक की थी. यह अनोखा मामला भले ही 6 साल से पोक्सो कोर्ट में आया था, लेकिन उत्तर प्रदेश में बच्चों के साथ यौनाचार और उन की अश्लील तसवीरें, वीडियो आदि इंटरनेट मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में फैलाने और बेचने की चर्चा साल 2010 से ही बनी हुई थी.

पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा कुछ मिनटों में ही आने वाले थे. हौल की 2 कतारों में लगी बेंचों पर सीबीआई के वकील, यूपी पुलिस, आरोपी, गवाह और बचाव पक्ष के वकील आ चुके थे. यानी कि कोर्ट में साक्ष्यों, सीबीआई के अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपनीअपनी बातें रखने के लिए पूरी तैयारी में थे. उन की तत्परता और उत्सुकता देखते बन रही थी. इस बारे में मीडियाकर्मी भी जानने को उत्सुक थे, लेकिन उन्हें वहां से दूर रखा गया था. हौल में तमाम तरह के मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल डिवाइसेस प्रतिबंधित थे.

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