Crime Story: शीना बोरा के कत्ल की कहानी तमाम रहस्यों में उलझी हुई है. कुछ रहस्य सुलझ गए हैं तो कुछ सुलझ जाएंगे. लेकिन यह रहस्य शायद ही सुलझ पाए कि इतने धनाढ्य और नामीगिरामी परिवार की होते हुए भी इंद्राणी मुखर्जी ने ऐसा क्यों किया? दौलत के लिए तो यह हो नहीं सकता, क्योंकि दौलत तो उन के कदम चूमती थी. फिर क्या रहस्य था शीना की हत्या का?
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया को मुंबई में अवैध हथियारों की खरीदफरोख्त से जुड़ी एक गुप्त सूचना मिली थी. इस संबंध में अपराधियों की धरपकड़ करतेकरते एक ऐसा कार ड्राइवर पुलिस के हत्थे चढ़ा, जिस से 7.66 एमएम की एक पिस्टल बरामद हुई. बरामद पिस्टल की मिल्कीयत की बाबत वह कोई सबूत पेश नहीं कर सका, न ही उस के पास हथियार रखने का कोई लाइसेंस था. उस का कहना था कि वह पिस्टल उसे एक जगह लावारिस पड़ा मिला था. पुलिस ने उस से सघन पूछताछ की. इस पूछताछ में की गई सख्ती उस से बरदाश्त नहीं हुई तो उस ने एक ऐसे सनसनीखेज अपराध का खुलासा कर दिया, जिस के बारे में सुनते ही पुलिस वालों के पैरों तले से जमीन खिसक गई.
उस ड्राइवर का नाम था श्यामवर राय. पुलिस द्वारा उस के अन्य अपराधों के बारे में पूछे जाने पर श्यामवर राय ने बताया कि उस ने कभी कोई अपराध नहीं किया. अलबत्ता कत्ल के एक मामले में अपनी मालकिन को सहयोग जरूर दिया था. श्यामवर राय ने पूछताछ में जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिस दुविधा में पड़ गई, वजह यह थी कि वह एक निहायत संगीन अपराध था और एक जानीमानी हस्ती से जुड़ा था. वह जिस कत्ल के बारे में पुलिस को बता रहा था, उस में मुख्य रूप से एक ऐसी औरत का हाथ था, जो न केवल मीडिया जगत की जानीमानी हस्ती थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खासा रुतबा रखती थी.
सन 2008 में उस का नाम दुनिया की 50 पावरफुल महिलाओं की सूची में शामिल किया गया था. इस के अलावा भी उस के नाम के साथ अन्य कई उपाधियां जुड़ी थीं. पूछताछ में ड्राइवर श्यामवर राय ने सीधेसीधे बताया कि उस महिला ने एक अन्य आदमी के साथ मिल कर अपनी छोटी बहन को मौत के घाट उतारा था और उस का शव रायगढ़ के जंगल में ले जा कर जला दिया था. बाद में उसे वहीं दफन कर दिया गया था. लेकिन बिना पर्याप्त सबूतों के उस महिला पर हाथ डालना आसान नहीं था. वैसे भी यह बात 3 साल से ज्यादा पुरानी थी.
महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी राकेश मारिया अपनी योग्यता और आपराधिक केसों को प्रोफेशनल तरीके से हल कर के दोषियों को सजा दिलवाने के लिए जाने जाते रहे हैं. इस का एक कारण यह भी रहा कि कोई भी आपराधिक मामला हल करने में उन्होंने कभी हड़बड़ी या जल्दबाजी नहीं की. वांछित अपराधी पर भी उन्होंने तभी हाथ डाला, जब उस के खिलाफ पर्याप्त सबूत हाथों में आ गए. इस केस में तो आरोपी का कद इतना बड़ा था कि बिना सही सबूतों के उस पर हाथ डालने का मतलब था, अपनी नौकरी से हाथ धोना. इसलिए राकेश मारिया ने एकएक कदम फूंकफूंक कर रखने का फैसला किया.
राकेश मारिया 30 सितंबर, 2015 को पुलिस कमिश्नर पद से मुक्त होने जा रहे थे. इसलिए वह चाहते थे कि मुंबई पुलिस कमिश्नर पद के बचेखुचे दिन बिना किसी दागधब्बे के अमनचैन से निकल जाएं. यह केस फूलप्रूफ तरीके से हल करने के लिए मारिया ने डीसीपी धनंजय कुलकर्णी के अलावा कुछ अन्य काबिल अफसरों और पुलिस कर्मचारियों की टीम बनाई. यह टीम मामले की तह में जा कर दोषियों के खिलाफ सबूत जुटाने में जुट गई. मारिया पलपल की खबर रख रहे थे. इस काम में उन्हें 3 महीने तो लगे, लेकिन उन्होंने कत्ल का केस हल करने के लिए वांछित सबूत जुटा लिए.
मीडिया जगत की जानीमानी हस्ती पीटर मुखर्जी ने सन 1993 से 2007 तक स्टार इंडिया के साथ काम किया था. ‘कौन बनेगा करोड़पति’ और ‘सास भी कभी बहू थी’ जैसे सीरियल को अस्तित्व में लाने का श्रेय उन्हें भी दिया गया था. यह केस पीटर मुखर्जी की पत्नी इंद्राणी मुखर्जी से ही जुड़ा था. दरअसल, इंद्राणी बोरा पहले मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज में बतौर एचआर कंसल्टेंट काम करती थी. वह निहायत ही खूबसूरत औरत थी. कहते हैं कि एक कौकटेल पार्टी में किसी ने पीटर और इंद्राणी का परिचय करवाया तो इंद्राणी ने बेतकल्लुफी से पीटर के गले लगते हुए कहा कि वह उन्हें न केवल पहले से जानती है, बल्कि एक सफल आदमी के रूप में उन्हें पसंद भी करती है.
इंद्राणी के बात करने के खुले लहजे और उस की खूबसूरती ने पीटर का मन कुछ इस तरह मोह लिया कि वह उसे पाने के लिए लालायित हो उठे. पीटर किसी अन्य औरत के साथ पार्टी में आए थे, जिसे वहीं छोड़ कर वह इंद्राणी के साथ चले गए. इस के बाद तो जैसे दोनों लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे. बाद में नवंबर, 2002 में दोनों ने शादी कर ली. उस समय पीटर 46 साल के तलाकशुदा अधेड़ थे, जबकि इंद्राणी 30 साल की थी यानी पीटर से 16 साल छोटी.
इंद्राणी ने पीटर से खुद को सिंगल मदर बता कर कहा था कि उस ने अपने आत्मसम्मान की वजह से अपने अभिभावकों से रिश्ता तोड़ रखा है. पीटर के कहने पर इंद्राणी अपनी 5 साल की बेटी विधि को भी घर में ले आई, जिसे पीटर ने विधिवत अपनी दत्तक पुत्री बना लिया. सन 2007 में जब पीटर ने स्टार को छोड़ा तो यह कंपनी स्टार इंडिया, स्टार ग्रुप और स्टार एंटरटेन इंडिया नाम की 3 कंपनियों में बंट गई. पीटर मुखर्जी को स्टार ग्रुप का सीईओ बनाया गया और एंटरटेन इंडिया का सीईओ बनाया गया समीर नायर को. इस बीच पीटर व इंद्राणी ने मिल कर आईएनएक्स मीडिया कंपनी की स्थापना कर ली थी. दरअसल यह कदम इंद्राणी के लिए ही उठाया गया था.
हकीकत में शादी के बाद धीरेधीरे इंद्राणी ने पीटर मुखर्जी की जिंदगी पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था. उस की जिस्मानी मादकता में खोए पीटर भी उसी के इशारों पर नाच रहे थे. पीटर के स्टार ग्रुप छोड़ने से 1 साल पहले ही इंद्राणी ने विधिवत आईएनएक्स कंपनी की चेयरपरसन का काम संभाल लिया था. साथ ही उस ने अन्य कई चैनल भी लांच करने की योजना बनानी शुरू कर दी थी. पीटर और इंद्राणी ने आईएनएक्स कंपनी को बड़े पैमाने पर लांच करने की बात कह कर देशविदेश की विज्ञापन कंपनियों से अपार धन एकत्र किया. देखतेदेखते ये लोग 800 करोड़ की संपत्ति के मालिक बन गए. मीडिया जगत में दोनों का खूब रुतबा तो था ही.
चेयरपरसन होने के नाते चूंकि इंद्राणी ही कंपनी का सारा काम देख रही थी, इसलिए उसे तमाम अवार्ड भी मिले और उस की पर्सनैलिटी पर लेखफीचर भी छपने लगे. कई बार टीवी पर भी उस के इंटरव्यू आए. इंद्राणी कुछ तो कुदरतन खूबसूरत थी, कुछ वह खूब बनठन कर रहा करती थी. फलस्वरूप पार्टियों में उस के व्यक्तित्व का अलग ही आकर्षण होता था. वह सब से खुल कर बातें करने में भी परहेज नहीं करती थी. साथ ही वह डांस भी बहुत अच्छा किया करती थी. यहां तक कि कभीकभी वह गीत वगैरह सुना कर भी महफिल में रंग जमा देती थी.
इत्तफाकन अगर वह किसी पार्टी में न पहुंच पाती तो अन्य लोग सब से ज्यादा उसी के बारे में पूछताछ करते थे. वैसे भी उस के बारे में यह बात मशहूर थी कि जिंदगी को सही मायनों में जीना है तो इस का गुर इंद्राणी मुखर्जी से सीखो. मुखर्जी परिवार संपन्न परिवार था. उन के यहां किसी चीज की कमी नहीं थी. पैसा तो जैसे इस परिवार के आंगन में बरसता था. सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था. तभी अचानक एक दिन एक लड़की शीना बोरा और लड़का मिखाइल पूछतेपूछते मुखर्जी परिवार के घर आ पहुंचे. उन दोनों को देख कर इंद्राणी पहले तो चौंकी, फिर उस ने पीटर को बताया कि ये दोनों उस के छोटे भाईबहन हैं.
यह जान कर पीटर ने उन दोनों की काफी आवभगत की और उन्हें अपने साथ ही रहने को कहा. इंद्राणी ने उन के रहने की अलग व्यवस्था करवा दी. सन 2010 में पीटर व इंद्राणी कुछ समय के लिए इंग्लैंड चले गए. वापस लौट कर वे फिर से अपनी खुशहाल जिंदगी में रम गए. इंद्राणी ने अपने भाईबहन की बात करना पहले ही बंद कर दिया था. पीटर मुखर्जी ने एकाध बार पूछा तो उस ने बताया कि मिखाइल अपना कारोबार जमाने में व्यस्त हो गया है, जबकि शीना को अमेरिका में अच्छी नौकरी मिल गई है. पीटर पत्नी की हर बात पर आंख मूंद कर विश्वास कर लेते थे. इस बार भी उन्हें इंद्राणी की बात पर कोई संदेह नहीं हुआ.
वक्त अपनी रफ्तार से गुजर रहा था कि अचानक एक रोज…
उस दिन अगस्त, 2015 की 26 तारीख थी. पीटर मुखर्जी अपनी पत्नी इंद्राणी के साथ वरली स्थित अपने निवास पर थे. सुबह का वक्त था. डोरबेल बजने पर घर के नौकर ने दरवाजा खोला तो सामने मुंबई पुलिस खड़ी थी. इंद्राणी को बुला कर एक महिला सबइंसपेक्टर ने आगे आ कर कहा, ‘‘मैडम, हमारे अफसरों को किसी केस के सिलसिले में आप से बात करनी है. कृपया आप हमारे साथ अभी थाने चलें.’’
इंद्राणी मुखर्जी मीडिया जगत से जुड़ी एक बड़ी हस्ती थी. वह पता नहीं कितने पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से अकसर मिला करती थी. वे तमाम लोग उसे निजी रूप से जानते थे. इसलिए इंद्राणी के लिए आम लोगों की तरह पुलिस से भयभीत होने जैसा कुछ नहीं था. वह बेझिझक बेपरवाह पुलिस की गाड़ी में बैठ कर उन के साथ चली गई. थाना खार में पहुंच कर उसे बताया गया कि उसे उस की बहन शीना बोरा के कत्ल और उस की लाश को खुर्दबुर्द करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इस संबंध में उस के खिलाफ भादंवि की धाराओं 302 (हत्या) व 201 (सबूत नष्ट करने) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जा चुका है.
इस के साथ ही पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के बारे में उस के पति पीटर मुखर्जी को भी सूचित कर दिया. पीटर मुखर्जी यह सुन कर अचंभित रह गए कि शीना का कत्ल कर दिया गया है और इस का इलजाम इंद्राणी पर है. उन्होंने कहा कि इंद्राणी ने अगर वाकई ऐसा किया है तो उस ने निहायत ही घिनौना काम किया है. इस के बावजूद उन्होंने पत्नी की मदद के लिए वकीलों का इंतजाम कर दिया. पुलिस थाना खार में थोड़ीबहुत मनोवैज्ञानिक पूछताछ करने के बाद उसी रोज कस्टडी रिमांड के लिए इंद्राणी को बांद्रा स्थित मेट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया.
इंद्राणी की ओर से महानगर के 2 जानेमाने वकीलों ने उस के बचाव में अदालत में पेश हो कर कहा कि उन की मुवक्किला को झूठे केस में फंसाया जा रहा है. किसी ने अगर शीना का कत्ल कर दिया था तो इस में इंद्राणी मुखर्जी का क्या कसूर? वकीलों का कहना था कि इस मामले में पुलिस के पास उन की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं है. वैसे भी वह मीडिया जगत की एक सम्मानित महिला हैं न कि कोई पेशेवर अपराधी. इसलिए अदालत को उसे पुलिस रिमांड में न दे कर तुरंत जमानत पर रिहा कर देना चाहिए.
माननीय दंडाधिकारी ने इंद्राणी के वकीलों की दलील सुनने के साथसाथ पुलिस का पक्ष भी सुना और उन के द्वारा पेश किए गए तथ्यों को भी जांचापरखा. इस के बाद अदालत ने पुलिस को इंद्राणी का रिमांड दे दिया. पुलिस ने इंद्राणी मुखर्जी को 5 दिनों तक कस्टडी रिमांड में रख कर शीना बोरा की हत्या के बारे में पूछताछ की. लेकिन इंद्राणी भी कम नहीं थी. पुलिस के तमाम हथकंडों के आगे न तो वह झुकी और न ही डरी. अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को मानने से उस ने साफ इनकार कर दिया. वह पुलिस को यही समझाने का प्रयास करती रही कि शीना मरी नहीं, अमेरिका में नौकरी कर रही है. हां, पिछले कुछ अरसे से वह उस के संपर्क में नहीं है, न ही उस के पास उस का कौंटेक्ट नंबर या पता वगैरह है.
इंद्राणी द्वारा पुलिस को बताए अनुसार, किसी बात पर शीना से उस की बहस हो गई थी, जिस से नाराज हो कर वह 3 साल पहले अमेरिका चली गई थी. वहीं से उस ने एक बार फोन कर के बताया था कि अमेरिका में उसे बहुत अच्छी नौकरी मिल गई है, इसलिए अब वह दोबारा कभी उस के पास इंडिया नहीं आएगी. इंद्राणी आसानी से काबू में नहीं आ रही थी. वह एक ही रट लगाए हुए थी कि इस केस में उस के किसी दुश्मन के कहने पर उसे गलत तरीके से फंसाया जा रहा है. इंद्राणी से उस का अपराध कबूल करवाना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था.
दूसरा कोई चारा न देख पुलिस ने ड्राइवर श्यामवर राय को ला कर उस के सामने खड़ा कर दिया. वह पहले ही से कस्टडी रिमांड में चल रहा था. उसे सामने देख इंद्राणी को कंपकंपी छूट गई. पुलिस के मुताबिक इस के बाद इंद्राणी ने शीना की हत्या करने की बात कबूल करते हुए कई राज खोले. पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने उसी दिन पत्रकारों को बताया कि शीना असलियत में इंद्राणी की बहन न हो कर बेटी थी. जुलाई, 2012 में जब वह 22 वर्ष की थी, उस की हत्या कर दी गई. अपनी ही बेटी के कत्ल का तानाबाना इंद्राणी ने खुद ही बुना था. शीना को ब्रांदा से सूमो गाड़ी पर अपहृत कर के मुंबई के दूरवर्ती इलाके रायगढ़ में एक सुनसान जगह पर ले जाया गया.
गाड़ी में शीना और इंद्राणी के अलावा ड्राइवर श्यामवर राय व संजीव खन्ना नामक शख्स थे. ड्राइवर ने इंद्राणी मुखर्जी के मुंह से इस शख्स का नाम सुन लिया था, मगर उसे यह नहीं मालूम हो पाया था कि दोनों का आपस में रिश्ता क्या था. बकौल पुलिस आयुक्त मारिया इंद्राणी ने पूछताछ में बताया कि उस ने शीना को रायगढ़ के फार्महाउस में होने वाली पार्टी में शामिल होने के बहाने से बुलाया था. शीना की हत्या मुंबई से दूर खोपोली सड़क मार्ग पर एक सुनसान जगह पर गला दबा कर की गई, फिर रायगढ़ के जंगल में पैट्रोल छिड़क कर शव को न केवल जलाया गया, बल्कि उसे वहीं गड्ढा खोद कर दफन भी कर दिया गया.
पुलिस कमिश्नर का यह बयान मीडिया के जरिए लोगों के सामने आया तो पूरे देश की नजरें इसी खबर पर टिक गईं. यह मुंबई महानगर का हाईप्रोफाइल केस था, जो अनैतिक संबंध, रिश्तों में धोखे और पैसों के लालच में उलझी किसी थ्रिलर स्टोरी की तरह सामने आता दिखाई दे रहा था. 27 अगस्त को पुलिस ने संजीव खन्ना को गिरफ्तार कर लिया. पता चला वह इंद्राणी का पूर्व पति था. खन्ना से की गई पूछताछ में पता चला कि उस की और इंद्राणी की मुलाकात 1980 के दशक में मेघालय की राजधानी शिलांग में तब हुई थी, जब इंद्राणी हायर एजुकेशन के सिलसिले में वहां रह रही थी.
पूछताछ में संजीव खन्ना ने पुलिस को बताया कि इंद्राणी के पिता एक बड़े कारोबारी थे. उस से उन का परिचय गुवाहाटी में अपना कारोबार जमाते समय हुआ था. इस संबंध में उन्होंने खन्ना की काफी मदद की थी. उन की बेटी इंद्राणी से खन्ना का इस से पहले ही परिचय हो चुका था, जो वक्त के साथ प्रेम में बदल गया था. बाद में दोनों ने आपस में शादी कर ली थी. इसी बीच मिखाइल ने पुलिस को यह बयान दे कर चौंका दिया कि वह इंद्राणी मुखर्जी का भाई नहीं, बल्कि बेटा है. अलबत्ता वह अपने पिता का नाम नहीं बता पाया. फिर भी उस ने यह बात पूरा जोर दे कर कही कि निश्चित रूप से उस की बहन शीना की हत्या हुई है, लेकिन इस संबंध में कुछ सनसनीखेज खुलासे वह तब करेगा, जब मुंबई पुलिस इस केस की अपनी छानबीन पूरी कर लेगी.
पुलिस के हवाले से यह बात भी सामने आई कि शीना के संबंध पीटर मुखर्जी की पहली पत्नी शबनम से पैदा बेटे राहुल मुखर्जी के साथ थे और दोनों शादी करना चाहते थे. यह बात सामने आने पर पीटर मुखर्जी ने अफसोस जाहिर करते हुए केवल इतना ही कहा कि वह सोच भी नहीं सकते थे कि उन के परिवार में इतना कुछ घट जाएगा और उन्हें पता भी नहीं चलेगा. इंद्राणी के बारे में भी अब तक यह तथ्य सामने आ गया था कि उस ने खुद को सिंगल मदर बता कर जब पीटर मुखर्जी से शादी की थी तो एक नहीं, कई झूठ बोले थे. उन में सब से बड़ा झूठ तो यही था कि उस ने अपनी औलादों मिखाइल व शीना को बेटाबेटी की जगह अपना भाईबहन बताया था.
अब यह बात भी सामने आई कि पीटर मुखर्जी से पहले भी इंद्राणी 2 शादियां कर चुकी थी. उस के पहले पति का नाम था सिद्धार्थ दास, जबकि संजीव खन्ना उस का दूसरा पति था. सिद्धार्थ से उसे बेटी शीना व बेटा मिखाइल पैदा हुए थे और संजीव खन्ना से बेटी विधि, जिसे पीटर मुखर्जी ने दत्तक पुत्री बना लिया था. रहस्यों से भरी किसी फिल्म की तरह पीटर के सामने नईनई बातें आ रही थीं. मीडिया के लोग उन से असलियत जानने को उन के घर के चक्कर लगाने लगे. आखिर परेशान हो कर पीटर को अपना बयान जारी करना पड़ा, ‘मैं पूरी तरह सदमे में हूं. अब तक मैं शीना को इंद्राणी की बहन मानता आया था और मिखाइल को उस का भाई. अब पता चल रहा है कि दोनों उस की अपनी औलाद थे.
‘शीना जब भारत नहीं आ रही थी तो मेरे बेटे राहुल ने मुझ से कहा था कि पापा कुछ गड़बड़ है. उस ने एक बार मुझे यह बताने की कोशिश भी की थी कि शीना असल में इंद्राणी की बेटी हो सकती है. लेकिन मैं ने उस की बात को खारिज कर दिया था. दूसरों की जिंदगी से जुड़ी सनसनीखेज कहानियां सुनना और पढ़ना जितना खुशगवार लगता है, उतना ही मुश्किल होता है अपने जीवन में इस तरह की कहानी से रूबरू होना.’
इस बीच पुलिस ने श्यामवर की निशानदेही पर रायगढ़ के जंगल से बरामद शीना की हड्डियों को मुंबई के जेजे अस्पताल में सुरक्षित रखवा दिया था. श्यामवर राय के अनुसार शीना की हत्या के बाद इंद्राणी मुखर्जी व संजीव खन्ना ने उसे चुप रहने के लिए बहुत बुरी तरह से धमकाया था, साथ ही मुंह बंद रखने के लिए उसे 50 हजार रुपए भी दिए थे.
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, श्यामवर राय इस अपराध में सीधे तौर पर शामिल नहीं था. इंद्राणी मुखर्जी का वह निजी ड्राइवर था. वह उस के दबंग स्वभाव से अच्छी तरह परिचित था. साथ ही वह यह भी जानता था कि इंद्राणी के बहुत ऊंचे संबंध थे, जिन के चलते वह किसी के खिलाफ कुछ भी करवा सकती थी. उस ने पुलिस को बताया कि उस की मालकिन अपने पति पीटर मुखर्जी को भी जूती की नोक पर रखती थी और उन्हें जराजरा सी बात पर बुरी तरह लताड़ देती थी. घर में एक तरह से इंद्राणी मुखर्जी का ही एकछत्र राज था. इन्हीं वजहों से श्यामवर राय अपनी मालकिन से बहुत डरता था. हालांकि शीना की हत्या के बाद उस का कई बार मन हुआ कि वह इस बारे में पुलिस को बता दे.
लेकिन वह इंद्राणी मुखर्जी के खिलाफ जाने का साहस कभी नहीं जुटा पाया. अब जबकि इंद्राणी मुखर्जी व संजीव खन्ना खुद सलाखों के पीछे हैं तो श्यामवर पुलिस संरक्षण में पूरी तरह इन के खिलाफ खड़ा हो गया था. वैसे भी उन के खिलाफ खड़े होने में ही उस की भलाई थी. संजीव खन्ना कोलकाता में केबल नेटवर्क का कारोबार करता था. उस के पास फाइनैंस का ज्यादा इंतजाम नहीं था और उस का बिजनैस भी घाटे में जा रहा था. 24 अप्रैल, 2012 को शीना के मर्डर के बाद एकदम से उस के खाते में इतनी बड़ी रकम आ गई थी कि रातोंरात उस ने अपने डूबते कारोबार को संभाल लिया था.
इस के साथ ही उस ने कोलकाता के चौरंगी लेन क्षेत्र में 1500 वर्गफुट के एरिया में ‘1658 बार ऐंड किचन’ नाम से नया काम भी शुरू कर दिया था. इस काम में उस का एक पार्टनर भी था अजय रावला, जो उस की गिरफ्तारी के बाद भूमिगत हो गया था. इस के अलावा भी खन्ना ने पश्चिम बंगाल के बावाली शहर में अपना एक हेरिटेज रिजौर्ट बना रखा था. हालांकि यह बात पूरी तरह साफ थी कि खन्ना के पास अचानक इतनी बड़ी धनराशि कहां से आ गई थी कि उस ने अपना डूबता हुआ कारोबार संभालने के साथसाथ नए काम भी शुरू कर दिए थे. लेकिन पुलिस इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी. सिवाय इस के कि शीना की हत्या में संजीव खन्ना भी उतना ही कसूरवार था, जितना कि इंद्राणी मुखर्जी.
शीना मर्डर केस की जांच आगे तो बढ़ रही थी, लेकिन बुरी तरह उलझीउलझी सी स्थिति में. यहां तक कि हत्या का मकसद तक साफ रूप से सामने नहीं आ रहा था. सही परिणाम सामने आते न देख 27 अगस्त, 2015 को पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने इस केस की जांच का जिम्मा पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया. उन्होंने थाने में बैठ कर केस के तीनों अभियुक्तों से खुद पूछताछ की. साथ ही उन्होंने इंद्राणी मुखर्जी के सौतेले बेटे राहुल मुखर्जी को भी वहां बुलवा लिया था. उस से भी पूछताछ की गई. इस पूछताछ में संजीव खन्ना ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि जब अपराध हुआ, तब वह अपने किसी काम से मुंबई आया था. यहां आ कर वह इंद्राणी के कहने पर उस की कार में बैठ गया था और कार चलते ही वह सो गया था. उसे नहीं मालूम कि उस की नींद के दौरान कार में या कार के बाहर क्या हुआ.
संजीव खन्ना ने पुलिस कमिश्नर मारिया को बताया, ‘‘सर, मेरी व इंद्राणी की बेटी विधि अमेरिका में पढ़ रही है. विधि को पीटर मुखर्जी ने गोद ले रखा है. शीना का पीटर के बेटे राहुल से अफेयर था. दोनों लिवइन रिलेशनशिप में भी रहे थे. इसे ले कर इंद्राणी शीना से बहुत नाराज थी. सो उस ने अपने ड्राइवर से मिल कर शीना की हत्या कर दी.’’
लेकिन पुलिस के थोड़ा सख्ती करते ही उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने मकसद के बारे में बताया कि विधि इंद्राणी की बेटी थी और शीना भी उसी की बेटी निकल आई थी. ऐसी स्थिति में उस के न रहने से इंद्राणी की प्रौपर्टी में उस का हिस्सा विधि को मिल जाता. राहुल मुखर्जी से एक घंटा पूछताछ करने के बाद उसे वापस घर भेज दिया गया था. 12 घंटे बाद उसे फिर से पूछताछ के लिए थाना खार में बुलवाया गया. पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने उस से खुद सवाल किए. दरअसल वह जानना चाहते थे कि एक बरस से अधिक तक शीना के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने के बाद वह एकाएक उस की ओर से बेफिक्र क्यों हो गया था? उस ने इस संबंध में पुलिस में रिपोर्ट क्यों नहीं लिखवाई?
राहुल को वरली व खार के उन फ्लैटों में भी ले जाया गया, जहां शीना और वह साथसाथ रहे थे. शीना का भाई मिखाइल अभी तक चुप था, अब उस ने भी टीवी पर आ कर सीधेसीधे साफ कहना शुरू कर दिया कि उस के पास ऐसे पक्के सबूत हैं, जो इंद्राणी मुखर्जी को शीना का कातिल करार देने के लिए काफी हैं. मिखाइल गुवाहाटी में रहता था. पुलिस ने वहां पहुंच कर उस से पूछताछ की. उस ने कुछ टेप व फोटो वगैरह पुलिस को दिए. साथ ही अपना बयान दर्ज करवाने के अलावा यह भी बताया कि शीना के साथसाथ इंद्राणी उसे भी मार देना चाहती थी. इतना ही नहीं, अभी भी उसे उस की ओर से जान का खतरा है.
मिखाइल ने पुलिस को शीना का बर्थ सर्टिफिकेट भी दिया, जिस पर उस के मातापिता के नाम वाले कौलम में उस के नानानानी उपेंद्र कुमार बोरा व दुर्गारानी बोरा का नाम दर्ज था. शीना की जन्मतिथि थी 11 फरवरी, 1989. मिखाइल उस से बड़ा था, उस के अभिभावक भी उस के नानानानी ही थे. बरसों पहले शीना को जन्म देने के बाद इंद्राणी ने शीना और मिखाइल को अपने मातापिता के पास छोड़ कर सिद्धार्थ दास से शादी कर ली थी. अभी तक सब को यही पता था कि पीटर मुखर्जी ही इंद्राणी के पति थे. अब यह बात सामने आई कि पीटर से पहले उस ने संजीव खन्ना से शादी की थी, जिस से शादी के बाद उस ने बेटी विधि को जन्म दिया था. संजीव से पहले उस ने सिद्धार्थ दास से शादी की थी.
इंद्राणी का आचरण बेहद उलझा हुआ था, पुलिस ने फिलहाल इसी को खंगालने की सोची. देखा जाए तो इंद्राणी का पूरा जीवन अय्याशी, मक्कारी और झूठी महत्त्वाकांक्षाओं से भरा था. वह जिंदगी में सब कुछ हासिल करने के लिए ऊंची से ऊंची उड़ान भरना चाहती थी, जिस के लिए वह कुछ भी करने को तैयार रहती थी. जहां जरा सा फायदा नजर आया, वहां उस ने अपना जिस्म दांव पर लगाने में भी झिझक नहीं की. वैसे इंद्राणी का मूल नाम था परी. अपने मांबाप की एकलौती संतान थी वह. परी के पिता का पहले अच्छाभला कारोबार था, जिस के घाटे में चले जाने की वजह से वह कुंठित हो गए थे. पत्नी से भी अनबन रहने लगी थी.
औलाद के रूप में उन के यहां एक बेटी ही थी परी, जिस पर गुस्सा उतारने के लिए वह उसे जराजरा सी बात पर पीटने लगते थे. कई बार तो उसे मारपीट कर कमरे में बंद कर दिया जाता था. एक बार परेशानी की हालत में वह घर से भाग गई. लेकिन स्टेशन पर गाड़ी में बैठने से पहले ही वह पिता द्वारा पकड़ ली गई. उस रोज उस की इतनी पिटाई हुई कि वह 2 बार तो बेहोश हो गई. बहरहाल, जैसेतैसे परी ने स्कूली शिक्षा पूरी की. आगे की पढ़ाई के लिए उसे शिलांग भेज दिया गया, जहां उस के कदम बहके और 1988 में उस ने महज 17 साल की उम्र में कुंवारी मां के रूप में मिखाइल को जन्म दिया. फिर 1989 में शीना पैदा हो गई. इस के बाद दोनों बच्चों को अपने मांबाप की गोद में डाल कर वह अपनी खुद की बनाई राह पर निकल पड़ी. इस नई राह पर उस ने अपना नाम रखा इंद्राणी.
इंद्राणी ने सब से पहले शादी की अपने से दोगुनी उम्र के वकील से, जो ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई. इस के बाद शिलांग में उस की मुलाकात सिद्धार्थ दास से हुई. दोनों ने विवाह भी किया, लेकिन कुछ ही दिनों में दोनों का तलाक हो गया. फिर वापस गुवाहाटी पहुंच कर उस ने साहिल नाम के लड़के से प्रेम विवाह किया. उस के साथ भी इंद्राणी का रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया. उस ने मामूली सी अनबन पर उसे भी तलाक दे दिया. तदनंतर गुवाहाटी से कोलकाता आ कर इंद्राणी ने एक निजी फर्म में काम किया, जहां उस की मुलाकात कारोबारी संजीव खन्ना से हुई. खन्ना को अपने प्रेमजाल में फंसा कर इंद्राणी ने उस से शादी कर ली, जिस से उसे बेटी विधि पैदा हुई.
खन्ना के साथ भी उस की शादी ज्यादा दिन नहीं टिक पाई. अंतत: उस ने संजीव खन्ना को भी तलाक दे दिया और नन्हीं विधि को ले कर मुंबई चली आई. मुंबई में इंद्राणी को अच्छी नौकरी मिली तो नए पति के रूप में पीटर मुखर्जी भी मिल गए. अब उस के लिए आसमान को छूने के रास्ते खुल गए थे. स्टार पति के साथ वह खुद भी स्टार बन गई थी. हालांकि इंद्राणी की कारगुजारियों के चलते पीटर भी बदनाम होने लगे थे. खैर, पुलिस की निरंतर पूछताछ अभी भी जारी थी. इस बार की पूछताछ में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ कि कत्ल किए जाते वक्त शीना 2 माह की गर्भवती थी. इस संबंध में राहुल मुखर्जी के मामा शालीन सिंह ने देहरादून में पत्रकारों को बताया कि राहुल व शीना के रिश्ते को उन की बहन शबनम व मां सीमा सिंह ने भी मंजूरी दे दी थी.
पीटर मुखर्जी की पहली ससुराल देहरादून के बदीपुर इलाके में है, जहां उन की पहली पत्नी शबनम का गुलएशबनम नाम से फार्महाउस है. इस से कुछ ही दूरी पर उन की मां सीमा सिंह का शंकर सदन नाम से बंगला है. बकौल शालीन सिंह सन 2011 में राहुल के साथ शीना जब शबनम के फार्महाउस पर आई थी तो राहुल ने अपनी मां के सामने उस से शादी की बात रखी थी. इस पर शबनम ने अपनी मां और उन्हें सलाहमशविरे के लिए वहां बुला लिया था. शालीन सिंह के अनुसार, शीना सभी को बहुत पसंद आई थी. वैसे भी वह और राहुल पतिपत्नी की तरह रह रहे थे. इसलिए उन सब ने इस शादी के लिए हामी भर दी थी. अगले दिन राहुल शीना को ले कर मुंबई चला गया. इस के बाद उस की कोई खबर नहीं आई थी.
पुलिस हिरासत में अपना गुनाह कबूल करते हुए संजीव खन्ना ने पुलिस से पूरा सहयोग करने की बात कहते हुए घटनास्थल पर जा कर शीना की कुछ हड्डियां बरामद करवा दीं. यहां से उस का एक दांत भी मिला. देहरादून से पुलिस ने शीना का पासपोर्ट भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने हड्डियां, खोपड़ी व दांत वगैरह डीएनए परीक्षण के लिए सुरक्षित रख लिए थे. दरअसल इस केस में दोषियों को सजा दिलवाने के लिए अहम भूमिका फोरैंसिक प्रमाण ही निभा सकते थे. 29 अगस्त को पुलिस ने वह कार भी बरामद कर ली, जिस का इस्तेमाल शीना के मर्डर में हुआ था.
इस के बावजूद इस केस में कोई भी बात पूरी तरह खुल कर सामने नहीं आ रही थी. यही वजह थी कि लोगों को पुलिस की तफ्तीश पर जरा भी विश्वास नहीं हो पा रहा था. इसे ले कर पुलिस की किरकिरी भी हो रही थी. इसी बीच रायगढ़ के तत्कालीन एसपी आर.डी. शिंदे संदेह के घेरे में आ गए. महाराष्ट्र के डीजीपी संजीव दयाल ने बताया कि 2012 में शीना का शव मिलने पर लापरवाही बरतने वाले किसी भी पुलिसकर्मी अथवा अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा. उल्लेखनीय है कि तब रायगढ़ पुलिस ने जंगल से जला हुआ शव और सूटकेस मिलने पर न तो हत्या का कोई केस दर्ज किया था और न ही जले हुए शव का पोस्टमार्टम करवाया था.
30 अगस्त को इंद्राणी के गैरेज से ठीक वैसा ही सूटकेस मिला, जैसा कि शीना के शव के टुकड़े रखने के लिए इस्तेमाल किया गया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस सूटकेस में मिखाइल की हत्या कर के उस के शव के टुकड़े रखे जाने थे. बताते चलें कि मिखाइल पहले ही यह दावा कर चुका था कि शीना से भी पहले इंद्राणी की योजना उस की हत्या करने की थी. 31 अगस्त को पुलिस रिमांड खत्म हो रहा था. अभी तक की पूछताछ से पुलिस खुद भी संतुष्ट नहीं थी. रिमांड बढ़ाने के अनुरोध के साथ इंद्राणी, संजीव व श्यामवर को फिर से बांद्रा मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया तो पुलिस रिमांड की अवधि 5 सितंबर, 2015 तक के लिए बढ़ा दी गई.
इस केस में हर दिन नएनए खुलासे हो रहे थे. 2 सितंबर को सिद्धार्थ दास ने कोलकाता में कुछ पत्रकारों से संपर्क कर के कहा, ‘‘शीना मर्डर केस के बारे में अखबारों और टीवी चैनलों से पता चला तो मैं सच्चाई पर पड़ा परदा उठाने को मजबूर हुआ हूं. इंद्राणी से न तो मेरी कानूनी तौर पर और न ही किसी मंदिर में शादी हुई थी. हम दोनों 1986 से 1989 तक लिवइन रिलेशनशिप में पतिपत्नी की तरह जरूर रहे थे. इसी दौरान हमारे 2 बच्चे मिखाइल और शीना पैदा हुए थे. मैं ही इन दोनों का जैविक पिता हूं. हां, इंद्राणी ने वाकई अगर शीना की हत्या की है तो निश्चित ही उसे फांसी की सजा होनी चाहिए. मैं डीएनए टेस्ट करवा कर पुलिस की हर तरह की मदद करने को तैयार हूं.’’
इसी दिन पीटर को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया, जहां उन्हें देखते ही इंद्राणी रोने लगी. इन दोनों को आमनेसामने बिठा कर पुलिस ने पीटर से उन की फाइनैंशियल ट्रांजेक्शंस की जानकारी मांगी, जो उन्होंने विस्तारपूर्वक दे दी. पीटर से पुलिस ने निरंतर 12 घंटों तक पूछताछ की. पीटर के सामने इंद्राणी ने एक बार फिर हत्या का अपना जुर्म स्वीकार किया. इसी दौरान शीना की एक डायरी भी सामने आई, जिस का हर पन्ना भावुकता से भरा था. इंद्राणी के बारे में उस ने एक जगह लिखा था, ‘मुझे नहीं पता कि मां मुझे याद करती है या नहीं, लेकिन वह मेरी मां है, मैं उन्हें चाहती हूं. वह दुनिया की सब से हसीन औरत हैं, एकदम फिल्मी हीरोहन लगती हैं. लेकिन उन की फितरत ऐसी है कि मैं उन्हें डायन कहना पसंद करूंगी.’
4 सितंबर को इस केस में बड़ा खुलासा यह हुआ कि रायगढ़ से मिली खोपड़ी का मिलान शीना के फेशियल रीकंस्ट्रक्शन से हो गया. 5 तारीख को रिमांड समाप्ति पर इंद्राणी, संजीव व श्यामवर को फिर से अदालत में पेश कर के 7 सितंबर तक इन का कस्टडी रिमांड बढ़वा लिया गया. रिमांड की इस अवधि में पुलिस ने कुछ ऐसे हथकंडों का इस्तेमाल किया कि शीना मर्डर केस की सारी सच्चाई पूरी तरह खुल कर सामने आ गई: दरअसल, इंद्राणी के लिए हर रिश्ता एक सीढ़ी था, जिस के सहारे वह आसमान की ऊंचाइयां छूना चाहती थी. सामने वाले को धोखा देना उस की फितरत में शुमार था.
दिल से तो वह किसी को भी पसंद नहीं करती थी, न अपने किसी प्रेमी या पति को और न ही अपनी औलादों को. उसे तो अपना मतलब निकालना आता था, इस के लिए सामने वाला उस के जिस्म को भले ही किसी भी तरह से क्यों न रौंद जाए. शायद इसीलिए संजीव खन्ना को तलाक दे दिए जाने के बावजूद उस ने उस से रिश्ता खत्म नहीं किया था. इंद्राणी द्वारा पुलिस को बताए अनुसार, वह अगर तेजतर्रार थी तो शीना भी कम नहीं थी. दोनों जब भी मिलतीं, दोनों का आपस में खूब झगड़ा होता था. मिखाइल भी हमेशा अपनी बहन का ही साथ देता था.
इंद्राणी ने पुलिस को बताया, ‘‘दरअसल, शीना मेरे कई राज जानती थी, जिन के आधार पर वह मुझे ब्लैकमेल किया करती थी. इस के बदले वह मुझ से एक बड़ा फ्लैट चाहती थी. मैं चूंकि उस से नफरत करती थी, इसलिए उस से छुटकारा पाने की सोचने लगी थी. यह नफरत तब और बढ़ गई, जब शीना ने पीटर के बेटे राहुल से ताल्लुकात बढ़ा कर उस से शादी की घोषणा कर दी. जबकि एक तरह से वह उस का भाई था. यह जान कर मैं उस के प्रति नफरत से भर उठी. राहुल से उसे गर्भ भी ठहर गया था.’’
बकौल इंद्राणी उस ने शीना को खत्म करने की सोची. फिर उस के दिमाग में आया कि इस सूरत में मिखाइल आसमान सिर पर उठा लेगा. अत: इंद्राणी ने उसे भी मौत की नींद सुलाने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने संजीव खन्ना को बुलवा कर उस से मिल कर अपनी खूनी योजना तैयार की. पीटर मुखर्जी उन दिनों विदेश गए हुए थे. योजना बना कर इन लोगों ने मिखाइल को इंद्राणी के वरली वाले फ्लैट पर बुला कर उसे अपने साथ एक पार्टी में चलने को कहा. साथ ही बताया कि रास्ते में शीना के कालेज से उसे भी साथ ले चलेंगे.
इस बीच इंद्राणी ने जहर मिला कोल्डड्रिंक का गिलास मिखाइल के सामने रखते हुए उसे पी लेने को कहा. मिखाइल को चूंकि इंद्राणी पर पहले ही संदेह था, अत: उस ने कहा कि वह वहीं बैठ कर आराम से कोल्डड्रिंक पीता है, तब तक वे लोग जा कर शीना को ले आएं. पार्टी में जाने को उसे तैयार होने में समय भी तो लगेगा. इंद्राणी व संजीव उस की बातों में आ कर शीना को लेने चले गए. उन के जाने के बाद मिखाइल चुपचाप वहां से निकल गया. शीना को घर ला कर इन्होंने पहले वही जहर मिला कोल्डड्रिंक पिलाया, फिर उस का गला घोंट दिया. बाद में उस के शव को अच्छे कपड़े पहना कर उस का मेकअप कर दिया. इंद्राणी ने उस के होंठों पर चटकीली लाल लिपस्टिक लगा कर आंखों पर गहरे रंग का चश्मा चढ़ा दिया.
इस के बाद कार की पीछे वाली सीट पर बैठ कर इंद्राणी ने अपनी बगल वाली सीट पर शीना के शव को बैठी अवस्था में रखते हुए उस का सिर अपने कंधे पर इस तरह टिका लिया, मानो वह थक कर सो गई हो. उस के दूसरी तरफ संजीव खन्ना बैठा. ड्राइवर श्यामवर राय को बाद में बुलाया गया. इस तरह पूरे फिल्मी अंदाज में इन लोगों ने मुंबई से 85 किलोमीटर दूर रायगढ़ के जंगलों में जा कर शीना के शव के टुकड़े किए. तत्पश्चात उन टुकड़ों को अपने साथ लाई खाली अटैची में भर कर एक गड्ढे में डाला और जला दिया. इस के बाद इन लोगों की इसी तरह मिखाइल को मारने की योजना भी थी.
पीटर से भी अब तक लगातार पूछताछ होती रही थी, मगर जब ये बातें प्रमाणों के साथ सामने आईं तो उन्हें क्लीनचिट दे दी गई. 7 सितंबर को पुलिस रिमांड की समाप्ति पर तीनों अभियुक्तों को फिर से अदालत पर पेश कर के 21 सितंबर, 2015 तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. इस बीच शीना की हड्डियों का डीएनए इंद्राणी और मिखाइल से मैच होने की रिपोर्ट आ गई थी. जब इस बात को ले कर विवाद बढ़ा कि राकेश मारिया को शीना मर्डर केस की जांच से हटाने के लिए उन्हें डीजी होमगार्ड्स बनाया गया है तो महाराष्ट्र सरकार ने इस की जांच सीबीआई को सौंप दी है. Crime Story






