Love Crime. मीनू से प्यार करने वाले शिवकुमार ने शादी का वादा कर के उस का एमएमएस बना लिया था. पुलिस में भर्ती होने के बाद उस ने बेरुखी दिखाई तो मीनू ने गांव के दीपक से प्रेमसंबंध बना लिए, शिवकुमार एमएमएस को हथियार बना कर उसे ब्लैकमेल करने लगा. इस का परिणाम तो बुरा होना ही था…

हर अमीरगरीब आदमी अपने बच्चों को पढ़ालिखा कर उन का भविष्य संवारने का सपना देखता है. वीरपाल ने भी ऐस ही सपना देखा था. वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद की देहात कोतवाली के गांव आलमगीरपुर छोटी सराय के रहने वाले थे. उन के पास थोड़ीबहुत खेती थी, जिस पर कड़ी मेहनत कर के किसी तरह वह परिवार की आजीविका चला रहे थे.

उन का बेटा शिवकुमार पुलिस विभाग में बतौर सिपाही भर्ती हो गया तो उन के परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा. बेटे की सफलता से न सिर्फ परिवार खुश था, बल्कि नातेरिश्तेदार भी खुश थे. भर्ती होने के बाद उस की ट्रेनिंग शुरू हो गई थी.

किसी परिवार में कोई अनहोनी कब घट जाए, इस बात को न कोई जान सका है और न जान पाएगा. कई बार उम्मीदों से अलग कुछ ऐसा घटित हो जाता है, जो जिंदगी भर के लिए दर्द बन जाता है.

शिवकुमार की ट्रेनिंग बुलंदशहर की ही पुलिस लाइन में हो रही थी. रविवार को ट्रेनिंग नहीं होती थी. केवल हाजिरी लगती थी, लिहाजा शिवकुमार अपने घर आ जाता था. 25 जून, 2016 की शाम को भी वह अपने घर आया था. अगले दिन रविवार को वह पुलिस लाइन गया और हाजिरी लगवा कर दोपहर तक घर आ गया.

हलकाहलका अंधेरा होने लगा तो थोड़ा घूम कर आने की बात कह कर वह खेतों की ओर चला गया. करीब 2 घंटे बाद भी वह वापस नहीं आया तो घर वालों को फिक्र हुई. लेकिन उन्हें लगा कि यारदोस्तों के पास गया होगा, इसलिए थोड़ी देर में आ जाएगा.

उसी बीच गांव के कुछ लड़के खेतों की ओर घूमने गए तो उन्हें खेतों के बीच से कुछ लोगों की इस तरह की आवाजें आती सुनाई दीं, जैसे मारपीट हो रही हो. उन्हें लगा कि बदमाश किसी के साथ मारपीट कर रहे हैं. चूंकि लड़के निहत्थे थे, इसलिए उन्होंने गांव आ कर यह बात गांव वालों को बताई तो कुछ लोग एकत्र हो कर वहां पहुंच गए.

उन लोगों ने वहां पहुंच कर जो देखा, पैरों तले से जमीन खिसक गई. वहां खून से लथपथ गांव का ही शिवकुमार पड़ा था. देखने से ही लग रहा था कि उस की सांसे थम चुकी हैं. तुरंत उस के घर वालों को इस की सूचना दी गई.

खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया. सभी रोतेबिलखते खेतों पर पहुंचे. किसी ने इस बात की सूचना रिपोर्टिंग पुलिसचौकी नई मंडी को दे दी थी. चौकीप्रभारी प्रदीप यादव तुरंत वहां पहुंच गए थे. घटनास्थल पर गांव वालों की भीड़ लगी थी.

प्रदीप यादव ने कोतवाली प्रभारी रामसेन सिंह को घटना के बारे में बताया तो पुलिस बल के साथ वह भी घटनास्थल पर पहुंच गए. निरीक्षण में साफ हो गया कि शिवकुमार की हत्या चाकुओं से गोद कर की गई थी. लाश के पास खून ही खून बिखरा था. उस का गला आधा कटा हुआ था.

उस के हाथों और शरीर पर भी जगहजगह चाकू लगने के निशान थे. इन निशानों को देख कर यही लगता था कि शिवकुमार ने अपने बचाव के लिए काफी संघर्ष किया था. लाश के पास ही मोबाइल पड़ा था. लाश की स्थिति देख कर अंदाजा लगाया गया कि हत्यारों की संख्या एक से अधिक रही होगी.

पुलिस ने लाश का ही नहीं, घटनास्थल का भी बारीकी से निरीक्षण किया, लेकिन कोई अहम सबूत वहां नहीं मिला. अधिकारियों को भी घटना की सूचना दे दी गई थी. ट्रेनिंग ले रहे एक सिपाही की हत्या का मामला था, इसलिए सूचना पा कर एसएसपी वैभव कृष्ण, एसपी (सिटी) राममोहन सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे.

हत्या को ले कर गांव वाले नाराज थे. अधिकारियों ने उन्हें समझाया और कोतवाली पुलिस को मामले का जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए. पुलिस ने रात में ही पंचनामा तैयार कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस हत्या से गांव में सनसनी फैल गई थी. इस की वजह यह थी कि यह हत्या लूटपाट के लिए नहीं हुई थी.

फिर भी एक अंदाजा लगाया जा रहा था कि शायद शिवकुमार ने गिरोहबंद बदमाशों को देख लिया होगा, जिन्होंने पकड़े जाने के डर से हत्या कर दी होगी. जिन लड़कों ने गांव आ कर बताया था, पुलिस ने उन से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने शिवकुमार के चीखनेचिल्लाने की नहीं, बल्कि झगड़े और मारपीट होने की आवाजें सुनने के साथ खेत के बीच हलचल महसूस की थी.

सोचने वाली बात यह थी कि उतनी रात को शिवकुमार खेत में क्या करने गया था? पुलिस ने घर वालों से पूछताछ की तो उन्होंने गांव के ही कुछ लोगों पर हत्या का शक जाहिर किया. उन का कहना था कि कुछ लोगों से खेत की मेड़ को ले कर उन की लड़ाई हुई थी, इस के अलावा क्रिकेट खेलने को ले कर भी कुछ दिनों पहले शिवकुमार की कुछ लड़कों से लड़ाई हुई थी.

इसी रंजिश को हत्या की वजह मान कर अगले दिन शिवकुमार के पिता की तहरीर पर अपराध संख्या- 740/2016 पर गांव के ही 7 लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा-302, 147, 148 व एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

एसपी सिटी राममोहन सिंह की देखरेख में घटना के खुलासे के लिए थानाप्रभारी रामसेन सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया गया, जिस में एसआई प्रदीप यादव, रामेश्वर, हैडकांस्टेबल देवेंद्र कुमार, कांस्टेबल बलबीर सिंह, अवनीश, अरविंद और मुकेश को शामिल किया गया.

इस पुलिस टीम ने नामजद लोगों की गिरफ्तारी के लिए गांव में छापा मारा. लेकिन तब तक आरोपी अपनेअपने घरों से फरार हो चुके थे. 2 दिन बीत गए. इस बीच पुलिस को अपने सूत्रों से पता चला कि जिन लोगों के खिलाफ शिवकुमार की हत्या का मुकदमा दर्ज है, वह अपनेअपने घरों में हैं.

उन से लड़ाईझगड़ा जरूर हुआ था, लेकिन ऐसी लड़ाई नहीं हुई थी कि बात हत्या तक पहुंच जाती. पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई. सुराग की तलाश में शिवकुमार के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर हत्या से थोड़ी देर पहले उस की बात हुई थी.

पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह गांव की ही एक लड़की मीनू का निकला. मीनू को हिरासत में लेने से पहले पुलिस ने गांव वालों से उस के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि शिवकुमार और मीनू के बीच प्रेमसंबंध था. मीनू पर संदेह हुआ तो पुलिस ने 1 जुलाई को उसे हिरासत में ले कर पूछताछ की.

मीनू ने शिवकुमार से अपने प्रेम संबंधों की बात तो स्वीकार की, लेकिन हत्या में अपना हाथ होने से साफ मना कर दिया. मीनू के बारे में पता करने पर पुलिस को यह भी पता चला था कि मीनू और शिवकुमार के प्रेमसंबंधों को ले कर उस का भाई राहुल काफी नाराज रहता था. इधर मीनू भाई के दोस्त दीपक से प्रेम करने लगी थी.

पुलिस टीम ने उन दोनों को हिरासत में ले कर जब उन से अलगअलग पूछताछ की तो वे उलझ गए और हत्या के रहस्य से परदा उठ गया. मीनू ने ही षडयंत्र रच कर शिवकुमार को उस रात खेतों पर बुलाया था और उस के आने पर प्रेमी दीपक और भाई राहुल ने उस की हत्या कर दी थी. विस्तृत पूछताछ में शिवकुमार की हत्या की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस प्रकार थी.

मीनू और शिवकुमार के प्रेमसंबंध 2 साल पहले बने थे. दोनों ही प्यार के पंख लगा कर उड़ रहे थे. उन की बातें तो होती ही रहती थीं, मौका निकाल कर वे मिलते भी रहते थे. एकांत में मिलने पर दोनों ने साथसाथ जीने और मरने की कसमें भी खाई थीं. कहते हैं, प्रेम अंधा होता है. मीनू भी शिवकुमार पर आंख मूंद कर भरोसा करती थी.

उसे पूरी उम्मीद थी कि एक दिन शिवकुमार उस से विवाह कर लेगा. अविश्वास जैसा उन के बीच कुछ भी नहीं था. गांवों में प्रेम के किस्से लाख छिपाए जाएं, लेकिन वे छिप नहीं पाते. मीनू और शिवकुमार के मामले में भी ऐसा ही हुआ. उन के प्यार के चर्चे गांव में होने लगे.

शिवकुमार इस मामले में सतर्क था. उस ने यारदोस्तों तक से भी कभी चर्चा नहीं की थी कि उस का मीनू के साथ कोई चक्कर है. लेकिन जब मीनू के भाई राहुल को इस बात का पता चला तो उस ने बहन को खूब डांटाफटकारा. इस के बाद मीनू और शिवकुमार ऐहतियात बरतने लगे.

समय अपनी गति से चलता रहा. शिवकुमार पुलिस में भर्ती हो गया. इस से मीनू भी खुश हुई कि अब उस की शादी आसानी से हो जाएगी. दोनों के संबंध उसी तरह चलते रहे. दोनों की लगभग रोज ही फोन पर बातें होती थीं. जब कभी शिवकुमार गांव आता, चोरीछिपे मीनू से जरूर मिलता.

होली के दिन शिवकुमार अपने दोस्तों के साथ होली खेल रहा था. सभी रंग खेल रहे थे. मीनू ने भी आ कर शिवकुमार को रंग लगा दिया. मीनू का रंग लगाना शिवकुमार को इतना नागवारा गुजरा कि उस ने उस के गाल पर थप्पड़ जड़ दिया. ऐसा कर के वह सब के सामने यह साबित करना चाहता था कि मीनू से उस का कोई संबंध नहीं है.

लेकिन मीनू ने उस की इस हरकत से खुद को काफी अपमानित महसूस किया. थप्पड़ की चोट सीधे उस के दिल पर लगी. उस ने कई दिनों तक शिवकुमार से बात नहीं की, लेकिन जब उस ने गलती मान कर मीनू को प्यार से समझाया तो वह मान गई. इस के बाद शिवकुमार ने एकांत के पलों की कुछ मोबाइल क्लिपें भी बना लीं. मीनू ने इस पर ऐतराज भी नहीं किया.

बहन के प्रेमसंबंधों के चर्चों से राहुल काफी परेशान था. लोग अक्सर उस पर ताने कसते थे. वह कड़वा घूंट पी कर रह जाता था. अचानक मीनू को लगा कि शिवकुमार बदलने लगा है. अपने प्यार को परखने के लिए उस ने शादी के मुद्दे पर बात की तो वह टाल गया.

इस के बाद मीनू जब भी इस मुद्दे पर बात करती, वह टाल जाता. मीनू को इस से झटका लगा. एक तो थप्पड़ मारा, ऊपर से बदल गया. इन दोनों का उस पर गहरा असर पड़ा. वह उस से दूरी बनाने की कोशिश करने लगा तो एक दिन शिवकुमार ने धमकी भरे अंदाज में कहा, ‘‘देखो मीनू, मेरे पास तुम्हारा बहुत कुछ है, इसलिए तुम मेरे साथ प्यार से रहो. कभी ऐसा न हो कि गुस्से में तुम्हारा यह सब मैं अन्य लोगों को दिखा दूं.’’

उस की बातों से मीनू अंदर तक हिल गई. उसे शिवकुमार से ऐसी उम्मीद नहीं थी. इस से यह भी साफ हो गया कि वह उस से कभी शादी नहीं करेगा. उस के लिए अब वह सिर्फ दिल बहलाने की चीज बन कर रह गई है. पहले प्रेम में धोखा खाई मीनू गांव के ही एक अन्य लड़के दीपक से प्रेम करने लगी.

दीपक उस के भाई राहुल का दोस्त था. दोनों के गीच गहरे प्रेमसंबंध बन गए. अब शिवकुमार के लिए उस के दिल में जगह नहीं रही. लेकिन उस से जुड़े रहना उस की मजबूरी थी. वह उस से बातें भी करती थी और बुलाने पर मिलने भी जाती थी. जब भी वह दूरी बनाने की कोशिश करती, शिवकुमार उसे एमएमएस की याद दिला देता.

शिवकुमार की हरकतों से मीनू के दिल में उस के लिए नफरत ने जन्म ले लिया था. अब वह उस से छुटकारा पाने के बारे में सोचने लगी थी. उस की समझ में यह भी आ गया था कि शिवकुमार कभी उस का पीछा छोड़ने वाला नहीं है. एमएमएस के बल पर वह उसे हमेशा खिलौना बना कर रखेगा.

एक दिन उस ने यह हकीकत अपने प्रेमी दीपक को बता दी. दीपक उस के प्यार में गहरे तक डूबा था. उस ने निर्णायक अंदाज में पूछा, ‘‘तुम इस मामले में क्या चाहती हो?’’

कुछ पल सोचने के बाद वह उस की आंखों में झांकते हुए बोली, ‘‘मैं उस से छुटकारा चाहती हूं, लेकिन छुटकारा उस के जिंदा रहते नहीं मिल सकता. जबकि उस के बाद ही मैं तुम्हारी हो सकूंगी. वरना वह मुझे तुम्हारी कभी नहीं होने देगा.’’

दीपक उस की बात का आशय समझ गया. वह मीनू से शादी करना चाहता था. लेकिन वह जान गया कि अगर उस ने मीनू से शादी कर ली और शिवकुमार ने उस के एमएमएस लोगों को बांट दिए तो उस की भी बदनामी होगी. उस ने मीनू को आश्वासन देते हुए कहा, ‘‘तुम चिंता मत करो, मैं उस का कुछ इलाज कर दूंगा.’’

‘‘तुम अकेले कुछ नहीं कर सकते. तुम्हारी मदद के लिए मैं अपने भाई को इस में शामिल कर लेती हूं.’’

‘‘ठीक है.’’ राहुल के साथ रहने से अच्छा ही रहेगा.

इस के बाद मीनू ने मौका देख कर राहुल से कहा, ‘‘भैया, मैं अपने किए पर शर्मिंदा हूं. मेरी वजह से परिवार की बदनामी हो रही है.’’

राहुल बहन से खार खाए ही था, क्योंकि उसे ले कर लोग उस पर तंज कसते थे. उस ने गुस्से से मीनू को डांटा, ‘‘तेरी वजह से मेरा गांव में निकलना दूभर हो गया है.’’

मीनू आंखों में आंसू भर कर बोली, ‘‘लेकिन मैं मजबूर हूं भैया, उस ने मेरा जीना मुश्किल कर दिया है.’’

‘‘मतलब?’’

‘‘मुझे भी परिवार की इज्जत का खयाल है, लेकिन मैं शिवकुमार की बात न मानूं तो हम लोगों की और ज्यादा बदनामी होगी. मैं उस का मुंह तक नहीं देखना चाहती, लेकिन वह मुझे ब्लैकमेल कर रहा है.’’

बहन की बात सुन कर राहुल चौंका, ‘‘क्या हुआ, तुम मुझे पूरी बात बताओ.’’

इस के बाद मीनू ने एमएमएस वाली बात राहुल को बता दी. यह सुन कर उस का खून खौल उठा. उस ने कहा, ‘‘यह बात तू ने मुझे पहले क्यों नहीं बताई?’’

‘‘मैं डर रही थी, लेकिन अब बरदाश्त नहीं हुआ तो बताना पड़ा. मैं ने दीपक को भी यह बात बताई थी.’’

खून के रिश्ते ऐसे होते हैं कि जब इल्जाम दूसरे पर आए तो अपने बेकसूर लगने लगते हैं. राहुल को भी शिवकुमार खलनायक और बहन बेकसूर लगने लगी. उस दिन के बाद राहुल बदले की आग में जलने लगा. इस के बाद उस की दीपक से मुलाकात हुई तो उस ने उस से इस मुद्दे पर बात की.

वह पहले से ही इस बारे में सब जानता था. इस बीच मीनू आग में घी डालने का काम करती रही. तीनों ने तय कर लिया था कि वे शिवकुमार को उस के किए की सजा जरूर देंगे. एक दिन बैठ कर उन्होंने शिवकुमार की हत्या की योजना बना डाली.

शिवकुमार को किसी तरह का शक न हो, मीनू उस से प्यार भरी बातें करती रही और मिलती भी रही. मीनू, राहुल और दीपक ने योजना बना ली थी कि हत्या किस तरह करनी है. दीपक ने इस बीच एक चाकू का इंतजाम कर लिया.

26 जून, 2016 रविवार को शिवकुमार को गांव आना था. उस ने यह बात मोबाइल पर मीनू को बता कर मिलने की इच्छा जाहिर की तो मीनू ने वादा किया कि शाम के बाद वह खेत में मिलेगी. शिवकुमार को अंदाजा भी नहीं था कि उस की प्रेमिका ने उस के लिए मौत के दूत तैयार कर लिए हैं.

रात हुई तो दोनों के बीच बात हुई. मीनू ने कहा कि वह मौका मिलते ही घर से निकलेगी. उन्होंने तय कर लिया था कि किस खेत में मिलना है. मीनू ने शिवकुमार को वहां पहुंच कर इंतजार करने को कहा.

मीनू का प्रेमी दीपक और भाई राहुल घर से निकल चुके थे. दीपक के पास चाकू था, जबकि राहुल ने एक डंडा ले लिया था. वे लोग खेत पर पहुंचे तो शिवकुमार मोबाइल पर मीनू से बातें कर रहा था. दोनों दबे पांव उस के पीछे पहुंचे और राहुल ने पीछे से उस के सिर पर प्रहार किया.

शिवकुमार गिर पड़ा. वह उठने की कोशिश करने लगा तो उसे चक्कर आ गया. वह संभल पाता, उस से पहले ही दोनों ने उसे पकड़ कर गिरा दिया. दीपक ने उस की गरदन पर चाकू से पूरी ताकत से वार किया. शिवकुमार बचाव के लिए छटपटाया, लेकिन उस ने उस के हाथों और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार कर दिए.

शिवकुमार के गले को गहरे तक काट दिया तो उस की सांसों की डोर टूट गई. हत्या कर के दोनों कुछ देर तक वहीं रुके रहे, उस के बाद अपनेअपने घर चले गए. गांव में हत्या का शोर हुआ तो वे भी मौके पर आ गए. शिवकुमार के परिजनों ने जब रंजिश के शक में अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखा दिया तो उन्हें खुशी हुई कि सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी.

लेकिन उन की इस खुशी की उम्र छोटी थी, तीनों जल्दी ही पुलिस के शिकंजे में आ गए. 2 जुलाई को एसएसपी ने प्रैसवार्ता कर के पूरे मामले का खुलासा किया. मीनू का कहना था कि वह ब्लैकमेलिंग से परेशान हो चुकी थी.

पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. शिवकुमार ने एमएमएस को हथियार न बनाया होता और मीनू ने विवेक से काम ले कर उस से इस तरह पीछा न छुड़ाया होता तो शायद ऐसी नौबत न आती. Love Crime

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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